परिचय – यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है?
नमस्ते बच्चों! आज हम Class 10 Social Science Civics Chapter 1 Power Sharing in Democracy को बहुत ही आसान भाषा में समझेंगे। कई विद्यार्थियों को नागरिक शास्त्र कठिन लगता है, क्योंकि इसमें बड़े-बड़े शब्द आते हैं, लेकिन सच यह है कि Class 10 Social Science Civics Chapter 1 Power Sharing in Democracy हमारे रोज़ के जीवन से सीधा जुड़ा हुआ है। जब आप अपने गाँव की पंचायत, विद्यालय की कक्षा-प्रतिनिधि व्यवस्था या घर में सबकी राय से लिए जाने वाले निर्णय देखते हैं, तो आप सत्ता की साझेदारी का छोटा रूप ही देख रहे होते हैं। इस अध्याय में हम जानेंगे कि शासन की शक्ति किसी एक व्यक्ति या एक समूह के पास क्यों नहीं रहनी चाहिए और उसे बाँटना लोकतंत्र के लिए क्यों आवश्यक है।
यह अध्याय लोकतांत्रिक राजनीति भाग 2 की नींव है। इसमें दो देशों, बेल्जियम और श्रीलंका, की तुलना करके यह समझाया गया है कि सत्ता बाँटने वाला देश शांत और स्थिर रहता है, जबकि बहुसंख्यक समूह द्वारा सत्ता हथियाने वाला देश संघर्ष और गृहयुद्ध की ओर चला जाता है। इसलिए इस अध्याय की हर बात आगे के सभी अध्यायों को समझने में मदद करेगी।
Bihar Board की परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय बहुत महत्वपूर्ण है। बेल्जियम और श्रीलंका की तुलना, सत्ता की साझेदारी के नैतिक और व्यावहारिक कारण, बहुसंख्यकवाद का अर्थ और सत्ता साझेदारी के रूप, इन विषयों से लगभग हर वर्ष प्रश्न पूछे जाते हैं। यदि आप उदाहरण सहित उत्तर लिखना सीख जाएँ तो इस अध्याय से पूरे अंक लाना बिल्कुल संभव है।
पढ़ने का सही तरीका यह है कि पहले बेल्जियम और श्रीलंका की कहानी को एक कहानी की तरह पढ़ें, फिर दोनों की तुलना एक तालिका में बनाएँ। उसके बाद कारणों और रूपों को उदाहरण से जोड़ें। इस लेख में हमने ठीक इसी क्रम से सब कुछ समझाया है, साथ में पूरी प्रश्नावली, बीच के प्रश्न, Case Study और 15 MCQ का Quiz भी दिया है, ताकि आपकी तैयारी एक ही जगह पूरी हो जाए।
📋 अध्याय की जानकारी (Chapter Information)
| Board | Bihar Board (BSEB) |
| Textbook | NCERT (लोकतांत्रिक राजनीति भाग 2) |
| Class | 10 |
| Subject | Social Science (सामाजिक विज्ञान) — नागरिक शास्त्र |
| Chapter | 1 |
| Chapter Name | Power Sharing in Democracy (लोकतंत्र में सत्ता की साझेदारी) |
| कुल हल किए गए प्रश्न | 39 (प्रश्नावली 14 + बीच के प्रश्न 6 + Case Study 4 + Quiz 15) |
बच्चों, ऊपर की तालिका से आपको साफ़ समझ आ गया होगा कि यह अध्याय किस पुस्तक का है और इसमें कुल कितने प्रश्न हल किए गए हैं। Bihar Board की परीक्षा में सामाजिक विज्ञान के प्रश्न इसी पुस्तक से बनते हैं, इसलिए हर भाग को ध्यान से पढ़ना ज़रूरी है। पहले पूरे अध्याय को एक बार सरसरी नज़र से पढ़ें, फिर परिभाषाएँ और उदाहरण अलग से नोट करें। अंत में प्रश्नावली और MCQ Quiz हल करके अपनी तैयारी खुद जाँचें। यही तरीका आपको कम समय में अच्छे अंक दिलाएगा।
📚 इस Chapter में क्या-क्या है? (Topics)
इस अध्याय में हम निम्नलिखित मुख्य विषयों को एक-एक करके, उदाहरण के साथ समझेंगे —
- सत्ता की साझेदारी का अर्थ – शासन की शक्ति को विभिन्न समूहों, संस्थाओं और स्तरों में बाँटना ही सत्ता की साझेदारी कहलाता है। इस भाग को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि इससे वस्तुनिष्ठ और लघु उत्तरीय दोनों तरह के प्रश्न बनते हैं।
- बेल्जियम की व्यवस्था – बेल्जियम ने डच और फ्रांसीसी भाषी समुदायों के बीच सत्ता बाँटकर संघर्ष टाला। इस भाग को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि इससे वस्तुनिष्ठ और लघु उत्तरीय दोनों तरह के प्रश्न बनते हैं।
- श्रीलंका का अनुभव – श्रीलंका में सिंहली बहुसंख्यकवाद अपनाया गया, जिसका परिणाम गृहयुद्ध हुआ। इस भाग को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि इससे वस्तुनिष्ठ और लघु उत्तरीय दोनों तरह के प्रश्न बनते हैं।
- बहुसंख्यकवाद – बहुसंख्यक समुदाय द्वारा अल्पसंख्यकों की इच्छा की अनदेखी करके शासन चलाना बहुसंख्यकवाद है। इस भाग को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि इससे वस्तुनिष्ठ और लघु उत्तरीय दोनों तरह के प्रश्न बनते हैं।
- साझेदारी के नैतिक कारण – लोकतंत्र की आत्मा ही यह है कि जिन पर शासन हो, शासन में उनकी भी भागीदारी हो। इस भाग को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि इससे वस्तुनिष्ठ और लघु उत्तरीय दोनों तरह के प्रश्न बनते हैं।
- साझेदारी के व्यावहारिक कारण – सत्ता बाँटने से सामाजिक संघर्ष घटता है और देश में स्थिरता व एकता बनी रहती है। इस भाग को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि इससे वस्तुनिष्ठ और लघु उत्तरीय दोनों तरह के प्रश्न बनते हैं।
- क्षैतिज साझेदारी – विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों का बँटवारा क्षैतिज कहलाता है। इस भाग को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि इससे वस्तुनिष्ठ और लघु उत्तरीय दोनों तरह के प्रश्न बनते हैं।
- ऊर्ध्वाधर साझेदारी – केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारों के बीच शक्तियों का बँटवारा ऊर्ध्वाधर कहलाता है। इस भाग को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि इससे वस्तुनिष्ठ और लघु उत्तरीय दोनों तरह के प्रश्न बनते हैं।
- सामाजिक समूहों में साझेदारी – विभिन्न धार्मिक, भाषायी और जातीय समूहों को शासन में प्रतिनिधित्व देना भी साझेदारी है। इस भाग को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि इससे वस्तुनिष्ठ और लघु उत्तरीय दोनों तरह के प्रश्न बनते हैं।
- दलों और दबाव समूहों में साझेदारी – राजनीतिक दलों, गठबंधनों और दबाव समूहों के द्वारा भी सत्ता में साझेदारी होती है। इस भाग को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि इससे वस्तुनिष्ठ और लघु उत्तरीय दोनों तरह के प्रश्न बनते हैं।
ये सभी विषय आपस में जुड़े हुए हैं। यदि पहला विषय समझ आ गया तो अगला अपने आप आसान लगने लगेगा। इसलिए पढ़ते समय जल्दबाज़ी न करें, हर विषय के बाद एक छोटा उदाहरण अपने मन में ज़रूर बनाएँ। गाँव, मोहल्ले, विद्यालय और परिवार के उदाहरण लेने से बात लंबे समय तक याद रहती है। शिक्षक के रूप में मेरा अनुभव है कि जो विद्यार्थी विषयों को अपने जीवन से जोड़कर पढ़ता है, वह परीक्षा में कभी खाली हाथ नहीं रहता।
📊 Key Concepts – मुख्य परिभाषाएँ व नियम
परीक्षा में परिभाषा पूछना परीक्षक की पुरानी आदत है। नीचे इस अध्याय के सबसे महत्वपूर्ण शब्द सरल भाषा में दिए गए हैं। हर परिभाषा के साथ उदाहरण भी दिया है, ताकि आप केवल रटें नहीं, समझकर याद करें —
सत्ता की साझेदारी – शासन की शक्तियों को सरकार के विभिन्न अंगों, स्तरों और सामाजिक समूहों के बीच बाँटने की व्यवस्था को सत्ता की साझेदारी कहते हैं।
उदाहरण: भारत में केंद्र, राज्य और पंचायत, तीनों स्तरों पर सरकारें अपने-अपने विषयों पर काम करती हैं। बोर्ड परीक्षा में इस शब्द से सीधा प्रश्न बनता है, इसलिए परिभाषा को अपने शब्दों में लिखकर याद करें और उत्तर में एक उदाहरण ज़रूर जोड़ें।
बहुसंख्यकवाद – यह विश्वास कि बहुसंख्यक समुदाय को अल्पसंख्यकों की इच्छा और आवश्यकता की पूरी अनदेखी करके देश पर शासन करना चाहिए, बहुसंख्यकवाद कहलाता है।
उदाहरण: श्रीलंका में सिंहली समुदाय ने इसी सोच से अपनी भाषा और धर्म को प्रधानता दी। बोर्ड परीक्षा में इस शब्द से सीधा प्रश्न बनता है, इसलिए परिभाषा को अपने शब्दों में लिखकर याद करें और उत्तर में एक उदाहरण ज़रूर जोड़ें।
नैतिक कारण – सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है, क्योंकि लोकतंत्र में वही लोग शासन करते हैं जिनके लिए शासन होता है, इसलिए हर समूह की भागीदारी नैतिक रूप से सही है।
उदाहरण: कक्षा का प्रतिनिधि चुनते समय सभी विद्यार्थियों की राय लेना नैतिक साझेदारी का छोटा उदाहरण है। बोर्ड परीक्षा में इस शब्द से सीधा प्रश्न बनता है, इसलिए परिभाषा को अपने शब्दों में लिखकर याद करें और उत्तर में एक उदाहरण ज़रूर जोड़ें।
व्यावहारिक या युक्ति-परक कारण – सत्ता बाँटने से सामाजिक समूहों के बीच टकराव की संभावना घटती है और राजनीतिक स्थिरता बढ़ती है, इसलिए यह व्यावहारिक रूप से भी लाभदायक है।
उदाहरण: बेल्जियम में समझदारी से सत्ता बाँटी गई, इसलिए वहाँ श्रीलंका जैसा गृहयुद्ध नहीं हुआ। बोर्ड परीक्षा में इस शब्द से सीधा प्रश्न बनता है, इसलिए परिभाषा को अपने शब्दों में लिखकर याद करें और उत्तर में एक उदाहरण ज़रूर जोड़ें।
क्षैतिज बँटवारा – सरकार के तीन अंगों, विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका, के बीच शक्तियों के बँटवारे को क्षैतिज बँटवारा कहते हैं, क्योंकि तीनों अंग एक ही स्तर पर होते हैं।
उदाहरण: संसद कानून बनाती है, सरकार उसे लागू करती है और न्यायालय उसकी जाँच करता है। बोर्ड परीक्षा में इस शब्द से सीधा प्रश्न बनता है, इसलिए परिभाषा को अपने शब्दों में लिखकर याद करें और उत्तर में एक उदाहरण ज़रूर जोड़ें।
ऊर्ध्वाधर बँटवारा – सरकार के विभिन्न स्तरों, जैसे केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकार, के बीच शक्तियों के बँटवारे को ऊर्ध्वाधर बँटवारा कहते हैं।
उदाहरण: रक्षा केंद्र का विषय है, पुलिस राज्य का और गाँव की सफ़ाई पंचायत का काम है। बोर्ड परीक्षा में इस शब्द से सीधा प्रश्न बनता है, इसलिए परिभाषा को अपने शब्दों में लिखकर याद करें और उत्तर में एक उदाहरण ज़रूर जोड़ें।
सामुदायिक सरकार – बेल्जियम में भाषा के आधार पर चुनी जाने वाली सरकार, जो अपने समुदाय के शिक्षा, संस्कृति और भाषा संबंधी मामलों का निर्णय स्वयं करती है, सामुदायिक सरकार कहलाती है।
उदाहरण: बेल्जियम में डच, फ्रांसीसी और जर्मन भाषी समुदायों की अपनी-अपनी सामुदायिक सरकारें हैं। बोर्ड परीक्षा में इस शब्द से सीधा प्रश्न बनता है, इसलिए परिभाषा को अपने शब्दों में लिखकर याद करें और उत्तर में एक उदाहरण ज़रूर जोड़ें।
गृहयुद्ध – जब देश के ही दो समूहों के बीच हिंसक संघर्ष इतना बढ़ जाए कि वह युद्ध का रूप ले ले, तो उसे गृहयुद्ध कहते हैं।
उदाहरण: श्रीलंका में सिंहली और तमिल समुदायों के बीच लंबा गृहयुद्ध चला, जिसमें हज़ारों लोग मारे गए। बोर्ड परीक्षा में इस शब्द से सीधा प्रश्न बनता है, इसलिए परिभाषा को अपने शब्दों में लिखकर याद करें और उत्तर में एक उदाहरण ज़रूर जोड़ें।
बेल्जियम और श्रीलंका – दो देशों की दो कहानियाँ
बेल्जियम यूरोप का एक छोटा-सा देश है। वहाँ की कुल जनसंख्या का लगभग 59 प्रतिशत भाग फ्लेमिश क्षेत्र में रहता है और डच भाषा बोलता है। लगभग 40 प्रतिशत लोग वेलोनिया क्षेत्र में रहते हैं और फ्रांसीसी भाषा बोलते हैं। शेष लगभग 1 प्रतिशत लोग जर्मन भाषा बोलते हैं। राजधानी ब्रुसेल्स में स्थिति उलटी है, वहाँ लगभग 80 प्रतिशत लोग फ्रांसीसी और 20 प्रतिशत लोग डच भाषा बोलते हैं। डच भाषी लोग संख्या में अधिक थे, लेकिन आर्थिक रूप से फ्रांसीसी भाषी अल्पसंख्यक अधिक समृद्ध और ताक़तवर थे। यही असंतुलन तनाव का कारण बन सकता था।
बेल्जियम के नेताओं ने समस्या को समय रहते समझा और 1970 से 1993 के बीच संविधान में चार बार संशोधन किए। वहाँ यह नियम बनाया गया कि केंद्रीय सरकार में डच और फ्रांसीसी भाषी मंत्रियों की संख्या बराबर होगी। कोई भी बड़ा कानून दोनों भाषायी समूहों के बहुमत के बिना पास नहीं हो सकता। केंद्र की अनेक शक्तियाँ क्षेत्रीय सरकारों को दे दी गईं। ब्रुसेल्स की अलग सरकार में दोनों समुदायों को बराबर प्रतिनिधित्व मिला और भाषा के मामलों के लिए सामुदायिक सरकार की व्यवस्था हुई। इस समझदारी भरी साझेदारी से देश टूटने से बच गया।
दूसरी ओर श्रीलंका है, जो 1948 में स्वतंत्र हुआ। वहाँ सिंहली भाषी लोग लगभग 74 प्रतिशत और तमिल भाषी लोग लगभग 18 प्रतिशत हैं। तमिलों में श्रीलंकाई तमिल और भारतीय मूल के तमिल दोनों शामिल हैं। स्वतंत्रता के बाद सिंहली नेताओं ने बहुमत के बल पर अपनी भाषा और धर्म को प्रधानता देने की नीति अपनाई। 1956 में सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित कर दिया गया। विश्वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में भी सिंहली समुदाय को प्राथमिकता दी जाने लगी।
तमिल समुदाय को लगने लगा कि उनकी भाषा, संस्कृति और समान अधिकारों की लगातार अनदेखी हो रही है। धीरे-धीरे उनका विरोध बढ़ा और अलग तमिल ईलम राज्य की माँग उठने लगी। आपसी अविश्वास बढ़ता गया और अंततः देश गृहयुद्ध की आग में झुलस गया, जिसमें दोनों पक्षों के हज़ारों लोग मारे गए, परिवार उजड़ गए और देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ। श्रीलंका का अनुभव सिखाता है कि बहुसंख्यकवाद किसी देश को कितनी भारी कीमत चुकाने पर मजबूर कर देता है।
उदाहरण से समझें
अपने विद्यालय को ही देखिए। यदि केवल एक ही कक्षा के विद्यार्थी सारे निर्णय लेने लगें और बाकी कक्षाओं की बात कोई न सुने, तो विद्यालय में असंतोष फैलेगा। लेकिन जब हर कक्षा का प्रतिनिधि होता है और निर्णय सबकी राय से होते हैं, तो व्यवस्था शांतिपूर्ण चलती है। बेल्जियम ने यही किया और श्रीलंका ने इसके उलट किया, परिणाम सबके सामने है।
गहराई से समझें
न्यायपालिका लोकतंत्र का वह स्तंभ है जो यह देखती है कि सरकार और नागरिक दोनों कानून के अनुसार चलें। भारत में एकीकृत न्यायपालिका है, जिसमें सबसे ऊपर सर्वोच्च न्यायालय, फिर राज्यों में उच्च न्यायालय और नीचे ज़िला न्यायालय हैं। न्यायपालिका स्वतंत्र है, अर्थात सरकार उसके निर्णयों में दखल नहीं दे सकती। यदि संसद कोई ऐसा कानून बनाए जो संविधान के विरुद्ध हो, तो न्यायालय उसे रद्द कर सकता है, इसे न्यायिक पुनरावलोकन कहते हैं। कमज़ोर और गरीब व्यक्ति के लिए न्यायपालिका ही अंतिम सहारा होती है। इसलिए जब भी किसी अध्याय में संस्थाओं की बात आए, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को एक महत्वपूर्ण बिंदु के रूप में ज़रूर याद रखें।
गहराई से समझें
मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। अखबार, टेलीविज़न, रेडियो और अब सोशल मीडिया, ये सभी सरकार के कामों की जानकारी जनता तक पहुँचाते हैं और जनता की आवाज़ सरकार तक ले जाते हैं। जब मीडिया स्वतंत्र और ज़िम्मेदार होता है, तो भ्रष्टाचार और ग़लत काम छिप नहीं पाते। लेकिन मीडिया का कर्तव्य यह भी है कि वह सही और जाँची हुई ख़बर ही दे, अफवाह न फैलाए। आज के समय में हर नागरिक को ख़बर पढ़ते समय यह सोचना चाहिए कि जानकारी कहाँ से आई है और क्या वह विश्वसनीय है। जागरूक नागरिक ही जागरूक लोकतंत्र बनाता है, और नागरिक शास्त्र पढ़ने का सबसे बड़ा लाभ यही जागरूकता है।
सत्ता की साझेदारी क्यों आवश्यक है? – नैतिक और व्यावहारिक कारण
पाठ्य-पुस्तक में सत्ता की साझेदारी के पक्ष में दो प्रकार के तर्क दिए गए हैं। पहला तर्क युक्ति-परक या व्यावहारिक है। इसके अनुसार सत्ता की साझेदारी इसलिए अच्छी है, क्योंकि इससे सामाजिक समूहों के बीच टकराव की संभावना घट जाती है। जब हर समूह को लगता है कि शासन में उसकी भी हिस्सेदारी है, तो वह खुद को अलग-थलग नहीं समझता और असंतोष हिंसा का रूप नहीं लेता। इस प्रकार साझेदारी देश की राजनीतिक स्थिरता और एकता के लिए लाभदायक है।
दूसरा तर्क नैतिक है। इसके अनुसार सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है, इसलिए यह अपने आप में वांछनीय है। लोकतंत्र का अर्थ ही है कि जिन लोगों पर शासन होना है, शासन व्यवस्था के बारे में निर्णय लेने में उनकी भी भूमिका हो। वैध सरकार वही है, जिसमें नागरिक विभिन्न समूहों के माध्यम से शासन में हिस्सेदारी करें। इसलिए नैतिक दृष्टि से साझेदारी सही है, चाहे उससे तत्काल लाभ दिखे या न दिखे।
दोनों तर्कों में अंतर समझना परीक्षा के लिए बहुत ज़रूरी है। व्यावहारिक तर्क परिणाम देखता है, अर्थात साझेदारी के अच्छे परिणामों के कारण उसे अपनाना चाहिए। नैतिक तर्क सिद्धांत देखता है, अर्थात साझेदारी अपने आप में सही मूल्य है। एक समझदार नागरिक दोनों दृष्टियों से सोचता है। बेल्जियम का उदाहरण व्यावहारिक सफलता दिखाता है, जबकि लोकतंत्र का मूल विचार नैतिक आधार देता है।
यह भी समझना चाहिए कि सत्ता बाँटने से निर्णय धीरे होते हैं, कभी-कभी यह आलोचना भी होती है। लेकिन लोकतंत्र में सबकी राय सुनकर लिया गया निर्णय, एक व्यक्ति के तुरंत लिए गए निर्णय से अधिक मज़बूत और टिकाऊ होता है। साझेदारी से शासक मनमानी नहीं कर पाता, क्योंकि हर स्तर पर उसे दूसरों की सहमति और जाँच का सामना करना पड़ता है। यही नियंत्रण और संतुलन लोकतंत्र को तानाशाही से अलग करता है।
उदाहरण से समझें
अपने घर का उदाहरण लें। यदि घर के सारे निर्णय केवल एक ही व्यक्ति ले और बाकी सदस्यों की इच्छा कोई न पूछे, तो घर में नाराज़गी बढ़ेगी। लेकिन जब बड़े निर्णय सबकी राय से होते हैं, तो निर्णय देर से भले हो, सब उसे अपनाते हैं और घर में शांति रहती है। देश के शासन में भी बिल्कुल यही सिद्धांत काम करता है।
गहराई से समझें
चुनाव लोकतंत्र का त्योहार कहे जाते हैं, क्योंकि इन्हीं के द्वारा जनता अपने शासक खुद चुनती है। भारत में चुनाव कराने की ज़िम्मेदारी चुनाव आयोग की है, जो एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव पाँच वर्ष में होते हैं। चुनाव के समय राजनीतिक दल अपने घोषणा-पत्र जारी करते हैं, उम्मीदवार प्रचार करते हैं और जनता अपने मुद्दों के आधार पर वोट देती है। निष्पक्ष चुनाव के बिना लोकतंत्र केवल नाम का रह जाता है। बिहार बोर्ड की परीक्षा में चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और आदर्श आचार संहिता से जुड़े छोटे प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं, इसलिए इस विषय की बुनियादी जानकारी हर विद्यार्थी को होनी चाहिए।
सत्ता की साझेदारी के विभिन्न रूप
आधुनिक लोकतंत्रों में सत्ता की साझेदारी कई रूपों में दिखाई देती है। पहला रूप है सरकार के विभिन्न अंगों के बीच साझेदारी। विधायिका कानून बनाती है, कार्यपालिका उसे लागू करती है और न्यायपालिका विवादों का निपटारा करती है। इन तीनों की शक्तियाँ अलग-अलग हैं और हर अंग दूसरे पर नियंत्रण रखता है। इसे क्षैतिज बँटवारा या नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था कहते हैं। इससे कोई एक अंग सर्वशक्तिमान नहीं बन पाता।
दूसरा रूप है विभिन्न स्तरों पर साझेदारी। केंद्र सरकार पूरे देश के विषय देखती है, राज्य सरकार अपने राज्य के और स्थानीय सरकारें गाँव व शहर के विषय देखती हैं। इसे ऊर्ध्वाधर बँटवारा कहते हैं। भारत में संविधान ने विषयों की सूचियाँ बनाकर यह बँटवारा स्पष्ट किया है। इस अध्याय में हम इसका परिचय पाते हैं और अगले अध्याय में संघवाद के अंतर्गत इसे विस्तार से पढ़ेंगे।
तीसरा रूप है विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच साझेदारी। धर्म, भाषा, जाति और क्षेत्र के आधार पर बने समूहों को शासन में उचित प्रतिनिधित्व देने से हर वर्ग खुद को शासन से जुड़ा महसूस करता है। बेल्जियम की सामुदायिक सरकार इसका सुंदर उदाहरण है। भारत में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था भी इसी भावना से जुड़ी है, ताकि कमज़ोर समूह भी निर्णय की प्रक्रिया में शामिल हों।
चौथा रूप है राजनीतिक दलों और दबाव समूहों के बीच साझेदारी। जब कोई एक दल बहुमत नहीं पाता तो कई दल मिलकर गठबंधन सरकार बनाते हैं, जिसमें अलग-अलग विचारों के दल साथ शासन करते हैं। किसान संगठन, व्यापारी संगठन, मज़दूर संघ जैसे दबाव समूह भी अपने प्रतिनिधियों और आंदोलनों द्वारा शासन की नीतियों को प्रभावित करते हैं। इस प्रकार सत्ता केवल चुनाव जीतने वालों तक सीमित नहीं रहती, समाज के अनेक समूह उसमें भागीदार बनते हैं।
उदाहरण से समझें
क्रिकेट टीम का उदाहरण समझिए। टीम में बल्लेबाज़, गेंदबाज़, विकेटकीपर और कप्तान, सबकी भूमिका अलग होती है। यदि कप्तान ही बल्लेबाज़ी, गेंदबाज़ी और कीपिंग सब करने लगे तो टीम हार जाएगी। जब हर खिलाड़ी अपनी भूमिका निभाता है और सबका सम्मान होता है, तभी टीम जीतती है। शासन व्यवस्था में भी भूमिकाओं का यही बँटवारा सत्ता की साझेदारी है।
गहराई से समझें
स्थानीय स्वशासन का अर्थ है कि गाँव और शहर के लोग अपनी छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान खुद अपने चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा करें। गाँव में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और ज़िला परिषद तथा शहर में नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम यही काम करते हैं। सड़क, पानी, बिजली, सफ़ाई और प्राथमिक विद्यालय जैसे विषय स्थानीय जीवन से सीधे जुड़े हैं। स्थानीय संस्थाएँ लोकतंत्र की पहली पाठशाला कही जाती हैं, क्योंकि यहीं से नागरिक शासन चलाना सीखता है और यहीं से भविष्य के नेता तैयार होते हैं। महिलाओं को इन संस्थाओं में आरक्षण मिलने से लाखों महिलाएँ पहली बार निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़ी हैं, जो भारतीय लोकतंत्र की एक बड़ी उपलब्धि है।
📘 पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (बीच के प्रश्न)
पाठ्य-पुस्तक के बीच-बीच में दिए गए प्रश्न विद्यार्थियों की समझ जाँचने के लिए होते हैं। Bihar Board की परीक्षा में इनसे मिलते-जुलते प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। नीचे सभी महत्वपूर्ण बीच के प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में दिए गए हैं —
प्रश्न 1. बेल्जियम और श्रीलंका, दोनों देशों में लोकतंत्र है, फिर भी श्रीलंका में तमिलों को अपने ही देश में बेगाना क्यों महसूस हुआ?
उत्तर: इसका कारण श्रीलंका में अपनाया गया बहुसंख्यकवाद है। सिंहली बहुमत के बल पर 1956 में सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित किया गया, बौद्ध धर्म को विशेष स्थान दिया गया और विश्वविद्यालयों व नौकरियों में सिंहली समुदाय को प्राथमिकता मिली। तमिलों के समान नागरिकता, भाषा और रोज़गार के अवसरों की माँग की लगातार अनदेखी हुई। फलतः तमिल समुदाय को लगने लगा कि संविधान और सरकार उनके हितों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं और वे अपने ही देश में बेगाने हो गए हैं।
प्रश्न 2. बेल्जियम के नेताओं ने क्षेत्रीय असमानताओं को पहचानने में श्रीलंका से अलग रास्ता क्यों अपनाया?
उत्तर: बेल्जियम के नेताओं ने समझा कि यदि डच और फ्रांसीसी भाषी समुदायों के बीच सत्ता न बाँटी गई तो देश टूट सकता है और हिंसा फैल सकती है। इसलिए उन्होंने संविधान में संशोधन करके बराबर प्रतिनिधित्व, क्षेत्रीय सरकारों और सामुदायिक सरकार की व्यवस्था की। इसके विपरीत श्रीलंका के नेताओं ने बहुसंख्यकवाद का रास्ता अपनाया और तमिलों की भावनाओं की अनदेखी की। बेल्जियम का रास्ता समझदारी और दूरदर्शिता का था, इसलिए वहाँ शांति बनी रही।
प्रश्न 3. सत्ता की साझेदारी के नैतिक तर्क और युक्ति-परक तर्क में क्या अंतर है?
उत्तर: युक्ति-परक या व्यावहारिक तर्क परिणाम पर आधारित है। इसके अनुसार सत्ता बाँटने से टकराव घटता है, स्थिरता आती है और देश एक रहता है, इसलिए साझेदारी करनी चाहिए। नैतिक तर्क सिद्धांत पर आधारित है। इसके अनुसार साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है, जिन पर शासन हो उनकी शासन में भागीदारी होनी ही चाहिए, इसलिए यह अपने आप में सही है। सरल शब्दों में, पहला तर्क कहता है कि साझेदारी लाभदायक है और दूसरा कहता है कि साझेदारी उचित है।
प्रश्न 4. क्या सत्ता की साझेदारी से निर्णय लेने में देरी नहीं होती? अपने विचार लिखिए।
उत्तर: हाँ, सत्ता बाँटने से निर्णय प्रक्रिया कुछ धीमी हो सकती है, क्योंकि अनेक संस्थाओं और समूहों की राय लेनी पड़ती है। लेकिन यह देरी लोकतंत्र की कमज़ोरी नहीं, मज़बूती है। सबकी राय से लिया गया निर्णय अधिक लोगों को स्वीकार्य होता है और उसमें गलती की संभावना कम रहती है। एक व्यक्ति का जल्दबाज़ी भरा मनमाना निर्णय देश को बड़े नुकसान में डाल सकता है। इसलिए लोकतंत्र में सोच-समझकर लिया गया धीमा निर्णय, मनमाने तेज़ निर्णय से बेहतर माना जाता है।
प्रश्न 5. सामुदायिक सरकार किसे कहते हैं? यह बेल्जियम में क्यों बनाई गई?
उत्तर: सामुदायिक सरकार वह सरकार है जिसका चुनाव एक ही भाषा बोलने वाले लोग करते हैं और जो अपने समुदाय से जुड़े सांस्कृतिक, शैक्षणिक और भाषा संबंधी मामलों का निर्णय स्वयं करती है। बेल्जियम में डच, फ्रांसीसी और जर्मन भाषी समुदायों के लिए ऐसी सरकारें बनाई गईं, ताकि भाषा और संस्कृति जैसे संवेदनशील विषयों पर कोई समुदाय दूसरे पर अपनी इच्छा न थोप सके। इससे भाषायी तनाव समाप्त हुआ और हर समुदाय को अपने मामलों में स्वायत्तता का अनुभव हुआ।
प्रश्न 6. बहुसंख्यकवाद लोकतंत्र के लिए क्यों हानिकारक है?
उत्तर: बहुसंख्यकवाद में बहुसंख्यक समुदाय अल्पसंख्यकों की इच्छा और ज़रूरतों की अनदेखी करके शासन करता है। इससे अल्पसंख्यक समूहों में असंतोष, बेगानापन और अविश्वास पैदा होता है। धीरे-धीरे यह असंतोष विरोध, आंदोलन और कभी-कभी गृहयुद्ध का रूप ले लेता है, जैसा श्रीलंका में हुआ। लोकतंत्र का अर्थ केवल बहुमत का शासन नहीं है, बल्कि अल्पमत के सम्मान समेत सबका शासन है। इसलिए बहुसंख्यकवाद लोकतंत्र की भावना के विरुद्ध और देश की एकता के लिए हानिकारक है।
✏️ प्रश्नावली (Exercise) – सभी प्रश्नों के हल
अब आते हैं अध्याय के अंत में दी गई प्रश्नावली पर। इसमें वस्तुनिष्ठ, लघु उत्तरीय और दीर्घ उत्तरीय, तीनों प्रकार के प्रश्न शामिल हैं। सभी प्रश्नों के उत्तर नीचे क्रम से दिए गए हैं। पहले खुद हल करने की कोशिश करें, फिर उत्तर से मिलाएँ —
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. बेल्जियम की राजधानी का नाम क्या है?
(A) पेरिस
(B) ब्रुसेल्स
(C) बर्लिन
(D) एम्सटर्डम
उत्तर: (B) ब्रुसेल्स – बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स है, जहाँ फ्रांसीसी भाषी लगभग 80 प्रतिशत और डच भाषी लगभग 20 प्रतिशत हैं।
प्रश्न 2. श्रीलंका किस वर्ष स्वतंत्र हुआ?
(A) 1947
(B) 1950
(C) 1948
(D) 1956
उत्तर: (C) 1948 – श्रीलंका 1948 में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ था।
प्रश्न 3. श्रीलंका में सिंहली को एकमात्र राजभाषा कब घोषित किया गया?
(A) 1948
(B) 1956
(C) 1970
(D) 1972
उत्तर: (B) 1956 – 1956 में कानून बनाकर सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित किया गया, तमिल की अनदेखी की गई।
प्रश्न 4. बेल्जियम में डच भाषी लोगों का प्रतिशत लगभग कितना है?
(A) 40 प्रतिशत
(B) 50 प्रतिशत
(C) 59 प्रतिशत
(D) 80 प्रतिशत
उत्तर: (C) 59 प्रतिशत – बेल्जियम की जनसंख्या का लगभग 59 प्रतिशत भाग डच भाषी फ्लेमिश क्षेत्र में रहता है।
प्रश्न 5. सरकार के तीन अंगों के बीच शक्तियों का बँटवारा क्या कहलाता है?
(A) ऊर्ध्वाधर बँटवारा
(B) क्षैतिज बँटवारा
(C) सामुदायिक बँटवारा
(D) क्षेत्रीय बँटवारा
उत्तर: (B) क्षैतिज बँटवारा – विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका एक ही स्तर पर होती हैं, इसलिए उनके बीच का बँटवारा क्षैतिज कहलाता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. सत्ता की साझेदारी से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: शासन की शक्तियों को विभिन्न अंगों, स्तरों और सामाजिक समूहों के बीच बाँटने की व्यवस्था को सत्ता की साझेदारी कहते हैं। इसका उद्देश्य यह है कि सत्ता किसी एक व्यक्ति, संस्था या समूह के हाथ में केंद्रित न हो और हर वर्ग को शासन में भागीदारी का अवसर मिले। इससे मनमानी रुकती है, टकराव घटता है और लोकतंत्र मज़बूत होता है। बेल्जियम इसका सफल उदाहरण है।
प्रश्न 7. बेल्जियम की समस्या श्रीलंका की समस्या से किस प्रकार भिन्न थी?
उत्तर: बेल्जियम की समस्या मुख्यतः भाषायी और आर्थिक असंतुलन की थी। डच भाषी बहुमत में थे, पर फ्रांसीसी भाषी अल्पसंख्यक अधिक समृद्ध थे और यह लाभ उन्हें देर से मिला। श्रीलंका की समस्या भाषा के साथ धर्म और जातीय पहचान से भी जुड़ी थी, जहाँ बहुसंख्यक सिंहली समुदाय ने सरकारी नीतियों द्वारा तमिलों के अवसर सीमित किए। बेल्जियम ने साझेदारी से समस्या सुलझाई, जबकि श्रीलंका में अनदेखी से समस्या गृहयुद्ध में बदल गई।
प्रश्न 8. सत्ता की साझेदारी के कोई दो व्यावहारिक कारण लिखिए।
उत्तर: पहला कारण, सत्ता बाँटने से विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच टकराव की संभावना घट जाती है, क्योंकि हर समूह खुद को शासन से जुड़ा महसूस करता है। दूसरा कारण, साझेदारी से राजनीतिक व्यवस्था में स्थिरता आती है और देश की एकता मज़बूत होती है। इसके अतिरिक्त, साझेदारी से शासकों की मनमानी पर रोक लगती है और निर्णय अधिक सोच-समझकर लिए जाते हैं, जो देश के हित में होता है।
प्रश्न 9. गठबंधन सरकार में सत्ता की साझेदारी कैसे होती है?
उत्तर: जब चुनाव में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो कई दल आपसी सहमति से मिलकर सरकार बनाते हैं, जिसे गठबंधन सरकार कहते हैं। इसमें अलग-अलग विचारधारा और अलग-अलग क्षेत्रों के दल शामिल होते हैं और मंत्रिमंडल में सबको स्थान मिलता है। नीतियाँ सबकी सहमति से बनती हैं, इसलिए किसी एक दल की मनमानी नहीं चलती। गठबंधन सरकार राजनीतिक दलों के बीच सत्ता साझेदारी का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
प्रश्न 10. तमिलों ने श्रीलंका में अलग राज्य की माँग क्यों की?
उत्तर: श्रीलंका में सिंहली बहुसंख्यकवाद के कारण तमिलों की भाषा को राजभाषा का दर्जा नहीं मिला, सरकारी नौकरियों और विश्वविद्यालयों में उनके अवसर घटे और उनकी सांस्कृतिक पहचान की अनदेखी हुई। समान नागरिकता और क्षेत्रीय स्वायत्तता की उनकी माँगें लगातार ठुकराई गईं। जब शांतिपूर्ण तरीकों से न्याय नहीं मिला, तो तमिलों के एक वर्ग ने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में अलग तमिल ईलम राज्य की माँग उठाई, जो बाद में गृहयुद्ध का कारण बनी।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 11. बेल्जियम में सत्ता की साझेदारी के लिए किए गए संवैधानिक प्रावधानों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: बेल्जियम में 1970 से 1993 के बीच संविधान में चार बार संशोधन करके साझेदारी की मज़बूत व्यवस्था बनाई गई। पहला प्रावधान, केंद्रीय सरकार में डच और फ्रांसीसी भाषी मंत्रियों की संख्या बराबर रखी गई। दूसरा, कुछ विशेष कानून तभी बनाए जा सकते हैं जब दोनों भाषायी समूहों के अधिकांश सांसदों का समर्थन मिले। तीसरा, केंद्र सरकार की अनेक शक्तियाँ राज्य सरकारों को दे दी गईं और राज्य सरकारें केंद्र के अधीन नहीं रहीं। चौथा, राजधानी ब्रुसेल्स की अलग सरकार बनाई गई, जिसमें दोनों समुदायों को बराबर प्रतिनिधित्व मिला। पाँचवाँ, भाषा, शिक्षा और संस्कृति के मामलों के लिए सामुदायिक सरकार बनाई गई, जिसका चुनाव एक भाषा के लोग करते हैं। इन प्रावधानों का परिणाम यह हुआ कि बेल्जियम में भाषायी संघर्ष समाप्त हो गया, देश एक रहा और हर समुदाय को अपने मामलों में सम्मानजनक भागीदारी मिली। यह व्यवस्था जटिल अवश्य है, लेकिन इसने देश को टूटने से बचा लिया।
प्रश्न 12. श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद के लिए उठाए गए कदमों और उनके परिणामों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: स्वतंत्रता के बाद श्रीलंका में सिंहली नेताओं ने बहुमत के बल पर कई ऐसे कदम उठाए जिनसे तमिल अल्पसंख्यक आहत हुए। 1956 में सिंहली को एकमात्र राजभाषा घोषित किया गया और तमिल को स्थान नहीं दिया गया। सरकार ने विश्वविद्यालयों में प्रवेश और सरकारी नौकरियों में सिंहली समुदाय को प्राथमिकता देने वाली नीतियाँ अपनाईं। बौद्ध धर्म को संविधान में विशेष स्थान दिया गया। नई बस्तियाँ बसाकर तमिल बहुल क्षेत्रों की जनसंख्या बदलने के प्रयास भी हुए। इन कदमों के परिणाम बहुत बुरे हुए। तमिलों में बेगानापन और अविश्वास बढ़ा, उनकी स्वायत्तता की माँगें तेज़ हुईं और अंततः अलग तमिल ईलम की माँग के साथ देश गृहयुद्ध में फँस गया। दशकों चले इस संघर्ष में हज़ारों लोग मारे गए, लाखों विस्थापित हुए और देश की अर्थव्यवस्था व सामाजिक एकता को भारी क्षति पहुँची। यह उदाहरण सिद्ध करता है कि बहुसंख्यकवाद अल्पकाल में बहुमत को भले लाभ दे, दीर्घकाल में पूरे देश को हानि पहुँचाता है।
प्रश्न 13. सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र के लिए क्यों आवश्यक है? नैतिक और व्यावहारिक, दोनों कारणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: सत्ता की साझेदारी के पक्ष में पहला तर्क युक्ति-परक या व्यावहारिक है। सत्ता बाँटने से सामाजिक समूहों के बीच टकराव की संभावना कम हो जाती है। जब हर समूह को शासन में हिस्सेदारी मिलती है तो असंतोष जमा नहीं होता और राजनीतिक व्यवस्था स्थिर रहती है। यह देश की एकता और अखंडता के लिए भी आवश्यक है, क्योंकि कोई समूह खुद को अलग-थलग नहीं समझता। श्रीलंका का गृहयुद्ध बताता है कि साझेदारी न होने की कीमत कितनी बड़ी हो सकती है। दूसरा तर्क नैतिक है। लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है कि शासन जनता के लिए और जनता की सहमति से हो। जिन लोगों पर कानून लागू होते हैं, उन्हें निर्णय प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिलना ही चाहिए। वैध सरकार वही है जिसमें नागरिक विभिन्न समूहों के माध्यम से शासन में भागीदार बनें। निष्कर्ष यह है कि व्यावहारिक दृष्टि से साझेदारी लाभदायक है और नैतिक दृष्टि से यह उचित और आवश्यक है। इसलिए हर लोकतंत्र को सत्ता की साझेदारी अपनानी चाहिए।
प्रश्न 14. आधुनिक लोकतंत्रों में सत्ता की साझेदारी के विभिन्न रूपों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: आधुनिक लोकतंत्रों में सत्ता की साझेदारी मुख्यतः चार रूपों में मिलती है। पहला रूप, सरकार के अंगों के बीच साझेदारी है। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका अलग-अलग शक्तियों का प्रयोग करती हैं और एक-दूसरे पर नियंत्रण रखती हैं, इसे क्षैतिज बँटवारा कहते हैं। दूसरा रूप, विभिन्न स्तरों की सरकारों के बीच साझेदारी है, जैसे केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारें, इसे ऊर्ध्वाधर बँटवारा कहते हैं। तीसरा रूप, विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच साझेदारी है, जिसमें धार्मिक, भाषायी और जातीय समूहों को प्रतिनिधित्व और स्वायत्तता दी जाती है, जैसे बेल्जियम की सामुदायिक सरकार। चौथा रूप, राजनीतिक दलों, गठबंधनों और दबाव समूहों के बीच साझेदारी है। गठबंधन सरकार में कई दल मिलकर शासन करते हैं और किसान, मज़दूर व व्यापारी संगठन जैसे दबाव समूह नीतियों को प्रभावित करते हैं। इन चारों रूपों से यह सुनिश्चित होता है कि सत्ता किसी एक के हाथ में केंद्रित न हो और समाज के सभी वर्ग निर्णय प्रक्रिया से जुड़े रहें।
📖 Case Study – बेल्जियम का समझदारी भरा निर्णय
बेल्जियम एक छोटा यूरोपीय देश है, जहाँ डच, फ्रांसीसी और जर्मन भाषा बोलने वाले लोग रहते हैं। डच भाषी बहुमत में थे, लेकिन फ्रांसीसी भाषी लोग आर्थिक रूप से अधिक समृद्ध थे। यदि बहुमत के बल पर डच भाषी अपनी इच्छा थोपते तो देश में संघर्ष हो सकता था। बेल्जियम के नेताओं ने समझदारी दिखाई। उन्होंने संविधान में संशोधन करके यह व्यवस्था की कि केंद्रीय सरकार में दोनों प्रमुख भाषायी समुदायों के मंत्री बराबर होंगे, क्षेत्रीय सरकारों को अधिक शक्तियाँ मिलेंगी और भाषा व संस्कृति के मामलों के लिए सामुदायिक सरकार बनेगी। इस साझेदारी के कारण बेल्जियम में शांति बनी रही और देश एकजुट रहा।
ऊपर के अनुच्छेद को ध्यान से पढ़कर नीचे के चारों प्रश्नों के उत्तर दीजिए। पहले खुद सोचें, फिर उत्तर देखकर मिलाएँ —
प्रश्न 1. बेल्जियम में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा कौन-सी है?
(A) फ्रांसीसी
(B) डच
(C) जर्मन
(D) अंग्रेज़ी
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) अनुच्छेद के अनुसार बेल्जियम में डच भाषी लोग बहुमत में हैं, अतः सही उत्तर (B) है।
प्रश्न 2. बेल्जियम के नेताओं ने संघर्ष टालने के लिए क्या किया?
(A) सेना बढ़ाई
(B) चुनाव रद्द किए
(C) संविधान में संशोधन कर सत्ता बाँटी
(D) एक भाषा थोप दी
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) नेताओं ने संविधान संशोधन द्वारा बराबर प्रतिनिधित्व और सामुदायिक सरकार की व्यवस्था की, अतः उत्तर (C) है।
प्रश्न 3. सामुदायिक सरकार किन मामलों से जुड़ी है?
(A) रक्षा और विदेश नीति
(B) भाषा, शिक्षा और संस्कृति
(C) कर और बजट
(D) पुलिस और सेना
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) सामुदायिक सरकार भाषा, शिक्षा और संस्कृति जैसे सामुदायिक मामलों का निर्णय करती है, अतः उत्तर (B) है।
प्रश्न 4. बेल्जियम के अनुभव से हमें क्या सीख मिलती है?
(A) बहुमत को मनमानी करनी चाहिए
(B) सत्ता बाँटने से देश टूटता है
(C) सत्ता की साझेदारी से शांति और एकता बनी रहती है
(D) अल्पसंख्यकों की बात नहीं सुननी चाहिए
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) बेल्जियम में साझेदारी से शांति और एकता बनी रही, यही इस अनुभव की मुख्य सीख है, अतः उत्तर (C) है।
⭐ Quick Revision – Important Points
परीक्षा से एक दिन पहले पूरा अध्याय दोबारा पढ़ना संभव नहीं होता। ऐसे समय के लिए नीचे के बिंदु ही आपकी सबसे बड़ी मदद करेंगे। इन्हें बार-बार पढ़ें —
- सत्ता की साझेदारी का अर्थ है शासन की शक्ति को अंगों, स्तरों और समूहों में बाँटना।
- बेल्जियम में डच भाषी लगभग 59 प्रतिशत, फ्रांसीसी भाषी लगभग 40 प्रतिशत और जर्मन भाषी लगभग 1 प्रतिशत हैं।
- ब्रुसेल्स में फ्रांसीसी भाषी लगभग 80 प्रतिशत और डच भाषी लगभग 20 प्रतिशत हैं।
- बेल्जियम में 1970 से 1993 के बीच संविधान में चार बार संशोधन हुए।
- बेल्जियम की केंद्रीय सरकार में दोनों भाषायी समुदायों के मंत्री बराबर होते हैं।
- श्रीलंका 1948 में स्वतंत्र हुआ, वहाँ सिंहली लगभग 74 प्रतिशत और तमिल लगभग 18 प्रतिशत हैं।
- 1956 में सिंहली को श्रीलंका की एकमात्र राजभाषा घोषित किया गया।
- बहुसंख्यकवाद अर्थात बहुमत द्वारा अल्पमत की अनदेखी करके शासन करना।
- युक्ति-परक कारण परिणाम देखता है और नैतिक कारण सिद्धांत देखता है।
- विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच बँटवारा क्षैतिज कहलाता है।
- केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारों के बीच बँटवारा ऊर्ध्वाधर कहलाता है।
- सामुदायिक सरकार भाषा, शिक्षा और संस्कृति के मामलों का निर्णय करती है।
- गठबंधन सरकार राजनीतिक दलों के बीच साझेदारी का उदाहरण है।
- श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद का परिणाम गृहयुद्ध हुआ, जबकि बेल्जियम में साझेदारी से शांति रही।
⚠️ Aam Galtiyan (Common Mistakes)
विद्यार्थी अक्सर इस अध्याय में नीचे की गलतियाँ करते हैं। आप इनसे बचें —
- बेल्जियम और श्रीलंका के आँकड़े उलट-पुलट लिख देना, जैसे डच भाषियों को 40 प्रतिशत लिखना। सही क्रम याद रखें, डच 59 और फ्रांसीसी 40।
- नैतिक और व्यावहारिक कारणों को आपस में मिला देना। परिणाम वाला तर्क व्यावहारिक है और सिद्धांत वाला तर्क नैतिक है।
- क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर बँटवारे में भ्रम होना। अंगों के बीच बँटवारा क्षैतिज और स्तरों के बीच बँटवारा ऊर्ध्वाधर है।
- बहुसंख्यकवाद को केवल बहुमत का शासन लिख देना। इसमें अल्पमत की अनदेखी वाला भाव अवश्य जोड़ें।
- श्रीलंका की राजभाषा घोषणा का वर्ष 1948 लिख देना। स्वतंत्रता 1948 में मिली, राजभाषा कानून 1956 में बना।
🎯 Bihar Board Exam Tips
Bihar Board की परीक्षा में अच्छे अंक केवल पढ़ने से नहीं, सही तरीके से लिखने से भी आते हैं। नीचे के सुझाव हर वर्ष मेरे विद्यार्थियों को लाभ देते आए हैं —
- बेल्जियम और श्रीलंका की तुलना के लिए दो स्तंभों वाली तालिका बनाकर उत्तर लिखें, परीक्षक को तुलना साफ़ दिखती है और अंक अच्छे मिलते हैं।
- हर उत्तर में कम से कम एक उदाहरण अवश्य दें, जैसे बेल्जियम का बराबर मंत्रिमंडल या श्रीलंका का 1956 का कानून।
- आँकड़े याद रखें – बेल्जियम में डच 59 प्रतिशत और श्रीलंका में सिंहली 74 प्रतिशत, तमिल 18 प्रतिशत, ये आँकड़े उत्तर को सटीक बनाते हैं।
- परिभाषा वाले प्रश्नों में पहले परिभाषा, फिर एक पंक्ति का उदाहरण लिखें, यह सबसे सुरक्षित तरीका है।
- दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में भूमिका की एक पंक्ति, फिर बिंदुओं में उत्तर और अंत में निष्कर्ष अवश्य लिखें।
- वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के लिए अध्याय की तिथियाँ और प्रतिशत अलग से एक पृष्ठ पर लिखकर दोहराएँ।
एक और महत्वपूर्ण बात — उत्तर लिखते समय पहले वही प्रश्न हल करें जो आपको सबसे अच्छे से आता हो। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और समय का सही उपयोग होता है। वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में अनुमान लगाने से बचें, पहले पक्के उत्तर भरें। दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में भूमिका, मुख्य बिंदु और निष्कर्ष, यह तीन भाग रखने से उत्तर संतुलित और प्रभावशाली बनता है। अंत में पाँच मिनट बचाकर उत्तर-पुस्तिका अवश्य जाँचें, क्योंकि छोटी-छोटी गलतियाँ वहीं पकड़ में आती हैं।
📝 MCQ Quiz – 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (स्वयं को जाँचें)
अब अपनी तैयारी खुद जाँचने का समय है। नीचे 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्न दिए गए हैं। हर प्रश्न का उत्तर सोचकर चुनें, फिर उत्तर देखकर मिलाएँ। यदि 12 से अधिक उत्तर सही हों तो आपकी तैयारी बहुत अच्छी है —
Q1. बेल्जियम में जर्मन भाषी लोगों का प्रतिशत लगभग कितना है?
(A) 10 प्रतिशत
(B) 5 प्रतिशत
(C) 1 प्रतिशत
(D) 20 प्रतिशत
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) बेल्जियम में जर्मन भाषी लोग लगभग 1 प्रतिशत हैं।
Q2. श्रीलंका में तमिल भाषी लोगों का प्रतिशत लगभग कितना है?
(A) 18 प्रतिशत
(B) 74 प्रतिशत
(C) 40 प्रतिशत
(D) 59 प्रतिशत
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (A) श्रीलंका में तमिल भाषी लगभग 18 प्रतिशत और सिंहली लगभग 74 प्रतिशत हैं।
Q3. बेल्जियम में संविधान संशोधन कितनी बार हुए (1970–1993)?
(A) दो बार
(B) तीन बार
(C) चार बार
(D) पाँच बार
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) 1970 से 1993 के बीच बेल्जियम के संविधान में चार बार संशोधन हुए।
Q4. नियंत्रण और संतुलन की व्यवस्था किससे जुड़ी है?
(A) ऊर्ध्वाधर बँटवारे से
(B) क्षैतिज बँटवारे से
(C) गठबंधन से
(D) आरक्षण से
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) सरकार के तीन अंगों के बीच नियंत्रण और संतुलन क्षैतिज बँटवारे से जुड़ा है।
Q5. निम्न में से कौन दबाव समूह का उदाहरण है?
(A) संसद
(B) न्यायालय
(C) मज़दूर संघ
(D) चुनाव आयोग
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) मज़दूर संघ एक दबाव समूह है, जो सरकार की नीतियों को प्रभावित करता है।
Q6. सत्ता की साझेदारी का नैतिक आधार क्या है?
(A) इससे चुनाव जीतना आसान होता है
(B) यह लोकतंत्र की आत्मा है
(C) इससे सेना मज़बूत होती है
(D) इससे कर बढ़ता है
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) नैतिक तर्क के अनुसार सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है।
Q7. श्रीलंका के गृहयुद्ध का मुख्य कारण क्या था?
(A) आर्थिक मंदी
(B) बहुसंख्यकवाद
(C) प्राकृतिक आपदा
(D) विदेशी आक्रमण
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) सिंहली बहुसंख्यकवाद और तमिलों की अनदेखी ही गृहयुद्ध का मुख्य कारण बनी।
Q8. ब्रुसेल्स में डच भाषी लोगों का प्रतिशत लगभग कितना है?
(A) 80 प्रतिशत
(B) 59 प्रतिशत
(C) 20 प्रतिशत
(D) 40 प्रतिशत
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) राजधानी ब्रुसेल्स में डच भाषी लगभग 20 प्रतिशत और फ्रांसीसी भाषी लगभग 80 प्रतिशत हैं।
Q9. केंद्र और राज्य सरकारों के बीच शक्ति का बँटवारा कहलाता है –
(A) क्षैतिज
(B) ऊर्ध्वाधर
(C) सामुदायिक
(D) क्षेत्रीय
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) विभिन्न स्तरों की सरकारों के बीच बँटवारा ऊर्ध्वाधर कहलाता है।
Q10. तमिल ईलम की माँग किस देश से जुड़ी है?
(A) बेल्जियम
(B) भारत
(C) श्रीलंका
(D) नेपाल
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) श्रीलंका के तमिलों ने अलग तमिल ईलम राज्य की माँग की थी।
Q11. निम्न में से कौन-सी सरकार भाषा के आधार पर चुनी जाती है?
(A) केंद्र सरकार
(B) सामुदायिक सरकार
(C) स्थानीय सरकार
(D) गठबंधन सरकार
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) बेल्जियम की सामुदायिक सरकार एक भाषा बोलने वाले लोगों द्वारा चुनी जाती है।
Q12. सत्ता की साझेदारी से सबसे बड़ा लाभ क्या है?
(A) निर्णय एक व्यक्ति लेता है
(B) सामाजिक टकराव घटता है
(C) चुनाव बंद हो जाते हैं
(D) न्यायालय समाप्त होता है
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) साझेदारी से समूहों के बीच टकराव घटता है और स्थिरता बढ़ती है।
Q13. बेल्जियम किस महाद्वीप में स्थित है?
(A) एशिया
(B) अफ्रीका
(C) यूरोप
(D) ऑस्ट्रेलिया
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) बेल्जियम यूरोप का एक छोटा देश है।
Q14. जब कई दल मिलकर सरकार बनाते हैं तो उसे कहते हैं –
(A) एकदलीय सरकार
(B) गठबंधन सरकार
(C) सैन्य सरकार
(D) सामुदायिक सरकार
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) कई दलों के मिलने से बनी सरकार गठबंधन सरकार कहलाती है।
Q15. लोकतंत्र में वैध सरकार वही है जिसमें –
(A) केवल बहुमत शासन करे
(B) नागरिक समूहों द्वारा शासन में भागीदार हों
(C) सेना शासन करे
(D) एक व्यक्ति शासन करे
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) वैध सरकार में नागरिक विभिन्न समूहों के माध्यम से शासन में हिस्सेदारी करते हैं।
✅ Answer Key
MCQ Quiz – उत्तर कुंजी (Answer Key)
| प्रश्न | सही उत्तर |
|---|---|
| Q1 | (C) |
| Q2 | (A) |
| Q3 | (C) |
| Q4 | (B) |
| Q5 | (C) |
| Q6 | (B) |
| Q7 | (B) |
| Q8 | (C) |
| Q9 | (B) |
| Q10 | (C) |
| Q11 | (B) |
| Q12 | (B) |
| Q13 | (C) |
| Q14 | (B) |
| Q15 | (B) |
उत्तर कुंजी से अपने उत्तर मिलाकर देखिए कि आपने कितने प्रश्न सही किए। जिन प्रश्नों में गलती हुई हो, उस विषय को अध्याय में दोबारा पढ़ें। केवल अंक गिनकर छोड़ देना सही तरीका नहीं है, गलती का कारण समझना ही असली तैयारी है।
❓ FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1. सत्ता की साझेदारी का सबसे सरल अर्थ क्या है?
उत्तर: सबसे सरल अर्थ है, शासन की ताक़त को बाँटकर रखना। जिस प्रकार घर या विद्यालय में काम बाँटने से व्यवस्था अच्छी चलती है, उसी प्रकार देश में भी विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, केंद्र, राज्य, स्थानीय सरकारों और विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच शक्तियाँ बाँटी जाती हैं। इससे कोई एक सर्वशक्तिमान नहीं बनता और हर वर्ग को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है।
प्रश्न 2. परीक्षा में बेल्जियम और श्रीलंका की तुलना कैसे लिखें?
उत्तर: तुलना के लिए तालिका का प्रयोग करें। एक ओर बेल्जियम लिखें, जहाँ सत्ता बाँटी गई, बराबर प्रतिनिधित्व मिला और शांति रही। दूसरी ओर श्रीलंका लिखें, जहाँ बहुसंख्यकवाद अपनाया गया, तमिलों की अनदेखी हुई और गृहयुद्ध हुआ। अंत में एक पंक्ति का निष्कर्ष लिखें कि साझेदारी ही लोकतंत्र का सही रास्ता है। तालिका, आँकड़े और निष्कर्ष, ये तीन चीज़ें आपके उत्तर को पूर्ण बनाएँगी।
प्रश्न 3. नैतिक और व्यावहारिक कारणों को याद करने की आसान तरकीब क्या है?
उत्तर: एक छोटी-सी तरकीब याद रखें – व्यावहारिक अर्थात परिणाम और नैतिक अर्थात नियम। यदि उत्तर में टकराव घटना, स्थिरता आना और एकता बढ़ना लिखा है तो वह व्यावहारिक कारण है। यदि उत्तर में लोकतंत्र की आत्मा, जनता की भागीदारी और सिद्धांत की बात है तो वह नैतिक कारण है। परीक्षा में दोनों कारण अलग-अलग शीर्षक बनाकर लिखें, इससे भ्रम नहीं होगा और अंक भी पूरे मिलेंगे।
प्रश्न 4. क्या भारत में भी सत्ता की साझेदारी है?
उत्तर: हाँ, भारत में सत्ता की साझेदारी कई रूपों में है। केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारों के बीच शक्तियाँ बँटी हैं। सरकार के तीनों अंग अलग-अलग काम करते हैं और एक-दूसरे पर नियंत्रण रखते हैं। अनुसूचित जाति, जनजाति और महिलाओं को प्रतिनिधित्व के विशेष अवसर दिए गए हैं। अनेक बार गठबंधन सरकारें भी बनी हैं। इसलिए भारत इस अध्याय के सिद्धांतों का जीवंत उदाहरण है, जिसे आप उत्तरों में उदाहरण के रूप में लिख सकते हैं।
प्रश्न 5. इस अध्याय से Bihar Board में किस प्रकार के प्रश्न आते हैं?
उत्तर: इस अध्याय से वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में देश, राजधानी, प्रतिशत और वर्ष पूछे जाते हैं। लघु उत्तरीय में परिभाषाएँ और छोटे कारण पूछे जाते हैं। दीर्घ उत्तरीय में बेल्जियम के प्रावधान, श्रीलंका के कदम और साझेदारी के कारण विस्तार से पूछे जाते हैं। इसलिए तैयारी के तीन स्तर रखें, आँकड़े, परिभाषाएँ और तुलनात्मक उत्तर। तीनों की तैयारी हो तो यह अध्याय आपके लिए अंक दिलाने वाला अध्याय सिद्ध होगा।
🔗 Pichhla / Agla Adhyay – पिछले व अगले अध्याय पढ़ें
⬅️ पिछला अध्याय: नागरिक शास्त्र – सभी अध्याय (Civics Parent)
➡️ अगला अध्याय: Chapter 2 – सत्ता में साझेदारी की कार्यप्रणाली (Working of Power Sharing)
📂 नागरिक शास्त्र के सभी अध्याय: Class 10 Bihar Board Social Science नागरिक शास्त्र (Civics)
📚 सामाजिक विज्ञान के सभी अध्याय: Class 10 Bihar Board Social Science – All Chapters
मेरी सलाह है कि अध्यायों को क्रम से ही पढ़ें, क्योंकि नागरिक शास्त्र की हर अगली बात पिछली बात से जुड़ी होती है। यदि कोई अध्याय छूट गया हो तो ऊपर के लिंक से उसे पहले पूरा करें, फिर आगे बढ़ें।
🔚 Conclusion – निष्कर्ष
इस अध्याय में हमने सीखा कि सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की नींव है। बेल्जियम ने साझेदारी अपनाकर शांति और एकता पाई, जबकि श्रीलंका ने बहुसंख्यकवाद अपनाकर गृहयुद्ध झेला। साझेदारी के नैतिक और व्यावहारिक, दोनों कारण हमें बताते हैं कि शासन में सबकी भागीदारी ही सही रास्ता है।
अब आप प्रश्नावली के उत्तर दोबारा पढ़ें, MCQ Quiz में अपना स्कोर देखें और गलतियों को सुधारें। अगले अध्याय में हम इसी साझेदारी की कार्यप्रणाली, अर्थात संघवाद, को विस्तार से समझेंगे, जहाँ केंद्र और राज्यों के संबंधों की रोचक जानकारी आपका इंतज़ार कर रही है।
