परिचय – यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है?
बच्चों, बाढ़ की चेतावनी मिल जाती है, पर भूकंप बिना बताए आता है — कुछ ही सेकंड में सब कुछ हिल जाता है। Class 10 Social Science Disaster Management Chapter 3 Earthquake and Tsunami हमें इन्हीं अचानक आने वाली आपदाओं को समझना सिखाता है। Class 10 Social Science Disaster Management Chapter 3 Earthquake and Tsunami में हम पढ़ेंगे कि भूकंप क्यों आता है, सुनामी कैसे बनती है और इनसे बचाव की तैयारी क्या होनी चाहिए।
बिहार हिमालय के निकट होने के कारण भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील है। 1934 का बिहार-नेपाल भूकंप और 2015 में नेपाल में आए भूकंप के झटके बिहार में भी तीव्रता से महसूस हुए थे। वहीं 26 दिसंबर 2004 को हिंद महासागर में आई सुनामी ने तमिलनाडु, अंडमान-निकोबार सहित कई देशों में भारी तबाही मचाई थी। ये घटनाएँ बताती हैं कि जानकारी और तैयारी ही इन आपदाओं में जीवन बचाती है।
इस अध्याय में हम भूकंप का अर्थ, प्लेट विवर्तनिकी की सरल समझ, रिक्टर स्केल, भूकंप क्षेत्र, सुनामी की उत्पत्ति और दोनों आपदाओं के सुरक्षा उपाय आसान भाषा में पढ़ेंगे। साथ में पूरी प्रश्नावली के हल, 2004 की सुनामी पर केस स्टडी और 15 MCQ का अभ्यास भी दिया गया है।
📋 अध्याय की जानकारी (Chapter Information)
| Board | Bihar Board (BSEB) |
| Textbook | BSTBPC (आपदा प्रबन्धन) |
| Class | 10 |
| Subject | Social Science (सामाजिक विज्ञान) — आपदा प्रबंधन |
| Chapter | 3 |
| Chapter Name | Natural Disaster and Management: Earthquake and Tsunami (प्राकृतिक आपदा एवं प्रबंधन : भूकंप एवं सुनामी) |
| कुल हल किए गए प्रश्न | 37 |
📚 इस Chapter में क्या-क्या है? (Topics)
- भूकंप का अर्थ और उत्पत्ति — भूगर्भिक प्लेटों का खिसकना
- अधिकेंद्र (Epicentre) और उद्गम केंद्र (Focus) की अवधारणा
- रिक्टर स्केल — भूकंप की तीव्रता का मापन
- भूकंप प्रभावित क्षेत्र — हिमालयी क्षेत्र और बिहार की स्थिति
- भूकंप के प्रभाव और भूकंप-रोधी निर्माण
- भूकंप के समय सुरक्षा उपाय — झुको, ढको, पकड़ो
- सुनामी का अर्थ और उत्पत्ति — समुद्र तल का भूकंप
- 2004 की हिंद महासागर सुनामी
- सुनामी की चेतावनी और तटीय सुरक्षा उपाय
📊 Key Concepts – मुख्य परिभाषाएँ व नियम
भूकंप (Earthquake): पृथ्वी के भीतर चट्टानों के अचानक खिसकने या टूटने से उत्पन्न कंपन को भूकंप कहते हैं। यह ऊर्जा तरंगों के रूप में फैलती है।
उद्गम केंद्र (Focus): पृथ्वी के भीतर वह बिंदु जहाँ से भूकंप की शुरुआत होती है, उद्गम केंद्र कहलाता है।
अधिकेंद्र (Epicentre): पृथ्वी की सतह पर उद्गम केंद्र के ठीक ऊपर स्थित बिंदु अधिकेंद्र कहलाता है। यहाँ कंपन सबसे तीव्र महसूस होता है।
रिक्टर स्केल (Richter Scale): भूकंप की तीव्रता (मैग्नीट्यूड) मापने का पैमाना रिक्टर स्केल कहलाता है। इसका आविष्कार चार्ल्स रिक्टर ने 1935 में किया था।
सिस्मोग्राफ (Seismograph): भूकंप की तरंगों को मापने और अंकित करने वाला यंत्र सिस्मोग्राफ कहलाता है।
सुनामी (Tsunami): समुद्र तल के नीचे आए भूकंप, ज्वालामुखी या भूस्खलन से उत्पन्न विशाल समुद्री लहरों की श्रृंखला को सुनामी कहते हैं। यह जापानी शब्द है — ‘सु’ अर्थात बंदरगाह और ‘नामी’ अर्थात लहर।
प्लेट विवर्तनिकी: पृथ्वी की ऊपरी परत कई बड़ी प्लेटों में बँटी है। इन प्लेटों के परस्पर खिसकने, टकराने या अलग होने से भूकंप और ज्वालामुखी उत्पन्न होते हैं।
भूकंप-रोधी निर्माण: ऐसी भवन तकनीक जिसमें हल्की सामग्री, मजबूत नींव और लचीली संरचना से भवन भूकंप के झटके सह सके, भूकंप-रोधी निर्माण कहलाता है।
🌋 भूकंप – धरती क्यों काँपती है?
पृथ्वी की ऊपरी परत एक अखंड खोल नहीं है, वह कई बड़ी-बड़ी प्लेटों में बँटी हुई है। ये प्लेटें बहुत धीमी गति से लगातार खिसकती रहती हैं। जब दो प्लेटों के किनारे आपस में फँस जाते हैं और दबाव बढ़ता जाता है, तो एक सीमा के बाद चट्टानें अचानक टूट या खिसक जाती हैं। जमा हुई ऊर्जा तरंगों के रूप में निकलती है और धरती काँपने लगती है — यही भूकंप है। इसीलिए अधिकांश भूकंप प्लेटों के किनारों पर ही आते हैं।
भारत की उत्तरी सीमा पर भारतीय प्लेट और यूरेशियाई प्लेट का टकराव होता है, जिससे हिमालय पर्वत बना और यह पूरा क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। बिहार इस क्षेत्र के निकट है, इसलिए यहाँ के उत्तरी जिलों को उच्च जोखिम क्षेत्र में रखा गया है। 1934 में आए बिहार-नेपाल भूकंप में मुंगेर, दरभंगा और मुजफ्फरपुर जैसे नगरों में भारी क्षति हुई थी। 2015 के नेपाल भूकंप के झटके भी पूरे बिहार में महसूस किए गए थे।
भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर मापी जाती है। सामान्यतः 5 से कम तीव्रता के भूकंप से मामूली क्षति, 6 से 7 के बीच के भूकंप से काफी क्षति और 7 से अधिक तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही होती है। याद रखिए, भूकंप से अधिकतर मृत्यु कंपन से नहीं, बल्कि कमजोर इमारतों के गिरने से होती है। इसलिए भूकंप-रोधी निर्माण ही इस आपदा का सबसे बड़ा उपचार है।
- भूकंप का मूल कारण — भूगर्भिक प्लेटों का अचानक खिसकना।
- तीव्रता का पैमाना — रिक्टर स्केल (आविष्कारक चार्ल्स रिक्टर, 1935)।
- बिहार का उत्तरी भाग हिमालय के निकट होने से भूकंप-संवेदनशील है।
🌊 सुनामी – समुद्र की विशाल लहरें
सुनामी जापानी शब्द है, जिसका अर्थ है बंदरगाह की लहर। जब समुद्र के तल के नीचे तीव्र भूकंप आता है, ज्वालामुखी फटता है या विशाल भूस्खलन होता है, तो समुद्र का जल अचानक ऊपर-नीचे होता है और विशाल लहरों की एक श्रृंखला बन जाती है। खुले समुद्र में ये लहरें लंबी और कम ऊँची होती हैं, इसलिए जहाजों को पता भी नहीं चलता, पर इनकी गति हवाई जहाज जैसी तेज — सैकड़ों किलोमीटर प्रति घंटा — हो सकती है।
जैसे-जैसे ये लहरें तट की ओर आती हैं, समुद्र उथला होता जाता है और लहरों की ऊँचाई बढ़ती जाती है। तट पर ये 10 मीटर या उससे भी ऊँची दीवार जैसे जल के रूप में टूटती हैं और कई किलोमीटर भीतर तक तबाही मचाती हैं। 26 दिसंबर 2004 को सुमात्रा के निकट समुद्र में आए लगभग 9.1 तीव्रता के भूकंप से उत्पन्न सुनामी ने भारत सहित 14 देशों में लगभग 2.3 लाख लोगों की जान ली थी। भारत में तमिलनाडु का तट, अंडमान-निकोबार और आंध्र तट विशेष रूप से प्रभावित हुए थे।
सुनामी से बचाव का सबसे अच्छा साधन समय पर चेतावनी है। भारत ने हैदराबाद स्थित भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) में सुनामी चेतावनी केंद्र स्थापित किया है, जो समुद्र में लगे सेंसरों से लहरों की सूचना पाकर तटीय क्षेत्रों को चेतावनी देता है। तट के लोगों को एक प्राकृतिक संकेत भी याद रखना चाहिए — यदि समुद्र का जल अचानक पीछे हट जाए या असामान्य आवाज आए, तो तुरंत ऊँचे स्थान की ओर भागना चाहिए।
- सुनामी का कारण — समुद्र तल के नीचे भूकंप, ज्वालामुखी या भूस्खलन।
- 2004 की सुनामी — 26 दिसंबर, सुमात्रा के निकट भूकंप, 14 देश प्रभावित।
- भारत का सुनामी चेतावनी केंद्र — INCOIS, हैदराबाद।
🧰 भूकंप और सुनामी के समय सुरक्षा उपाय
भूकंप के समय सबसे पहला नियम है — घबराइए मत। यदि आप भवन के भीतर हैं तो ‘झुको, ढको, पकड़ो’ का नियम अपनाइए — मजबूत मेज के नीचे झुकिए, सिर ढकिए और मेज को पकड़े रहिए। खिड़कियों, शीशों, अलमारियों और लटकती वस्तुओं से दूर रहिए। लिफ्ट का प्रयोग बिल्कुल न करें। यदि आप बाहर हैं तो खुले मैदान की ओर जाइए और इमारतों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहिए। कंपन रुकने के बाद ही सावधानी से बाहर निकलकर खुले स्थान पर एकत्र होइए।
सुनामी की चेतावनी मिलते ही तट से दूर ऊँची भूमि या मजबूत ऊँची इमारत की ऊपरी मंजिल पर चले जाना चाहिए। समुद्र तट पर लहर देखने के लिए रुकना सबसे बड़ी भूल है, क्योंकि सुनामी एक लहर नहीं होती — कई लहरें आती हैं और दूसरी या तीसरी लहर पहली से बड़ी हो सकती है। प्रशासन की ‘सब सुरक्षित’ घोषणा के बाद ही तट पर लौटना चाहिए। मछुआरों को चेतावनी के समय समुद्र में नहीं जाना चाहिए।
दोनों आपदाओं के लिए पूर्व तैयारी समान है — परिवार की आपात योजना, सुरक्षित स्थान की पहचान, जरूरी सामान का थैला तैयार रखना और विद्यालय व कार्यस्थल पर मॉक ड्रिल में भाग लेना। भूकंप क्षेत्र में घर बनाते समय भूकंप-रोधी तकनीक और नियमों का पालन करना चाहिए तथा भारी सामान ऊँची अलमारियों पर नहीं रखना चाहिए। तैयारी ही इन अचानक आपदाओं में जीवन और मृत्यु का अंतर बन जाती है।
- भूकंप में नियम — झुको, ढको, पकड़ो (Drop, Cover, Hold)।
- सुनामी में एक लहर नहीं आती — घोषणा से पहले तट पर न लौटें।
- लिफ्ट का प्रयोग भूकंप के समय कभी न करें।
भूकंप के बारे में एक महत्वपूर्ण बात यह समझनी है कि इसकी भविष्यवाणी आज भी संभव नहीं है, परंतु जोखिम की पहचान पूरी तरह संभव है। वैज्ञानिक मानचित्रों द्वारा देश को भूकंप क्षेत्रों (ज़ोन) में बाँटा गया है, जिनमें ज़ोन V सबसे अधिक जोखिम वाला और ज़ोन II सबसे कम जोखिम वाला माना जाता है। बिहार के उत्तरी जिले उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में आते हैं। इस जानकारी का उपयोग भवन निर्माण के नियम तय करने में होता है — जहाँ जोखिम अधिक, वहाँ निर्माण के मानक अधिक कठोर होने चाहिए। दुर्भाग्य से व्यवहार में नियमों की अनदेखी होती है और वही अनदेखी आपदा के समय मृत्यु का कारण बनती है। इसलिए एक जागरूक नागरिक को अपने घर के निर्माण में इंजीनियर की सलाह और नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए।
सुनामी के विषय में भारतीय तट की स्थिति भी समझनी चाहिए। भारत का पूर्वी तट — तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और अंडमान-निकोबार — बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के भूकंप क्षेत्र के निकट होने से सुनामी के प्रति संवेदनशील है। पश्चिमी तट पर गुजरात के कच्छ क्षेत्र के निकट भी समुद्री भूकंप की संभावना रहती है। 2004 के बाद भारत ने समुद्र में सुनामी मापक यंत्र (बॉय) लगाए, तटीय गाँवों में चेतावनी टावर स्थापित किए और मछुआरा समुदाय को प्रशिक्षण देना प्रारंभ किया। आज चेतावनी कुछ ही मिनटों में जारी हो जाती है। फिर भी अंतिम सुरक्षा जनता के व्यवहार पर निर्भर है — चेतावनी सुनकर तुरंत ऊँचे स्थान पर जाना ही जीवन बचाता है।
विद्यालयों के लिए भूकंप सुरक्षा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि दिन के समय सैकड़ों बच्चे एक ही भवन में होते हैं। सुरक्षित विद्यालय का अर्थ है — मजबूत भवन, खुले मैदान तक स्पष्ट निकासी मार्ग, भारी अलमारियों को दीवार से बाँधना और नियमित मॉक ड्रिल। ड्रिल के समय बच्चों को यह अभ्यास होना चाहिए कि वे घबराए बिना, धक्का-मुक्की किए बिना, कतार में मैदान तक पहुँचें। शिक्षकों को प्राथमिक उपचार और लापता बच्चों की सूची का कार्य सौंपा जाना चाहिए। यदि प्रत्येक विद्यालय यह व्यवस्था अपना ले, तो भूकंप जैसी अचानक आपदा में भी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। यही कारण है कि आपदा प्रबंधन को अब विद्यालयी शिक्षा का अभिन्न अंग बनाया गया है।
एक व्यावहारिक बात और समझ लीजिए — भूकंप के बाद की स्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है जितनी भूकंप के समय की। मुख्य झटके के बाद आफ्टरशॉक आते रहते हैं, इसलिए क्षतिग्रस्त भवनों में सामान लेने के लिए पुनः प्रवेश करना खतरनाक होता है। गैस की लाइन और बिजली के तार क्षतिग्रस्त हो सकते हैं, इसलिए माचिस जलाने से पहले रिसाव की जाँच आवश्यक है। घायलों को मलबे से निकालते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि ऊपर का मलबा एकाएक न हटे, वरना नीचे दबा व्यक्ति और दब सकता है। प्रशासन की ओर से भवन की सुरक्षा जाँच होने तक उसमें निवास नहीं करना चाहिए। सुनामी प्रभावित तटों पर भी यही नियम लागू होता है — मृत मछलियों और दूषित जल से बीमारियाँ फैल सकती हैं, इसलिए राहत दलों के निर्देशों के बिना तटीय क्षेत्र में लौटना उचित नहीं है। इन सावधानियों को याद रखने का सरल सूत्र है — आपदा के बाद की जल्दबाजी दूसरी आपदा बन सकती है। धैर्य, आधिकारिक सूचना और क्रमबद्ध कार्य ही सुरक्षा देते हैं। विद्यार्थी यदि इन बिंदुओं को अपने उत्तरों में लिखते हैं, तो उनका उत्तर केवल पुस्तकीय नहीं रहता, व्यावहारिक भी बन जाता है और परीक्षक पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।
परीक्षा की दृष्टि से इस अध्याय को पढ़ने की एक विशेष विधि भी अपना लीजिए। सबसे पहले सभी परिभाषाएँ — भूकंप, उद्गम केंद्र, अधिकेंद्र, रिक्टर स्केल, सिस्मोग्राफ और सुनामी — एक पृष्ठ पर लिखकर याद कीजिए, क्योंकि वस्तुनिष्ठ प्रश्न इन्हीं से बनते हैं। फिर सुरक्षा उपायों की सूची को क्रम से याद कीजिए — पहले, दौरान और बाद में — क्योंकि दीर्घ प्रश्न इसी क्रम में उत्तर माँगता है। अंत में तिथियों और स्थानों की एक छोटी सूची बनाइए — 1934 बिहार-नेपाल, 2001 भुज, 2004 सुमात्रा सुनामी, INCOIS हैदराबाद। जब ये तीनों सूचियाँ तैयार हो जाएँ, तो अध्याय के MCQ स्वयं हल करके अपनी तैयारी जाँचिए। जो प्रश्न गलत हों, उनके अनुच्छेद को पुनः पढ़िए। इस विधि से पढ़ा हुआ अध्याय लंबे समय तक याद रहता है और परीक्षा भवन में घबराहट भी नहीं होती।
📘 पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (बीच के प्रश्न)
प्रश्न 1. भूकंप क्यों आता है?
उत्तर: पृथ्वी की ऊपरी परत की प्लेटें लगातार धीरे-धीरे खिसकती रहती हैं। जब प्लेटों के किनारे आपस में फँसकर दबाव बढ़ता है और चट्टानें अचानक टूट या खिसक जाती हैं, तो जमा ऊर्जा तरंगों के रूप में निकलती है। इन्हीं तरंगों के कंपन को भूकंप कहते हैं। ज्वालामुखी विस्फोट और मानव निर्मित विस्फोटों से भी हल्के कंपन हो सकते हैं।
प्रश्न 2. अधिकेंद्र किसे कहते हैं?
उत्तर: पृथ्वी की सतह पर वह बिंदु जो भूकंप के उद्गम केंद्र के ठीक ऊपर स्थित होता है, अधिकेंद्र कहलाता है। अधिकेंद्र के आसपास के क्षेत्र में कंपन सबसे तीव्र होता है और क्षति भी सबसे अधिक वहीं होती है। दूरी बढ़ने के साथ कंपन की तीव्रता घटती जाती है।
प्रश्न 3. सुनामी शब्द का अर्थ क्या है?
उत्तर: सुनामी जापानी भाषा का शब्द है। ‘सु’ का अर्थ है बंदरगाह और ‘नामी’ का अर्थ है लहर, अर्थात बंदरगाह की लहर। समुद्र तल के भूकंप से उत्पन्न विशाल लहरें जब बंदरगाहों और तटों तक पहुँचती हैं तो भारी तबाही मचाती हैं, इसलिए इन्हें सुनामी कहा गया।
प्रश्न 4. रिक्टर स्केल से क्या मापा जाता है?
उत्तर: रिक्टर स्केल से भूकंप की तीव्रता अर्थात मैग्नीट्यूड मापा जाता है, जो भूकंप से निकली ऊर्जा की मात्रा बताता है। 6 से अधिक तीव्रता का भूकंप क्षति पहुँचा सकता है और 7 से अधिक का भूकंप भारी तबाही मचा सकता है। इस स्केल का आविष्कार चार्ल्स रिक्टर ने 1935 में किया था।
प्रश्न 5. समुद्र का जल पीछे हटना किस बात का संकेत है?
उत्तर: यदि समुद्र का जल अचानक असामान्य रूप से पीछे हट जाए और समुद्र तल दिखाई देने लगे, तो यह सुनामी आने का प्राकृतिक संकेत होता है। ऐसी स्थिति में तट पर रुकना या मछली पकड़ने जाना खतरनाक है — तुरंत ऊँचे स्थान की ओर भागना चाहिए।
✏️ प्रश्नावली (Exercise) – सभी प्रश्नों के हल
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. भूकंप की तीव्रता मापने का पैमाना है? (A) बैरोमीटर (B) रिक्टर स्केल (C) थर्मामीटर (D) हाइग्रोमीटर
उत्तर: सही उत्तर (B) रिक्टर स्केल है। रिक्टर स्केल भूकंप से निकली ऊर्जा अर्थात मैग्नीट्यूड को मापता है। बैरोमीटर वायुदाब, थर्मामीटर ताप और हाइग्रोमीटर आर्द्रता मापता है। रिक्टर स्केल के आविष्कारक चार्ल्स रिक्टर थे, जिन्होंने 1935 में इसे विकसित किया था।
प्रश्न 2. सुनामी उत्पन्न होने का मुख्य कारण है? (A) चक्रवात (B) समुद्र तल के नीचे भूकंप (C) भारी वर्षा (D) ज्वार-भाटा
उत्तर: सही उत्तर (B) है। समुद्र तल के नीचे आए तीव्र भूकंप से जल का विशाल स्तंभ विस्थापित होता है और सुनामी लहरें बनती हैं। चक्रवात से तूफानी लहरें (स्टॉर्म सर्ज) उठती हैं, जो सुनामी से भिन्न होती हैं — दोनों को मिलाकर न लिखें।
प्रश्न 3. हिंद महासागर में विनाशकारी सुनामी किस तिथि को आई थी? (A) 26 दिसंबर 2004 (B) 15 अगस्त 2005 (C) 26 जनवरी 2001 (D) 13 मार्च 2011
उत्तर: सही उत्तर (A) 26 दिसंबर 2004 है। सुमात्रा के निकट आए लगभग 9.1 तीव्रता के भूकंप से उत्पन्न इस सुनामी से 14 देश प्रभावित हुए और भारत के तमिलनाडु तट व अंडमान-निकोबार में भारी क्षति हुई। 26 जनवरी 2001 गुजरात के भुज भूकंप की तिथि है।
प्रश्न 4. भारत का सुनामी चेतावनी केंद्र कहाँ स्थित है? (A) दिल्ली (B) चेन्नई (C) हैदराबाद (INCOIS) (D) मुंबई
उत्तर: सही उत्तर (C) हैदराबाद स्थित INCOIS (भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र) है। यह केंद्र समुद्री सेंसरों और भूकंपीय आँकड़ों के आधार पर तटीय राज्यों को सुनामी की चेतावनी जारी करता है, जिससे लोग समय रहते ऊँचे स्थानों पर पहुँच सकें।
प्रश्न 5. भूकंप के समय सही आचरण कौन-सा है? (A) लिफ्ट से उतरना (B) मजबूत मेज के नीचे छिपकर सिर ढकना (C) खिड़की के पास खड़े होना (D) सीढ़ियों पर दौड़ना
उत्तर: सही उत्तर (B) है। भूकंप के समय ‘झुको, ढको, पकड़ो’ का नियम अपनाना चाहिए — मजबूत मेज के नीचे झुककर सिर ढकना सबसे सुरक्षित है। लिफ्ट फँस सकती है, खिड़की के शीशे टूटकर घायल कर सकते हैं और कंपन के समय दौड़ना गिरने का कारण बनता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. उद्गम केंद्र और अधिकेंद्र में अंतर बताइए।
उत्तर: उद्गम केंद्र पृथ्वी के भीतर वह बिंदु है जहाँ चट्टान टूटने से भूकंप की शुरुआत होती है, जबकि अधिकेंद्र पृथ्वी की सतह पर उद्गम केंद्र के ठीक ऊपर स्थित बिंदु होता है। भूकंप की तरंगें उद्गम केंद्र से निकलती हैं, पर सतह पर सबसे तीव्र कंपन और सबसे अधिक क्षति अधिकेंद्र के आसपास होती है। एक भूमिगत बिंदु है और दूसरा सतही बिंदु — यही मूल अंतर है।
प्रश्न 7. बिहार भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील क्यों है?
उत्तर: बिहार हिमालय क्षेत्र के निकट स्थित है, जहाँ भारतीय और यूरेशियाई प्लेटों का टकराव चल रहा है। इस टकराव से उत्पन्न दबाव समय-समय पर भूकंप के रूप में निकलता है। विशेषकर बिहार के उत्तरी जिले उच्च जोखिम क्षेत्र में आते हैं। 1934 के बिहार-नेपाल भूकंप और 2015 के नेपाल भूकंप के प्रभाव ने इस संवेदनशीलता को स्पष्ट कर दिया है।
प्रश्न 8. भूकंप के समय घर के भीतर क्या करना चाहिए?
उत्तर: घर के भीतर होने पर मजबूत मेज या पलंग के नीचे छिपकर सिर को ढकना चाहिए और ‘झुको, ढको, पकड़ो’ नियम का पालन करना चाहिए। खिड़कियों, शीशों, भारी अलमारियों और झूमरों से दूर रहना चाहिए। लिफ्ट का प्रयोग नहीं करना चाहिए और कंपन रुकने तक भीतर ही रहना चाहिए। कंपन रुकने पर गैस और बिजली बंद करके सावधानी से खुले स्थान पर जाना चाहिए।
प्रश्न 9. सुनामी की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: सुनामी की पहली विशेषता यह है कि खुले समुद्र में इसकी लहरें कम ऊँची पर अत्यंत तेज गति वाली होती हैं, पर तट के निकट पहुँचकर इनकी ऊँचाई कई मीटर तक बढ़ जाती है। दूसरी विशेषता यह है कि सुनामी एक अकेली लहर नहीं होती — लहरों की श्रृंखला आती है और बाद की लहरें पहली से अधिक ऊँची हो सकती हैं। इसलिए पहली लहर के बाद तट पर लौटना खतरनाक होता है।
प्रश्न 10. भूकंप-रोधी भवन की दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: भूकंप-रोधी भवन की पहली विशेषता है मजबूत नींव और हल्की छत, जिससे भवन पर कंपन का भार कम पड़े। दूसरी विशेषता है लचीली और सममित संरचना — स्तंभों और बीमों में पर्याप्त सरिया (स्टील) का प्रयोग, जिससे भवन झटके में टूटने के बजाय लचक सके। ऐसे भवनों में दरवाजों के ऊपर लिंटल बैंड और छत के स्तर पर रूफ बैंड भी दिया जाता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 11. भूकंप के कारणों और प्रभावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: भूकंप का मुख्य कारण भूगर्भिक प्लेटों का खिसकना है। पृथ्वी की ऊपरी परत की प्लेटें जब आपस में टकराती, अलग होती या किनारों पर रगड़ खाती हैं, तो दबाव बढ़ने पर चट्टानें अचानक टूटती हैं और ऊर्जा तरंगों के रूप में फैलकर धरती को कँपाती है। ज्वालामुखी विस्फोट, भूस्खलन और बड़ी खदानों के धँसने से भी स्थानीय भूकंप आ सकते हैं। भूकंप के प्रभाव अत्यंत विनाशकारी होते हैं — इमारतें और पुल गिरते हैं, सड़कों में दरारें पड़ती हैं, आग लगती है, बाँध टूटने से बाढ़ आ सकती है और हजारों लोग मारे व घायल होते हैं। तटीय क्षेत्रों में भूकंप सुनामी को भी जन्म दे सकता है। आर्थिक दृष्टि से भूकंप वर्षों के विकास को पीछे धकेल देता है। चूँकि भूकंप की पूर्व चेतावनी संभव नहीं है, इसलिए इसका एकमात्र उपचार भूकंप-रोधी निर्माण, तैयारी और त्वरित बचाव व्यवस्था है।
प्रश्न 12. सुनामी की उत्पत्ति और 2004 की सुनामी का वर्णन कीजिए।
उत्तर: सुनामी की उत्पत्ति समुद्र तल के नीचे आए तीव्र भूकंप से होती है। जब समुद्र तल की चट्टान अचानक ऊपर या नीचे खिसकती है, तो उसके ऊपर का विशाल जल स्तंभ भी विस्थापित होता है और लहरों की श्रृंखला चारों ओर फैलती है। खुले समुद्र में ये लहरें तेज गति से चलती हैं, पर तट के उथले जल में इनकी गति घटती और ऊँचाई बढ़ती जाती है। 26 दिसंबर 2004 को इंडोनेशिया के सुमात्रा तट के निकट समुद्र में लगभग 9.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे उत्पन्न सुनामी ने भारत, श्रीलंका, थाईलैंड और इंडोनेशिया सहित 14 देशों में लगभग 2.3 लाख लोगों की जान ली। भारत में नागपट्टिनम सहित तमिलनाडु का तट और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह बुरी तरह प्रभावित हुए। इस घटना के बाद भारत ने हैदराबाद में आधुनिक सुनामी चेतावनी केंद्र स्थापित किया, ताकि भविष्य में समय रहते चेतावनी दी जा सके।
प्रश्न 13. भूकंप से बचाव के उपायों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
उत्तर: भूकंप से बचाव के उपाय तीन स्तरों पर होते हैं। आपदा-पूर्व उपायों में भूकंप-रोधी भवनों का निर्माण, पुराने कमजोर भवनों की मजबूती (रेट्रोफिटिंग), परिवार की आपात योजना, जरूरी सामान का थैला तैयार रखना और विद्यालयों में मॉक ड्रिल शामिल हैं। भूकंप के समय के उपायों में ‘झुको, ढको, पकड़ो’ नियम, लिफ्ट का त्याग, शीशों और भारी वस्तुओं से दूरी और बाहर होने पर खुले मैदान में जाना शामिल है। आपदा-पश्चात उपायों में घायलों को प्राथमिक उपचार, क्षतिग्रस्त भवनों से दूरी, गैस रिसाव की जाँच, आधिकारिक सूचनाओं का पालन और बचाव दलों को सहयोग शामिल है। बिहार जैसे संवेदनशील राज्य में भवन निर्माण नियमों का पालन अनिवार्य होना चाहिए। याद रखिए — भूकंप नहीं मारता, गिरती इमारतें मारती हैं; इसलिए सुरक्षित निर्माण ही सबसे बड़ा बचाव है।
📖 Case Study – 26 दिसंबर 2004 – हिंद महासागर की सुनामी
26 दिसंबर 2004 की सुबह इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के निकट समुद्र तल के नीचे लगभग 9.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। इससे उत्पन्न सुनामी लहरें कुछ ही घंटों में हिंद महासागर के तटों तक पहुँच गईं। भारत में तमिलनाडु के नागपट्टिनम और कडलोर जिले, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और आंध्र प्रदेश व केरल के तट प्रभावित हुए। हजारों लोग, जिनमें बड़ी संख्या में मछुआरे और तट पर खेलते बच्चे थे, लहरों में बह गए। उस समय भारत में सुनामी चेतावनी व्यवस्था नहीं थी। इस घटना के बाद भारत ने हैदराबाद स्थित INCOIS में आधुनिक सुनामी चेतावनी केंद्र स्थापित किया और तटीय क्षेत्रों में जागरूकता अभियान शुरू किए।
प्रश्न 1. 2004 की सुनामी किससे उत्पन्न हुई थी?
(A) चक्रवात से
(B) समुद्र तल के नीचे लगभग 9.1 तीव्रता के भूकंप से
(C) ज्वालामुखी से
(D) बाँध टूटने से
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) सुमात्रा के निकट समुद्र तल के नीचे आए लगभग 9.1 तीव्रता के भूकंप से सुनामी उत्पन्न हुई।
प्रश्न 2. भारत में सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में कौन शामिल था?
(A) नागपट्टिनम (तमिलनाडु) और अंडमान-निकोबार
(B) पटना
(C) जयपुर
(D) भोपाल
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (A) तमिलनाडु का नागपट्टिनम क्षेत्र और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह बुरी तरह प्रभावित हुए।
प्रश्न 3. 2004 के बाद भारत ने क्या महत्वपूर्ण कदम उठाया?
(A) सुनामी पर प्रतिबंध लगाया
(B) हैदराबाद में सुनामी चेतावनी केंद्र (INCOIS) स्थापित किया
(C) तट खाली करा दिए
(D) मछली पालन बंद किया
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) भारत ने INCOIS, हैदराबाद में आधुनिक सुनामी चेतावनी केंद्र स्थापित किया।
प्रश्न 4. उस समय भारत में क्षति अधिक होने का एक कारण क्या था?
(A) चेतावनी व्यवस्था का अभाव
(B) अधिक वर्षा
(C) घना कोहरा
(D) बिजली की कमी
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (A) उस समय भारत में सुनामी चेतावनी व्यवस्था नहीं थी, इसलिए लोग समय रहते सुरक्षित स्थान पर नहीं जा पाए।
⭐ Quick Revision – Important Points
- भूकंप = प्लेटों के अचानक खिसकने से उत्पन्न कंपन; उद्गम केंद्र भीतर, अधिकेंद्र सतह पर।
- तीव्रता का पैमाना — रिक्टर स्केल, आविष्कारक चार्ल्स रिक्टर (1935); मापक यंत्र — सिस्मोग्राफ।
- 7 से अधिक तीव्रता = भारी तबाही की संभावना।
- बिहार के ऐतिहासिक भूकंप — 1934 (बिहार-नेपाल) और 2015 के नेपाल भूकंप के झटके।
- सुनामी = समुद्र तल के भूकंप से उत्पन्न लहरों की श्रृंखला; जापानी शब्द — बंदरगाह की लहर।
- 2004 सुनामी — 26 दिसंबर, सुमात्रा, लगभग 9.1 तीव्रता, 14 देश प्रभावित।
- भारत का सुनामी चेतावनी केंद्र — INCOIS, हैदराबाद।
- भूकंप सुरक्षा नियम — झुको, ढको, पकड़ो; लिफ्ट का प्रयोग वर्जित।
- भूकंप नहीं मारता, कमजोर इमारतें मारती हैं — भूकंप-रोधी निर्माण ही उपचार है।
⚠️ Aam Galtiyan (Common Mistakes)
- उद्गम केंद्र और अधिकेंद्र की परिभाषा उलट देना — उद्गम भीतर, अधिकेंद्र सतह पर होता है।
- सुनामी को चक्रवात की लहर लिख देना — सुनामी भूकंप से, तूफानी लहर चक्रवात से बनती है।
- रिक्टर स्केल को यंत्र लिख देना — स्केल पैमाना है, यंत्र सिस्मोग्राफ है।
- भूकंप के समय बाहर दौड़ने को सही उपाय लिखना — कंपन के समय मेज के नीचे रहना सुरक्षित है।
🎯 Bihar Board Exam Tips
- रिक्टर स्केल, सिस्मोग्राफ, अधिकेंद्र — इन तीनों की परिभाषा अलग-अलग एक-एक पंक्ति में लिखिए।
- तिथियाँ याद रखिए — 1934 बिहार-नेपाल, 2001 भुज, 2004 सुनामी, 2015 नेपाल।
- सुरक्षा उपायों वाले उत्तर में ‘झुको, ढको, पकड़ो’ अवश्य लिखिए, यह बोर्ड का प्रिय बिंदु है।
- सुनामी के उत्तर में INCOIS, हैदराबाद का नाम लिखना न भूलें।
📝 MCQ Quiz – 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (स्वयं को जाँचें)
Q1. भूकंप मापने का यंत्र है –
(A) बैरोमीटर
(B) सिस्मोग्राफ
(C) थर्मामीटर
(D) रेनगेज
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) सिस्मोग्राफ भूकंप की तरंगों को मापता और अंकित करता है।
Q2. पृथ्वी की सतह पर उद्गम केंद्र के ठीक ऊपर का बिंदु है –
(A) अधिकेंद्र
(B) केंद्र बिंदु
(C) ध्रुव
(D) विषुवत रेखा
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (A) सतह पर उद्गम केंद्र के ठीक ऊपर का बिंदु अधिकेंद्र कहलाता है।
Q3. चार्ल्स रिक्टर ने रिक्टर स्केल कब विकसित किया?
(A) 1905
(B) 1935
(C) 1975
(D) 2005
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) चार्ल्स रिक्टर ने 1935 में रिक्टर स्केल विकसित किया था।
Q4. सुनामी शब्द किस भाषा का है?
(A) चीनी
(B) जापानी
(C) हिंदी
(D) अरबी
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) सुनामी जापानी शब्द है — सु (बंदरगाह) + नामी (लहर)।
Q5. भूकंप की दृष्टि से बिहार का कौन-सा भाग अधिक संवेदनशील है?
(A) उत्तरी भाग
(B) दक्षिणी पठार
(C) मध्य भाग
(D) पश्चिमी भाग
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (A) हिमालय के निकट होने से बिहार का उत्तरी भाग अधिक संवेदनशील है।
Q6. किस तीव्रता से अधिक का भूकंप भारी तबाही मचा सकता है?
(A) 3
(B) 4
(C) 7 से अधिक
(D) 2
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) सामान्यतः 7 से अधिक तीव्रता का भूकंप भारी तबाही मचाता है।
Q7. 1934 का बड़ा भूकंप किन क्षेत्रों से जुड़ा था?
(A) भुज
(B) बिहार-नेपाल
(C) लातूर
(D) असम
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) 1934 का विनाशकारी भूकंप बिहार-नेपाल क्षेत्र में आया था।
Q8. भूकंप के समय लिफ्ट का प्रयोग क्यों नहीं करना चाहिए?
(A) बिजली जा सकती है और लिफ्ट फँस सकती है
(B) लिफ्ट धीमी होती है
(C) लिफ्ट महंगी है
(D) नियम नहीं है
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (A) कंपन में बिजली जाने से लिफ्ट बीच में फँस सकती है, इसलिए सीढ़ी भी कंपन रुकने के बाद ही उपयोग करें।
Q9. सुनामी की लहरों की विशेषता है –
(A) केवल एक लहर आती है
(B) लहरों की श्रृंखला आती है
(C) लहरें धीमी होती हैं
(D) लहरें छोटी रहती हैं
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) सुनामी में लहरों की श्रृंखला आती है, बाद की लहरें अधिक ऊँची हो सकती हैं।
Q10. समुद्र जल का अचानक पीछे हटना संकेत है –
(A) ज्वार का
(B) सुनामी का
(C) वर्षा का
(D) चक्रवात समाप्ति का
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) समुद्र का असामान्य रूप से पीछे हटना सुनामी का प्राकृतिक संकेत है।
Q11. भारत में सुनामी चेतावनी केंद्र INCOIS कहाँ है?
(A) हैदराबाद
(B) मुंबई
(C) कोलकाता
(D) विशाखापत्तनम
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (A) INCOIS हैदराबाद में स्थित है और वहीं से सुनामी चेतावनी जारी होती है।
Q12. भूकंप का मुख्य कारण है –
(A) वर्षा
(B) प्लेटों का खिसकना
(C) पवन
(D) ज्वार
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) भूगर्भिक प्लेटों के अचानक खिसकने से भूकंप आता है।
Q13. भुज (गुजरात) का भूकंप किस वर्ष आया?
(A) 2001
(B) 2004
(C) 1999
(D) 2015
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (A) गुजरात के भुज में 26 जनवरी 2001 को विनाशकारी भूकंप आया था।
Q14. ‘झुको, ढको, पकड़ो’ किस आपदा का सुरक्षा नियम है?
(A) बाढ़
(B) भूकंप
(C) सूखा
(D) आग
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) यह भूकंप के समय अपनाया जाने वाला सुरक्षा नियम है।
Q15. सुनामी की चेतावनी मिलने पर क्या करना चाहिए?
(A) तट पर लहर देखना
(B) ऊँची भूमि की ओर जाना
(C) समुद्र में नाव ले जाना
(D) घर में रहना
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) चेतावनी मिलते ही तट छोड़कर ऊँची भूमि पर जाना चाहिए।
✅ Answer Key
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| Q1 | B |
| Q2 | A |
| Q3 | B |
| Q4 | B |
| Q5 | A |
| Q6 | C |
| Q7 | B |
| Q8 | A |
| Q9 | B |
| Q10 | B |
| Q11 | A |
| Q12 | B |
| Q13 | A |
| Q14 | B |
| Q15 | B |
❓ FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1. क्या भूकंप की भविष्यवाणी की जा सकती है?
उत्तर: अभी तक भूकंप की सटीक भविष्यवाणी की कोई विश्वसनीय विधि नहीं है। वैज्ञानिक केवल संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर सकते हैं। इसलिए तैयारी और भूकंप-रोधी निर्माण ही बचाव का उपाय है।
प्रश्न 2. बिहार के किस भाग में भूकंप का खतरा अधिक है?
उत्तर: बिहार के उत्तरी भाग में, जो हिमालय के निकट है। सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया जैसे सीमावर्ती जिले उच्च जोखिम क्षेत्र में माने जाते हैं।
प्रश्न 3. सुनामी और सामान्य समुद्री लहर में क्या अंतर है?
उत्तर: सामान्य लहरें पवन से बनती हैं और केवल सतह को प्रभावित करती हैं, जबकि सुनामी समुद्र तल के भूकंप से बनती है, पूरे जल स्तंभ को हिलाती है और तट पर विशाल ऊँचाई व गति के साथ तबाही मचाती है।
प्रश्न 4. भूकंप के बाद आफ्टरशॉक क्या होते हैं?
उत्तर: मुख्य भूकंप के बाद आने वाले छोटे-छोटे झटकों को आफ्टरशॉक कहते हैं। ये क्षतिग्रस्त भवनों को और गिरा सकते हैं, इसलिए मुख्य झटके के बाद भी कमजोर भवनों से दूर रहना चाहिए।
प्रश्न 5. घर को भूकंप से सुरक्षित कैसे बनाएँ?
उत्तर: मजबूत नींव, पर्याप्त सरिया वाले स्तंभ-बीम, लिंटल व रूफ बैंड, हल्की छत और सममित नक्शा अपनाकर घर को भूकंप-रोधी बनाया जा सकता है। भारी सामान नीचे रखना और अलमारियाँ दीवार से बाँधना भी जरूरी है।
🔗 Pichhla / Agla Adhyay – पिछले व अगले अध्याय पढ़ें
पिछला अध्याय पढ़ें: पिछला अध्याय 2
अगला अध्याय पढ़ें: अगला अध्याय 4
आपदा प्रबंधन के सभी अध्याय: Class 10 Bihar Board Social Science – आपदा प्रबंधन
सामाजिक विज्ञान के सभी विषय व अध्याय: Class 10 Bihar Board Social Science – All Chapters
🔚 Conclusion – निष्कर्ष
भूकंप और सुनामी दोनों बिना चेतावनी के आते हैं, इसलिए इनका एकमात्र उपचार है — पहले से तैयारी। भूकंप-रोधी मकान, ‘झुको, ढको, पकड़ो’ का अभ्यास और सुनामी चेतावनी पर तुरंत ऊँची भूमि की ओर जाना — ये छोटे नियम जीवन बचा सकते हैं। अगले अध्याय में हम जीवन रक्षक आकस्मिक प्रबंधन अर्थात प्राथमिक उपचार और त्वरित बचाव की व्यावहारिक जानकारी पढ़ेंगे।
