परिचय – यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है?
Class 10 Science Chapter 12 Electricity के NCERT Solutions आपको इस पेज पर सरल हिंदी में, किताब के क्रम से मिलेंगे। Class 10 Science Chapter 12 Electricity यानी विद्युत — यह भौतिकी (Physics) का वह अध्याय है जो हमारे घर की हर स्विच-प्लेट, हर बल्ब, हर पंखे और हर हीटर के पीछे छिपे विज्ञान को समझाता है।
ज़रा सोचिए — स्विच दबाते ही बल्ब क्यों जल उठता है? बिजली का बिल “यूनिट” में क्यों आता है? हीटर की डोरी ठंडी रहती है, पर अंदर की कुंडली लाल-गरम क्यों हो जाती है? फ्यूज़ बार-बार क्यों उड़ जाता है? इन सब सवालों के जवाब इसी अध्याय में हैं — विद्युत धारा, विभवांतर, ओम का नियम, प्रतिरोध, तापन प्रभाव और विद्युत शक्ति की कहानी में।
यह अध्याय बाकी अध्यायों से थोड़ा अलग है, क्योंकि इसमें न्यूमेरिकल (आंकिक प्रश्न) सबसे अधिक हैं। सूत्र बहुत कम हैं — मुश्किल से आठ-दस — पर उन्हीं सूत्रों को घुमा-फिराकर तरह-तरह के प्रश्न बना दिए जाते हैं। अच्छी बात यह है कि यदि आप हर न्यूमेरिकल को “दिया गया → सूत्र → मान रखना → गणना → उत्तर” के क्रम से हल करना सीख जाएँ, तो यह अध्याय आपके लिए सबसे अधिक अंक दिलाने वाला अध्याय बन जाएगा। इस पेज पर हर न्यूमेरिकल ठीक इसी क्रम से, हर छोटा चरण दिखाकर हल किया गया है।
Bihar Board (BSEB) Class 10 की परीक्षा में इस अध्याय से हर साल वस्तुनिष्ठ (MCQ) प्रश्न, सूत्र-आधारित न्यूमेरिकल और श्रेणी-समानांतर संयोजन पर दीर्घ उत्तरीय प्रश्न आते हैं। पिछले अध्याय में आपने प्रकाश (Light) पढ़ा था; यह अध्याय उससे बिल्कुल अलग, पर अपने आप में पूरी तरह स्वतंत्र है — इसलिए आप इसे सीधे यहीं से शुरू कर सकते हैं।
📌 खास बात: इस अध्याय की सबसे बड़ी ताकत इसके सूत्रों की आपसी कड़ी है — I = Q/t से शुरू होकर V = IR, R = ρL/A, H = I2Rt और P = VI तक, सारे सूत्र एक-दूसरे से जुड़े हैं। एक सूत्र पक्का होगा तो बाकी अपने आप याद हो जाएँगे। न्यूमेरिकल में इकाइयाँ (मात्रक) लिखना कभी न भूलें — Board में इकाई के भी अंक मिलते हैं!
📋 अध्याय की जानकारी (Chapter Information)
| Board | Bihar Board (BSEB) |
|---|---|
| Textbook | NCERT |
| Class | 10 |
| Subject | Science (विज्ञान) |
| Chapter | 12 |
| Chapter Name | Electricity (विद्युत) |
| कुल हल किए गए प्रश्न | 54 (InText 23 + NCERT उदाहरण 13 + प्रश्नावली 18) |
📚 इस Chapter में क्या-क्या है? (Topics)
- 12.1 विद्युत धारा और परिपथ – आवेश, धारा I = Q/t, ऐम्पियर की परिभाषा व ऐमीटर
- 12.2 विद्युत विभव और विभवांतर – V = W/Q, वोल्ट की परिभाषा व वोल्टमीटर
- 12.3 परिपथ आरेख – सेल, बैटरी, स्विच (प्लग कुंजी), प्रतिरोधक, ऐमीटर, वोल्टमीटर आदि के प्रतीक (संकेत)
- 12.4 ओम का नियम – V = IR, V–I ग्राफ़ व प्रतिरोध की अवधारणा
- 12.5 प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक – R = ρL/A, लंबाई, अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल, पदार्थ की प्रकृति, ताप व प्रतिरोधकता (ρ) की सारणी
- 12.6 प्रतिरोधकों का संयोजन
- 12.6.1 श्रेणी संयोजन (Series) – तुल्य प्रतिरोध R = R1 + R2 + R3
- 12.6.2 समानांतर (पार्श्व) संयोजन (Parallel) – 1/R = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3
- 12.7 विद्युत धारा का तापन प्रभाव – जूल का नियम H = I2Rt, हीटर, इस्तरी, बल्ब व फ्यूज़ में उपयोग
- 12.8 विद्युत शक्ति – P = VI = I2R = V2/R, वाट, किलोवाट-घंटा (kWh) अर्थात “यूनिट” व बिजली के बिल की गणना
- पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (InText) – 23 प्रश्न, NCERT उदाहरण (Examples 12.1 से 12.13) – 13 उदाहरण, प्रश्नावली के 18 प्रश्न
- Case Study, Quick Revision, Common Mistakes, Bihar Board Exam Tips, MCQ Quiz व FAQ
📊 Key Concepts – मुख्य परिभाषाएँ व सूत्र
| पद / नियम | अर्थ व सूत्र (एक लाइन में) |
|---|---|
| विद्युत आवेश (Q) | पदार्थ का वह गुण जिसके कारण विद्युत प्रभाव उत्पन्न होता है; मात्रक कूलॉम (C); एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश = 1.6 × 10-19 C (ऋणात्मक)। |
| विद्युत धारा (I) | आवेश के प्रवाह की दर — I = Q/t; मात्रक ऐम्पियर (A)। धारा की दिशा इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा के विपरीत मानी जाती है। |
| ऐम्पियर (A) | यदि किसी चालक से 1 सेकंड में 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित हो, तो धारा 1 ऐम्पियर है — 1 A = 1 C/1 s। |
| विद्युत परिपथ | विद्युत धारा के प्रवाह का सतत और बंद पथ। पथ कहीं से भी टूटा हो तो धारा नहीं बहेगी। |
| विभवांतर (V) | दो बिंदुओं के बीच प्रति इकाई आवेश को ले जाने में किया गया कार्य — V = W/Q; मात्रक वोल्ट (V)। |
| वोल्ट (V) | यदि 1 कूलॉम आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में 1 जूल कार्य हो, तो विभवांतर 1 वोल्ट है — 1 V = 1 J/1 C। |
| ओम का नियम | नियत ताप पर चालक से बहने वाली धारा उसके सिरों के विभवांतर के अनुक्रमानुपाती होती है — V = IR। |
| प्रतिरोध (R) | चालक का वह गुण जो धारा के प्रवाह का विरोध करता है — R = V/I; मात्रक ओम (Ω)। |
| प्रतिरोधकता (ρ) | पदार्थ का निजी गुण — R = ρL/A से ρ = RA/L; मात्रक ओम-मीटर (Ω m); केवल पदार्थ की प्रकृति व ताप पर निर्भर करती है। |
| श्रेणी संयोजन | प्रतिरोधक एक ही पथ में एक के बाद एक जुड़े हों — धारा सबमें समान, विभवांतर बँटता है; R = R1 + R2 + R3। |
| समानांतर संयोजन | सभी प्रतिरोधक दो ही सामान्य बिंदुओं के बीच जुड़े हों — विभवांतर सब पर समान, धारा बँटती है; 1/R = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3। |
| जूल का तापन नियम | प्रतिरोधक में उत्पन्न ऊष्मा H = I2Rt = VIt = V2t/R; मात्रक जूल (J)। |
| विद्युत शक्ति (P) | ऊर्जा व्यय की दर — P = VI = I2R = V2/R; मात्रक वाट (W)। |
| किलोवाट-घंटा (kWh) | विद्युत ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक — 1 kWh = 1 यूनिट = 3.6 × 106 J। घरों का बिजली बिल इसी में बनता है। |
| फ्यूज़ | कम गलनांक वाली मिश्रातु का तार, जो अधिक धारा बहने पर पिघलकर परिपथ तोड़ देता है और उपकरणों को बचा लेता है। |
सबसे काम की बात: पूरे अध्याय की कुंजी केवल तीन अक्षर हैं — V, I और R। इनमें से कोई दो पता हों तो तीसरा ओम के नियम से निकल आता है, और फिर शक्ति, ऊष्मा व ऊर्जा — सब उसी से बन जाते हैं। न्यूमेरिकल देखते ही सबसे पहले लिखिए कि क्या दिया गया है और क्या निकालना है — आधा प्रश्न वहीं हल हो जाता है!
विद्युत धारा और परिपथ – आवेश जब चलने लगता है
हम नदी में बहते पानी को “जल धारा” कहते हैं। ठीक वैसे ही, जब किसी चालक (जैसे धातु के तार) में से विद्युत आवेश बहने लगता है, तो हम कहते हैं कि उसमें विद्युत धारा बह रही है। टॉर्च के बल्ब का जलना, पंखे का घूमना — इन सबके पीछे यही बहता हुआ आवेश है।
धातुओं में यह आवेश किनके द्वारा बहता है? धातु के अंदर बड़ी संख्या में मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं, जो सामान्य अवस्था में इधर-उधर बेतरतीब घूमते रहते हैं। जैसे ही तार के दोनों सिरों को सेल या बैटरी से जोड़ते हैं, इलेक्ट्रॉन एक निश्चित दिशा में चलने लगते हैं — और यही व्यवस्थित प्रवाह विद्युत धारा है। एक महत्वपूर्ण परंपरा याद रखें — धारा की दिशा, इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा के विपरीत मानी जाती है, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से धारा को धन आवेश का प्रवाह माना गया था।
धारा का सूत्र – I = Q/t
यदि किसी चालक के किसी अनुप्रस्थ काट (cross-section) से t समय में Q आवेश प्रवाहित हो, तो धारा:
विद्युत धारा (I) = आवेश (Q) / समय (t) अर्थात I = Q/t, और इसी से Q = It तथा t = Q/I
आवेश का SI मात्रक कूलॉम (C) है। एक कूलॉम आवेश लगभग 6 × 1018 इलेक्ट्रॉनों के आवेश के बराबर होता है — कितनी बड़ी संख्या है, सोचिए! प्रत्येक इलेक्ट्रॉन पर आवेश केवल 1.6 × 10-19 C होता है, इसलिए इतने सारे इलेक्ट्रॉन मिलकर मात्र 1 कूलॉम बनाते हैं।
धारा का SI मात्रक ऐम्पियर (A) है, जो फ्रांसीसी वैज्ञानिक आंद्रे-मैरी ऐम्पियर के नाम पर रखा गया है। परिभाषा बिल्कुल सूत्र से बनती है — यदि 1 सेकंड में 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित हो जाए तो धारा 1 ऐम्पियर होगी। छोटी धाराओं के लिए मिलीऐम्पियर (1 mA = 10-3 A) और माइक्रोऐम्पियर (1 μA = 10-6 A) का उपयोग होता है। परिपथ में धारा मापने का यंत्र ऐमीटर (Ammeter) है, जिसे हमेशा परिपथ में श्रेणीक्रम में लगाया जाता है।
विद्युत परिपथ किसे कहते हैं?
टॉर्च तभी जलती है जब उसका स्विच ऑन हो। स्विच क्या करता है? वह सेल और बल्ब के बीच एक चालक कड़ी बना देता है। विद्युत धारा के ऐसे सतत और बंद पथ को ही विद्युत परिपथ (Electric Circuit) कहते हैं। पथ में कहीं भी एक छोटा-सा टूट (gap) आ जाए — स्विच खुला हो, तार टूटा हो या बल्ब का तंतु (फिलामेंट) टूटा हो — तो धारा तुरंत रुक जाएगी। इसीलिए फ्यूज़ हुआ बल्ब नहीं जलता: उसका तंतु टूटकर परिपथ अधूरा कर देता है।
एक साधारण परिपथ में ये चीज़ें होती हैं — एक सेल या बैटरी (ऊर्जा का स्रोत), एक बल्ब या कोई उपकरण (जो ऊर्जा का उपयोग करे), एक स्विच या प्लग कुंजी (परिपथ को जोड़ने-तोड़ने के लिए) और जोड़ने वाले तार।
📌 याद रखें: धारा मापनी है तो ऐमीटर श्रेणीक्रम में — क्योंकि ऐमीटर को उसी धारा से गुजरना है जिसे वह माप रहा है। ऐमीटर का प्रतिरोध बहुत कम (आदर्श रूप से शून्य) होता है, ताकि वह परिपथ की धारा को बदल ही न पाए।
एक साँस में समझें — बहता आवेश ही धारा है, I = Q/t, मात्रक ऐम्पियर; और धारा तभी बहेगी जब पथ सतत और बंद हो अर्थात परिपथ पूरा हो।
विद्युत विभव और विभवांतर – धारा बहती क्यों है?
पानी ऊँची जगह से नीची जगह की ओर अपने आप बहता है। ठीक उसी तरह आवेश भी तभी बहता है जब चालक के दो सिरों के बीच विभवांतर (Potential Difference) हो। यह विभवांतर कौन बनाता है? सेल या बैटरी — यही वह युक्ति है जो चालक के सिरों पर विभवांतर बनाए रखती है। सेल के अंदर होने वाली रासायनिक अभिक्रियाएँ आवेशों को ऊर्जा देकर उन्हें एक सिरे से दूसरे सिरे तक धकेलती रहती हैं।
विभवांतर का सूत्र – V = W/Q
दो बिंदुओं के बीच विभवांतर वह कार्य है जो एक इकाई आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया जाता है:
विभवांतर (V) = किया गया कार्य (W) / आवेश (Q) अर्थात V = W/Q, और इसी से W = VQ
विभवांतर का SI मात्रक वोल्ट (V) है, जो वैज्ञानिक अलेसान्द्रो वोल्टा के नाम पर रखा गया है। यदि 1 कूलॉम आवेश को ले जाने में 1 जूल कार्य हो, तो विभवांतर 1 वोल्ट होगा — 1 V = 1 J/C। यही वाक्य “दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 1 V है” का अर्थ है; किताब का यह प्रश्न हर साल पूछा जाता है, इसलिए इसे ऐसे ही याद करें।
एक आसान उदाहरण — 6 V की बैटरी से गुजरने वाले प्रत्येक 1 कूलॉम आवेश को W = VQ = 6 × 1 = 6 जूल ऊर्जा मिलती है। साधारण टॉर्च का एक सेल 1.5 V का होता है, कार की बैटरी 12 V की और हमारे घरों की आपूर्ति 220 V की होती है। विभवांतर मापने का यंत्र वोल्टमीटर है, जिसे हमेशा उन दो बिंदुओं के बीच समानांतर (पार्श्वक्रम) में लगाया जाता है जिनके बीच का विभवांतर मापना है। वोल्टमीटर का प्रतिरोध बहुत अधिक (आदर्श रूप से अनंत) होता है, ताकि वह स्वयं लगभग कोई धारा न ले।
📌 ऐमीटर बनाम वोल्टमीटर — यही जोड़ी सबसे ज़्यादा उलझाती है: ऐमीटर → धारा मापता है → श्रेणी में → प्रतिरोध बहुत कम। वोल्टमीटर → विभवांतर मापता है → समानांतर में → प्रतिरोध बहुत अधिक।
एक साँस में समझें — विभवांतर ही आवेश को धक्का देता है; V = W/Q, मात्रक वोल्ट, और उसे बनाए रखती है बैटरी।
परिपथ आरेख – संकेतों की भाषा
हर बार असली सेल, असली बल्ब बनाकर परिपथ दिखाना कठिन है। इसलिए वैज्ञानिकों ने कुछ निश्चित प्रतीक (संकेत) बनाए हैं — इन्हीं प्रतीकों से बना चित्र परिपथ आरेख (Circuit Diagram) कहलाता है। Board की परीक्षा में परिपथ आरेख बनाना एक स्वतंत्र प्रश्न के रूप में आता है, इसलिए नीचे के सभी संकेत अच्छी तरह पहचान लीजिए।
| अवयव | संकेत का वर्णन | काम |
|---|---|---|
| विद्युत सेल | एक लंबी व एक छोटी समांतर रेखा का जोड़ा (लंबी रेखा धनात्मक, छोटी-मोटी रेखा ऋणात्मक सिरा) | विभवांतर का छोटा स्रोत (एक सेल प्रायः 1.5 V) |
| बैटरी | सेल के प्रतीकों के दो या अधिक जोड़े एक साथ जुड़े हुए | अधिक विभवांतर का स्रोत — एक से अधिक सेल का समूह |
| प्लग कुंजी / स्विच (खुला) | तार में एक खाली खाँचा (gap) — संपर्क टूटा हुआ | परिपथ खुला है, धारा नहीं बहेगी |
| प्लग कुंजी / स्विच (बंद) | खाँचे के ऊपर तार का टुकड़ा जुड़ा हुआ, या खाँचे में बिंदु (•) | परिपथ बंद है, धारा बहेगी |
| विद्युत बल्ब | वृत्त (गोला) जिसके अंदर क्रॉस जैसा तंतु बना हो | धारा बहने पर प्रकाश देता है |
| प्रतिरोधक (प्रतिरोध R) | तार के बीच ज़िगज़ैग (लहरदार) रेखा | नियत प्रतिरोध प्रदान करता है |
| परिवर्ती प्रतिरोध / रियोस्टैट | ज़िगज़ैग रेखा के ऊपर से गुजरता तीर, या तीर सहित प्रतिरोधक का बक्सा | प्रतिरोध बदलकर धारा नियंत्रित करने के लिए |
| ऐमीटर (A) | वृत्त के अंदर अक्षर A | धारा मापता है — श्रेणी में लगता है; + सिरा बैटरी के + की ओर |
| वोल्टमीटर (V) | वृत्त के अंदर अक्षर V | विभवांतर मापता है — समानांतर में लगता है; + सिरा बैटरी के + की ओर |
| गैल्वेनोमीटर (G) | वृत्त के अंदर अक्षर G | सूक्ष्म धारा की उपस्थिति व दिशा बताता है |
| जोड़ने वाला तार | सीधी सरल रेखा | अवयवों को जोड़ता है (प्रतिरोध नगण्य माना जाता है) |
| तारों का संधि बिंदु | दो तारों के मिलने की जगह पर ठोस बिंदु (•); बिना बिंदु के क्रॉस करने वाले तार जुड़े नहीं माने जाते | बताता है कि तार वास्तव में जुड़े हैं या नहीं |
| फ्यूज़ | छोटा आयत या तार पर बना छोटा वक्र/बक्सा | अधिक धारा पर पिघलकर परिपथ की रक्षा करता है |
परिपथ आरेख बनाते समय दो बातें हमेशा ध्यान रखें — एक, ऐमीटर और वोल्टमीटर के धनात्मक (+) सिरे बैटरी के धनात्मक सिरे की ओर हों; दो, आरेख साफ़-सीधी रेखाओं से बनाएँ, तार कहीं अनावश्यक मोड़ न लें। नीचे InText प्रश्नों में हम 2 V के तीन सेलों की बैटरी वाला एक पूरा परिपथ शब्दों में समझेंगे — उसे पढ़कर आरेख बनाने का ढांचा पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा।
एक साँस में समझें — परिपथ आरेख प्रतीकों की वह भाषा है जिससे कोई भी परिपथ कागज़ पर सटीक बनाया और समझाया जा सकता है।
ओम का नियम – V = IR, अध्याय का दिल
सन् 1827 में जर्मन वैज्ञानिक जॉर्ज साइमन ओम ने धारा और विभवांतर के बीच एक बहुत सरल संबंध खोजा। कल्पना कीजिए — एक नाइक्रोम तार को बैटरी से जोड़कर हम बैटरी में सेलों की संख्या बढ़ाते जाते हैं (अर्थात विभवांतर V बढ़ाते हैं) और हर बार ऐमीटर से धारा I पढ़ते हैं। हर बार देखते हैं कि V और I का अनुपात एक ही आता है। यही नियमितता ओम का नियम है:
ओम का नियम: नियत ताप पर किसी चालक से प्रवाहित धारा, उसके सिरों पर लगाए गए विभवांतर के अनुक्रमानुपाती होती है। अर्थात V ∝ I या V = IR — जहाँ R एक नियतांक है, जिसे चालक का प्रतिरोध कहते हैं।
इससे प्रतिरोध की परिभाषा अपने आप मिल जाती है — R = V/I। प्रतिरोध का SI मात्रक ओम (Ω) है। यदि किसी चालक के सिरों पर 1 V विभवांतर लगाने से उसमें 1 A धारा बहे, तो उसका प्रतिरोध 1 Ω होगा।
V–I ग्राफ़ – सीधी रेखा ही पहचान है
V को ऊर्ध्वाधर अक्ष (Y) और I को क्षैतिज अक्ष (X) पर रखकर ग्राफ़ खींचें, तो नाइक्रोम जैसे धात्विक चालक के लिए मूल बिंदु से गुजरती सीधी रेखा मिलती है। यह सीधी रेखा दो बातें कहती है — एक, V और I अनुक्रमानुपाती हैं (ओम का नियम सत्य है); दो, उस रेखा का ढाल (slope) ही प्रतिरोध है — R = V/I। रेखा जितनी खड़ी (steep), प्रतिरोध उतना अधिक। ताप बढ़ने पर धातु का प्रतिरोध बढ़ जाता है, इसलिए अधिक ताप पर खींची रेखा अधिक खड़ी होगी।
ध्यान रहे — ओम का नियम सभी पदार्थों पर लागू नहीं होता। बल्ब का तंतु गरम होने पर उसका प्रतिरोध बदल जाता है, इसलिए उसके लिए V–I ग्राफ़ पूरी तरह सीधा नहीं रहता। ऐसे पदार्थों को अन-ओमीय (non-ohmic) कहते हैं। परंतु Class 10 के स्तर पर हमारे सारे न्यूमेरिकल ओम के नियम को सत्य मानकर ही बनते हैं।
एक छोटा-सा अभ्यास मन में कीजिए — 220 V के स्रोत से जुड़े 1200 Ω प्रतिरोध वाले बल्ब-तंतु में धारा I = V/R = 220/1200 = 0.18 A बहेगी, जबकि 100 Ω की हीटर कुंडली में I = 220/100 = 2.2 A। देखा? प्रतिरोध जितना कम, धारा उतनी अधिक — हीटर इसीलिए बल्ब की तुलना में कहीं अधिक धारा खींचता है। यह प्रश्न नीचे उदाहरण 12.3 में पूरा हल किया गया है।
📌 याद रखें: ओम के नियम के तीन रूप एक ही सिक्के के तीन पहलू हैं — V = IR, I = V/R, R = V/I। प्रश्न में जो दो राशियाँ दी हों, तीसरी इन्हीं से निकालें। ताप नियत रहना नियम की शर्त है — यह बात परिभाषा में अवश्य लिखें।
एक साँस में समझें — ओम का नियम कहता है V = IR; ग्राफ़ की सीधी रेखा और उसका ढाल = प्रतिरोध, यही पहचान है।
प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक – R = ρL/A
मान लीजिए एक ही बैटरी से पहले एक छोटा नाइक्रोम तार जोड़ते हैं, फिर उससे दोगुनी लंबाई का तार, फिर एक मोटा तार, और अंत में उसी आकार का ताँबे का तार। हर बार ऐमीटर का पाठ्यांक बदल जाता है। प्रयोग से चार निष्कर्ष निकलते हैं:
1. लंबाई (L): तार जितना लंबा, प्रतिरोध उतना अधिक — R ∝ L। लंबाई दोगुनी तो प्रतिरोध दोगुना, क्योंकि इलेक्ट्रॉनों को अधिक दूरी तक टकराते हुए जाना पड़ता है।
2. अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल (A): तार जितना मोटा, प्रतिरोध उतना कम — R ∝ 1/A। मोटे तार में इलेक्ट्रॉनों को चलने के लिए अधिक “रास्ता” मिलता है, ठीक वैसे जैसे चौड़ी सड़क पर भीड़ कम अटकती है। क्षेत्रफल दोगुना तो प्रतिरोध आधा।
3. पदार्थ की प्रकृति: एक ही लंबाई व मोटाई के नाइक्रोम तार का प्रतिरोध ताँबे के तार से बहुत अधिक होता है। अर्थात प्रतिरोध पदार्थ पर निर्भर करता है — इसी को हम प्रतिरोधकता (ρ, रो) से मापते हैं।
4. ताप: धातुओं का प्रतिरोध ताप बढ़ने पर बढ़ता है। (मिश्रातुओं, जैसे नाइक्रोम, में यह वृद्धि बहुत कम होती है — यही एक कारण है कि हीटर की कुंडली मिश्रातु की बनती है।)
इन कारकों को मिलाकर मिलता है अध्याय का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण सूत्र:
R = ρL/A अर्थात ρ = RA/L — यहाँ ρ (रो) पदार्थ की प्रतिरोधकता है, जिसका SI मात्रक ओम-मीटर (Ω m) है।
प्रतिरोधकता (ρ) की सारणी – NCERT Table 12.2 (20°C पर)
| वर्ग | पदार्थ | प्रतिरोधकता ρ (Ω m) |
|---|---|---|
| धातु | चाँदी (Silver) | 1.60 × 10-8 |
| धातु | ताँबा (Copper) | 1.62 × 10-8 |
| धातु | ऐलुमिनियम (Aluminium) | 2.63 × 10-8 |
| धातु | टंगस्टन (Tungsten) | 5.20 × 10-8 |
| धातु | निकेल (Nickel) | 6.84 × 10-8 |
| धातु | लोहा / आयरन (Iron) | 10.0 × 10-8 |
| धातु | क्रोमियम (Chromium) | 12.9 × 10-8 |
| धातु | पारा / मरकरी (Mercury) | 94.0 × 10-8 |
| धातु | मैंगनीज़ (Manganese) | 1.84 × 10-6 |
| मिश्रातु | कॉन्सटेंटन (Cu–Ni) | 49 × 10-8 |
| मिश्रातु | मैंगनीन (Cu–Mn–Ni) | 44 × 10-8 |
| मिश्रातु | नाइक्रोम (Ni–Cr–Mn–Fe) | 100 × 10-8 |
| कुचालक | काँच (Glass) | 1010 – 1014 |
| कुचालक | कठोर रबर (Hard Rubber) | 1013 – 1016 |
| कुचालक | एबोनाइट (Ebonite) | 1015 – 1017 |
| कुचालक | शुष्क कागज़ (Paper, dry) | 1012 |
सारणी से तीन बड़े सबक मिलते हैं। पहला — चाँदी सबसे अच्छा चालक है (सबसे कम ρ), उसके बाद ताँबा; परंतु चाँदी महँगी है, इसलिए घरों व संचारण (transmission) के तार ताँबे और ऐलुमिनियम के बनते हैं। दूसरा — मिश्रातुओं की प्रतिरोधकता उनकी संघटक धातुओं से अधिक होती है (नाइक्रोम 100 × 10-8, जबकि उसकी धातुओं के मान बहुत कम हैं) और ताप के साथ लगभग नहीं बदलती; इसीलिए हीटर, इस्तरी व टोस्टर के तापन अवयव मिश्रातु (नाइक्रोम) के बनाए जाते हैं, शुद्ध धातु के नहीं। तीसरा — कुचालकों की प्रतिरोधकता धातुओं से लाखों-करोड़ों गुना अधिक होती है, इसीलिए तारों पर रबर-प्लास्टिक का आवरण चढ़ाया जाता है।
एक बात खास तौर पर याद रखें — प्रतिरोधकता केवल पदार्थ की प्रकृति और ताप पर निर्भर करती है, तार की लंबाई या मोटाई पर नहीं। तार बदलने से R बदलता है, ρ नहीं बदलता। यह प्रश्न MCQ में बार-बार आता है।
📌 न्यूमेरिकल चेतावनी: ρ वाले प्रश्नों में व्यास (diameter) प्रायः mm में दिया होता है। पहले उसे मीटर में बदलें (1 mm = 10-3 m), त्रिज्या = व्यास/2 लें, फिर A = πr2 निकालें। 10 की घात की गलती यहीं सबसे अधिक होती है!
एक साँस में समझें — प्रतिरोध लंबाई के अनुक्रमानुपाती, क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती और पदार्थ के गुण ρ पर निर्भर है: R = ρL/A।
प्रतिरोधकों का संयोजन – श्रेणी व समानांतर
असली परिपथों में एक ही प्रतिरोधक कभी नहीं होता — बल्ब, पंखा, हीटर, सब एक साथ जुड़ते हैं। ऐसे समूह का व्यवहार समझने के लिए हम उनका तुल्य प्रतिरोध (Equivalent Resistance) निकालते हैं — वह एकल प्रतिरोध, जो पूरे समूह की जगह लगाने पर बैटरी से उतनी ही धारा ले। संयोजन के दो ही मूल ढंग हैं।
(क) श्रेणी संयोजन (Series Combination)
जब प्रतिरोधक एक ही पथ में एक के बाद एक जुड़े हों — पहले का दूसरा सिरा दूसरे के पहले सिरे से — तो यह श्रेणी संयोजन है। इसकी दो पहचानें हैं:
1. धारा सबमें समान: रास्ता एक ही है, इसलिए हर प्रतिरोधक से वही धारा I बहती है। ऐमीटर को परिपथ में कहीं भी लगा दें, पाठ्यांक एक ही आता है।
2. विभवांतर बँटता है: कुल विभवांतर प्रतिरोधकों पर उनके प्रतिरोध के अनुपात में बँट जाता है — V = V1 + V2 + V3, जहाँ V1 = IR1 आदि। बड़ा प्रतिरोधक, बड़ा हिस्सा।
अतः तुल्य प्रतिरोध:
श्रेणी: R = R1 + R2 + R3 — तुल्य प्रतिरोध सबसे बड़े प्रतिरोध से भी बड़ा होता है (लंबाई बढ़ने जैसा असर)।
(ख) समानांतर / पार्श्व संयोजन (Parallel Combination)
जब सभी प्रतिरोधकों के एक-एक सिरे एक सामान्य बिंदु से और दूसरे सिरे दूसरे सामान्य बिंदु से जुड़े हों, तो यह समानांतर संयोजन है। इसकी भी दो पहचानें हैं:
1. विभवांतर सब पर समान: हर प्रतिरोधक सीधे उन्हीं दो बिंदुओं के बीच लगा है, इसलिए हर एक पर पूरा विभवांतर V मिलता है।
2. धारा बँटती है: कुल धारा शाखाओं में बँट जाती है — I = I1 + I2 + I3, जहाँ I1 = V/R1 आदि। छोटे प्रतिरोध वाली शाखा में अधिक धारा बहती है।
अतः तुल्य प्रतिरोध:
समानांतर: 1/R = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3 — तुल्य प्रतिरोध सबसे छोटे प्रतिरोध से भी छोटा होता है (मोटाई बढ़ने जैसा असर)। दो प्रतिरोधकों के लिए सुविधाजनक रूप: R = R1R2/(R1 + R2)।
श्रेणी बनाम समानांतर – अंतर की सारणी
| बात | श्रेणी संयोजन | समानांतर संयोजन |
|---|---|---|
| जुड़ने का ढंग | एक ही पथ में एक के बाद एक | दो सामान्य बिंदुओं के बीच, अलग-अलग शाखाओं में |
| धारा (I) | सभी प्रतिरोधकों में समान | शाखाओं में बँटती है; कुल धारा = शाखा धाराओं का योग |
| विभवांतर (V) | प्रतिरोधकों पर बँटता है; योग = कुल V | सभी प्रतिरोधकों पर समान |
| तुल्य प्रतिरोध | R = R1 + R2 + R3 — सबसे बड़े से भी बड़ा | 1/R = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3 — सबसे छोटे से भी छोटा |
| एक उपकरण खराब होने पर | पूरा परिपथ टूट जाता है, सब बंद | बाकी उपकरण चलते रहते हैं |
| उपयोग | फ्यूज़, ऐमीटर की सुरक्षा व सजावटी लड़ियाँ (सीमित) | घरेलू वायरिंग — हर उपकरण को पूरा 220 V व अलग स्विच मिलता है |
घर की वायरिंग समानांतर क्यों होती है, अब आप स्वयं बता सकते हैं — हर उपकरण को पूरा 220 V मिलता है, हर एक का अलग स्विच होता है, और एक बल्ब फ्यूज़ होने से पूरा घर अँधेरे में नहीं डूबता। यही प्रश्न InText व प्रश्नावली दोनों में आता है।
📌 पहचान का नियम: प्रश्न में समूह देखते ही पहले पूछिए — “धारा एक ही रास्ते से जाएगी या बँटेगी?” एक रास्ता = श्रेणी; कई शाखाएँ = समानांतर। मिश्रित (mixed) परिपथों में पहले अंदर के छोटे समूह हल करें, फिर बाहर बढ़ें — उदाहरण 12.9 ठीक इसी विधि का अभ्यास है।
एक साँस में समझें — श्रेणी में धारा समान व प्रतिरोध जुड़ते हैं; समानांतर में विभवांतर समान व तुल्य प्रतिरोध सबसे छोटे से भी छोटा होता है।
विद्युत धारा का तापन प्रभाव – जूल का नियम
यदि कोई परिपथ केवल प्रतिरोधकों से बना हो, तो स्रोत की विद्युत ऊर्जा लगातार ऊष्मा में बदलती रहती है। यही विद्युत धारा का तापन प्रभाव है। कारण समझिए — धारा बहते समय इलेक्ट्रॉन चालक के आयनों से बार-बार टकराते हैं; हर टक्कर में वे अपनी ऊर्जा का कुछ भाग आयनों को दे देते हैं, आयनों का कंपन बढ़ता है और चालक गरम हो जाता है।
जूल के तापन नियम की व्युत्पत्ति
माना प्रतिरोध R के सिरों पर विभवांतर V है, धारा I है और समय t में आवेश Q बहता है। विभवांतर की परिभाषा से, Q आवेश को ले जाने में किया गया कार्य:
चरण 1: W = VQ
चरण 2: Q = It रखने पर — W = VIt
चरण 3: यह समस्त कार्य ही ऊष्मा के रूप में प्रकट होता है, अतः H = VIt। अब ओम के नियम (V = IR) से V का मान रखने पर:
जूल का नियम: H = I2Rt — और I = V/R रखने पर तीसरा रूप: H = V2t/R (तीनों रूप: H = VIt = I2Rt = V2t/R)
नियम को शब्दों में ऐसे कहें — उत्पन्न ऊष्मा धारा के वर्ग के अनुक्रमानुपाती है (धारा दोगुनी तो ऊष्मा चार गुनी!), प्रतिरोध के अनुक्रमानुपाती है और समय के अनुक्रमानुपाती है। धारा के वर्ग वाला हिस्सा सबसे महत्वपूर्ण है — इसीलिए अतिभार (overload) होने पर तार खतरनाक रूप से गरम हो जाते हैं।
तापन प्रभाव के उपयोग
- विद्युत हीटर, इस्तरी, टोस्टर, गीज़र व भट्ठी: इनमें उच्च प्रतिरोधकता वाली नाइक्रोम की कुंडली होती है। धारा बहने पर कुंडली I2Rt के अनुसार बहुत गरम हो जाती है। जोड़ने वाली डोरी ताँबे की (कम प्रतिरोध) बनी होती है, इसलिए वह गरम नहीं होती — कुंडली तपती है, डोरी नहीं; यह किताब का प्रसिद्ध प्रश्न है।
- विद्युत बल्ब: बल्ब के अंदर टंगस्टन का पतला तंतु (फिलामेंट) होता है, जिसका गलनांक अत्यंत उच्च (3380°C) है। धारा से तंतु लगभग 2700°C तक तपकर सफ़ेद-तप्त हो जाता है और प्रकाश देने लगता है। बल्ब में निष्क्रिय गैस (आर्गन/नाइट्रोजन) भरी जाती है ताकि तंतु जल न जाए।
- विद्युत फ्यूज़: परिपथ की सुरक्षा का सिपाही। यह कम गलनांक वाली मिश्रातु (सीसा-टिन) का तार होता है जो श्रेणी में लगा रहता है। निश्चित सीमा से अधिक धारा बहते ही फ्यूज़ तार में उत्पन्न ऊष्मा (I2Rt) उसे पिघला देती है, परिपथ टूट जाता है और महँगे उपकरण व घर की वायरिंग आग से बच जाती है। हर फ्यूज़ पर उसकी धारा-क्षमता (जैसे 5 A, 15 A) अंकित रहती है।
ध्यान दें — तापन प्रभाव हर जगह वरदान नहीं है। बिजली के संचारण में तारों के प्रतिरोध के कारण ऊर्जा ऊष्मा बनकर व्यर्थ जाती है; इसीलिए संचारण के लिए कम प्रतिरोधकता वाले ताँबे-ऐलुमिनियम के मोटे तार उपयोग होते हैं।
📌 याद रखें: हीटर की कुंडली नाइक्रोम की (उच्च ρ, ताप पर प्रतिरोध लगभग स्थिर, वायु में उपचयित नहीं होती), बल्ब का तंतु टंगस्टन का (अत्यंत उच्च गलनांक) और फ्यूज़ तार कम गलनांक वाली मिश्रातु का — तीनों के पदार्थ व कारण अलग-अलग हैं, Board तीनों पूछता है।
एक साँस में समझें — प्रतिरोधक में विद्युत ऊर्जा ऊष्मा बनती है: H = I2Rt; यही नियम हीटर चलाता है, बल्ब जलाता है और फ्यूज़ उड़ाकर घर बचाता है।
विद्युत शक्ति – वाट, यूनिट और बिजली का बिल
ऊर्जा कितनी खर्च हुई, यह समय पर भी निर्भर करता है; परंतु उपकरण कितना “ताकतवर” है, यह बताती है विद्युत शक्ति (Electric Power) — ऊर्जा व्यय होने की दर:
P = W/t = VI और ओम के नियम से: P = I2R = V2/R — शक्ति का SI मात्रक वाट (W) है; 1 W = 1 J/s।
यदि किसी उपकरण पर “220 V; 100 W” लिखा है, तो इसका अर्थ है — 220 V पर चलाने से वह प्रति सेकंड 100 जूल ऊर्जा खर्च करेगा। इसे उपकरण का अनुमतांक (rating) कहते हैं। अनुमतांक से हम तुरंत दो चीज़ें निकाल सकते हैं — धारा I = P/V और प्रतिरोध R = V2/P। प्रश्नावली के कई प्रश्न ठीक इसी पर आधारित हैं।
किलोवाट-घंटा (kWh) – घर का “यूनिट”
जूल बहुत छोटा मात्रक है — घर की खपत जूल में लिखें तो संख्या करोड़ों में जाएगी। इसलिए बिजली कंपनी ऊर्जा को किलोवाट-घंटा में मापती है, जिसे हम बोलचाल में “यूनिट” कहते हैं।
1 kWh = 1 kW × 1 h = 1000 W × 3600 s = 3.6 × 106 J = 1 यूनिट
खपत (यूनिट में) = [शक्ति (W) × समय (घंटे) × दिनों की संख्या] / 1000
एक छोटा उदाहरण — 400 W का फ्रिज रोज़ 8 घंटे चले तो 30 दिन की खपत = (400 × 8 × 30)/1000 = 96 kWh = 96 यूनिट; ₹3 प्रति यूनिट की दर से खर्च = 96 × 3 = ₹288। (यह NCERT का उदाहरण 12.13 है — नीचे पूरा हल दिया गया है।) घर का बिल बनाना अब आपके लिए दो लाइन का काम है: हर उपकरण की शक्ति × घंटे × दिन जोड़िए, 1000 से भाग दीजिए और दर से गुणा कर दीजिए।
📌 सबसे आम गलती से बचें: वाट (W) व किलोवाट (kW) शक्ति के मात्रक हैं और किलोवाट-घंटा (kWh) ऊर्जा का। “मोटर की शक्ति 1100 W है” और “मोटर ने 2.2 kWh ऊर्जा खर्च की” — दोनों वाक्यों में मात्रक न बदलें। न्यूमेरिकल में समय सेकंड में हो तो ऊर्जा जूल में, और घंटे में हो तो प्रायः kWh में निकालना सुविधाजनक रहता है।
एक साँस में समझें — शक्ति P = VI ऊर्जा की दर है, मात्रक वाट; और बिल वाली ऊर्जा kWh में गिनी जाती है — 1 यूनिट = 3.6 × 106 J।
📘 पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (InText Questions)
ये वे प्रश्न हैं जो NCERT किताब के अनुच्छेदों के बीच-बीच में दिए गए हैं। Board में ये प्रश्न वैसे-के-वैसे पूछ लिए जाते हैं, इसलिए इन्हें सबसे पहले तैयार कीजिए। इस अध्याय में कुल 23 InText प्रश्न हैं — हर सेट को अलग-अलग दिया गया है।
(क) अनुच्छेद 12.1 पर आधारित प्रश्न
प्रश्न 1. विद्युत परिपथ का क्या अर्थ है?
हल: विद्युत धारा के सतत (लगातार) तथा बंद पथ को विद्युत परिपथ कहते हैं। इसमें सेल/बैटरी, जोड़ने वाले तार, स्विच और बल्ब जैसा कोई उपकरण इस प्रकार जुड़े होते हैं कि धारा को बहने का पूरा रास्ता मिले। पथ कहीं से भी खुला या टूटा हो तो धारा नहीं बहेगी।
प्रश्न 2. विद्युत धारा के मात्रक की परिभाषा लिखिए।
हल: विद्युत धारा का SI मात्रक ऐम्पियर (A) है। यदि किसी चालक के किसी अनुप्रस्थ काट से 1 सेकंड में 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित हो, तो उसमें बहने वाली धारा 1 ऐम्पियर कहलाती है। सूत्र के रूप में — 1 A = 1 C/1 s (सूत्र I = Q/t से)।
प्रश्न 3. एक कूलॉम आवेश की रचना करने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या परिकलित कीजिए।
हल:
दिया गया है: कुल आवेश Q = 1 C; एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश e = 1.6 × 10-19 C
सूत्र: Q = ne अर्थात n = Q/e
मान रखने पर: n = 1 / (1.6 × 10-19) = (1/1.6) × 1019 = 0.625 × 1019
उत्तर: n = 6.25 × 1018 इलेक्ट्रॉन — अर्थात एक कूलॉम आवेश बनाने के लिए छह अरब अरब से भी अधिक इलेक्ट्रॉन चाहिए!
(ख) अनुच्छेद 12.2 पर आधारित प्रश्न
प्रश्न 1. उस युक्ति का नाम लिखिए जो किसी चालक के सिरों पर विभवांतर बनाए रखने में सहायता करती है।
हल:
उत्तर: विद्युत सेल (या बैटरी) — सेल के भीतर की रासायनिक अभिक्रियाएँ आवेशों को ऊर्जा देकर चालक के सिरों पर विभवांतर बनाए रखती हैं। एक से अधिक सेलों के समूह को बैटरी कहते हैं।
प्रश्न 2. यह कहने का क्या तात्पर्य है कि दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 1 V है?
हल: इसका तात्पर्य है कि यदि 1 कूलॉम आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाया जाए, तो उस पर 1 जूल कार्य किया जाता है। सूत्र से — V = W/Q = 1 J/1 C = 1 V।
प्रश्न 3. 6 V बैटरी से गुजरने वाले प्रत्येक कूलॉम आवेश को कितनी ऊर्जा दी जाती है?
हल:
दिया गया है: V = 6 V, Q = 1 C
सूत्र: W = VQ
मान रखने पर: W = 6 × 1 = 6
उत्तर: प्रत्येक कूलॉम आवेश को 6 जूल ऊर्जा दी जाती है।
(ग) अनुच्छेद 12.3 से 12.5 पर आधारित प्रश्न
प्रश्न 1. किसी चालक का प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है?
हल: किसी चालक (तार) का प्रतिरोध चार कारकों पर निर्भर करता है — (1) तार की लंबाई पर (R ∝ L), (2) उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर (R ∝ 1/A), (3) उसके पदार्थ की प्रकृति अर्थात प्रतिरोधकता पर, तथा (4) ताप पर। इन सबको मिलाकर R = ρL/A लिखा जाता है।
प्रश्न 2. समान पदार्थ के दो तारों में यदि एक पतला तथा दूसरा मोटा हो, तो इनमें से किसमें विद्युत धारा आसानी से प्रवाहित होगी, जबकि उन्हें समान विद्युत स्रोत से संयोजित किया जाता है? क्यों?
हल: मोटे तार का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A अधिक है। R = ρL/A के अनुसार क्षेत्रफल अधिक होने से प्रतिरोध कम होगा, और I = V/R के अनुसार कम प्रतिरोध में अधिक धारा बहेगी।
उत्तर: विद्युत धारा मोटे तार में आसानी से (अधिक मात्रा में) प्रवाहित होगी, क्योंकि उसका प्रतिरोध पतले तार से कम होता है।
प्रश्न 3. मान लीजिए किसी वैद्युत अवयव के दो सिरों के बीच विभवांतर को उसके पूर्व के विभवांतर की तुलना में घटाकर आधा कर देने पर भी उसका प्रतिरोध नियत रहता है। तब उस अवयव से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा में क्या परिवर्तन होगा?
हल: ओम के नियम से I = V/R। R नियत है, अतः I ∝ V। विभवांतर आधा (V/2) करने पर धारा भी I/2 हो जाएगी।
उत्तर: विद्युत धारा भी आधी हो जाएगी।
प्रश्न 4. विद्युत टोस्टरों तथा विद्युत इस्तरियों के तापन अवयव शुद्ध धातु के न बनाकर किसी मिश्रातु के क्यों बनाए जाते हैं?
हल: इसके तीन कारण हैं — (1) मिश्रातुओं की प्रतिरोधकता शुद्ध धातुओं से अधिक होती है, इसलिए समान धारा से अधिक ऊष्मा (H = I2Rt) उत्पन्न होती है। (2) मिश्रातुओं की प्रतिरोधकता ताप बढ़ने पर लगभग नहीं बदलती, इसलिए तापन स्थिर रहता है। (3) मिश्रातुएँ उच्च ताप पर भी सरलता से उपचयित (जलती) नहीं होतीं, इसलिए अवयव लंबे समय तक चलता है। इसीलिए तापन अवयव नाइक्रोम जैसी मिश्रातु के बनाए जाते हैं।
प्रश्न 5. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सारणी 12.2 (प्रतिरोधकता के आँकड़े) के आधार पर दीजिए — (a) आयरन (Fe) तथा मरकरी (Hg) में कौन अच्छा विद्युत चालक है? (b) कौन-सा पदार्थ सर्वश्रेष्ठ चालक है?
हल: सारणी के अनुसार आयरन की प्रतिरोधकता 10.0 × 10-8 Ω m है, जबकि मरकरी की 94.0 × 10-8 Ω m — अर्थात मरकरी की प्रतिरोधकता आयरन से लगभग साढ़े नौ गुना अधिक है। जिसकी प्रतिरोधकता कम, वह अच्छा चालक।
उत्तर: (a) आयरन (Fe) मरकरी से अच्छा चालक है। (b) चाँदी (Silver) सर्वश्रेष्ठ चालक है, क्योंकि उसकी प्रतिरोधकता (1.60 × 10-8 Ω m) सभी पदार्थों में सबसे कम है।
(घ) अनुच्छेद 12.6 व 12.6.1 पर आधारित प्रश्न (श्रेणी संयोजन)
प्रश्न 1. किसी विद्युत परिपथ का व्यवस्था आरेख खींचिए, जिसमें 2 V के तीन सेलों की बैटरी, एक 5 Ω प्रतिरोधक, एक 8 Ω प्रतिरोधक, एक 12 Ω प्रतिरोधक तथा एक प्लग कुंजी, सभी श्रेणीक्रम में संयोजित हों।
हल (आरेख का वर्णन): एक बंद आयताकार पथ बनाइए। एक भुजा पर बैटरी लगाइए — लंबी-छोटी रेखाओं के तीन जोड़े एक के बाद एक (हर जोड़े का धनात्मक सिरा अगले की ओर एक ही क्रम में), कुल विभवांतर 2 + 2 + 2 = 6 V। उसी पथ में क्रम से 5 Ω का प्रतिरोधक (ज़िगज़ैग), फिर 8 Ω का प्रतिरोधक, फिर 12 Ω का प्रतिरोधक और अंत में प्लग कुंजी (बंद अवस्था में) जोड़िए। सभी अवयव एक ही पथ में हैं — यही श्रेणीक्रम की पहचान है। परीक्षा में यही आरेख बनाना है: बैटरी, तीनों प्रतिरोधक व कुंजी, चारों एक ही बंद लूप में।
प्रश्न 2. प्रश्न 1 का परिपथ दोबारा खींचिए तथा इसमें प्रतिरोधकों से प्रवाहित विद्युत धारा मापने के लिए ऐमीटर तथा 12 Ω के प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर लगाइए। ऐमीटर तथा वोल्टमीटर के क्या पाठ्यांक होंगे?
हल (आरेख का वर्णन): पहले वाले परिपथ में ऐमीटर को किसी भी स्थान पर श्रेणी में (वृत्त में A लिखकर) लगाइए — श्रेणी में हर जगह धारा एक ही होती है। वोल्टमीटर को 12 Ω प्रतिरोधक के दोनों सिरों से जोड़कर समानांतर में लगाइए (वृत्त में V), उसका + सिरा बैटरी के + की ओर रखिए।
दिया गया है: R1 = 5 Ω, R2 = 8 Ω, R3 = 12 Ω; बैटरी V = 2 + 2 + 2 = 6 V
चरण 1 (तुल्य प्रतिरोध): श्रेणी में R = R1 + R2 + R3 = 5 + 8 + 12 = 25 Ω
चरण 2 (धारा): सूत्र I = V/R; मान रखने पर I = 6/25 = 0.24 A — यही ऐमीटर का पाठ्यांक होगा।
चरण 3 (12 Ω पर विभवांतर): सूत्र V = IR; मान रखने पर V = 0.24 × 12 = 2.88 V — यही वोल्टमीटर का पाठ्यांक होगा।
उत्तर: ऐमीटर का पाठ्यांक = 0.24 A, वोल्टमीटर का पाठ्यांक = 2.88 V।
(ङ) अनुच्छेद 12.6.2 पर आधारित प्रश्न (समानांतर संयोजन)
प्रश्न 1. जब (a) 1 Ω तथा 106 Ω, (b) 1 Ω, 103 Ω तथा 106 Ω के प्रतिरोध पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं, तो इनके तुल्य प्रतिरोध के संबंध में आप क्या निर्णय करेंगे?
हल:
(a) दिया गया है: R1 = 1 Ω, R2 = 106 Ω। सूत्र: 1/R = 1/R1 + 1/R2। मान रखने पर: 1/R = 1/1 + 1/106 = (106 + 1)/106, अतः R = 106/(106 + 1) ≈ 1 Ω से कुछ ही कम (लगभग 0.999999 Ω)।
(b) दिया गया है: R1 = 1 Ω, R2 = 103 Ω, R3 = 106 Ω। मान रखने पर: 1/R = 1 + 1/103 + 1/106 ≈ 1.001, अतः R ≈ 0.999 Ω ≈ 1 Ω।
निष्कर्ष: दोनों ही स्थितियों में तुल्य प्रतिरोध लगभग 1 Ω है — अर्थात समानांतर संयोजन का तुल्य प्रतिरोध उसमें जुड़े सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम होता है, और बड़े प्रतिरोधों का योगदान लगभग नगण्य रहता है।
प्रश्न 2. 100 Ω का एक विद्युत लैम्प, 50 Ω का एक विद्युत टोस्टर तथा 500 Ω का एक जल फ़िल्टर 220 V के विद्युत स्रोत से पार्श्वक्रम में संयोजित हैं। उस विद्युत इस्तरी का प्रतिरोध क्या है, जिसे यदि समान स्रोत से संयोजित कर दें तो वह उतनी ही विद्युत धारा लेती है जितनी तीनों युक्तियाँ लेती हैं? यह भी ज्ञात कीजिए कि इस विद्युत इस्तरी से कितनी विद्युत धारा प्रवाहित होती है।
हल:
दिया गया है: R1 = 100 Ω, R2 = 50 Ω, R3 = 500 Ω, V = 220 V
चरण 1 (तीनों का तुल्य प्रतिरोध): सूत्र 1/R = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3; मान रखने पर 1/R = 1/100 + 1/50 + 1/500 = (5 + 10 + 1)/500 = 16/500, अतः R = 500/16 = 31.25 Ω
चरण 2 (कुल धारा): सूत्र I = V/R; मान रखने पर I = 220/31.25 = 7.04 A
उत्तर: इस्तरी को ठीक उतनी ही धारा लेनी है, इसलिए उसका प्रतिरोध तीनों के तुल्य प्रतिरोध के बराबर होगा — इस्तरी का प्रतिरोध = 31.25 Ω और उससे प्रवाहित धारा = 7.04 A।
प्रश्न 3. श्रेणीक्रम में संयोजित करने के स्थान पर वैद्युत युक्तियों को पार्श्वक्रम में संयोजित करने के क्या लाभ हैं?
हल: पार्श्व (समानांतर) संयोजन के लाभ हैं — (1) प्रत्येक युक्ति को स्रोत का पूरा विभवांतर मिलता है, इसलिए हर उपकरण अपनी पूरी क्षमता से काम करता है; श्रेणी में विभवांतर बँट जाने से सब मंद पड़ जाते। (2) प्रत्येक युक्ति को अलग स्विच से चालू-बंद किया जा सकता है, दूसरों पर असर नहीं पड़ता। (3) कोई एक युक्ति खराब हो जाए या उसका फ्यूज़ उड़ जाए, तो भी बाकी युक्तियाँ चलती रहती हैं; श्रेणी में एक खराब होते ही पूरा परिपथ टूट जाता। (4) समानांतर में तुल्य प्रतिरोध घटता है, इसलिए स्रोत से आवश्यकता अनुसार अधिक कुल धारा मिल जाती है और हर युक्ति अपनी ज़रूरत की धारा स्वयं लेती है। इन्हीं कारणों से घरेलू वायरिंग हमेशा पार्श्वक्रम में की जाती है।
प्रश्न 4. 2 Ω, 3 Ω तथा 6 Ω के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि संयोजन का कुल प्रतिरोध (a) 4 Ω, (b) 1 Ω हो?
हल:
(a) 4 Ω के लिए: 3 Ω व 6 Ω को पहले पार्श्वक्रम में जोड़िए — 1/R′ = 1/3 + 1/6 = (2 + 1)/6 = 3/6, अतः R′ = 2 Ω। अब इस 2 Ω को तीसरे 2 Ω प्रतिरोधक के साथ श्रेणीक्रम में जोड़िए — R = 2 + 2 = 4 Ω।
(b) 1 Ω के लिए: तीनों को पार्श्वक्रम में जोड़िए — 1/R = 1/2 + 1/3 + 1/6 = (3 + 2 + 1)/6 = 6/6 = 1, अतः R = 1 Ω।
प्रश्न 5. 4 Ω, 8 Ω, 12 Ω तथा 24 Ω प्रतिरोध की चार कुंडलियों को किस प्रकार संयोजित करें कि संयोजन से (a) अधिकतम, (b) निम्नतम प्रतिरोध प्राप्त हो सके?
हल:
(a) अधिकतम के लिए सभी श्रेणीक्रम में: R = 4 + 8 + 12 + 24 = 48 Ω
(b) निम्नतम के लिए सभी पार्श्वक्रम में: 1/R = 1/4 + 1/8 + 1/12 + 1/24 = (6 + 3 + 2 + 1)/24 = 12/24 = 1/2, अतः R = 2 Ω
नियम याद रखें: अधिकतम प्रतिरोध हमेशा श्रेणी से और निम्नतम हमेशा समानांतर से मिलता है।
(च) अनुच्छेद 12.7 पर आधारित प्रश्न (तापन प्रभाव)
प्रश्न 1. किसी विद्युत हीटर की डोरी क्यों उत्तप्त नहीं होती, जबकि उसका तापन अवयव उत्तप्त हो जाता है?
हल: जूल के नियम H = I2Rt के अनुसार समान धारा व समान समय के लिए उत्पन्न ऊष्मा प्रतिरोध के अनुक्रमानुपाती होती है (H ∝ R)। हीटर का तापन अवयव नाइक्रोम का बना होता है, जिसका प्रतिरोध बहुत अधिक है — इसलिए वह अत्यधिक गरम होकर लाल तप्त हो जाता है। इसके विपरीत, डोरी ताँबे की बनी होती है, जिसका प्रतिरोध बहुत ही कम है — इसलिए उसमें ऊष्मा लगभग नगण्य उत्पन्न होती है और डोरी उत्तप्त नहीं होती। दोनों में धारा एक ही बहती है, फर्क केवल प्रतिरोध का है।
प्रश्न 2. एक घंटे में 50 V विभवांतर से 96000 कूलॉम आवेश को स्थानांतरित करने में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित कीजिए।
हल:
दिया गया है: Q = 96000 C, V = 50 V, t = 1 घंटा = 3600 s
चरण 1 (धारा): सूत्र I = Q/t; मान रखने पर I = 96000/3600 = 26.67 A (लगभग)
चरण 2 (ऊष्मा): सूत्र H = VIt; मान रखने पर H = 50 × 26.67 × 3600 = 50 × 96000 = 4800000 J (ध्यान दें — 26.67 × 3600 पुनः 96000 ही बनता है, इसलिए H = VQ से भी यही उत्तर आता है।)
उत्तर: उत्पन्न ऊष्मा H = 4.8 × 106 J
प्रश्न 3. 20 Ω प्रतिरोध की कोई विद्युत इस्तरी 5 A विद्युत धारा लेती है। 30 s में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित कीजिए।
हल:
दिया गया है: R = 20 Ω, I = 5 A, t = 30 s
सूत्र: H = I2Rt
मान रखने पर: H = (5)2 × 20 × 30 = 25 × 20 × 30 = 500 × 30 = 15000 J
उत्तर: उत्पन्न ऊष्मा H = 1.5 × 104 J (15 kJ)
(छ) अनुच्छेद 12.7.1 व 12.8 पर आधारित प्रश्न (विद्युत शक्ति)
प्रश्न 1. विद्युत धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर का निर्धारण कैसे किया जाता है?
हल: विद्युत धारा द्वारा प्रदत्त ऊर्जा की दर का निर्धारण विद्युत शक्ति से किया जाता है। शक्ति वह भौतिक राशि है जो बताती है कि प्रति सेकंड कितनी विद्युत ऊर्जा व्यय (या प्रदत्त) हुई — P = W/t = VI, मात्रक वाट (W)।
प्रश्न 2. कोई विद्युत मोटर 220 V के विद्युत स्रोत से 5.0 A विद्युत धारा लेता है। मोटर की शक्ति निर्धारित कीजिए तथा 2 घंटे में मोटर द्वारा उपभुक्त ऊर्जा परिकलित कीजिए।
हल:
दिया गया है: V = 220 V, I = 5.0 A, t = 2 घंटे
चरण 1 (शक्ति): सूत्र P = VI; मान रखने पर P = 220 × 5.0 = 1100 W
चरण 2 (ऊर्जा): सूत्र E = P × t; मान रखने पर E = 1100 W × 2 h = 2200 Wh = 2200/1000 kWh = 2.2 kWh (जूल में: 1100 × 2 × 3600 = 7.92 × 106 J)
उत्तर: मोटर की शक्ति = 1100 W; 2 घंटे में उपभुक्त ऊर्जा = 2.2 kWh (2.2 यूनिट)
इस भाग में हमने सीखा — InText के 23 प्रश्नों में सूत्र चुनना ही असली कौशल है: आवेश दिया हो तो I = Q/t, कार्य दिया हो तो V = W/Q, ऊष्मा पूछी हो तो H = I2Rt और ऊर्जा-दर पूछी हो तो P = VI।
📗 NCERT उदाहरण (Examples 12.1 – 12.13)
इस अध्याय में NCERT ने कुल 13 क्रमांकित उदाहरण दिए हैं — हर मुख्य सूत्र पर एक। Board के न्यूमेरिकल अक्सर इन्हीं उदाहरणों के आँकड़े बदलकर बनाए जाते हैं, इसलिए इन्हें चरण-दर-चरण समझकर हल करना सबसे समझदारी है।
उदाहरण 12.1. किसी विद्युत बल्ब के तंतु द्वारा 0.5 A धारा 10 मिनट के लिए ली जाती है। परिपथ में प्रवाहित विद्युत आवेश की मात्रा ज्ञात कीजिए।
हल: दिया गया है: I = 0.5 A, t = 10 मिनट = 10 × 60 = 600 s। सूत्र: Q = It। मान रखने पर: Q = 0.5 × 600 = 300
उत्तर: प्रवाहित आवेश Q = 300 C। (समय को सेकंड में बदलना इस प्रश्न की जान है — मिनट में रखते तो उत्तर गलत हो जाता।)
उदाहरण 12.2. 12 V विभवांतर वाले दो बिंदुओं के बीच 2 C आवेश को ले जाने में कितना कार्य किया जाता है?
हल: दिया गया है: Q = 2 C, V = 12 V। सूत्र: W = VQ। मान रखने पर: W = 12 × 2 = 24
उत्तर: किया गया कार्य W = 24 J
उदाहरण 12.3. (a) यदि किसी विद्युत बल्ब के तंतु का प्रतिरोध 1200 Ω है, तो वह 220 V के स्रोत से कितनी धारा लेगा? (b) यदि किसी विद्युत हीटर की कुंडली का प्रतिरोध 100 Ω है, तो वह 220 V के स्रोत से कितनी धारा लेगी?
हल: दिया गया है: V = 220 V; (a) R = 1200 Ω, (b) R = 100 Ω। सूत्र: I = V/R
(a) मान रखने पर: I = 220/1200 = 0.183 ≈ 0.18 A
(b) मान रखने पर: I = 220/100 = 2.2 A
उत्तर: बल्ब 0.18 A और हीटर 2.2 A धारा लेगा — प्रतिरोध जितना कम, धारा उतनी अधिक।
उदाहरण 12.4. किसी विद्युत हीटर के टर्मिनलों के बीच विभवांतर 60 V है, जब वह स्रोत से 4 A धारा लेता है। यदि विभवांतर बढ़ाकर 120 V कर दिया जाए, तो हीटर कितनी धारा लेगा?
हल:
चरण 1 (पहले प्रतिरोध निकालिए): दिया गया है V = 60 V, I = 4 A। सूत्र R = V/I; मान रखने पर R = 60/4 = 15 Ω (हीटर का प्रतिरोध नियत रहेगा।)
चरण 2 (नई धारा): अब V = 120 V, R = 15 Ω। सूत्र I = V/R; मान रखने पर I = 120/15 = 8 A
उत्तर: हीटर अब 8 A धारा लेगा — विभवांतर दोगुना, तो नियत प्रतिरोध पर धारा भी दोगुनी।
उदाहरण 12.5. 1 m लंबे किसी धातु के तार का प्रतिरोध 20°C पर 26 Ω है। यदि तार का व्यास 0.3 mm है, तो उस ताप पर धातु की प्रतिरोधकता क्या होगी? सारणी 12.2 की सहायता से तार के पदार्थ का अनुमान लगाइए।
हल:
दिया गया है: R = 26 Ω, L = 1 m, व्यास d = 0.3 mm = 0.3 × 10-3 m = 3 × 10-4 m
चरण 1 (त्रिज्या व क्षेत्रफल): r = d/2 = (3 × 10-4)/2 = 1.5 × 10-4 m। A = πr2 = 3.14 × (1.5 × 10-4)2 = 3.14 × 2.25 × 10-8 = 7.07 × 10-8 m2 (लगभग)
चरण 2 (प्रतिरोधकता): सूत्र ρ = RA/L; मान रखने पर ρ = (26 × 7.07 × 10-8)/1 = 183.8 × 10-8 = 1.84 × 10-6 Ω m
उत्तर: प्रतिरोधकता ρ = 1.84 × 10-6 Ω m; सारणी 12.2 में यही मान मैंगनीज़ (Manganese) का है, अतः तार मैंगनीज़ का है।
उदाहरण 12.6. किसी दिए गए पदार्थ के तार की लंबाई l तथा अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A है और उसका प्रतिरोध 4 Ω है। उसी पदार्थ के किसी अन्य तार की लंबाई l/2 तथा क्षेत्रफल 2A हो, तो उसका प्रतिरोध क्या होगा?
हल: पहले तार के लिए R1 = ρl/A = 4 Ω। दूसरे तार के लिए — सूत्र: R2 = ρ(l/2)/(2A) = ρl/A × (1/2) × (1/2) = ρl/A × 1/4। मान रखने पर: R2 = 4 × 1/4 = 1
उत्तर: नए तार का प्रतिरोध = 1 Ω — लंबाई आधी होने से प्रतिरोध आधा और क्षेत्रफल दोगुना होने से पुनः आधा, कुल एक-चौथाई।
उदाहरण 12.7. एक विद्युत लैम्प, जिसका प्रतिरोध 20 Ω है, तथा 4 Ω प्रतिरोध का एक चालक 6 V की बैटरी से श्रेणी में जुड़े हैं। ज्ञात कीजिए — (a) परिपथ का कुल प्रतिरोध, (b) परिपथ में धारा, तथा (c) विद्युत लैम्प व चालक के सिरों पर विभवांतर।
हल:
दिया गया है: R1 = 20 Ω (लैम्प), R2 = 4 Ω (चालक), V = 6 V
(a) कुल प्रतिरोध: श्रेणी सूत्र R = R1 + R2 = 20 + 4 = 24 Ω
(b) धारा: सूत्र I = V/R; मान रखने पर I = 6/24 = 0.25 A (श्रेणी में यही धारा दोनों से बहेगी।)
(c) विभवांतर: सूत्र V = IR से — लैम्प पर V1 = 0.25 × 20 = 5 V; चालक पर V2 = 0.25 × 4 = 1 V। जाँच: 5 + 1 = 6 V = बैटरी का विभवांतर ✓
उत्तर: (a) कुल प्रतिरोध 24 Ω, (b) धारा 0.25 A, (c) लैम्प पर 5 V तथा चालक पर 1 V।
उदाहरण 12.8. किसी परिपथ में प्रतिरोधक R1, R2 व R3 के मान क्रमशः 5 Ω, 10 Ω व 30 Ω हैं और वे 12 V की बैटरी से समानांतर में जुड़े हैं। ज्ञात कीजिए — (a) प्रत्येक प्रतिरोधक से धारा, (b) परिपथ में कुल धारा, तथा (c) परिपथ का कुल प्रतिरोध।
हल:
दिया गया है: R1 = 5 Ω, R2 = 10 Ω, R3 = 30 Ω, V = 12 V (समानांतर में हर प्रतिरोधक पर यही 12 V मिलेगा।)
(a) प्रत्येक से धारा: सूत्र I = V/R से — I1 = 12/5 = 2.4 A; I2 = 12/10 = 1.2 A; I3 = 12/30 = 0.4 A
(b) कुल धारा: I = I1 + I2 + I3 = 2.4 + 1.2 + 0.4 = 4.0 A
(c) कुल प्रतिरोध: 1/R = 1/5 + 1/10 + 1/30 = (6 + 3 + 1)/30 = 10/30 = 1/3, अतः R = 3 Ω। जाँच: I = V/R = 12/3 = 4 A ✓ — भाग (b) से मेल खाता है।
उत्तर: (a) 2.4 A, 1.2 A, 0.4 A; (b) कुल धारा 4 A; (c) कुल प्रतिरोध 3 Ω।
उदाहरण 12.9. किसी व्यवस्था में R1 = 10 Ω, R2 = 40 Ω, R3 = 30 Ω, R4 = 20 Ω, R5 = 60 Ω हैं; R1 व R2 परस्पर समानांतर में हैं, R3, R4 व R5 परस्पर समानांतर में हैं, और ये दोनों समूह परस्पर श्रेणी में जुड़े हैं तथा यह पूरी व्यवस्था 12 V की बैटरी से जुड़ी है। ज्ञात कीजिए — (a) परिपथ का कुल प्रतिरोध, (b) परिपथ में कुल धारा।
हल:
चरण 1 (पहला समूह R′): 1/R′ = 1/10 + 1/40 = (4 + 1)/40 = 5/40 = 1/8, अतः R′ = 8 Ω
चरण 2 (दूसरा समूह R″): 1/R″ = 1/30 + 1/20 + 1/60 = (2 + 3 + 1)/60 = 6/60 = 1/10, अतः R″ = 10 Ω
चरण 3 (कुल प्रतिरोध): दोनों समूह श्रेणी में हैं — R = R′ + R″ = 8 + 10 = 18 Ω
चरण 4 (कुल धारा): सूत्र I = V/R; मान रखने पर I = 12/18 = 0.67 A (लगभग)
उत्तर: (a) कुल प्रतिरोध 18 Ω, (b) कुल धारा 0.67 A। मिश्रित परिपथ का नियम यही है — पहले समानांतर समूह, फिर श्रेणी योग।
उदाहरण 12.10. एक विद्युत इस्तरी अधिकतम दर पर तापन में 840 W तथा न्यूनतम दर पर 360 W की दर से ऊर्जा उपभुक्त करती है। वोल्टता 220 V है। दोनों प्रकरणों में धारा तथा प्रतिरोध क्या हैं?
हल:
दिया गया है: V = 220 V; अधिकतम P = 840 W; न्यूनतम P = 360 W
अधिकतम दर पर: सूत्र I = P/V; मान रखने पर I = 840/220 = 3.82 A। सूत्र R = V/I; मान रखने पर R = 220/3.82 = 57.6 Ω (लगभग)
न्यूनतम दर पर: I = 360/220 = 1.64 A। R = 220/1.64 = 134.4 Ω (लगभग)
उत्तर: अधिकतम पर — धारा 3.82 A, प्रतिरोध 57.6 Ω; न्यूनतम पर — धारा 1.64 A, प्रतिरोध 134.4 Ω। (इस्तरी की सेटिंग बदलने से वास्तव में परिपथ में जुड़ने वाली कुंडली की लंबाई/संयोजन बदलता है, इसलिए प्रतिरोध बदलता है।)
उदाहरण 12.11. 4 Ω के किसी प्रतिरोधक में प्रति सेकंड 100 J ऊष्मा उत्पन्न होती है। प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया गया है: H = 100 J, t = 1 s, R = 4 Ω
चरण 1: ऊष्मा की दर ही शक्ति है — P = H/t = 100/1 = 100 W
चरण 2 (धारा): सूत्र P = I2R से I2 = P/R = 100/4 = 25, अतः I = 5 A
चरण 3 (विभवांतर): सूत्र V = IR; मान रखने पर V = 5 × 4 = 20 V (दूसरी जाँच: V = √(PR) = √(100 × 4) = √400 = 20 V ✓)
उत्तर: प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर = 20 V
उदाहरण 12.12. एक विद्युत बल्ब 220 V के जनित्र से जुड़ा है। धारा 0.50 A है। बल्ब की शक्ति क्या है?
हल: दिया गया है: V = 220 V, I = 0.50 A। सूत्र: P = VI। मान रखने पर: P = 220 × 0.50 = 110
उत्तर: बल्ब की शक्ति P = 110 W
उदाहरण 12.13. 400 W अनुमतांक का कोई विद्युत रेफ्रिजरेटर 8 घंटे/दिन चलाया जाता है। 3.00 रुपये प्रति kWh की दर से इसे 30 दिन तक चलाने के लिए ऊर्जा का मूल्य क्या है?
हल:
दिया गया है: P = 400 W = 0.4 kW, समय = 8 घंटे/दिन × 30 दिन, दर = ₹3.00 प्रति kWh
चरण 1 (कुल ऊर्जा): सूत्र E = P × t; मान रखने पर E = 0.4 kW × 8 × 30 = 0.4 × 240 = 96 kWh
चरण 2 (मूल्य): मूल्य = 96 × 3.00 = ₹288.00
उत्तर: 30 दिन का खर्च = ₹288। अपने घर के हर उपकरण पर यही विधि लगाकर आप पूरा बिजली बिल पहले से अनुमान लगा सकते हैं!
इन 13 उदाहरणों में हमने सीखा — हर सूत्र का कम-से-कम एक तैयार ढांचा तैयार है; परीक्षा के न्यूमेरिकल में बस आँकड़े बदलते हैं, विधि नहीं।
✏️ प्रश्नावली (Exercise) – सभी 18 प्रश्नों के हल
प्रश्न 1. प्रतिरोध R के किसी तार के टुकड़े को पाँच बराबर भागों में काटा जाता है। इन टुकड़ों को फिर पार्श्वक्रम में संयोजित कर देते हैं। यदि संयोजन का तुल्य प्रतिरोध R′ है, तो R/R′ अनुपात का मान क्या है? (a) 1/25 (b) 1/5 (c) 5 (d) 25
हल: काटने पर हर भाग की लंबाई 1/5 रह जाएगी, इसलिए हर भाग का प्रतिरोध = R/5। पाँचों को पार्श्वक्रम में जोड़ने पर — 1/R′ = 5/(R/5) = 25/R, अतः R′ = R/25। इसलिए R/R′ = R ÷ (R/25) = 25।
उत्तर: (d) 25
प्रश्न 2. निम्नलिखित में से कौन-सा पद विद्युत परिपथ में विद्युत शक्ति को निरूपित नहीं करता? (a) I2R (b) IR2 (c) VI (d) V2/R
हल: शक्ति के तीनों सही रूप हैं — P = VI, और ओम के नियम से P = I2R तथा P = V2/R। IR2 किसी भी प्रतिस्थापन से नहीं बनता।
उत्तर: (b) IR2
प्रश्न 3. किसी विद्युत बल्ब का अनुमतांक 220 V; 100 W है। जब इसे 110 V पर प्रचालित करते हैं, तब इसके द्वारा उपभुक्त शक्ति कितनी होती है? (a) 100 W (b) 75 W (c) 50 W (d) 25 W
हल:
चरण 1 (बल्ब का प्रतिरोध — यह नियत रहेगा): सूत्र R = V2/P; मान रखने पर R = (220)2/100 = 48400/100 = 484 Ω
चरण 2 (110 V पर शक्ति): सूत्र P = V2/R; मान रखने पर P = (110)2/484 = 12100/484 = 25 W
उत्तर: (d) 25 W — वोल्टता आधी होने पर शक्ति एक-चौथाई रह जाती है, क्योंकि P ∝ V2।
प्रश्न 4. दो चालक तार, जिनके पदार्थ, लंबाई तथा व्यास समान हैं, किसी विद्युत परिपथ में पहले श्रेणीक्रम में और फिर पार्श्वक्रम में संयोजित किए जाते हैं। श्रेणीक्रम तथा पार्श्वक्रम संयोजन में उत्पन्न ऊष्माओं का अनुपात क्या होगा? (a) 1 : 2 (b) 2 : 1 (c) 1 : 4 (d) 4 : 1
हल: माना हर तार का प्रतिरोध R है और दोनों संयोजनों में समान विभवांतर V समान समय t तक लगता है। श्रेणी में तुल्य प्रतिरोध Rs = 2R; पार्श्व में Rp = R/2। सूत्र H = V2t/R के अनुसार H ∝ 1/R, अतः Hs/Hp = Rp/Rs = (R/2)/(2R) = 1/4।
उत्तर: (c) 1 : 4
प्रश्न 5. किसी विद्युत परिपथ में दो बिंदुओं के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर को किस प्रकार संयोजित किया जाता है?
हल:
उत्तर: वोल्टमीटर को उन दो बिंदुओं के बीच पार्श्वक्रम (समानांतर) में संयोजित किया जाता है — यही कारण है कि वोल्टमीटर का प्रतिरोध बहुत अधिक रखा जाता है, ताकि वह परिपथ से लगभग कोई धारा न ले और मूल विभवांतर न बदले।
प्रश्न 6. किसी ताँबे के तार का व्यास 0.5 mm तथा प्रतिरोधकता 1.6 × 10-8 Ω m है। 10 Ω प्रतिरोध का प्रतिरोधक बनाने के लिए कितने लंबे तार की आवश्यकता होगी? यदि इससे दोगुने व्यास का तार लें, तो प्रतिरोध में क्या अंतर आएगा?
हल:
दिया गया है: d = 0.5 mm = 5 × 10-4 m, ρ = 1.6 × 10-8 Ω m, R = 10 Ω
चरण 1 (त्रिज्या व क्षेत्रफल): r = d/2 = 2.5 × 10-4 m। A = πr2 = 3.14 × (2.5 × 10-4)2 = 3.14 × 6.25 × 10-8 = 1.9625 × 10-7 m2
चरण 2 (लंबाई): सूत्र R = ρL/A से L = RA/ρ; मान रखने पर L = (10 × 1.9625 × 10-7)/(1.6 × 10-8) = (1.9625 × 10-6)/(1.6 × 10-8) = 122.66 m (लगभग 122.7 m)
चरण 3 (व्यास दोगुना होने पर): व्यास दोगुना → त्रिज्या दोगुनी → क्षेत्रफल A = πr2 चार गुना। R ∝ 1/A, अतः उसी लंबाई के तार का प्रतिरोध एक-चौथाई रह जाएगा — 10/4 = 2.5 Ω।
उत्तर: तार की आवश्यक लंबाई ≈ 122.7 m; व्यास दोगुना करने पर प्रतिरोध घटकर 2.5 Ω (एक-चौथाई) हो जाएगा।
प्रश्न 7. किसी प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर V के विभिन्न मानों के लिए उससे प्रवाहित विद्युत धाराओं I के संगत मान नीचे दिए गए हैं — I (ऐम्पियर): 0.5, 1.0, 2.0, 3.0, 4.0; V (वोल्ट): 1.6, 3.4, 6.7, 10.2, 13.2। V तथा I के बीच ग्राफ़ खींचकर इस प्रतिरोधक का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
हल:
चरण 1 (ग्राफ़): I को X-अक्ष पर और V को Y-अक्ष पर लेकर पाँचों बिंदु अंकित कीजिए — (0.5, 1.6), (1.0, 3.4), (2.0, 6.7), (3.0, 10.2), (4.0, 13.2)। सभी बिंदु मूल बिंदु से गुजरती एक सीधी रेखा पर आते हैं — यही ओम के नियम की पुष्टि है।
चरण 2 (ढाल = प्रतिरोध): रेखा के दो दूर के बिंदु लीजिए — (0.5, 1.6) और (4.0, 13.2)। सूत्र R = ΔV/ΔI; मान रखने पर R = (13.2 − 1.6)/(4.0 − 0.5) = 11.6/3.5 = 3.31 Ω
उत्तर: प्रतिरोधक का प्रतिरोध ≈ 3.3 Ω (जाँच: हर एकल अनुपात V/I भी 3.2–3.4 के बीच ही आता है।) (NCERT के मॉडल उत्तर में ग्राफ़ के बिंदुओं (1.0 A पर 3.4 V) के अनुपात से यह मान 3.4 Ω लिया गया है — Board में 3.4 Ω लिखना अधिक सुरक्षित है।)
प्रश्न 8. जब किसी अज्ञात प्रतिरोध के प्रतिरोधक के सिरों से 12 V की बैटरी को संयोजित किया जाता है, तो परिपथ में 2.5 mA विद्युत धारा प्रवाहित होती है। प्रतिरोधक का प्रतिरोध परिकलित कीजिए।
हल:
दिया गया है: V = 12 V, I = 2.5 mA = 2.5 × 10-3 A
सूत्र: R = V/I
मान रखने पर: R = 12/(2.5 × 10-3) = (12/2.5) × 103 = 4.8 × 103
उत्तर: प्रतिरोध R = 4800 Ω (4.8 kΩ) — mA को A में बदलना ही इस प्रश्न की कुंजी थी।
प्रश्न 9. 9 V की किसी बैटरी को 0.2 Ω, 0.3 Ω, 0.4 Ω, 0.5 Ω तथा 12 Ω के प्रतिरोधकों के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित किया गया है। 12 Ω के प्रतिरोधक से कितनी विद्युत धारा प्रवाहित होगी?
हल:
दिया गया है: V = 9 V; प्रतिरोध 0.2, 0.3, 0.4, 0.5 व 12 Ω (श्रेणी)
चरण 1 (तुल्य प्रतिरोध): R = 0.2 + 0.3 + 0.4 + 0.5 + 12 = 13.4 Ω
चरण 2 (धारा): सूत्र I = V/R; मान रखने पर I = 9/13.4 = 0.67 A। श्रेणी में हर प्रतिरोधक से यही धारा बहती है।
उत्तर: 12 Ω के प्रतिरोधक से 0.67 A धारा प्रवाहित होगी।
प्रश्न 10. 176 Ω प्रतिरोध के कितने प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में संयोजित करें कि 220 V के विद्युत स्रोत से संयोजन 5 A विद्युत धारा ले?
हल:
दिया गया है: V = 220 V, I = 5 A, प्रत्येक प्रतिरोधक = 176 Ω
चरण 1 (आवश्यक तुल्य प्रतिरोध): सूत्र R = V/I; मान रखने पर R = 220/5 = 44 Ω
चरण 2 (संख्या): समान प्रतिरोधों के पार्श्व संयोजन में R = 176/n; अतः 176/n = 44 → n = 176/44 = 4
उत्तर: 4 प्रतिरोधक पार्श्वक्रम में संयोजित करने होंगे।
प्रश्न 11. यह दर्शाइए कि आप 6 Ω प्रतिरोध के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करेंगे कि प्राप्त संयोजन का प्रतिरोध (i) 9 Ω, (ii) 4 Ω हो।
हल:
(i) 9 Ω के लिए: दो प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में जोड़िए — 1/R′ = 1/6 + 1/6 = 2/6, अतः R′ = 3 Ω। इस 3 Ω को तीसरे 6 Ω के साथ श्रेणीक्रम में जोड़िए — R = 3 + 6 = 9 Ω ✓
(ii) 4 Ω के लिए: दो प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में जोड़िए — R′ = 6 + 6 = 12 Ω। इस 12 Ω को तीसरे 6 Ω के साथ पार्श्वक्रम में जोड़िए — 1/R = 1/12 + 1/6 = (1 + 2)/12 = 3/12, अतः R = 4 Ω ✓
प्रश्न 12. 220 V की विद्युत लाइन पर उपयोग किए जाने वाले बहुत-से बल्बों का अनुमतांक 10 W है। यदि 220 V लाइन से अनुमत अधिकतम विद्युत धारा 5 A है, तो इस लाइन के दो तारों के बीच कितने बल्ब पार्श्वक्रम में संयोजित किए जा सकते हैं?
हल:
दिया गया है: V = 220 V, प्रत्येक बल्ब P = 10 W, अधिकतम धारा I = 5 A
चरण 1 (एक बल्ब का प्रतिरोध): सूत्र R = V2/P; मान रखने पर R = (220)2/10 = 48400/10 = 4840 Ω
चरण 2 (आवश्यक तुल्य प्रतिरोध): Req = V/I = 220/5 = 44 Ω
चरण 3 (संख्या): पार्श्व में 1/Req = n/R → n = R/Req = 4840/44 = 110
उत्तर: अधिकतम 110 बल्ब पार्श्वक्रम में संयोजित किए जा सकते हैं। (सरल जाँच: हर बल्ब 10/220 A लेता है; 5 ÷ (10/220) = 110 ✓)
प्रश्न 13. किसी विद्युत भट्ठी की तप्त प्लेट दो प्रतिरोधक कुंडलियों A तथा B की बनी है, जिनमें प्रत्येक का प्रतिरोध 24 Ω है तथा इन्हें पृथक्-पृथक्, श्रेणीक्रम में अथवा पार्श्वक्रम में संयोजित करके उपयोग किया जा सकता है। यदि यह भट्ठी 220 V विद्युत स्रोत से संयोजित की जाती है, तो तीनों प्रकरणों में प्रवाहित विद्युत धाराएँ क्या हैं?
हल: दिया गया है: V = 220 V, RA = RB = 24 Ω; हर प्रकरण में सूत्र I = V/R
प्रकरण 1 (केवल एक कुंडली): I = 220/24 = 9.2 A (लगभग)
प्रकरण 2 (श्रेणीक्रम): R = 24 + 24 = 48 Ω; I = 220/48 = 4.6 A (लगभग)
प्रकरण 3 (पार्श्वक्रम): 1/R = 1/24 + 1/24 = 2/24, अतः R = 12 Ω; I = 220/12 = 18.3 A (लगभग)
उत्तर: पृथक् 9.2 A, श्रेणी 4.6 A, पार्श्व 18.3 A — इसीलिए भट्ठी की “तेज़ आँच” पार्श्व संयोजन से मिलती है।
प्रश्न 14. निम्नलिखित परिपथों में प्रत्येक में 2 Ω प्रतिरोधक द्वारा उपभुक्त शक्तियों की तुलना कीजिए — (i) 6 V बैटरी से संयोजित 1 Ω तथा 2 Ω का श्रेणीक्रम संयोजन; (ii) 4 V बैटरी से संयोजित 12 Ω तथा 2 Ω का पार्श्वक्रम संयोजन।
हल:
(i) श्रेणी प्रकरण: तुल्य प्रतिरोध R = 1 + 2 = 3 Ω; धारा I = V/R = 6/3 = 2 A (दोनों से यही बहेगी)। सूत्र P = I2R; मान रखने पर 2 Ω में P1 = (2)2 × 2 = 4 × 2 = 8 W
(ii) पार्श्व प्रकरण: 2 Ω प्रतिरोधक पर पूरा विभवांतर 4 V मिलेगा। सूत्र P = V2/R; मान रखने पर P2 = (4)2/2 = 16/2 = 8 W
उत्तर: दोनों परिपथों में 2 Ω प्रतिरोधक द्वारा उपभुक्त शक्ति बराबर (8 W) है — अनुपात 1 : 1।
प्रश्न 15. दो विद्युत लैम्प, जिनमें से एक का अनुमतांक 100 W; 220 V तथा दूसरे का 60 W; 220 V है, विद्युत मेन्स के साथ पार्श्वक्रम में संयोजित हैं। यदि विद्युत आपूर्ति की वोल्टता 220 V है, तो विद्युत मेन्स से कितनी धारा ली जाती है?
हल:
दिया गया है: P1 = 100 W, P2 = 60 W, V = 220 V (पार्श्व में दोनों पर यही वोल्टता)
चरण 1: सूत्र I = P/V से — I1 = 100/220 = 0.455 A; I2 = 60/220 = 0.273 A
चरण 2: पार्श्व में कुल धारा जुड़ती है — I = 0.455 + 0.273 = 0.728 A
उत्तर: मेन्स से ली गई कुल धारा ≈ 0.73 A
प्रश्न 16. किसमें अधिक विद्युत ऊर्जा उपभुक्त होती है — 250 W का टी.वी. सेट, जो एक घंटे तक चलाया जाता है, अथवा 1200 W का टोस्टर, जो 10 मिनट के लिए चलाया जाता है?
हल:
सूत्र: E = P × t (समय सेकंड में)
टी.वी. सेट: E1 = 250 × (1 × 3600) = 250 × 3600 = 900000 J = 9 × 105 J
टोस्टर: E2 = 1200 × (10 × 60) = 1200 × 600 = 720000 J = 7.2 × 105 J
उत्तर: 250 W का टी.वी. सेट एक घंटे में अधिक ऊर्जा उपभुक्त करता है (9 × 105 J > 7.2 × 105 J) — टोस्टर की शक्ति अधिक है, पर वह बहुत कम समय चला; ऊर्जा शक्ति × समय दोनों पर निर्भर करती है।
प्रश्न 17. 8 Ω प्रतिरोध का कोई विद्युत हीटर विद्युत मेन्स से 2 घंटे तक 15 A विद्युत धारा लेता है। हीटर में उत्पन्न ऊष्मा की दर परिकलित कीजिए।
हल:
दिया गया है: R = 8 Ω, I = 15 A
सूत्र: ऊष्मा उत्पन्न होने की दर = शक्ति P = I2R
मान रखने पर: P = (15)2 × 8 = 225 × 8 = 1800
उत्तर: हीटर में ऊष्मा 1800 J/s (1800 W) की दर से उत्पन्न होती है। ध्यान दें — “दर” पूछी गई है, इसलिए दिया गया समय (2 घंटे) यहाँ उपयोग नहीं होगा; यदि कुल ऊष्मा पूछी जाती तो H = 1800 × 7200 = 1.296 × 107 J होता।
प्रश्न 18. निम्नलिखित को स्पष्ट कीजिए — (a) विद्युत लैम्पों के तंतुओं के निर्माण में प्रायः एकमात्र टंगस्टन का ही उपयोग क्यों किया जाता है? (b) विद्युत तापन युक्तियों, जैसे ब्रेड-टोस्टर तथा विद्युत इस्तरी, के चालक शुद्ध धातुओं के स्थान पर मिश्रातुओं के क्यों बनाए जाते हैं? (c) घरेलू विद्युत परिपथों में श्रेणीक्रम संयोजन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता? (d) किसी तार का प्रतिरोध उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल में परिवर्तन के साथ किस प्रकार परिवर्तित होता है? (e) विद्युत संचारण के लिए प्रायः कॉपर तथा ऐलुमिनियम के तारों का उपयोग क्यों किया जाता है?
हल:
(a) टंगस्टन की प्रतिरोधकता उच्च है और गलनांक अत्यंत उच्च (लगभग 3380°C) है। धारा बहने पर तंतु तपकर श्वेत-तप्त होकर प्रकाश देता है, पर इतने उच्च ताप पर भी पिघलता नहीं और आसानी से जलता (उपचयित) भी नहीं — अन्य धातुएँ इतना ताप सह ही नहीं पातीं। इसलिए लैम्पों के तंतु प्रायः एकमात्र टंगस्टन के बनाए जाते हैं।
(b) मिश्रातुओं की प्रतिरोधकता शुद्ध धातुओं से अधिक होती है, ताप के साथ लगभग अपरिवर्तित रहती है और वे उच्च ताप पर आसानी से उपचयित नहीं होतीं — इसलिए समान धारा से अधिक व स्थिर ऊष्मा मिलती है और तापन अवयव लंबे समय तक टिकता है। यही कारण टोस्टर-इस्तरी में नाइक्रोम जैसी मिश्रातु के उपयोग का है (InText प्रश्न 4 से मिलान कीजिए)।
(c) श्रेणी में (1) कुल विभवांतर सभी युक्तियों में बँट जाता है, इसलिए किसी को भी पूरा 220 V नहीं मिलता और सब मंद काम करती हैं; (2) किसी एक युक्ति के खराब होने या बंद करने पर पूरा परिपथ टूट जाता है; (3) कुल प्रतिरोध बढ़ जाने से धारा बहुत कम रह जाती है; और (4) सभी युक्तियों के लिए एक ही स्विच होता है — अलग-अलग नियंत्रण संभव नहीं। इसलिए घरेलू परिपथों में श्रेणीक्रम का उपयोग नहीं होता।
(d) R = ρL/A के अनुसार प्रतिरोध, अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है — क्षेत्रफल बढ़ाने (मोटा तार) पर प्रतिरोध घटता है और क्षेत्रफल घटाने (पतला तार) पर प्रतिरोध बढ़ता है। क्षेत्रफल चार गुना तो प्रतिरोध एक-चौथाई (प्रश्न 6 की तरह)।
(e) चाँदी के बाद ताँबा व ऐलुमिनियम ही सर्वोत्तम चालक हैं — उनकी प्रतिरोधकता बहुत कम है (क्रमशः 1.62 × 10-8 व 2.63 × 10-8 Ω m), इसलिए संचारण में ऊर्जा की हानि कम होती है। चाँदी इतनी महँगी है कि तारों में उसका उपयोग संभव नहीं; ताँबा-ऐलुमिनियम अपेक्षाकृत सस्ते, पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध और तार बनाने योग्य (तन्य) हैं। ऐलुमिनियम हल्का भी है, इसलिए खंभों पर लटकने वाले लंबे तारों में वही अधिक चलता है।
इस प्रश्नावली में हमने सीखा — 18 प्रश्नों में से अधिकांश केवल तीन सूत्रों (V = IR, R = ρL/A, P = VI) के ही रूपांतर हैं; विधि वही “दिया गया → सूत्र → मान → गणना → उत्तर” वाली है।
📖 Case Study – सर्दी की शाम, हीटर और उड़ता फ्यूज़
जनवरी की एक ठंडी शाम सीमा के घर में 220 V की लाइन पर एक 2000 W का रूम हीटर और 100 W के दो बल्ब चल रहे थे। तभी उसके भाई ने उसी लाइन से एक और उपकरण जोड़ने की कोशिश की और अचानक फ्यूज़ उड़ गया — पूरा कमरा अँधेरे में डूब गया। पिता ने कहा, “हर लाइन की एक धारा-सीमा होती है; उपकरण बढ़ेंगे तो धारा बढ़ेगी और फ्यूज़ अपनी जान देकर घर को बचा लेगा।” उन्होंने फ्यूज़ बदलकर कुछ उपकरण बंद किए, तब जाकर बिजली लौटी। सीमा ने उसी शाम अपने बिल का हिसाब भी लगाया — हीटर रोज़ 5 घंटे चलता है, तो महीने भर में वह कितनी यूनिट खाएगा, यह जानकर वह हैरान रह गई। इस गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
Q1. हीटर (2000 W) और दो बल्ब (प्रत्येक 100 W) एक साथ चलने पर लाइन से कुल कितनी धारा ली जा रही थी? —
(A) 5 A
(B) 10 A
(C) 15 A
(D) 20 A
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) 10 A — कुल शक्ति P = 2000 + 100 + 100 = 2200 W; सूत्र I = P/V से I = 2200/220 = 10 A।
Q2. यदि उस लाइन का फ्यूज़ केवल 8 A का था, तो नया उपकरण जोड़ते ही फ्यूज़ क्यों उड़ा होगा? —
(A) क्योंकि वोल्टता घट गई थी
(B) क्योंकि कुल धारा फ्यूज़ की निर्धारित सीमा (8 A) से अधिक हो गई, फ्यूज़ तार पिघलकर परिपथ टूट गया
(C) क्योंकि बल्ब खराब थे
(D) क्योंकि तार ताँबे के थे
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) पहले से ही 10 A धारा बह रही थी — सीमा 8 A से ऊपर। नया उपकरण जुड़ते ही धारा और बढ़ी, I2Rt के अनुसार फ्यूज़ तार इतना गरम हुआ कि वह पिघल गया और परिपथ टूट गया — यही फ्यूज़ का काम है।
Q3. 2000 W का हीटर रोज़ 5 घंटे चले, तो 30 दिन में वह कितनी विद्युत ऊर्जा (यूनिट) उपभुक्त करेगा? —
(A) 150 यूनिट
(B) 300 यूनिट
(C) 450 यूनिट
(D) 600 यूनिट
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) 300 यूनिट — E = (2000 W × 5 h × 30)/1000 = 300 kWh = 300 यूनिट। हीटर जैसे उच्च-शक्ति उपकरण ही बिल बढ़ाते हैं!
Q4. हीटर की कुंडली लाल तप्त हो जाती है, परंतु उसकी डोरी (कॉर्ड) ठंडी रहती है — क्यों? —
(A) डोरी में धारा नहीं बहती
(B) कुंडली में धारा अधिक बहती है
(C) कुंडली नाइक्रोम की है जिसका प्रतिरोध बहुत अधिक है, जबकि डोरी ताँबे की है जिसका प्रतिरोध बहुत कम है — समान धारा में ऊष्मा H = I2Rt के अनुसार प्रतिरोध के अनुक्रमानुपाती होती है
(D) डोरी पर प्लास्टिक चढ़ा होता है
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) दोनों में धारा एक समान बहती है; अंतर केवल प्रतिरोध का है — नाइक्रोम का उच्च प्रतिरोध अधिक ऊष्मा देता है, ताँबे का नगण्य प्रतिरोध लगभग कोई ऊष्मा नहीं देता।
⭐ Quick Revision – Important Points
- ✅ धारा I = Q/t (मात्रक ऐम्पियर); 1 A = 1 C/s; 1 C = 6.25 × 1018 इलेक्ट्रॉनों का आवेश; ऐमीटर श्रेणी में लगता है।
- ✅ विभवांतर V = W/Q (मात्रक वोल्ट); 1 V = 1 J/C; वोल्टमीटर समानांतर में लगता है; विभवांतर बनाए रखती है — बैटरी।
- ✅ ओम का नियम (नियत ताप पर): V = IR; V–I ग्राफ़ मूल बिंदु से जाती सीधी रेखा, ढाल = R; प्रतिरोध का मात्रक ओम (Ω)।
- ✅ R = ρL/A; ρ का मात्रक Ω m; ρ केवल पदार्थ व ताप पर निर्भर — लंबाई-मोटाई पर नहीं। चाँदी सर्वश्रेष्ठ चालक (1.60 × 10-8), फिर ताँबा (1.62 × 10-8); नाइक्रोम 100 × 10-8 Ω m।
- ✅ श्रेणी: धारा समान, V बँटता है, R = R1 + R2 + R3 (सबसे बड़े से बड़ा)। समानांतर: V समान, धारा बँटती है, 1/R = 1/R1 + 1/R2 + 1/R3 (सबसे छोटे से छोटा)।
- ✅ जूल का नियम: H = I2Rt = VIt = V2t/R — धारा दोगुनी तो ऊष्मा चार गुनी।
- ✅ शक्ति: P = VI = I2R = V2/R (मात्रक वाट); ऊर्जा E = P × t।
- ✅ 1 kWh = 1 यूनिट = 3.6 × 106 J; यूनिट = (W × घंटे × दिन)/1000।
- ✅ पदार्थ-त्रिक: हीटर कुंडली — नाइक्रोम; बल्ब तंतु — टंगस्टन (गलनांक ~3380°C); फ्यूज़ — कम गलनांक वाली मिश्रातु, श्रेणी में।
- ✅ घरेलू वायरिंग समानांतर में होती है — हर उपकरण को पूरा 220 V, अलग स्विच, एक खराब हो तो बाकी चलते रहते हैं।
⚠️ Aam Galtiyan (Common Mistakes)
- समय की इकाई न बदलना: I = Q/t व H = I2Rt में समय हमेशा सेकंड में रखें (10 मिनट = 600 s) और धारा के सूत्र में mA को A में बदलें (2.5 mA = 2.5 × 10-3 A) — आधे न्यूमेरिकल की गलती यहीं होती है।
- व्यास को ही त्रिज्या ले लेना: ρ वाले प्रश्नों में A = πr2 में r = d/2 होता है और d को mm से m में बदलना अनिवार्य है। व्यास दोगुना होने पर क्षेत्रफल चार गुना होता है, दो गुना नहीं।
- श्रेणी-समानांतर की पहचान उलटना: श्रेणी में धारा समान रहती है और समानांतर में विभवांतर — यह जोड़ी उलटी लिखी तो पूरा न्यूमेरिकल गलत हो जाएगा।
- समानांतर में प्रतिरोध जोड़ देना: समानांतर में 1/R जुड़ते हैं; उत्तर निकालकर जाँचें — तुल्य प्रतिरोध सबसे छोटे प्रतिरोध से कम आना ही चाहिए, अधिक आया तो विधि गलत है।
- शक्ति व ऊर्जा के मात्रक बदलना: P = VI से उत्तर वाट में आता है और E = Pt से जूल या kWh में — “शक्ति 2.2 kWh है” जैसी बात गलत है; 2.2 kWh ऊर्जा है, शक्ति नहीं।
- अनुमतांक (rating) पर सूत्र उल्टा लगाना: “220 V; 100 W” दिए होने पर प्रतिरोध R = V2/P से निकालें और वोल्टता बदलने पर प्रतिरोध वही रखें — नया प्रतिरोध निकालने की गलती प्रश्न 3 जैसे प्रश्नों में सबसे आम है।
- “दर” और “कुल मात्रा” में भ्रम: “ऊष्मा की दर” पूछे तो उत्तर P = I2R (समय का उपयोग नहीं); “कुल ऊष्मा” पूछे तभी t से गुणा करें — प्रश्न 17 इसी जाँच के लिए बनाया गया है।
🎯 Bihar Board Exam Tips
- सूत्र-सूची अलग पेज पर बनाकर दोहराएँ: I = Q/t, V = W/Q, V = IR, R = ρL/A, श्रेणी-समानांतर के सूत्र, H = I2Rt, P = VI व 1 kWh = 3.6 × 106 J — यही आठ सूत्र पूरे अध्याय के 54 प्रश्न हल कर देते हैं।
- न्यूमेरिकल में पाँच-चरणीय प्रारूप अपनाएँ: दिया गया → सूत्र → मान रखना → गणना → इकाई सहित उत्तर बॉक्स। Board में चरणों के अंक मिलते हैं — अंतिम उत्तर थोड़ा इधर-उधर हो भी जाए तो विधि के अंक बच जाते हैं।
- परिपथ आरेख का अभ्यास करें: सेल, बैटरी, कुंजी, ऐमीटर (श्रेणी) व वोल्टमीटर (समानांतर) वाले आरेख पर स्वतंत्र प्रश्न आता है — प्रतीक साफ़ व सही क्रम में बनाएँ और +/− सिरे अवश्य दर्शाएँ।
- कारण-वाले प्रश्न तैयार रखें: हीटर की डोरी बनाम कुंडली, मिश्रातु बनाम शुद्ध धातु, टंगस्टन का उपयोग, घरेलू वायरिंग समानांतर क्यों — ये चार “क्यों” प्रश्न हर साल किसी-न-किसी रूप में आते हैं।
- प्रतिरोधकता सारणी के चुनिंदा मान याद रखें: चाँदी 1.60, ताँबा 1.62, ऐलुमिनियम 2.63, आयरन 10.0, मरकरी 94.0 व नाइक्रोम 100 (सभी × 10-8 Ω m) — इन पर आधारित तुलना-प्रश्न व MCQ बार-बार आते हैं।
- उत्तर की स्व-जाँच की आदत डालें: श्रेणी में V1 + V2 = V, समानांतर में I1 + I2 = I और P = VI तीनों रूपों से एक ही आना चाहिए — जाँच में एक मिनट लगता है, पर गलती पकड़ में आ जाती है।
- पिछले वर्षों के BSEB प्रश्न-पत्रों से इस अध्याय के न्यूमेरिकल हल करके जाएँ — InText, उदाहरण व प्रश्नावली के प्रश्न अक्सर आँकड़े बदलकर दोहराए जाते हैं।
📝 MCQ Quiz – 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (स्वयं को जाँचें)
पहले बिना देखे हल करें, फिर “✅ उत्तर देखें” खोलकर मिलाएँ। अंत में Answer Key table दी गई है।
Q1. विद्युत धारा का SI मात्रक है —
(A) वोल्ट
(B) ऐम्पियर
(C) ओम
(D) वाट
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) ऐम्पियर — 1 A = 1 C/1 s; वोल्ट विभवांतर का, ओम प्रतिरोध का और वाट शक्ति का मात्रक है।
Q2. एक कूलॉम आवेश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या होती है —
(A) 6.25 × 1016
(B) 6.25 × 1017
(C) 6.25 × 1018
(D) 6.25 × 1019
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) 6.25 × 1018 — n = Q/e = 1/(1.6 × 10-19) = 6.25 × 1018।
Q3. दो बिंदुओं के बीच विभवांतर मापने का यंत्र है —
(A) ऐमीटर
(B) गैल्वेनोमीटर
(C) रियोस्टैट
(D) वोल्टमीटर
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (D) वोल्टमीटर — यह उन दो बिंदुओं के बीच समानांतर में लगाया जाता है; ऐमीटर धारा मापता है और श्रेणी में लगता है।
Q4. ओम का नियम है —
(A) V = IR
(B) I = VR
(C) R = VI
(D) V = I/R
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (A) V = IR — नियत ताप पर धारा, विभवांतर के अनुक्रमानुपाती होती है।
Q5. प्रतिरोध का SI मात्रक है —
(A) वोल्ट
(B) ऐम्पियर
(C) ओम
(D) ओम-मीटर
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) ओम (Ω) — ध्यान रहे, ओम-मीटर प्रतिरोधकता (ρ) का मात्रक है, प्रतिरोध का नहीं।
Q6. किसी तार का प्रतिरोध निम्न में से किस पर निर्भर नहीं करता? —
(A) तार की लंबाई पर
(B) अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर
(C) ताप पर
(D) तार पर लगाए गए विभवांतर पर
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (D) तार पर लगाए गए विभवांतर पर — R = ρL/A केवल लंबाई, क्षेत्रफल, पदार्थ व ताप पर निर्भर करता है; विभवांतर बदलने से धारा बदलती है, प्रतिरोध नहीं।
Q7. श्रेणी संयोजन में सभी प्रतिरोधकों में समान रहती है —
(A) विभवांतर
(B) विद्युत धारा
(C) शक्ति
(D) ऊष्मा
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) विद्युत धारा — एक ही पथ होने से हर प्रतिरोधक से वही धारा बहती है; विभवांतर उन पर बँटता है।
Q8. समानांतर संयोजन का तुल्य प्रतिरोध उसमें जुड़े सबसे छोटे प्रतिरोध से —
(A) कम होता है
(B) अधिक होता है
(C) बराबर होता है
(D) दोगुना होता है
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (A) कम होता है — 1/R में हर पद धनात्मक जुड़ता है, इसलिए R सबसे छोटे प्रतिरोध से भी छोटा निकलता है।
Q9. विद्युत हीटर की कुंडली नाइक्रोम की क्यों बनाई जाती है? —
(A) यह सबसे सस्ती धातु है
(B) इसकी प्रतिरोधकता सबसे कम है
(C) इसकी प्रतिरोधकता उच्च है और यह उच्च ताप पर आसानी से उपचयित नहीं होती
(D) यह चुंबकीय है
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) उच्च प्रतिरोधकता (100 × 10-8 Ω m) से अधिक ऊष्मा मिलती है और नाइक्रोम तपने पर भी जलती नहीं है।
Q10. जूल के नियमानुसार प्रतिरोधक में उत्पन्न ऊष्मा का सूत्र है —
(A) H = IRt
(B) H = I2R/t
(C) H = VRt
(D) H = I2Rt
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (D) H = I2Rt — इसके अन्य रूप H = VIt और H = V2t/R भी सही हैं।
Q11. 1 kWh (एक यूनिट) बराबर होता है —
(A) 3.6 × 105 J
(B) 3.6 × 106 J
(C) 3.6 × 107 J
(D) 36 × 106 J
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) 3.6 × 106 J — 1000 W × 3600 s = 3.6 × 106 J।
Q12. निम्न में से कौन-सा पद विद्युत शक्ति को नहीं दर्शाता? —
(A) VI
(B) I2R
(C) IR2
(D) V2/R
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) IR2 — शक्ति के तीनों सही रूप VI, I2R और V2/R हैं (प्रश्नावली प्रश्न 2 से मिलान कीजिए)।
Q13. किसी तार की लंबाई दोगुनी कर देने पर (पदार्थ व मोटाई वही) उसका प्रतिरोध —
(A) दोगुना हो जाएगा
(B) आधा रह जाएगा
(C) चार गुना हो जाएगा
(D) अपरिवर्तित रहेगा
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (A) दोगुना हो जाएगा — R ∝ L (R = ρL/A)।
Q14. ऐमीटर को परिपथ में कैसे जोड़ा जाता है? —
(A) समानांतर में
(B) बल्ब के समानांतर में
(C) केवल बैटरी के पास
(D) श्रेणीक्रम में
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (D) श्रेणीक्रम में — ताकि मापी जाने वाली पूरी धारा ऐमीटर से होकर गुजरे; इसका प्रतिरोध बहुत कम होता है।
Q15. विद्युत बल्ब का तंतु (फिलामेंट) किस पदार्थ का बना होता है? —
(A) ताँबा
(B) टंगस्टन
(C) नाइक्रोम
(D) ऐलुमिनियम
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) टंगस्टन — इसका गलनांक अत्यंत उच्च (~3380°C) है, इसलिए तंतु तपकर प्रकाश देता है पर पिघलता नहीं। नाइक्रोम हीटर की कुंडली का पदार्थ है।
Answer Key – उत्तरमाला
| प्रश्न | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उत्तर | B | C | D | A | C | D | B | A | C | D | B | C | A | D | B |
❓ FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1. विद्युत धारा और विभवांतर में सरल अंतर क्या है?
उत्तर: विद्युत धारा आवेश के बहने की दर है (I = Q/t, मात्रक ऐम्पियर) — जैसे नली में बहते पानी की मात्रा। विभवांतर वह “दबाव” है जो आवेश को बहाता है (V = W/Q, मात्रक वोल्ट) — जैसे पानी के टैंक की ऊँचाई का अंतर। विभवांतर होगा तभी धारा बहेगी, और कितनी बहेगी यह प्रतिरोध तय करता है: I = V/R।
प्रश्न 2. घरेलू वायरिंग समानांतर में ही क्यों होती है?
उत्तर: तीन कारणों से — (1) हर उपकरण को पूरा 220 V मिलता है, इसलिए सब अपनी पूरी क्षमता से चलते हैं; (2) हर उपकरण का अलग स्विच होता है; (3) कोई एक उपकरण खराब हो जाए तो बाकी चलते रहते हैं। श्रेणी में विभवांतर बँट जाता, एक खराब होते ही सब बंद हो जाते और अलग नियंत्रण संभव नहीं होता।
प्रश्न 3. बिजली के बिल की “यूनिट” मैं स्वयं कैसे निकालूँ?
उत्तर: हर उपकरण के लिए (शक्ति W × रोज़ के घंटे × दिन) जोड़िए और योग को 1000 से भाग दीजिए — वही kWh अर्थात यूनिट है। उदाहरण: 400 W फ्रिज × 8 घंटे × 30 दिन ÷ 1000 = 96 यूनिट। फिर यूनिट × प्रति-यूनिट दर = अनुमानित बिल। सबसे अधिक यूनिट हीटर, गीज़र व AC जैसे उच्च-वाट उपकरण खाते हैं।
प्रश्न 4. क्या केवल InText, उदाहरण और प्रश्नावली के प्रश्न तैयार करना काफ़ी है?
उत्तर: इस अध्याय के लिए लगभग हाँ — Board के अधिकांश न्यूमेरिकल इन्हीं 54 प्रश्नों (InText 23 + उदाहरण 13 + प्रश्नावली 18) के आँकड़े बदलकर बनते हैं। साथ में आठ मुख्य सूत्र, प्रतिरोधकता सारणी के चुनिंदा मान और परिपथ आरेख के प्रतीक तैयार कर लें, तो वस्तुनिष्ठ व आरेख-आधारित प्रश्नों की तैयारी भी पूरी हो जाएगी।
प्रश्न 5. NCERT की किताब (PDF) कहाँ से मिलेगी?
उत्तर: NCERT की आधिकारिक वेबसाइट ncert.nic.in से Class 10 Science की किताब का PDF बिल्कुल मुफ़्त डाउनलोड किया जा सकता है। वहीं से आप हर अध्याय की मूल किताब पढ़ सकते हैं।
🔗 Pichhla / Agla Adhyay – पिछले व अगले अध्याय पढ़ें
⬅️ पिछला अध्याय: अध्याय 11 — मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार (The Human Eye and the Colourful World): Class 10 Science Chapter 11
➡️ अगला अध्याय: अध्याय 13 — विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव (Magnetic Effects of Electric Current): Class 10 Science Chapter 13
📚 सभी अध्यायों की सूची यहाँ देखें: NCERT Class 10 Bihar Board Science Book
🔚 Conclusion – निष्कर्ष
बधाई हो! आपने भौतिकी का सबसे न्यूमेरिकल-भरा अध्याय पूरा कर लिया। अब आप जानते हैं कि धारा I = Q/t क्या है, विभवांतर V = W/Q क्यों ज़रूरी है, ओम का नियम V = IR कैसे काम करता है, प्रतिरोध किन कारकों पर निर्भर करता है (R = ρL/A), श्रेणी व समानांतर संयोजन में क्या अंतर है, जूल के नियम H = I2Rt से हीटर-बल्ब-फ्यूज़ कैसे चलते हैं, और शक्ति P = VI व यूनिट (kWh) से बिजली का बिल कैसे बनता है।
ऊपर दिए गए सभी 54 हल किए गए प्रश्नों (InText 23 + NCERT उदाहरण 13 + प्रश्नावली 18) और 15 MCQ का अभ्यास कीजिए — हर न्यूमेरिकल को स्वयं “दिया गया → सूत्र → मान → गणना → उत्तर” के क्रम से दोबारा हल करके देखें। किताब का मूल पाठ पढ़ने के लिए NCERT की आधिकारिक वेबसाइट ncert.nic.in से PDF ले सकते हैं। अब अगले अध्याय — विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव — की तैयारी शुरू कीजिए; वहाँ यही धारा चुंबक बनकर नए कमाल दिखाएगी। शुभकामनाएँ, मेहनत जारी रखिए!
