परिचय – यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है?
Class 10 Science Chapter 10 Light – Reflection and Refraction के NCERT Solutions आपको इस पेज पर सरल हिंदी में, किताब के क्रम से मिलेंगे। Class 10 Science Chapter 10 Light – Reflection and Refraction यानी प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन — यह भौतिकी (Physics) का पहला बड़ा अध्याय है और पूरे विज्ञान में सबसे अधिक numericals वाला अध्याय भी यही है।
ज़रा आस-पास देखिए — शीशे में दिखता चेहरा, गाड़ी के पीछे वाले शीशे में दिखती सड़क, चश्मे का लेंस, टॉर्च की रोशनी, पानी में टेढ़ी दिखती चम्मच… ये सब इसी अध्याय के कमाल हैं! प्रकाश जब किसी सतह से टकराकर लौटता है तो परावर्तन होता है और जब एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाते समय मुड़ जाता है तो अपवर्तन होता है। इन्हीं दो घटनाओं से दर्पण और लेंस की पूरी दुनिया बनती है।
इस अध्याय में हम सीखेंगे — परावर्तन के नियम, गोलीय दर्पण (अवतल व उत्तल), किरण-आरेख बनाने के नियम, चिन्ह परिपाटी, दर्पण सूत्र व आवर्धन, अपवर्तन व अपवर्तनांक, गोलीय लेंस, लेंस सूत्र और लेंस की शक्ति। हर सूत्र के साथ ढेर सारे हल किए हुए numericals भी मिलेंगे, क्योंकि इस अध्याय में अंक सूत्र से नहीं, चिन्हों की सही समझ से आते हैं।
Bihar Board (BSEB) Class 10 की परीक्षा में इस अध्याय से हर साल निश्चित रूप से प्रश्न आते हैं — दर्पण व लेंस के सूत्रों पर आधारित 2–3 अंकों के numericals, किरण-आरेख पर आधारित प्रश्न, चिन्ह परिपाटी व आवर्धन पर वस्तुनिष्ठ (MCQ) प्रश्न और दर्पण-लेंस के उपयोगों पर लघु उत्तरीय प्रश्न। अच्छी बात यह है कि सूत्र केवल तीन-चार ही हैं; उन्हें चिन्हों सहित समझ लिया तो यह अध्याय आपके लिए अंकों की खान बन जाएगा!
📌 खास बात: इस अध्याय के numericals में विद्यार्थी सबसे अधिक गलती सूत्र में नहीं, चिन्ह लगाने में करते हैं — u का ऋणात्मक चिन्ह भूल जाना इस अध्याय की सबसे महँगी गलती है। इसलिए हर numerical को इस पेज पर दिए गए तरीके से — पहले “दिया गया” चिन्हों सहित, फिर सूत्र, फिर गणना — हल करने का अभ्यास कीजिए।
📋 अध्याय की जानकारी (Chapter Information)
| Board | Bihar Board (BSEB) |
|---|---|
| Textbook | NCERT |
| Class | 10 |
| Subject | Science (विज्ञान) |
| Chapter | 10 |
| Chapter Name | Light – Reflection and Refraction (प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन) |
| कुल हल किए गए प्रश्न | 35 (InText 14 + NCERT उदाहरण 4 + प्रश्नावली 17) — साथ में 2 अतिरिक्त कार्यित उदाहरण भी |
📚 इस Chapter में क्या-क्या है? (Topics)
- 10.1 प्रकाश का परावर्तन – परावर्तन के नियम, आपतन कोण व परावर्तन कोण, समतल दर्पण का प्रतिबिंब
- 10.2 गोलीय दर्पण
- अवतल व उत्तल दर्पण तथा उनसे जुड़ी शब्दावली – ध्रुव, वक्रता केंद्र, मुख्य अक्ष, मुख्य फोकस, फोकस दूरी, द्वारक
- किरण-आरेख बनाने के नियम व प्रतिबिंब-निर्माण की पूरी तालिकाएँ (दोनों दर्पणों की)
- गोलीय दर्पणों के उपयोग – शेविंग दर्पण, दंत चिकित्सक, सौर भट्टी, वाहन की headlight, पश्च-दृश्य दर्पण
- चिन्ह परिपाटी (Sign Convention), दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f तथा आवर्धन m = −v/u = h′/h
- 10.3 प्रकाश का अपवर्तन
- अपवर्तन के नियम व कारण – माध्यम बदलने पर प्रकाश की चाल बदलना
- काँच की आयताकार सिल्ली से अपवर्तन व पार्श्व विस्थापन (lateral shift)
- अपवर्तनांक n = c/v तथा विभिन्न माध्यमों के अपवर्तनांक
- गोलीय लेंस (उत्तल व अवतल), लेंस की शब्दावली, किरण-आरेख के नियम व प्रतिबिंब तालिकाएँ
- लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f, आवर्धन तथा लेंस की शक्ति P = 1/f (मीटर में) = 100/f (cm में), इकाई डायोप्टर (D)
- पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (InText) – 14 प्रश्न (4 set में), NCERT उदाहरण – 4 क्रमांकित उदाहरण, प्रश्नावली के 17 प्रश्न
- Case Study, Quick Revision, Common Mistakes, Bihar Board Exam Tips, MCQ Quiz व FAQ
📊 Key Concepts – मुख्य परिभाषाएँ, नियम व सूत्र
| पद / नियम | अर्थ (एक लाइन में) |
|---|---|
| परावर्तन (Reflection) | प्रकाश का किसी सतह से टकराकर उसी माध्यम में लौट आना। |
| परावर्तन का नियम 1 | आपतन कोण (∠i) सदैव परावर्तन कोण (∠r) के बराबर होता है — ∠i = ∠r। |
| परावर्तन का नियम 2 | आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर डाला गया अभिलंब — तीनों एक ही तल में होते हैं। |
| अपवर्तन (Refraction) | प्रकाश का एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाते समय अपने मार्ग से मुड़ जाना। |
| अपवर्तन का कारण | अलग-अलग माध्यमों में प्रकाश की चाल अलग-अलग होती है; चाल बदलते ही किरण मुड़ जाती है। |
| अपवर्तनांक (n) | निर्वात में प्रकाश की चाल (c) तथा माध्यम में प्रकाश की चाल (v) का अनुपात — n = c/v। यह एक शुद्ध संख्या है, इसकी कोई इकाई नहीं होती। |
| प्रकाशतः सघन / विरल माध्यम | जिस माध्यम का अपवर्तनांक अधिक, वह प्रकाशतः अधिक सघन; जिसका कम, वह अधिक विरल। (यह घनत्व (density) से अलग बात है!) |
| वास्तविक प्रतिबिंब | जो प्रतिबिंब परदे पर प्राप्त किया जा सके; किरणों के वास्तव में मिलने से बनता है; सदैव उल्टा होता है। |
| आभासी प्रतिबिंब | जो प्रतिबिंब परदे पर प्राप्त न किया जा सके; किरणों के पीछे बढ़ाने पर मिलती प्रतीत होती हैं; सदैव सीधा होता है। |
| लेंस की शक्ति (P) | लेंस द्वारा किरणों को मोड़ने (अभिसारित/अपसारित करने) की क्षमता — P = 1/f (f मीटर में); इकाई डायोप्टर (D)। उत्तल लेंस की शक्ति धनात्मक (+), अवतल की ऋणात्मक (−) होती है। |
| सूत्र | कहाँ लगता है | ध्यान रहे |
|---|---|---|
| R = 2f | गोलीय दर्पण | वक्रता त्रिज्या, फोकस दूरी की दोगुनी होती है; दोनों का चिन्ह एक जैसा होता है। |
| 1/v + 1/u = 1/f | दर्पण सूत्र | u, v, f — तीनों चिन्ह परिपाटी से लें; वस्तु दर्पण के सामने है तो u सदैव ऋणात्मक। |
| m = −v/u = h′/h | दर्पण का आवर्धन | m ऋणात्मक → प्रतिबिंब वास्तविक व उल्टा; m धनात्मक → आभासी व सीधा। |
| n = c/v | अपवर्तनांक | v = c/n; n जितना बड़ा, माध्यम में प्रकाश उतना ही धीमा। |
| 1/v − 1/u = 1/f | लेंस सूत्र | दर्पण सूत्र से अंतर देखिए — यहाँ बीच में ऋण (−) चिन्ह है! यही सबसे बड़ी उलझन है। |
| m = v/u = h′/h | लेंस का आवर्धन | लेंस में m = v/u (ऋण चिन्ह नहीं); m ऋणात्मक → उल्टा (वास्तविक), धनात्मक → सीधा (आभासी)। |
| P = 1/f (मीटर) = 100/f (cm) | लेंस की शक्ति | f को पहले मीटर या cm में ठीक-ठीक बदलें; उत्तल → +D, अवतल → −D। |
सबसे काम की बात: इस अध्याय के सारे numericals की कुंजी है — चिन्ह परिपाटी। वस्तु की दूरी u लगभग हर प्रश्न में ऋणात्मक आएगी, अवतल दर्पण व अवतल लेंस के f ऋणात्मक होंगे और उत्तल दर्पण व उत्तल लेंस के f धनात्मक। उत्तर आने के बाद चिन्ह देखकर प्रतिबिंब की प्रकृति अवश्य बताइए — Board में वही आधे अंक दिलाता है!
प्रकाश का परावर्तन – शीशा झूठ नहीं बोलता
हम वस्तुओं को तभी देख पाते हैं जब उनसे टकराकर लौटा प्रकाश हमारी आँखों तक पहुँचे। प्रकाश का किसी चिकनी व पॉलिश की हुई सतह से टकराकर लौट आना ही परावर्तन है। दर्पण में चेहरा इसीलिए दिखता है, क्योंकि चेहरे से गया प्रकाश दर्पण से नियमित रूप से परावर्तित होकर आँखों तक लौट आता है। खुरदरी सतह से प्रकाश बिखरकर परावर्तित होता है (विसरित परावर्तन), इसलिए दीवार में हमारा प्रतिबिंब नहीं बनता — पर उसी बिखरे प्रकाश से हम दीवार को देख अवश्य पाते हैं।
पहले शब्दावली समझिए – किरण, अभिलंब व कोण
प्रकाश किरण: प्रकाश जिस सीधी रेखा में चलता है, उसे किरण कहते हैं और तीर से दिखाते हैं। किरणों के समूह को प्रकाश पुंज कहते हैं।
आपतित किरण: सतह पर पड़ने (टकराने) वाली किरण। परावर्तित किरण: सतह से टकराकर लौटने वाली किरण। जिस बिंदु पर किरण सतह को छूती है, वह आपतन बिंदु है।
अभिलंब (Normal): आपतन बिंदु पर सतह के लंबवत खींची गई काल्पनिक रेखा। सारे कोण इसी अभिलंब से नापे जाते हैं — सतह से नहीं! यह बात अभी नोट कर लीजिए, आगे यही सबसे बड़ी गलती बनेगी।
आपतन कोण (∠i): आपतित किरण व अभिलंब के बीच का कोण। परावर्तन कोण (∠r): परावर्तित किरण व अभिलंब के बीच का कोण।
परावर्तन के दो नियम – हर दर्पण, हर बार
नियम 1: आपतन कोण सदैव परावर्तन कोण के बराबर होता है — ∠i = ∠r।
नियम 2: आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर डाला गया अभिलंब — ये तीनों एक ही तल में स्थित होते हैं।
ये नियम समतल दर्पण पर भी उतने ही लागू होते हैं, जितने गोलीय (वक्र) दर्पणों पर। वक्र सतह पर बस इतना ध्यान रखना होता है कि अभिलंब हर बिंदु पर अलग दिशा में होता है — वह वक्रता केंद्र से होकर जाने वाली रेखा होती है, यह बात आगे काम आएगी।
समतल दर्पण का प्रतिबिंब – चार पक्की बातें
- प्रतिबिंब आभासी होता है — परदे पर नहीं लिया जा सकता, दर्पण के पीछे बनता है।
- प्रतिबिंब सीधा होता है और उसका आकार वस्तु के समान होता है।
- वस्तु दर्पण से जितनी आगे होती है, प्रतिबिंब दर्पण के उतना ही पीछे बनता है।
- प्रतिबिंब में पार्श्व परिवर्तन होता है — बायाँ भाग दायाँ और दायाँ भाग बायाँ दिखता है। एंबुलेंस पर “AMBULANCE” उल्टा इसीलिए लिखा जाता है, ताकि आगे वाले वाहन के शीशे में वह सीधा पढ़ा जा सके!
📌 याद रखें: कोण हमेशा अभिलंब से नापें। यदि कोई किरण सतह से 30° का कोण बनाकर पड़ती है, तो आपतन कोण 30° नहीं, 90° − 30° = 60° होगा — MCQ में यही जाल सबसे अधिक बिछाया जाता है।
एक साँस में समझें — परावर्तन के केवल दो नियम हैं: ∠i = ∠r, और तीनों रेखाएँ एक ही तल में; कोण सदैव अभिलंब से नापा जाता है।
गोलीय दर्पण – चम्मच के दोनों पहलू ही असली शुरुआत हैं
एक चमकदार स्टील का चम्मच लीजिए। उसके अंदर की (धँसी हुई) सतह के सामने चेहरा रखिए — कभी प्रतिबिंब बड़ा, कभी उल्टा दिखेगा। अब चम्मच पलटकर बाहर की (उभरी हुई) सतह देखिए — प्रतिबिंब हमेशा सीधा, पर छोटा दिखेगा। बधाई हो, आपने दोनों गोलीय दर्पण अपने हाथ में पकड़ लिए हैं!
गोलीय दर्पण वह दर्पण है जिसकी परावर्तक सतह किसी खोखले गोले का एक भाग होती है। ये दो प्रकार के होते हैं:
1. अवतल दर्पण (Concave Mirror): जिस गोलीय दर्पण की परावर्तक सतह अंदर की ओर (गोले के केंद्र की ओर) धँसी हुई हो, वह अवतल दर्पण है। चम्मच की भीतरी सतह, शेविंग दर्पण — यही हैं। यह किरणों को एक बिंदु पर इकट्ठा (अभिसारित) करता है, इसलिए इसे अभिसारी दर्पण भी कहते हैं।
2. उत्तल दर्पण (Convex Mirror): जिस गोलीय दर्पण की परावर्तक सतह बाहर की ओर उभरी हुई हो, वह उत्तल दर्पण है। चम्मच की बाहरी सतह, गाड़ी का पश्च-दृश्य दर्पण — यही हैं। यह किरणों को फैला (अपसारित कर) देता है, इसलिए इसे अपसारी दर्पण भी कहते हैं।
गोलीय दर्पण की शब्दावली – सात शब्द, पक्के कर लीजिए
| पद | संकेत | अर्थ |
|---|---|---|
| ध्रुव (Pole) | P | गोलीय दर्पण की परावर्तक सतह का केंद्र बिंदु। सारी दूरियाँ इसी से नापी जाती हैं। |
| वक्रता केंद्र (Centre of Curvature) | C | वह बिंदु जो उस गोले का केंद्र है, जिसका भाग दर्पण है। यह दर्पण का भाग नहीं होता; अवतल दर्पण में यह दर्पण के सामने और उत्तल दर्पण में दर्पण के पीछे होता है। |
| वक्रता त्रिज्या (Radius of Curvature) | R | उस गोले की त्रिज्या, जिसका भाग दर्पण है — अर्थात ध्रुव से वक्रता केंद्र की दूरी (R = PC)। |
| मुख्य अक्ष (Principal Axis) | — | ध्रुव व वक्रता केंद्र से होकर जाने वाली सीधी काल्पनिक रेखा। यह दर्पण पर उसके ध्रुव पर अभिलंब होती है। |
| मुख्य फोकस (Principal Focus) | F | मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली किरणें परावर्तन के बाद जिस बिंदु पर मिलती हैं (अवतल) या मिलती हुई प्रतीत होती हैं (उत्तल), वह मुख्य फोकस है। |
| फोकस दूरी (Focal Length) | f | ध्रुव व मुख्य फोकस के बीच की दूरी (f = PF)। स्मरण रहे — f = R/2। |
| द्वारक (Aperture) | — | दर्पण की परावर्तक सतह का प्रभावी व्यास — अर्थात दर्पण का वह मुँह (किनारे-से-किनारे की चौड़ाई) जहाँ से प्रकाश अंदर आ-जा सकता है। |
अवतल दर्पण का फोकस दर्पण के सामने होता है, वहाँ किरणें सचमुच मिलती हैं — इसलिए वह वास्तविक फोकस है। उत्तल दर्पण का फोकस दर्पण के पीछे होता है, किरणें वहाँ से आती हुई केवल प्रतीत होती हैं — इसलिए वह आभासी फोकस है। सूर्य की किरणों को अवतल दर्पण से कागज़ पर केंद्रित करने पर कागज़ जल उठता है — यह फोकस की वास्तविकता का सबसे सुंदर प्रमाण है। (और हाँ, सूर्य की ओर दर्पण या आँख सीधे कभी न करें — आँखें खराब हो सकती हैं!)
सबसे काम की बात: फोकस, वक्रता केंद्र व ध्रुव के बीच का संबंध एक ही लाइन में याद रखें — P — F — C इसी क्रम में होते हैं और PF = FC = f, अर्थात R = 2f। फोकस, ध्रुव व वक्रता केंद्र के ठीक बीच में बैठता है।
एक साँस में समझें — धँसी सतह वाला अवतल (अभिसारी) और उभरी सतह वाला उत्तल (अपसारी); F, P व C के बीच में है और R = 2f होता है।
किरण-आरेख बनाने के नियम – दर्पण वाली चार जादुई किरणें
किसी वस्तु का प्रतिबिंब कहाँ बनेगा, यह जानने के लिए वस्तु के हर बिंदु से निकलने वाली अनगिनत किरणों को खींचना संभव नहीं है। अच्छी बात यह है कि वस्तु के शिखर (ऊपर वाले सिरे) से निकलने वाली केवल दो किरणें ही काफी हैं — जहाँ वे परावर्तन के बाद मिलती हैं (या मिलती प्रतीत होती हैं), वहीं प्रतिबिंब का शिखर बनता है। और उन दो किरणों को चुनने के लिए नीचे के चार नियम हैं — इनमें से कोई भी दो चुन लीजिए, काम बन जाएगा। ये नियम शब्दों में बिल्कुल स्पष्ट याद कीजिए, क्योंकि Board में आरेख के साथ-साथ नियम भी पूछे जाते हैं।
नियम 1 — मुख्य अक्ष के समांतर किरण: जो किरण वस्तु से निकलकर मुख्य अक्ष के समांतर चलकर दर्पण पर पड़ती है, वह परावर्तन के बाद अवतल दर्पण में मुख्य फोकस F से होकर जाती है, और उत्तल दर्पण में ऐसा प्रतीत होता है मानो वह मुख्य फोकस F से आ रही हो (किरण को पीछे की ओर बढ़ाने पर वह F से गुजरती है)।
नियम 2 — फोकस से जाने वाली किरण: जो किरण अवतल दर्पण के मुख्य फोकस F से होकर दर्पण पर पड़ती है (उत्तल दर्पण में — जो किरण फोकस की दिशा में बढ़ती हुई दर्पण पर पड़ती है), वह परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समांतर हो जाती है। देखिए — नियम 1 व नियम 2 एक-दूसरे के ठीक उलटे हैं; एक याद किया तो दूसरा मुफ़्त में याद हो गया!
नियम 3 — वक्रता केंद्र से जाने वाली किरण: जो किरण वक्रता केंद्र C से होकर दर्पण पर पड़ती है (उत्तल दर्पण में — जो किरण C की दिशा में जाती हुई पड़ती है), वह दर्पण पर अभिलंबवत पड़ती है, क्योंकि C से आने वाली रेखा सतह के हर बिंदु पर अभिलंब होती है। आपतन कोण शून्य होता है, इसलिए यह किरण उसी पथ पर वापस परावर्तित हो जाती है — अपने ही रास्ते पर लौट आती है।
नियम 4 — ध्रुव पर पड़ने वाली तिरछी किरण: जो किरण मुख्य अक्ष से तिरछी होकर ध्रुव P पर पड़ती है, वह परावर्तन के नियम (∠i = ∠r) के अनुसार मुख्य अक्ष से उतना ही कोण बनाती हुई दूसरी ओर परावर्तित हो जाती है — जैसे समतल दर्पण पर होता है।
📌 आरेख बनाते समय ध्यान दें: वास्तविक किरणों को ठोस रेखा व तीर के निशान के साथ बनाएँ और आभासी (पीछे बढ़ाई गई) किरणों को बिंदीदार (खण्डित) रेखा से दिखाएँ। वस्तु को मुख्य अक्ष पर खड़ी तीरनुमा रेखा (शिखर ऊपर) से दिखाना NCERT की शैली है — Board में आरेख के अंक इन्हीं छोटी बातों से मिलते हैं।
अवतल दर्पण – प्रतिबिंब निर्माण की पूरी तालिका (6 स्थितियाँ)
अवतल दर्पण सबसे रोचक है, क्योंकि वस्तु की स्थिति बदलते ही प्रतिबिंब का स्वभाव पूरी तरह बदल जाता है — कहीं बड़ा-उल्टा, कहीं छोटा-उल्टा और एक स्थिति में तो सीधा भी! नीचे की तालिका इस अध्याय की जान है, इसे समझकर याद कीजिए:
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रतिबिंब का आकार | प्रतिबिंब की प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | फोकस F पर | अत्यधिक छोटा, बिंदु-आकार | वास्तविक व उल्टा |
| C से परे (C के पीछे) | F व C के बीच | छोटा | वास्तविक व उल्टा |
| C पर | C पर ही | वस्तु के बराबर | वास्तविक व उल्टा |
| C व F के बीच | C से परे | बड़ा (आवर्धित) | वास्तविक व उल्टा |
| F पर | अनंत पर | अत्यधिक बड़ा | वास्तविक व उल्टा |
| P व F के बीच | दर्पण के पीछे | बड़ा (आवर्धित) | आभासी व सीधा |
तालिका से दो सोने जैसी बातें निकलती हैं — पहली, अवतल दर्पण का प्रतिबिंब केवल एक ही स्थिति में आभासी व सीधा बनता है: जब वस्तु ध्रुव व फोकस के बीच हो। बाकी हर स्थिति में प्रतिबिंब वास्तविक व उल्टा बनता है। दूसरी, वस्तु C से जितनी दूर जाती है, प्रतिबिंब उतना ही F की ओर खिसकता और छोटा होता जाता है; वस्तु F के पास आती है तो प्रतिबिंब दूर भागता और बड़ा होता जाता है — बिल्कुल सी-सॉ (झूले) जैसा संतुलन!
उत्तल दर्पण – प्रतिबिंब निर्माण की तालिका (2 स्थितियाँ)
उत्तल दर्पण बहुत सरल स्वभाव का है — वस्तु कहीं भी रख दीजिए, उत्तर हमेशा एक ही जैसा मिलेगा:
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रतिबिंब का आकार | प्रतिबिंब की प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | दर्पण के पीछे, फोकस F पर | अत्यधिक छोटा, बिंदु-आकार | आभासी व सीधा |
| दर्पण से किसी भी निश्चित दूरी पर | दर्पण के पीछे, P व F के बीच | छोटा | आभासी व सीधा |
अर्थात उत्तल दर्पण का प्रतिबिंब हमेशा दर्पण के पीछे, ध्रुव व फोकस के बीच, आभासी, सीधा व छोटा बनता है। वस्तु पास लाने पर प्रतिबिंब ध्रुव की ओर खिसकता है और थोड़ा बड़ा होता है, पर सीधा व छोटा ही रहता है। गाड़ी के शीशे में पीछे की गाड़ियाँ छोटी दिखती हैं, पर सीधी दिखती हैं — कारण यही है। (इसीलिए उन शीशों पर चेतावनी लिखी होती है कि वस्तुएँ दिखने की अपेक्षा अधिक निकट हैं!)
गोलीय दर्पणों के उपयोग – कहाँ, कौन-सा दर्पण और क्यों?
अवतल दर्पण के उपयोग:
- शेविंग दर्पण व मेकअप दर्पण: चेहरा ध्रुव व फोकस के बीच रखने पर सीधा व बड़ा प्रतिबिंब बनता है — छोटी-छोटी बातें साफ दिखती हैं।
- दंत चिकित्सक (डेंटिस्ट) का दर्पण: डॉक्टर दाँत को फोकस के भीतर रखकर उसका बड़ा व सीधा प्रतिबिंब देखता है, जिससे सड़न व दरारें आसानी से दिख जाती हैं। कान-नाक-गला विशेषज्ञ भी माथे पर अवतल दर्पण बाँधकर प्रकाश को रोगी के अंग पर केंद्रित करते हैं।
- सौर भट्टी (Solar Furnace): बड़े अवतल दर्पण सूर्य की समांतर किरणों को फोकस पर केंद्रित कर देते हैं, वहाँ इतनी ऊष्मा इकट्ठी होती है कि भोजन पक जाता है व धातु तक गरम हो जाती है। सौर कुकर में भी यही सिद्धांत काम करता है।
- वाहनों की headlight, टॉर्च व सर्चलाइट: बल्ब को अवतल परावर्तक के फोकस पर रखा जाता है। नियम 2 याद कीजिए — फोकस से निकलने वाली किरणें परावर्तन के बाद समांतर हो जाती हैं, इसलिए प्रकाश का तीव्र व समांतर पुंज दूर तक सड़क को रोशन करता है।
उत्तल दर्पण के उपयोग:
- वाहनों का पश्च-दृश्य (rear-view) दर्पण: उत्तल दर्पण सदैव सीधा प्रतिबिंब देता है और बाहर की ओर उभरा होने के कारण इसका दृष्टि-क्षेत्र (field of view) बहुत विस्तृत होता है — चालक पीछे का बहुत बड़ा क्षेत्र एक साथ देख पाता है। प्रतिबिंब छोटा बनता है, पर सुरक्षा के लिए सीधा व विस्तृत दृश्य ही अधिक ज़रूरी है।
- दुकानों व ATM में सुरक्षा दर्पण तथा अंधे मोड़ों (blind turns) पर लगे बड़े दर्पण भी उत्तल ही होते हैं — कारण वही, विस्तृत दृष्टि-क्षेत्र।
एक साँस में समझें — अवतल दर्पण में केवल P–F के बीच रखी वस्तु का प्रतिबिंब सीधा बनता है; उत्तल दर्पण का प्रतिबिंब हमेशा सीधा, छोटा व आभासी होता है।
चिन्ह परिपाटी, दर्पण सूत्र व आवर्धन – numericals की असली कुंजी
नवीन कार्तीय चिन्ह परिपाटी (New Cartesian Sign Convention)
सूत्रों में दूरियाँ किस चिन्ह के साथ ली जाएँ, इसके नियम को चिन्ह परिपाटी कहते हैं। NCERT की परिपाटी के पाँच नियम हैं:
नियम 1: वस्तु को सदैव दर्पण (या लेंस) के बाईं ओर रखा जाता है, अर्थात प्रकाश वस्तु से बाईं ओर से दाईं ओर चलता है।
नियम 2: सारी दूरियाँ ध्रुव P (दर्पण में) या प्रकाशिक केंद्र O (लेंस में) से नापी जाती हैं — यही मूल बिंदु है।
नियम 3: आपतित प्रकाश की दिशा में (बाएँ से दाएँ) नापी गई दूरियाँ धनात्मक (+) होती हैं।
नियम 4: आपतित प्रकाश की विपरीत दिशा में (दाएँ से बाएँ) नापी गई दूरियाँ ऋणात्मक (−) होती हैं।
नियम 5: मुख्य अक्ष के ऊपर की ऊँचाइयाँ धनात्मक (+) व नीचे की ऊँचाइयाँ ऋणात्मक (−) ली जाती हैं।
| राशि | अवतल दर्पण | उत्तल दर्पण | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| वस्तु दूरी u | − (ऋणात्मक) | − (ऋणात्मक) | वस्तु हमेशा सामने (बाईं ओर) है, इसलिए u हर दर्पण-प्रश्न में ऋणात्मक |
| फोकस दूरी f | − (ऋणात्मक) | + (धनात्मक) | F सामने हो तो −, पीछे हो तो + |
| वक्रता त्रिज्या R | − (ऋणात्मक) | + (धनात्मक) | R का चिन्ह f जैसा ही होता है |
| प्रतिबिंब दूरी v | − यदि प्रतिबिंब सामने बने | + (पीछे बनता है) | v का चिन्ह ही बताएगा प्रतिबिंब वास्तविक (−, सामने) है या आभासी (+, पीछे) |
| वस्तु की ऊँचाई h | + (धनात्मक) | वस्तु अक्ष के ऊपर खड़ी होती है | |
| प्रतिबिंब की ऊँचाई h′ | + सीधा / − उल्टा | h′ ऋणात्मक आया तो प्रतिबिंब उल्टा (वास्तविक) है | |
📌 सबसे बड़ी राहत की बात: दर्पण हो या लेंस — u लगभग हमेशा ऋणात्मक होता है, क्योंकि असली वस्तु हमेशा यंत्र के सामने रखी जाती है। और अवतल = ऋणात्मक f, उत्तल = धनात्मक f — दर्पण व लेंस दोनों में यह नियम एक जैसा है। बस यह दो बातें पक्की कर लीजिए, आधे चिन्ह अपने-आप सही लग जाएँगे।
दर्पण सूत्र (Mirror Formula)
वस्तु दूरी (u), प्रतिबिंब दूरी (v) व फोकस दूरी (f) के बीच का संबंध ही दर्पण सूत्र है:
दर्पण सूत्र: 1/v + 1/u = 1/f | उपयोगी रूप: 1/v = 1/f − 1/u (v निकालने के लिए)
यह सूत्र हर गोलीय दर्पण के लिए व वस्तु की हर स्थिति के लिए लागू होता है — बस दूरियाँ ध्रुव से व चिन्हों सहित लेनी हैं। सूत्र याद करने की तरकीब — “v और u जुड़कर f के बराबर” (व्युत्क्रमों में)। लेंस सूत्र से इसका अंतर अच्छी तरह देख लीजिए: दर्पण में + है, लेंस में − आएगा।
आवर्धन (Magnification)
प्रतिबिंब, वस्तु से कितना बड़ा या छोटा बना — यही आवर्धन बताता है:
आवर्धन: m = h′/h = −v/u | h′ = m × h
- |m| > 1 → प्रतिबिंब वस्तु से बड़ा; |m| < 1 → छोटा; |m| = 1 → बराबर आकार का।
- m ऋणात्मक → प्रतिबिंब वास्तविक व उल्टा (अवतल दर्पण की सामान्य स्थिति)।
- m धनात्मक → प्रतिबिंब आभासी व सीधा (उत्तल दर्पण में हमेशा; अवतल में केवल P–F स्थिति में)।
- आवर्धन एक शुद्ध अनुपात है — इसकी कोई इकाई नहीं होती।
एक साँस में समझें — दूरियाँ ध्रुव से, चिन्ह दिशा से; दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f और m = −v/u, जहाँ m का चिन्ह प्रतिबिंब की प्रकृति बता देता है।
प्रकाश का अपवर्तन – पानी में चम्मच टेढ़ी क्यों दिखती है?
एक गिलास पानी में चम्मच या पेंसिल डालकर देखिए — पानी के अंदर वाला भाग थोड़ा मुड़ा हुआ और ऊपर उठा हुआ दिखेगा। तरणताल (swimming pool) की तली भी वास्तव की अपेक्षा ऊपर उठी हुई लगती है। यह सब अपवर्तन का खेल है — प्रकाश के एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में जाते समय अपने पथ से मुड़ जाने को अपवर्तन कहते हैं।
अपवर्तन क्यों होता है? – चाल बदली, रास्ता मुड़ा
कारण बिल्कुल सरल है — अलग-अलग माध्यमों में प्रकाश की चाल अलग-अलग होती है। निर्वात में प्रकाश सबसे तेज़ चलता है (3 × 108 m/s), वायु में लगभग उतना ही, जल में धीमा (लगभग 2.25 × 108 m/s) और काँच में और धीमा (लगभग 2 × 108 m/s)। जब किरण तिरछी होकर सीमा-रेखा पार करती है, तो उसका एक किनारा पहले धीमा (या तेज़) हो जाता है और किरण मुड़ जाती है — ठीक वैसे, जैसे कीचड़ में एक ओर का पहिया फँसने पर गाड़ी मुड़ जाती है!
- विरल से सघन माध्यम में (जैसे वायु → जल): किरण की चाल घटती है और किरण अभिलंब की ओर मुड़ जाती है (आपतन कोण > अपवर्तन कोण)।
- सघन से विरल माध्यम में (जैसे जल → वायु): किरण की चाल बढ़ती है और किरण अभिलंब से दूर मुड़ जाती है (अपवर्तन कोण > आपतन कोण)।
- यदि किरण सीमा पर अभिलंबवत (सीधी) पड़े, तो वह बिना मुड़े सीधी निकल जाती है — मुड़ने का कारण ही तिरछापन है।
अपवर्तन के दो नियम (स्नेल के नियम सहित)
नियम 1: आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा दोनों माध्यमों को अलग करने वाली सीमा के आपतन बिंदु पर डाला गया अभिलंब — तीनों एक ही तल में होते हैं।
नियम 2 (स्नेल का नियम): प्रकाश के किसी दिए गए रंग व माध्यमों के दिए गए युग्म के लिए, आपतन कोण की ज्या (sin i) व अपवर्तन कोण की ज्या (sin r) का अनुपात स्थिर होता है — sin i / sin r = स्थिरांक (पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक)।
काँच की आयताकार सिल्ली से अपवर्तन – पार्श्व विस्थापन
जब प्रकाश की किरण काँच की आयताकार सिल्ली (rectangular glass slab) पर तिरछी पड़ती है, तो वह दो बार अपवर्तित होती है — पहली सतह पर वायु (विरल) से काँच (सघन) में जाते समय अभिलंब की ओर मुड़ती है और दूसरी (समांतर) सतह पर काँच से वायु में निकलते समय अभिलंब से दूर मुड़ती है। दोनों मुड़ाव बराबर व विपरीत होते हैं, इसलिए निर्गत किरण, आपतित किरण के समांतर निकलती है — दिशा वही, बस किरण अपने मूल पथ से थोड़ी बगल में खिसक जाती है। इसी खिसकाव को पार्श्व विस्थापन (lateral shift / lateral displacement) कहते हैं। सिल्ली जितनी मोटी होगी व आपतन कोण जितना बड़ा होगा, पार्श्व विस्थापन उतना ही अधिक होगा; किरण अभिलंबवत पड़े तो विस्थापन शून्य होता है।
अपवर्तनांक (Refractive Index) – माध्यम में प्रकाश कितना धीमा?
निरपेक्ष अपवर्तनांक: n = निर्वात में प्रकाश की चाल (c) / माध्यम में प्रकाश की चाल (v) अर्थात n = c/v और v = c/n
अपवर्तनांक बता देता है कि माध्यम प्रकाशतः कितना सघन है। n = 1.5 का अर्थ है — उस माध्यम में प्रकाश, निर्वात की अपेक्षा डेढ़ गुना धीमा चलता है। NCERT की तालिका के प्रमुख मान याद कर लीजिए:
| माध्यम | अपवर्तनांक (n) | माध्यम | अपवर्तनांक (n) |
|---|---|---|---|
| वायु | 1.0003 | मिट्टी का तेल (किरोसिन) | 1.44 |
| बर्फ़ | 1.31 | तारपीन का तेल | 1.47 |
| जल | 1.33 | क्राउन काँच | 1.52 |
| ऐल्कोहॉल | 1.36 | सघन फ्लिंट काँच | 1.65 |
| कार्बन डाइसल्फ़ाइड | 1.63 | हीरा | 2.42 |
तालिका से स्पष्ट है — हीरे का अपवर्तनांक सबसे अधिक (2.42) है, अर्थात हीरा प्रकाशतः सबसे सघन माध्यम है और उसमें प्रकाश सबसे धीमा (लगभग 1.24 × 108 m/s) चलता है। वायु का अपवर्तनांक सबसे कम (1.0003) है, अर्थात वायु प्रकाशतः सबसे विरल है। और एक चेतावनी — प्रकाशतः सघनता, द्रव्यमान-घनत्व से अलग है: मिट्टी के तेल का घनत्व जल से कम है, फिर भी उसका अपवर्तनांक (1.44) जल (1.33) से अधिक है — अर्थात प्रकाशतः मिट्टी का तेल, जल से अधिक सघन है! यह प्रश्न MCQ में बहुत घुमाकर पूछा जाता है।
📌 याद रखें: जिस माध्यम का n अधिक, उसमें प्रकाश की चाल कम। चाल निकालनी हो तो v = c/n — n से भाग दीजिए, गुणा कभी नहीं!
एक साँस में समझें — अपवर्तन चाल बदलने से होता है: सघन में जाते समय किरण अभिलंब की ओर, विरल में जाते समय अभिलंब से दूर मुड़ती है; और n = c/v होता है।
गोलीय लेंस – काँच के दो पहलू, दो स्वभाव
लेंस एक ऐसा पारदर्शी माध्यम होता है जो दो पृष्ठों से घिरा होता है, जिनमें से एक या दोनों पृष्ठ गोलीय होते हैं। दर्पण में प्रकाश लौटता था, लेंस में प्रकाश आर-पार जाता है — यही बुनियादी अंतर है।
1. उत्तल लेंस (Convex Lens): बीच में मोटा व किनारों पर पतला होता है। समांतर किरणों को यह एक बिंदु पर अभिसारित कर देता है, इसलिए इसे अभिसारी लेंस कहते हैं। आवर्धक शीशा (magnifying glass), कैमरे का लेंस — यही है।
2. अवतल लेंस (Concave Lens): बीच में पतला व किनारों पर मोटा होता है। समांतर किरणों को यह अपसारित (फैला) देता है, इसलिए इसे अपसारी लेंस कहते हैं। दरवाज़े का पीप-होल व निकट-दृष्टि दोष का चश्मा — यही है।
लेंस की शब्दावली – पाँच शब्द
| पद | संकेत | अर्थ |
|---|---|---|
| प्रकाशिक केंद्र (Optical Centre) | O | लेंस का केंद्रीय बिंदु। इससे होकर जाने वाली किरण बिना मुड़े सीधी निकल जाती है। लेंस की सारी दूरियाँ इसी से नापी जाती हैं। |
| मुख्य अक्ष | — | लेंस के दोनों गोलीय पृष्ठों के वक्रता केंद्रों से होकर जाने वाली काल्पनिक सीधी रेखा। |
| मुख्य फोकस | F1, F2 | मुख्य अक्ष के समांतर किरणें अपवर्तन के बाद जिस बिंदु पर मिलती हैं (उत्तल) या मिलती प्रतीत होती हैं (अवतल)। लेंस के दोनों ओर एक-एक फोकस होता है — F1 व F2। |
| फोकस दूरी | f | प्रकाशिक केंद्र से मुख्य फोकस की दूरी। लेंस के आरेखों में 2F वाले बिंदु वक्रता केंद्र की भूमिका में आते हैं — लेंस के लिए हम F व 2F ही कहते हैं। |
| द्वारक | — | लेंस के वृत्ताकार किनारे का प्रभावी व्यास। |
लेंस के किरण-आरेख के नियम – तीन किरणें
नियम 1 — मुख्य अक्ष के समांतर किरण: वस्तु से निकलकर मुख्य अक्ष के समांतर चलने वाली किरण, उत्तल लेंस से अपवर्तन के बाद दूसरी ओर के मुख्य फोकस F2 से होकर जाती है; अवतल लेंस में वह ऐसे अपसारित होती है मानो वह वस्तु वाली ओर के फोकस F1 से आ रही हो (अपवर्तित किरण को पीछे बढ़ाने पर वह F1 से गुजरती है)।
नियम 2 — फोकस से जाने वाली किरण: जो किरण उत्तल लेंस के F1 से होकर लेंस पर पड़ती है (अवतल लेंस में — जो किरण दूसरी ओर के F2 की दिशा में जाती हुई पड़ती है), वह अपवर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समांतर हो जाती है। फिर वही बात — नियम 1 व 2 परस्पर उलटे हैं।
नियम 3 — प्रकाशिक केंद्र से जाने वाली किरण: जो किरण प्रकाशिक केंद्र O से होकर जाती है, वह बिना किसी विचलन के सीधी निकल जाती है। यह सबसे आसान किरण है — आरेख में सबसे पहले यही बना लीजिए, आधी समस्या वहीं हल हो जाती है।
उत्तल लेंस – प्रतिबिंब निर्माण की पूरी तालिका (6 स्थितियाँ)
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रतिबिंब का आकार | प्रतिबिंब की प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | दूसरी ओर, फोकस F2 पर | अत्यधिक छोटा, बिंदु-आकार | वास्तविक व उल्टा |
| 2F1 से परे | दूसरी ओर, F2 व 2F2 के बीच | छोटा | वास्तविक व उल्टा |
| 2F1 पर | दूसरी ओर, 2F2 पर | वस्तु के बराबर | वास्तविक व उल्टा |
| F1 व 2F1 के बीच | दूसरी ओर, 2F2 से परे | बड़ा (आवर्धित) | वास्तविक व उल्टा |
| F1 पर | अनंत पर | अत्यधिक बड़ा | वास्तविक व उल्टा |
| F1 व प्रकाशिक केंद्र O के बीच | वस्तु वाली ओर ही (उसी तरफ) | बड़ा (आवर्धित) | आभासी व सीधा |
देखा आपने? उत्तल लेंस की तालिका अवतल दर्पण वाली तालिका की जुड़वाँ बहन है — वहाँ C था, यहाँ 2F है; बाकी क्रम बिल्कुल वही। एक तालिका पक्की कीजिए, दूसरी अपने-आप याद हो जाएगी। यही उत्तल लेंस, वस्तु को F व O के बीच रखने पर आवर्धक लेंस का काम करता है।
अवतल लेंस – प्रतिबिंब निर्माण की तालिका (2 स्थितियाँ)
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | प्रतिबिंब का आकार | प्रतिबिंब की प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | वस्तु वाली ओर, फोकस F1 पर | अत्यधिक छोटा, बिंदु-आकार | आभासी व सीधा |
| प्रकाशिक केंद्र से किसी भी निश्चित दूरी पर | वस्तु वाली ओर, O व F1 के बीच | छोटा | आभासी व सीधा |
अवतल लेंस भी उत्तल दर्पण की तरह एक-स्वभावी है — प्रतिबिंब हमेशा वस्तु वाली ओर, फोकस व प्रकाशिक केंद्र के बीच, आभासी, सीधा व छोटा बनता है। अवतल दर्पण ↔ उत्तल लेंस और उत्तल दर्पण ↔ अवतल लेंस — ये दो जोड़ियाँ याद रखीं तो चारों तालिकाएँ दो में समा जाएँगी।
लेंस सूत्र, आवर्धन व लेंस की शक्ति
लेंस सूत्र: 1/v − 1/u = 1/f | आवर्धन: m = v/u = h′/h | लेंस की शक्ति: P = 1/f (जब f मीटर में हो) = 100/f (जब f cm में हो); इकाई — डायोप्टर (D)
लेंस में भी चिन्ह परिपाटी वही है — दूरियाँ प्रकाशिक केंद्र O से, वस्तु बाईं ओर इसलिए u ऋणात्मक, उत्तल लेंस का f धनात्मक (+) व अवतल का ऋणात्मक (−)। लेंस के आवर्धन में m = v/u होता है (दर्पण वाले −v/u से ऋण चिन्ह गायब है) — m ऋणात्मक आए तो प्रतिबिंब उल्टा व वास्तविक, धनात्मक आए तो सीधा व आभासी।
लेंस की शक्ति का अर्थ है — लेंस किरणों को कितना अधिक मोड़ सकता है। फोकस दूरी जितनी छोटी, लेंस उतना शक्तिशाली (अधिक मोड़ने वाला) और P उतना अधिक। 1 मीटर फोकस दूरी वाले लेंस की शक्ति 1 डायोप्टर होती है — यही 1 D की परिभाषा है। चश्मे के नंबर (+2.5 D आदि) यही शक्ति है: धनात्मक नंबर = उत्तल (अभिसारी) लेंस, ऋणात्मक नंबर = अवतल (अपसारी) लेंस। डॉक्टर के पर्चे वाले प्रश्न इसी पर बनते हैं, आगे हल किए हुए मिलेंगे।
📌 याद रखें: शक्ति निकालते समय f मीटर में होना चाहिए। f cm में दिया हो तो या तो उसे 100 से भाग देकर मीटर बनाएँ या सीधे P = 100/f(cm) लगा दें — दोनों से एक ही उत्तर आएगा। इकाई D लिखना न भूलें!
एक साँस में समझें — लेंस में प्रकाश आर-पार जाता है; उत्तल अभिसारी (+f, +P) व अवतल अपसारी (−f, −P) होता है; लेंस सूत्र में ऋण चिन्ह और m = v/u होता है।
📘 पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (InText Questions)
ये वे प्रश्न हैं जो NCERT किताब के अनुच्छेदों के बीच-बीच में दिए गए हैं। इस अध्याय में कुल 14 InText प्रश्न हैं, जो चार set में बँटे हैं — पहला set गोलीय दर्पणों की शब्दावली पर, दूसरा दर्पण सूत्र पर, तीसरा अपवर्तनांक पर और चौथा लेंस की शक्ति पर। Board में ये प्रश्न वैसे-के-वैसे पूछ लिए जाते हैं, इसलिए इन्हें सबसे पहले तैयार कीजिए। हर numerical में हमने वही क्रम रखा है — दिया गया (चिन्हों सहित) → सूत्र → मान रखना → गणना → उत्तर। परीक्षा में भी यही क्रम अपनाइए, पूरे अंक मिलेंगे।
(क) अनुच्छेद 10.2 पर आधारित प्रश्न – Set 1 (कुल 4 प्रश्न)
प्रश्न 1. अवतल दर्पण के मुख्य फोकस की परिभाषा लिखिए।
हल:
मुख्य अक्ष के समांतर आती हुई प्रकाश की किरणें अवतल दर्पण से परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष पर स्थित जिस बिंदु पर वास्तव में मिलती (अभिसारित होती) हैं, उस बिंदु को अवतल दर्पण का मुख्य फोकस (F) कहते हैं।
उत्तर: मुख्य अक्ष के समांतर किरणें परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के जिस बिंदु पर मिलती हैं, वही अवतल दर्पण का मुख्य फोकस है। (यह दर्पण के सामने होता है, इसलिए इसे वास्तविक फोकस कहते हैं।)
प्रश्न 2. किसी गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या 20 cm है। इसकी फोकस दूरी कितनी होगी?
हल:
दिया गया: वक्रता त्रिज्या R = 20 cm; फोकस दूरी f = ?
सूत्र: R = 2f, अर्थात f = R/2
मान रखना व गणना: f = 20/2 = 10 cm
उत्तर: दर्पण की फोकस दूरी 10 cm है। (जाँच: f हमेशा R की आधी होती है — 20 की आधी 10, सही है। यदि दर्पण अवतल हो तो चिन्ह सहित f = −10 cm और उत्तल हो तो f = +10 cm लिखा जाएगा।)
प्रश्न 3. उस दर्पण का नाम बताइए जो किसी वस्तु का सीधा तथा आवर्धित (बड़ा) प्रतिबिंब बना सके।
हल:
सीधा प्रतिबिंब केवल आभासी प्रतिबिंब होता है और बड़ा प्रतिबिंब देने की क्षमता उत्तल दर्पण में नहीं है (वह हमेशा छोटा बनाता है)। अवतल दर्पण ही एकमात्र ऐसा दर्पण है जो — वस्तु को ध्रुव व फोकस के बीच रखने पर — सीधा व बड़ा प्रतिबिंब बनाता है।
उत्तर: अवतल दर्पण — जब वस्तु उसके ध्रुव (P) व मुख्य फोकस (F) के बीच रखी हो। (यही कारण है कि शेविंग व डेंटिस्ट के दर्पण अवतल होते हैं।)
प्रश्न 4. हम वाहनों में पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में उत्तल दर्पण को क्यों वरीयता देते हैं?
हल:
उत्तल दर्पण के दो गुण यहाँ काम आते हैं। पहला — यह सदैव सीधा (व आभासी) प्रतिबिंब बनाता है, इसलिए चालक को पीछे का दृश्य बिना उलझन के, सही दिशा में दिखता है। दूसरा — बाहर की ओर उभरा होने के कारण इसका दृष्टि-क्षेत्र बहुत विस्तृत होता है, अर्थात एक ही छोटे-से शीशे में पीछे की सड़क का बहुत बड़ा भाग समा जाता है। प्रतिबिंब छोटा अवश्य बनता है, पर सुरक्षा की दृष्टि से विस्तृत व सीधा दृश्य ही अधिक महत्वपूर्ण है।
उत्तर: उत्तल दर्पण (i) सदैव सीधा प्रतिबिंब देता है और (ii) विस्तृत दृष्टि-क्षेत्र के कारण चालक को पीछे के यातायात का बहुत बड़ा भाग देखने में सक्षम बनाता है — इसलिए वाहनों में पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में उत्तल दर्पण को वरीयता दी जाती है।
(ख) अनुच्छेद 10.2.3 पर आधारित प्रश्न – Set 2 (कुल 2 प्रश्न)
प्रश्न 1. उस उत्तल दर्पण की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी वक्रता त्रिज्या 32 cm है।
हल:
दिया गया: दर्पण उत्तल है, इसलिए चिन्ह परिपाटी से R = +32 cm; f = ?
सूत्र: f = R/2
मान रखना व गणना: f = (+32)/2 = +16 cm
उत्तर: उत्तल दर्पण की फोकस दूरी +16 cm है। (जाँच: धनात्मक चिन्ह सही है, क्योंकि उत्तल दर्पण का फोकस दर्पण के पीछे होता है।)
प्रश्न 2. कोई अवतल दर्पण अपने सामने 10 cm दूरी पर रखी वस्तु का तीन गुणा आवर्धित (बड़ा) वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है। प्रतिबिंब दर्पण से कितनी दूरी पर है?
हल:
दिया गया: वस्तु दूरी u = −10 cm (वस्तु दर्पण के सामने है, इसलिए ऋणात्मक)। प्रतिबिंब वास्तविक है व तीन गुणा बड़ा है — वास्तविक प्रतिबिंब उल्टा होता है, इसलिए आवर्धन m = −3; प्रतिबिंब दूरी v = ?
सूत्र: m = −v/u
मान रखना व गणना: −3 = −v/(−10) → −3 = v/10 → v = −30 cm
उत्तर: प्रतिबिंब दर्पण के सामने 30 cm दूरी पर बनेगा। (जाँच: v ऋणात्मक आया — अर्थात प्रतिबिंब दर्पण के सामने बना, जो वास्तविक प्रतिबिंब के लिए सही है; दूरी वस्तु की तीन गुणा है, जो तीन गुणा आवर्धन से मेल खाती है। ध्यान दें — यह अवतल दर्पण है, उत्तल नहीं; उत्तल दर्पण वास्तविक प्रतिबिंब बना ही नहीं सकता।)
(ग) अनुच्छेद 10.3 पर आधारित प्रश्न – Set 3 (कुल 5 प्रश्न)
प्रश्न 1. प्रकाश की कोई किरण वायु से तिरछी होकर जल में प्रवेश करती है। क्या प्रकाश किरण अभिलंब की ओर झुकेगी या अभिलंब से दूर हटेगी? क्यों?
हल:
वायु प्रकाशतः विरल माध्यम है (n ≈ 1.0003) और जल उससे सघन माध्यम है (n = 1.33)। सघन माध्यम में प्रवेश करते ही प्रकाश की चाल घट जाती है और चाल घटने पर किरण अभिलंब की ओर मुड़ जाती है।
उत्तर: प्रकाश किरण अभिलंब की ओर झुकेगी, क्योंकि वायु से जल (विरल से सघन माध्यम) में जाने पर प्रकाश की चाल कम हो जाती है।
प्रश्न 2. प्रकाश वायु से 1.50 अपवर्तनांक वाले काँच में प्रवेश करता है। काँच में प्रकाश की चाल कितनी होगी? निर्वात में प्रकाश की चाल 3 × 108 m/s है।
हल:
दिया गया: काँच का अपवर्तनांक n = 1.50; निर्वात में प्रकाश की चाल c = 3 × 108 m/s; काँच में चाल v = ?
सूत्र: n = c/v, अर्थात v = c/n
मान रखना व गणना: v = (3 × 108) / 1.50 = 2 × 108 m/s
उत्तर: काँच में प्रकाश की चाल 2 × 108 m/s है। (जाँच: n > 1 है, इसलिए v, c से छोटा आना ही चाहिए — 2 × 108 < 3 × 108, सही है।)
प्रश्न 3. सारणी (NCERT की माध्यमों के अपवर्तनांक वाली तालिका) से उस माध्यम का नाम बताइए जो प्रकाशतः सबसे अधिक सघन है। उस माध्यम का नाम भी बताइए जो प्रकाशतः सबसे अधिक विरल है।
हल:
प्रकाशतः सघनता का माप अपवर्तनांक है — जिसका n सबसे अधिक, वह सबसे सघन; जिसका n सबसे कम, वह सबसे विरल। तालिका में सबसे बड़ा मान हीरे का (2.42) है और सबसे छोटा मान वायु का (1.0003) है।
उत्तर: प्रकाशतः सबसे अधिक सघन माध्यम — हीरा (n = 2.42); प्रकाशतः सबसे अधिक विरल माध्यम — वायु (n = 1.0003)।
प्रश्न 4. आपको मिट्टी का तेल (किरोसिन), तारपीन का तेल तथा जल दिए गए हैं। इनमें से किसमें प्रकाश सबसे तेज़ी से चलता है? (तालिका: किरोसिन n = 1.44, तारपीन n = 1.47, जल n = 1.33)
हल:
चाल v = c/n होती है — अर्थात n जितना कम, चाल उतनी अधिक। तीनों में जल का अपवर्तनांक सबसे कम (1.33) है, किरसोिन का 1.44 व तारपीन का सबसे अधिक 1.47 है। इसलिए चाल का क्रम होगा — जल (लगभग 2.26 × 108 m/s) > किरोसिन > तारपीन।
उत्तर: प्रकाश जल में सबसे तेज़ी से चलता है, क्योंकि दिए गए तीनों माध्यमों में जल का अपवर्तनांक सबसे कम (1.33) है। (ध्यान दें — तर्क “n अधिक इसलिए तेज़” बिल्कुल उल्टा होगा; n अधिक होने पर चाल घटती है।)
प्रश्न 5. हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है। इस कथन का क्या अभिप्राय है?
हल:
अपवर्तनांक n = c/v का अर्थ है — निर्वात में प्रकाश की चाल और हीरे में प्रकाश की चाल का अनुपात 2.42 है। अर्थात हीरे में प्रकाश, निर्वात की तुलना में 2.42 गुणा धीमा चलता है: v = (3 × 108) / 2.42 ≈ 1.24 × 108 m/s।
उत्तर: इसका अभिप्राय है कि निर्वात में प्रकाश की चाल, हीरे में प्रकाश की चाल की 2.42 गुणा है — हीरे में प्रकाश की चाल केवल लगभग 1.24 × 108 m/s रह जाती है। यही कारण है कि हीरा प्रकाशतः सबसे सघन माध्यमों में से एक है।
(घ) अनुच्छेद 10.3.6 पर आधारित प्रश्न – Set 4 (कुल 3 प्रश्न)
प्रश्न 1. किसी लेंस की 1 डायोप्टर शक्ति की परिभाषा लिखिए।
हल:
उत्तर: 1 मीटर फोकस दूरी वाले लेंस की शक्ति को 1 डायोप्टर (1 D) कहते हैं। अर्थात यदि f = 1 m हो, तो P = 1/f = 1/1 = 1 D। डायोप्टर लेंस की शक्ति की SI इकाई है।
प्रश्न 2. कोई उत्तल लेंस किसी सुई का वास्तविक तथा उल्टा प्रतिबिंब उस लेंस से 50 cm की दूरी पर बनाता है। यदि प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बराबर है, तो सुई लेंस के सामने कहाँ रखी है? लेंस की शक्ति भी ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया गया: प्रतिबिंब वास्तविक व उल्टा है और लेंस के दूसरी ओर बना है, इसलिए v = +50 cm। प्रतिबिंब व वस्तु का आकार बराबर है और प्रतिबिंब उल्टा है, इसलिए आवर्धन m = −1; वस्तु दूरी u = ?, शक्ति P = ?
चरण 1 (u ज्ञात करना): लेंस के लिए m = v/u → −1 = 50/u → u = −50 cm। अर्थात सुई लेंस के सामने 50 cm दूरी पर रखी है।
चरण 2 (f ज्ञात करना): लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f → 1/50 − 1/(−50) = 1/50 + 1/50 = 2/50 = 1/25 → f = +25 cm = 0.25 m। (समझ की बात — बराबर आकार का वास्तविक प्रतिबिंब तभी बनता है जब वस्तु 2F पर हो; यहाँ 2f = 50 cm, इसलिए f = 25 cm — उत्तर मेल खाता है।)
चरण 3 (शक्ति): P = 1/f (मीटर में) = 1/0.25 = +4 D। अथवा P = 100/f(cm) = 100/25 = +4 D।
उत्तर: सुई लेंस के सामने 50 cm दूरी पर (अर्थात 2F पर) रखी है और लेंस की शक्ति +4 D है। (जाँच: धनात्मक शक्ति सही है, क्योंकि लेंस उत्तल (अभिसारी) है।)
प्रश्न 3. 2 m फोकस दूरी वाले अवतल लेंस की शक्ति ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया गया: लेंस अवतल है, इसलिए f = −2 m; P = ?
सूत्र: P = 1/f (f मीटर में)
मान रखना व गणना: P = 1/(−2) = −0.5 D
उत्तर: अवतल लेंस की शक्ति −0.5 D है। (जाँच: अवतल लेंस अपसारी होता है, इसलिए उसकी शक्ति ऋणात्मक ही आनी चाहिए — केवल “0.5 D” लिखना अधूरा उत्तर होगा, ऋण चिन्ह अनिवार्य है।)
इस भाग में हमने सीखा — InText के 14 प्रश्नों में सूत्र केवल तीन हैं (R = 2f, m = −v/u व m = v/u, n = c/v और P = 1/f), असली खेल चिन्हों का है; चिन्ह सही लगे तो हर उत्तर अपने-आप सही बनता है।
📗 NCERT उदाहरण (Examples)
इस अध्याय में NCERT के क्रमांकित उदाहरण कुल चार हैं — उदाहरण 10.1 से 10.4 तक। इनमें पहले दो उदाहरण दर्पणों पर हैं (उदाहरण 10.1 – उत्तल दर्पण, उदाहरण 10.2 – अवतल दर्पण) और अगले दो उदाहरण लेंसों पर हैं (उदाहरण 10.3 – अवतल लेंस, उदाहरण 10.4 – उत्तल लेंस)। चारों को नीचे चरण-दर-चरण, चिन्हों सहित हल किया गया है — परीक्षा के numericals इन्हीं की छाया होते हैं, इसलिए हर चरण ध्यान से देखिए। इनके बाद अभ्यास के लिए दो अतिरिक्त कार्यित उदाहरण (A व B) भी दिए गए हैं — वे NCERT के क्रमांकित उदाहरण नहीं हैं, इसलिए उन्हें उदाहरण 10.1–10.4 से अलग, स्पष्ट label के साथ रखा गया है।
उदाहरण 10.1 (NCERT). किसी वाहन में पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में प्रयुक्त उत्तल दर्पण की वक्रता त्रिज्या 3.00 m है। यदि कोई बस इस दर्पण से 5.00 m की दूरी पर स्थित है, तो प्रतिबिंब की स्थिति, प्रकृति तथा आवर्धन ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया गया: दर्पण उत्तल है, इसलिए वक्रता त्रिज्या R = +3.00 m; वस्तु (बस) की दूरी u = −5.00 m (वस्तु दर्पण के सामने है); v = ?, m = ?
पहला चरण (फोकस दूरी): f = R/2 = +3.00/2 = +1.50 m
सूत्र: दर्पण सूत्र — 1/v + 1/u = 1/f, अर्थात 1/v = 1/f − 1/u
मान रखना व गणना: 1/v = 1/(+1.50) − 1/(−5.00) = 0.667 + 0.200 = 0.867 → v = 1/0.867 = +1.15 m
आवर्धन: m = −v/u = −(+1.15)/(−5.00) = +0.23
उत्तर: प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 1.15 m दूरी पर बनेगा; प्रकृति आभासी व सीधी होगी और आकार वस्तु का केवल 0.23 गुणा (बहुत छोटा) होगा। (जाँच: v धनात्मक → प्रतिबिंब दर्पण के पीछे — उत्तल दर्पण के लिए सही; m धनात्मक व 1 से कम → सीधा व छोटा — सही। बस असल में जितनी दूर है, प्रतिबिंब उससे पास प्रतीत होता है — पश्च-दृश्य दर्पण की चेतावनी का कारण यही है।)
उदाहरण 10.2 (NCERT). 4.0 cm ऊँचाई की कोई वस्तु 15 cm फोकस दूरी वाले अवतल दर्पण के सामने 25 cm दूरी पर रखी है। प्रतिबिंब की स्थिति, प्रकृति तथा आकार ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया गया: दर्पण अवतल है, इसलिए f = −15 cm; u = −25 cm; वस्तु की ऊँचाई h = +4.0 cm; v = ?, h′ = ?
सूत्र: दर्पण सूत्र — 1/v + 1/u = 1/f, अर्थात 1/v = 1/f − 1/u
मान रखना व गणना: 1/v = 1/(−15) − 1/(−25) = −1/15 + 1/25 = (−5 + 3)/75 = −2/75 → v = −37.5 cm
आवर्धन: m = −v/u = −(−37.5)/(−25) = −1.5; अतः h′ = m × h = −1.5 × 4.0 = −6.0 cm
उत्तर: प्रतिबिंब दर्पण के सामने 37.5 cm दूरी पर बनेगा; उसका आकार 6.0 cm होगा और प्रकृति वास्तविक, उल्टी व आवर्धित (1.5 गुणा बड़ी) होगी। (जाँच: v ऋणात्मक → प्रतिबिंब सामने, वास्तविक — सही; h′ ऋणात्मक → उल्टा — सही; वस्तु F (−15 cm) व C (−30 cm) के बीच थी, इसलिए प्रतिबिंब C से परे व बड़ा बनना ही चाहिए था — v = −37.5 cm वही कहता है।)
उदाहरण 10.3 (NCERT). 15 cm फोकस दूरी का कोई अवतल लेंस अपने से 10 cm दूरी पर प्रतिबिंब बनाता है। वस्तु को लेंस से कितनी दूरी पर रखा गया है? आवर्धन भी ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया गया: लेंस अवतल है, इसलिए f = −15 cm। अवतल लेंस का प्रतिबिंब सदैव वस्तु वाली ओर ही बनता है, इसलिए v = −10 cm; u = ?, m = ?
सूत्र: लेंस सूत्र — 1/v − 1/u = 1/f, अर्थात 1/u = 1/v − 1/f
मान रखना व गणना: 1/u = 1/(−10) − 1/(−15) = −1/10 + 1/15 = (−3 + 2)/30 = −1/30 → u = −30 cm
आवर्धन: m = v/u = (−10)/(−30) = +0.33
उत्तर: वस्तु लेंस के सामने 30 cm दूरी पर रखनी होगी। प्रतिबिंब लेंस से 10 cm दूरी पर, वस्तु वाली ओर ही बनेगा; प्रकृति आभासी व सीधी होगी और आकार वस्तु का 0.33 गुणा (छोटा) होगा। (जाँच: u ऋणात्मक → वस्तु लेंस के सामने है — सही; m धनात्मक → सीधा व आभासी — अवतल लेंस की पहचान यही है; प्रतिबिंब (10 cm) वस्तु (30 cm) से पास व छोटा है — सही।)
उदाहरण 10.4 (NCERT). 2.0 cm ऊँचाई की कोई वस्तु 10 cm फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस के सामने 15 cm दूरी पर रखी है। प्रतिबिंब की स्थिति, प्रकृति तथा आकार ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया गया: लेंस उत्तल है, इसलिए f = +10 cm; u = −15 cm; वस्तु की ऊँचाई h = +2.0 cm; v = ?, h′ = ?
सूत्र: लेंस सूत्र — 1/v − 1/u = 1/f, अर्थात 1/v = 1/f + 1/u
मान रखना व गणना: 1/v = 1/(+10) + 1/(−15) = 1/10 − 1/15 = (3 − 2)/30 = 1/30 → v = +30 cm
आवर्धन: m = v/u = (+30)/(−15) = −2; अतः h′ = m × h = −2 × 2.0 = −4.0 cm
उत्तर: प्रतिबिंब लेंस के दूसरी ओर 30 cm दूरी पर बनेगा; उसका आकार 4.0 cm होगा और प्रकृति वास्तविक, उल्टी व 2 गुणा आवर्धित होगी। (जाँच: v धनात्मक → प्रतिबिंब दूसरी ओर, वास्तविक — सही; h′ ऋणात्मक → उल्टा — सही; वस्तु F (10 cm) व 2F (20 cm) के बीच थी, इसलिए प्रतिबिंब 2F से परे व बड़ा बनना ही चाहिए था — v = +30 cm वही कहता है।)
अतिरिक्त कार्यित उदाहरण (NCERT के क्रमांकित उदाहरण नहीं – केवल अभ्यास के लिए)
नीचे के दोनों उदाहरण NCERT की किताब में क्रमांकित उदाहरण के रूप में नहीं दिए गए हैं — इन्हें केवल अभ्यास के लिए, वही सूत्र व चिन्ह परिपाटी अपनाकर हल किया गया है, ताकि परीक्षा में दोहराए गए numericals का स्वभाव स्पष्ट हो जाए।
उदाहरण A. 4 cm ऊँचाई की कोई वस्तु 15 cm फोकस दूरी वाले अवतल दर्पण के सामने 20 cm दूरी पर रखी है। प्रतिबिंब की स्थिति, प्रकृति तथा आकार ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया गया: दर्पण अवतल है, इसलिए f = −15 cm; u = −20 cm; वस्तु की ऊँचाई h = +4 cm; v = ?, h′ = ?
सूत्र: दर्पण सूत्र — 1/v + 1/u = 1/f, अर्थात 1/v = 1/f − 1/u
मान रखना व गणना: 1/v = 1/(−15) − 1/(−20) = −1/15 + 1/20 = (−4 + 3)/60 = −1/60 → v = −60 cm
आवर्धन: m = −v/u = −(−60)/(−20) = −3; अतः h′ = m × h = −3 × 4 = −12 cm
उत्तर: प्रतिबिंब दर्पण के सामने 60 cm दूरी पर बनेगा; उसका आकार 12 cm होगा और प्रकृति वास्तविक, उल्टी व 3 गुणा आवर्धित होगी। (जाँच: v ऋणात्मक → प्रतिबिंब सामने, वास्तविक — सही; h′ ऋणात्मक → उल्टा — सही; वस्तु F (−15 cm) व C (−30 cm) के बीच थी, इसलिए प्रतिबिंब C से परे व बड़ा बनना ही चाहिए था — v = −60 cm वही कहता है।)
उदाहरण B. (a) 20 cm फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस की शक्ति ज्ञात कीजिए। (b) −20 cm फोकस दूरी वाले अवतल लेंस की शक्ति ज्ञात कीजिए।
हल:
(a) उत्तल लेंस: f = +20 cm (उत्तल → धनात्मक); शक्ति P = 100/f (cm में) = 100/20 = +5 D
(b) अवतल लेंस: f = −20 cm (अवतल → ऋणात्मक); शक्ति P = 100/f (cm में) = 100/(−20) = −5 D
उत्तर: (a) उत्तल लेंस की शक्ति +5 D है — धनात्मक चिन्ह बताता है कि लेंस अभिसारी है। (b) अवतल लेंस की शक्ति −5 D है — ऋणात्मक चिन्ह बताता है कि लेंस अपसारी है। (जाँच: f के चिन्ह से ही शक्ति का चिन्ह तय हो जाता है — दोनों में फोकस दूरी की मात्रा बराबर है, इसलिए शक्तियाँ परिमाण में बराबर व चिन्ह में विपरीत हैं — सही।)
इस भाग में हमने सीखा — उदाहरण 10.1–10.4 के चारों चरणों में तीन जाँचें हर बार लगती हैं: चिन्ह सही हैं या नहीं, प्रतिबिंब की प्रकृति सूत्र से मिल रही है या नहीं, और स्थिति दर्पण/लेंस की तालिका से मिल रही है या नहीं। ये तीन जाँचें हर numerical को स्वयं-जाँचने योग्य बना देती हैं।
✏️ प्रश्नावली (Exercise) – सभी 17 प्रश्नों के हल
प्रश्नावली के कुल 17 प्रश्न हैं। पहले छह प्रश्न वस्तुनिष्ठ (MCQ) प्रकार के हैं (Q1–Q6), जिनके सही विकल्प चिन्हित उत्तर-सहित दिए गए हैं; शेष प्रश्न अवधारणात्मक व numerical हैं (Q7–Q17)। हर उत्तर में तर्क, सूत्र व जाँच उसी तरह दी गई है जैसे NCERT उदाहरणों में — इसलिए उत्तर पढ़ने के साथ-साथ उसे दोहराना ही तैयारी है।
प्रश्न 1. निम्न में से कौन-सा पदार्थ लेंस बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता है?
(a) जल (b) काँच (c) प्लास्टिक (d) मिट्टी
हल: लेंस बनाने के लिए माध्यम पारदर्शी होना आवश्यक है, तभी प्रकाश उसमें से अपवर्तित होकर प्रतिबिंब बना सकेगा। जल, काँच व प्लास्टिक — तीनों पारदर्शी हैं (जल-लेंस व प्लास्टिक-लेंस वास्तव में उपयोग में भी आते हैं), परंतु मिट्टी अपारदर्शी है — वह प्रकाश को आर-पार जाने ही नहीं देगी, इसलिए उससे लेंस बनाना असंभव है।
उत्तर: (d) मिट्टी
प्रश्न 2. किसी अवतल दर्पण द्वारा किसी बिंब का आभासी, सीधा तथा आवर्धित (बड़ा) प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए बिंब को दर्पण के सामने कहाँ रखा जाए?
(a) फोकस व वक्रता केंद्र के बीच (b) वक्रता केंद्र पर (c) वक्रता केंद्र से परे (d) ध्रुव व फोकस के बीच
हल: अवतल दर्पण की प्रतिबिंब-तालिका से — केवल एक ही स्थिति में प्रतिबिंब आभासी व सीधा बनता है, और वह है वस्तु का ध्रुव (P) व फोकस (F) के बीच होना; तभी प्रतिबिंब दर्पण के पीछे, सीधा व बड़ा बनता है। अन्य सभी स्थितियों (F व C के बीच, C पर, C से परे) में प्रतिबिंब वास्तविक व उल्टा बनता है — इसलिए (a), (b) व (c) गलत हैं।
उत्तर: (d) ध्रुव व फोकस के बीच
प्रश्न 3. किसी बिंब का वास्तविक तथा समान आकार का प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए बिंब को उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखा जाए?
(a) लेंस के मुख्य फोकस पर (b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर (c) अनंत पर (d) लेंस के प्रकाशिक केंद्र व उसके मुख्य फोकस के बीच
हल: उत्तल लेंस की प्रतिबिंब-तालिका से — वस्तु 2F1 पर रखने पर प्रतिबिंब दूसरी ओर 2F2 पर, वस्तु के बराबर, वास्तविक व उल्टा बनता है। विकल्प (a) में प्रतिबिंब अनंत पर बनता है, (c) में फोकस पर बिंदु-आकार, और (d) में आभासी व बड़ा — अतः तीनों गलत हैं। फोकस दूरी की दोगुनी दूरी ही 2F है।
उत्तर: (b) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर
प्रश्न 4. किसी गोलीय दर्पण तथा किसी पतले गोलीय लेंस, दोनों की फोकस दूरी −15 cm है। दर्पण तथा लेंस संभवतः हैं —
(a) दोनों अवतल (b) दोनों उत्तल (c) दर्पण अवतल तथा लेंस उत्तल (d) दर्पण उत्तल तथा लेंस अवतल
हल: चिन्ह परिपाटी से — अवतल दर्पण की फोकस दूरी ऋणात्मक होती है (F सामने), जबकि उत्तल दर्पण की धनात्मक (F पीछे)। लेंसों में — अवतल लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक (अपसारी) व उत्तल लेंस की धनात्मक (अभिसारी) होती है। यहाँ दोनों की f = −15 cm (ऋणात्मक) है — अतः दर्पण अवतल है और लेंस भी अवतल है।
उत्तर: (a) दोनों अवतल
प्रश्न 5. किसी दर्पण से आप चाहे कितनी ही दूरी पर खड़े हों, आपका प्रतिबिंब सदैव सीधा प्रतीत होता है। संभवतः दर्पण है —
(a) केवल समतल (b) केवल अवतल (c) केवल उत्तल (d) या तो समतल अथवा उत्तल
हल: अवतल दर्पण में प्रतिबिंब केवल P–F के बीच रखी वस्तु का ही सीधा बनता है; जैसे-जैसे दूर जाइए, प्रतिबिंब उल्टा व वास्तविक हो जाता है — इसलिए (b) गलत है। समतल दर्पण में प्रतिबिंब हर दूरी पर सीधा बनता है, और उत्तल दर्पण में भी हर दूरी पर सीधा (व आभासी) बनता है — अतः दोनों संभव हैं। केवल (a) या केवल (c) अधूरा है, इसलिए पूर्ण उत्तर (d) है।
उत्तर: (d) या तो समतल अथवा उत्तल
प्रश्न 6. किसी शब्दकोश (dictionary) में पाए गए छोटे अक्षरों को पढ़ते समय आप निम्न में से कौन-सा लेंस पसंद करेंगे?
(a) 50 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस (b) 50 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस (c) 5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस (d) 5 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस
हल: छोटे अक्षर पढ़ने के लिए आवर्धक (magnifying glass) चाहिए — अर्थात उत्तल लेंस, क्योंकि वही वस्तु को F व O के बीच रखकर बड़ा व सीधा प्रतिबिंब देता है। अवतल लेंस सदैव छोटा प्रतिबिंब देता है — इसलिए (b) व (d) गलत हैं। उत्तल लेंसों में — फोकस दूरी जितनी कम, आवर्धन उतना अधिक होता है। 5 cm वाले उत्तल लेंस से 50 cm वाले की तुलना में लगभग दस गुणा अधिक आवर्धन मिलेगा।
उत्तर: (c) 5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
प्रश्न 7. 15 cm फोकस दूरी के किसी अवतल दर्पण का उपयोग करते हुए हम किसी बिंब का सीधा (erect) प्रतिबिंब बनाना चाहते हैं। बिंब का दर्पण से दूरी का परिसर (range) क्या होना चाहिए? प्रतिबिंब की प्रकृति कैसी होगी? प्रतिबिंब बिंब से बड़ा होगा अथवा छोटा? इस स्थिति में प्रतिबिंब बनने को दर्शाने के लिए एक किरण आरेख खींचिए।
हल:
दिया गया: अवतल दर्पण की फोकस दूरी f = −15 cm (अवतल → ऋणात्मक)।
परिसर (range): अवतल दर्पण का प्रतिबिंब केवल एक ही स्थिति में सीधा बनता है — जब वस्तु ध्रुव (P) व फोकस (F) के बीच हो। अतः वस्तु की दूरी 0 से 15 cm के बीच होनी चाहिए (अर्थात वस्तु दर्पण से 15 cm से कम दूरी पर हो)। यदि वस्तु F पर या F से आगे चली जाए, तो प्रतिबिंब उल्टा व वास्तविक हो जाएगा।
प्रकृति व आकार: इस स्थिति में प्रतिबिंब आभासी (virtual) होगा — क्योंकि किरणें वास्तव में मिलती नहीं, बल्कि पीछे बढ़ाने पर मिलती हुई प्रतीत होती हैं। प्रतिबिंब सीधा और वस्तु से बड़ा (आवर्धित) होगा।
किरण आरेख (शब्दों में): दर्पण के सामने ध्रुव P व फोकस F के बीच एक तीर (वस्तु) खड़ी कीजिए। उससे (i) एक किरण मुख्य अक्ष के समांतर भेजिए — परावर्तन के बाद वह F से होकर जाएगी; (ii) दूसरी किरण F से होकर भेजिए — परावर्तन के बाद वह मुख्य अक्ष के समांतर हो जाएगी। दोनों परावर्तित किरणें सामने फैलती हुई जाती हैं (मिलती नहीं) — उन्हें पीछे बढ़ाने पर वे दर्पण के पीछे मिलती हैं — वही बिंदु प्रतिबिंब का शीर्ष है, जो वस्तु से ऊँचा व सीधा है।
उत्तर: वस्तु दर्पण से 0–15 cm की दूरी पर (ध्रुव व फोकस के बीच) रखी जाए; प्रतिबिंब आभासी, सीधा व आवर्धित होगा।
प्रश्न 8. निम्न स्थितियों में प्रयुक्त दर्पण का प्रकार बताइए —
(a) किसी कार का अग्र-दीप (हैडलाइट) (b) किसी वाहन का पश्च-दृश्य दर्पण (side/rear-view mirror) (c) सौर भट्टी (solar furnace)
हल:
(a) कार की हैडलाइट — अवतल दर्पण: बल्ब को अवतल परावर्तक के फोकस पर रखा जाता है, जिससे परावर्तित किरणें समांतर किरण-पुंज बनकर दूर तक जाती हैं — यही तेज़ व दूरगामी प्रकाश देता है।
(b) वाहन का पश्च-दृश्य दर्पण — उत्तल दर्पण: उत्तल दर्पण का दृष्टि-क्षेत्र बहुत व्यापक (wide) होता है और प्रतिबिंब सदैव सीधा बनता है, इसलिए पीछे का बड़ा क्षेत्र एक ही नज़र में दिख जाता है।
(c) सौर भट्टी — अवतल दर्पण: बड़ा अवतल दर्पण सूर्य की समांतर किरणों को अपने फोकस पर केंद्रित करता है, जिससे वहाँ अत्यधिक ताप उत्पन्न होता है — यही सौर भट्टी का सिद्धांत है।
उत्तर: (a) अवतल (b) उत्तल (c) अवतल
प्रश्न 9. किसी उत्तल लेंस का आधा भाग काले कागज़ से ढक दिया गया है। क्या यह लेंस किसी बिंब का पूरा प्रतिबिंब बना पाएगा? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
हल:
हाँ — पूरा प्रतिबिंब बनेगा, परंतु उसकी चमक (brightness) कम हो जाएगी।
कारण — लेंस का हर छोटा भाग वस्तु के प्रत्येक बिंदु से आने वाली किरणों को मोड़कर उसी प्रतिबिंब-बिंदु पर मिलाता है। अर्थात पूरा प्रतिबिंब लेंस के हर भाग से बनता है, किसी एक भाग से नहीं। आधा भाग ढकने से किरणों की संख्या आधी रह जाएगी — इसलिए प्रतिबिंब की तीव्रता/चमक कम होगी, परंतु प्रतिबिंब पूरा ही बनेगा — न कि आधा।
उत्तर: हाँ, पूरा प्रतिबिंब बनेगा; केवल चमक (brightness) कम हो जाएगी।
प्रश्न 10. 5 cm ऊँचाई की कोई वस्तु 10 cm फोकस दूरी वाले अभिसारी (converging) लेंस से 25 cm दूरी पर रखी है। प्रतिबिंब की स्थिति, आकार तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया गया: लेंस अभिसारी (उत्तल) है, इसलिए f = +10 cm; वस्तु दूरी u = −25 cm; वस्तु की ऊँचाई h = +5 cm; v = ?, m = ?, h′ = ?
सूत्र: लेंस सूत्र — 1/v − 1/u = 1/f, अर्थात 1/v = 1/f + 1/u; आवर्धन m = v/u = h′/h
मान रखना व गणना: 1/v = 1/(+10) + 1/(−25) = 1/10 − 1/25 = (5 − 2)/50 = 3/50 → v = +16.67 cm
आवर्धन: m = v/u = (+16.67)/(−25) = −0.67; अतः h′ = m × h = −0.67 × 5 = −3.33 cm
जाँच: v धनात्मक → प्रतिबिंब लेंस के दूसरी ओर बना है — वास्तविक — सही; m ऋणात्मक → उल्टा — सही; |m| < 1 → छोटा — सही।
उत्तर: प्रतिबिंब लेंस से 16.67 cm दूर (दूसरी ओर) बनेगा; वास्तविक, उल्टा व छोटा (ऊँचाई 3.33 cm) होगा।
प्रश्न 11. 15 cm फोकस दूरी का कोई अवतल लेंस किसी बिंब का प्रतिबिंब अपने से 10 cm दूरी पर बनाता है। बिंब लेंस से कितनी दूरी पर स्थित है? किरण आरेख खींचिए।
हल:
दिया गया: लेंस अवतल है, इसलिए f = −15 cm। अवतल लेंस का प्रतिबिंब सदैव वस्तु वाली ओर बनता है, इसलिए v = −10 cm; u = ?
सूत्र: लेंस सूत्र — 1/v − 1/u = 1/f, अर्थात 1/u = 1/v − 1/f
मान रखना व गणना: 1/u = 1/(−10) − 1/(−15) = −1/10 + 1/15 = (−3 + 2)/30 = −1/30 → u = −30 cm
किरण आरेख (शब्दों में): लेंस की बाईं ओर मुख्य अक्ष पर 30 cm की दूरी पर वस्तु (तीर) रखिए। उससे एक किरण मुख्य अक्ष के समांतर भेजिए — अपवर्तन के बाद वह पीछे बढ़ाने पर बाईं ओर के फोकस F1 से आती प्रतीत होगी। दूसरी किरण प्रकाशिक केंद्र O से सीधी भेजिए — वह बिना मुड़े निकल जाएगी। पीछे बढ़ाई गई पहली किरण व दूसरी किरण लेंस की बाईं ओर 10 cm पर मिलती प्रतीत होंगी — वही आभासी, सीधा व छोटा प्रतिबिंब है।
उत्तर: बिंब लेंस से 30 cm की दूरी पर स्थित है।
प्रश्न 12. 15 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल दर्पण से कोई बिंब 10 cm दूरी पर रखा है। प्रतिबिंब की स्थिति तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया गया: दर्पण उत्तल है, इसलिए f = +15 cm; वस्तु दूरी u = −10 cm; v = ?, m = ?
सूत्र: दर्पण सूत्र — 1/v + 1/u = 1/f, अर्थात 1/v = 1/f − 1/u; आवर्धन m = −v/u
मान रखना व गणना: 1/v = 1/(+15) − 1/(−10) = 1/15 + 1/10 = (2 + 3)/30 = 5/30 = 1/6 → v = +6 cm
आवर्धन: m = −v/u = −(+6)/(−10) = +0.6
जाँच: v धनात्मक → प्रतिबिंब दर्पण के पीछे बना है — आभासी — सही; m धनात्मक → सीधा — सही; |m| < 1 → छोटा — सही। उत्तल दर्पण की तालिका भी यही कहती है — प्रतिबिंब P व F के बीच (6 cm, जो 15 cm से कम है) बनेगा।
उत्तर: प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 6 cm की दूरी पर बनेगा; आभासी, सीधा व छोटा (आवर्धन +0.6) होगा।
प्रश्न 13. समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन +1 है। इसका क्या अर्थ है?
हल:
आवर्धन m = h′/h = +1 है। अर्थात —
- |m| = 1 → प्रतिबिंब का आकार वस्तु के बराबर है (न बड़ा, न छोटा)।
- m धनात्मक (+) → प्रतिबिंब सीधा (erect) है — अर्थात वस्तु के समान दिशा में है।
- समतल दर्पण का प्रतिबिंब सदैव आभासी होता है — परदे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता, दर्पण के पीछे बनता है।
उत्तर: प्रतिबिंब वस्तु के समान आकार का, सीधा व आभासी होगा।
प्रश्न 14. 5.0 cm ऊँचाई की कोई वस्तु 30 cm वक्रता त्रिज्या वाले उत्तल दर्पण के सामने 20 cm दूरी पर रखी है। प्रतिबिंब की स्थिति, प्रकृति तथा आकार ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया गया: दर्पण उत्तल है, इसलिए वक्रता त्रिज्या R = +30 cm; फोकस दूरी f = R/2 = +15 cm; वस्तु दूरी u = −20 cm; वस्तु की ऊँचाई h = +5.0 cm; v = ?, m = ?, h′ = ?
सूत्र: दर्पण सूत्र — 1/v + 1/u = 1/f, अर्थात 1/v = 1/f − 1/u; आवर्धन m = −v/u = h′/h
मान रखना व गणना: 1/v = 1/(+15) − 1/(−20) = 1/15 + 1/20 = (4 + 3)/60 = 7/60 → v = +8.57 cm
आवर्धन: m = −v/u = −(+8.57)/(−20) = +0.43; अतः h′ = m × h = 0.43 × 5.0 = +2.14 cm
जाँच: v धनात्मक → प्रतिबिंब दर्पण के पीछे — आभासी — सही; m धनात्मक → सीधा — सही; |m| < 1 → छोटा — सही; v = 8.57 cm, जो P व F (15 cm) के बीच है — उत्तल दर्पण की तालिका से भी यही अपेक्षित है।
उत्तर: प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 8.57 cm की दूरी पर बनेगा; आभासी, सीधा व छोटा (ऊँचाई 2.14 cm) होगा।
प्रश्न 15. 7.0 cm ऊँचाई की कोई वस्तु 18 cm फोकस दूरी के किसी अवतल दर्पण के सामने 27 cm दूरी पर रखी है। परदा कितनी दूरी पर रखा जाए कि उस पर वस्तु का स्पष्ट फोकसित प्रतिबिंब प्राप्त हो सके? प्रतिबिंब का आकार तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
हल:
दिया गया: दर्पण अवतल है, इसलिए f = −18 cm; वस्तु दूरी u = −27 cm; वस्तु की ऊँचाई h = +7.0 cm; v = ?, m = ?, h′ = ?
सूत्र: दर्पण सूत्र — 1/v + 1/u = 1/f, अर्थात 1/v = 1/f − 1/u; आवर्धन m = −v/u = h′/h
मान रखना व गणना: 1/v = 1/(−18) − 1/(−27) = −1/18 + 1/27 = (−3 + 2)/54 = −1/54 → v = −54 cm
आवर्धन: m = −v/u = −(−54)/(−27) = −2; अतः h′ = m × h = −2 × 7.0 = −14 cm
जाँच: v ऋणात्मक → प्रतिबिंब दर्पण के सामने बना है — परदे पर लिया जा सकता है — वास्तविक — सही; m ऋणात्मक → उल्टा — सही; |m| = 2 → दो गुणा बड़ा — सही; वस्तु C (36 cm) व F (18 cm) के बीच थी, इसलिए प्रतिबिंब C से परे व बड़ा बनना ही चाहिए था — v = 54 cm वही कहता है।
उत्तर: परदा दर्पण के सामने 54 cm की दूरी पर रखा जाए; प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा व 2 गुणा बड़ा (ऊँचाई 14 cm) होगा।
प्रश्न 16. −2.0 D शक्ति वाले लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। यह किस प्रकार का लेंस है?
हल:
दिया गया: शक्ति P = −2.0 D; f = ?
सूत्र: P = 1/f (f मीटर में), अर्थात f = 1/P
मान रखना व गणना: f = 1/(−2.0) = −0.5 m (अर्थात −50 cm)
प्रकार: शक्ति ऋणात्मक है → फोकस दूरी ऋणात्मक → लेंस अपसारी (अवतल) लेंस है।
उत्तर: फोकस दूरी −0.5 m; यह अवतल (अपसारी) लेंस है।
प्रश्न 17. कोई डॉक्टर +1.5 D शक्ति का संशोधक लेंस निर्धारित करता है। लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। क्या निर्धारित लेंस अभिसारी है अथवा अपसारी?
हल:
दिया गया: शक्ति P = +1.5 D; f = ?
सूत्र: P = 1/f (f मीटर में), अर्थात f = 1/P
मान रखना व गणना: f = 1/(+1.5) = +0.67 m (अर्थात लगभग +67 cm)
प्रकार: शक्ति धनात्मक है → फोकस दूरी धनात्मक → लेंस अभिसारी (उत्तल) लेंस है। (यही कारण है कि दूरदृष्टि-दोष के चश्मों में उत्तल लेंस लगे होते हैं।)
उत्तर: फोकस दूरी +0.67 m; यह अभिसारी (उत्तल) लेंस है।
इस प्रश्नावली में हमने सीखा — पहले छह MCQ में विकल्पों की परीक्षा तालिका व चिन्ह परिपाटी से होती है, और शेष ग्यारह प्रश्नों में सूत्र केवल तीन हैं (दर्पण सूत्र, लेंस सूत्र व आवर्धन) — बस चिन्ह पहले, गणना बाद में; जो उत्तर तालिका से मेल न खाए, वह स्वयं ही गलत होने का संकेत दे देता है।
📖 Case Study – राहुल के घर की एक सुबह और चार दर्पण-लेंस
सुबह-सुबह राहुल ने देखा — उसके पिता शेविंग दर्पण के सामने खड़े होकर दाढ़ी बना रहे थे; चेहरा दर्पण के बहुत पास था और प्रतिबिंब बड़ा व सीधा दिख रहा था। फिर राहुल कार में बैठा — ड्राइवर के बगल वाले side mirror में पीछे की सड़क का एक बड़ा हिस्सा एक ही नज़र में दिख गया, हालाँकि गाड़ियाँ छोटी दिख रही थीं। रात को टॉर्च जलाई तो बल्ब के पीछे लगे परावर्तक से एक तेज़, दूर तक जाने वाली किरण-पुंज निकली। दादाजी ने अपने +2.0 D वाले चश्मे से अखबार पढ़ा। और नाश्ते में पानी के गिलास में डूबी चम्मच टूटी हुई दिखी। इन पाँचों दृश्यों के पीछे इसी अध्याय के नियम हैं — अब इन्हीं पर आधारित चार प्रश्न हल कीजिए।
प्रश्न 1. शेविंग के समय पिता का चेहरा दर्पण के बहुत पास था और प्रतिबिंब बड़ा व सीधा दिख रहा था। यह दर्पण कौन-सा था?
(A) समतल दर्पण (B) अवतल दर्पण (C) उत्तल दर्पण (D) इनमें से कोई नहीं
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) अवतल दर्पण — अवतल दर्पण में वस्तु ध्रुव व फोकस के बीच हो, तो प्रतिबिंब आभासी, सीधा व बड़ा बनता है — यही शेविंग दर्पण का सिद्धांत है। समतल दर्पण बराबर आकार का प्रतिबिंब देता है और उत्तल दर्पण सदैव छोटा प्रतिबिंब देता है।
प्रश्न 2. कार के side mirror में पीछे की सड़क का बड़ा हिस्सा एक नज़र में दिखा, हालाँकि गाड़ियाँ छोटी दिख रही थीं। ऐसा क्यों?
(A) यह अवतल दर्पण है, जो बड़ा प्रतिबिंब देता है (B) यह समतल दर्पण है, जो दूर तक देखता है (C) यह उत्तल दर्पण है, जिसका दृष्टि-क्षेत्र व्यापक होता है और प्रतिबिंब सीधा व छोटा बनता है (D) यह कोई दर्पण नहीं, साधारण काँच है
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) यह उत्तल दर्पण है — उत्तल दर्पण बाहर की ओर फैली किरणों को समेटकर एक छोटे क्षेत्र में लाता है, इसलिए उसका दृष्टि-क्षेत्र (field of view) सबसे व्यापक होता है और प्रतिबिंब सदैव सीधा व छोटा बनता है — इसीलिए वाहनों में पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में उत्तल दर्पण ही लगाया जाता है।
प्रश्न 3. दादाजी के चश्मे के लेंस की शक्ति +2.0 D है। इस लेंस की फोकस दूरी कितनी होगी और यह किस प्रकार का लेंस है?
(A) 50 cm, उत्तल लेंस (B) 50 cm, अवतल लेंस (C) 20 cm, उत्तल लेंस (D) 2 m, उत्तल लेंस
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (A) 50 cm, उत्तल लेंस — शक्ति P = 100/f (f cm में) से f = 100/P = 100/2.0 = 50 cm। शक्ति धनात्मक है, इसलिए फोकस दूरी भी धनात्मक है — अर्थात लेंस अभिसारी (उत्तल) है, जो दूरदृष्टि-दोष के सुधार में प्रयुक्त होता है।
प्रश्न 4. पानी के गिलास में डूबी चम्मच टूटी हुई (मुड़ी हुई) क्यों दिखी?
(A) परावर्तन के कारण (B) प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण (C) पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण (D) अपवर्तन के कारण
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (D) अपवर्तन के कारण — पानी में डूबी चम्मच से आने वाली प्रकाश किरणें जल (सघन माध्यम) से वायु (विरल माध्यम) में आते समय अभिलंब से दूर मुड़ जाती हैं, इसलिए चम्मच का डूबा भाग अपनी वास्तविक स्थिति से थोड़ा ऊपर उठा हुआ प्रतीत होता है — चम्मच टूटी हुई दिखती है। यही अपवर्तन का दैनिक उदाहरण है।
⭐ Quick Revision – Important Points
- ✅ परावर्तन के नियम — ∠i = ∠r और आपतित किरण, परावर्तित किरण व अभिलंब एक ही तल में; कोण सदैव अभिलंब से नापे जाते हैं।
- ✅ समतल दर्पण — प्रतिबिंब आभासी, सीधा, बराबर आकार का, पार्श्व-परिवर्तित; आवर्धन m = +1।
- ✅ गोलीय दर्पण — अवतल = धँसी सतह, अभिसारी, वास्तविक फोकस; उत्तल = उभरी सतह, अपसारी, आभासी फोकस; R = 2f और F, P व C के बीच में होता है।
- ✅ अवतल दर्पण में आभासी-सीधा-बड़ा प्रतिबिंब केवल P व F के बीच रखी वस्तु का बनता है; उत्तल दर्पण का प्रतिबिंब हमेशा आभासी, सीधा व छोटा (P व F के बीच, दर्पण के पीछे) बनता है।
- ✅ चिन्ह परिपाटी — दूरियाँ ध्रुव/प्रकाशिक केंद्र से; u लगभग हमेशा ऋणात्मक; अवतल का f ऋणात्मक, उत्तल का f धनात्मक (दर्पण व लेंस दोनों में)।
- ✅ दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f, आवर्धन m = −v/u = h′/h; m ऋणात्मक = वास्तविक-उल्टा, m धनात्मक = आभासी-सीधा।
- ✅ अपवर्तन — कारण: माध्यम बदलने पर चाल बदलना; सघन में जाते समय किरण अभिलंब की ओर, विरल में जाते समय अभिलंब से दूर; काँच की सिल्ली से निर्गत किरण समांतर निकलती है, केवल पार्श्व विस्थापन होता है।
- ✅ अपवर्तनांक n = c/v; हीरा सबसे सघन (2.42), वायु सबसे विरल (1.0003); n अधिक → चाल कम; प्रकाशतः सघनता ≠ द्रव्यमान-घनत्व (किरोसिन बनाम जल)।
- ✅ लेंस — उत्तल अभिसारी (+f, +P), अवतल अपसारी (−f, −P); उत्तल लेंस की तालिका अवतल दर्पण जैसी व अवतल लेंस की तालिका उत्तल दर्पण जैसी (हमेशा आभासी, सीधा, छोटा)।
- ✅ लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f, आवर्धन m = v/u = h′/h; शक्ति P = 1/f (मीटर) = 100/f (cm), इकाई डायोप्टर (D); 1 m फोकस दूरी = 1 D।
⚠️ Aam Galtiyan (Common Mistakes)
- u का चिन्ह धनात्मक ले लेना: यह इस अध्याय की सबसे आम व सबसे महँगी गलती है। वस्तु दर्पण/लेंस के सामने (बाईं ओर) होती है, इसलिए u सदैव ऋणात्मक लें — “दूरी 20 cm दी है” का अर्थ u = −20 cm है। चिन्ह यहीं छूटा तो v, m, h′ — सब गलत होंगे।
- दर्पण व लेंस सूत्र आपस में बदल देना: दर्पण में 1/v + 1/u = 1/f (जोड़) और लेंस में 1/v − 1/u = 1/f (घटाव)। इसी तरह आवर्धन दर्पण में −v/u और लेंस में v/u है। प्रश्न पढ़ते ही पहले यह तय करें — दर्पण है या लेंस?
- अवतल-उत्तल के f के चिन्ह उलट देना: अवतल = ऋणात्मक f (दर्पण व लेंस दोनों में), उत्तल = धनात्मक f। विशेषकर उत्तल दर्पण में f को ऋणात्मक लेना बहुत आम गलती है — उत्तल दर्पण का फोकस पीछे होता है, इसलिए f धनात्मक होगा।
- शक्ति में cm व मीटर की गड़बड़ी: P = 1/f में f मीटर में होना चाहिए। f = 50 cm को सीधे 1/50 करके 0.02 D लिखना गलत है — सही है P = 1/0.5 = +2 D या P = 100/50 = +2 D। साथ ही अवतल लेंस की शक्ति में ऋण चिन्ह छोड़ देना भी आम गलती है।
- कोण सतह से नापना: आपतन व परावर्तन कोण अभिलंब से नापे जाते हैं, सतह से नहीं। सतह से 30° पर पड़ने वाली किरण का आपतन कोण 60° होगा।
- R व f को बराबर समझ लेना: R = 2f होता है — R = 30 cm दिया हो तो f = 15 cm लें, 30 नहीं। प्रश्न 14 (प्रश्नावली) में यही पहला चरण है।
- उत्तर में प्रकृति न बताना / चिन्ह से निष्कर्ष न निकालना: v ऋणात्मक आया तो “प्रतिबिंब सामने, वास्तविक” और h′ ऋणात्मक आया तो “उल्टा” — यह एक लाइन न लिखने से numerical अधूरा माना जाता है। हर उत्तर के अंत में स्थिति + प्रकृति + आकार तीनों लिखें।
- अपवर्तन की दिशा उलटी याद करना: सघन माध्यम में किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है (चाल घटती है), विरल में दूर। साथ ही n = c/v में v निकालते समय c को n से भाग दें — गुणा करने पर उत्तर निर्वात-चाल से भी बड़ा आ जाएगा, जो असंभव है।
🎯 Bihar Board Exam Tips
- चिन्ह परिपाटी की table सबसे पहले रट लें: u ऋणात्मक, अवतल f ऋणात्मक, उत्तल f धनात्मक — वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का एक बड़ा भाग केवल इसी समझ से हल हो जाता है, बिना गणना किए।
- चारों प्रतिबिंब तालिकाएँ (अवतल/उत्तल दर्पण व लेंस) एक साथ तैयार करें: “वस्तु कहाँ, प्रतिबिंब कहाँ व कैसा” — इस पर हर साल 2–3 प्रश्न आते हैं। जुड़वाँ जोड़ियों (अवतल दर्पण ↔ उत्तल लेंस; उत्तल दर्पण ↔ अवतल लेंस) से याद करना सबसे आसान रहता है।
- Numerical का प्रारूप पक्का कर लें: दिया गया (चिन्हों सहित) → सूत्र → मान → गणना → उत्तर-बॉक्स (इकाई + प्रकृति)। BSEB में चरणों के अंक मिलते हैं; अंतिम उत्तर थोड़ा इधर-उधर हो भी जाए तो सही प्रारूप से अधिकांश अंक बच जाते हैं।
- किरण-आरेख का अभ्यास हाथ से करें: कम से कम चार आरेख पक्के रखें — अवतल दर्पण में C पर वस्तु, अवतल दर्पण में P–F के बीच वस्तु, उत्तल लेंस में 2F से परे वस्तु, अवतल लेंस का सामान्य आरेख। किरणों में तीर, आभासी किरणों में बिंदीदार रेखा व P, F, C/O के लेबल अवश्य दें।
- शक्ति (Power) वाले प्रश्न मुफ़्त के अंक हैं: P = 100/f(cm) याद रखें और डॉक्टर-पर्चे वाले प्रश्नों (+D = उत्तल, −D = अवतल) का अभ्यास करें — ये प्रश्नावली के अंतिम दो प्रश्नों जैसे ही हर साल घूमकर आते हैं।
- पिछले वर्षों के BSEB प्रश्न-पत्रों से इस अध्याय के प्रश्न हल करके जाएँ — InText व प्रश्नावली के numericals अक्सर संख्या बदलकर दोहराए जाते हैं।
📝 MCQ Quiz – 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (स्वयं को जाँचें)
पहले बिना देखे हल करें, फिर “✅ उत्तर देखें” खोलकर मिलाएँ। अंत में Answer Key table दी गई है।
Q1. कोई प्रकाश किरण दर्पण पर 40° के आपतन कोण से पड़ती है। परावर्तन कोण कितना होगा? —
(A) 20°
(B) 40°
(C) 50°
(D) 90°
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) 40° — परावर्तन के नियम से ∠i = ∠r सदैव होता है।
Q2. किसी गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या 30 cm है। उसकी फोकस दूरी होगी —
(A) 60 cm
(B) 30 cm
(C) 15 cm
(D) 7.5 cm
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) 15 cm — f = R/2 = 30/2 = 15 cm।
Q3. उत्तल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब सदैव होता है —
(A) वास्तविक, उल्टा व बड़ा
(B) वास्तविक, उल्टा व छोटा
(C) आभासी, सीधा व छोटा
(D) आभासी, सीधा व बड़ा
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) आभासी, सीधा व छोटा — वस्तु की स्थिति कुछ भी हो, उत्तल दर्पण का उत्तर यही होता है।
Q4. वाहनों में पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में किस दर्पण का उपयोग होता है? —
(A) अवतल दर्पण
(B) उत्तल दर्पण
(C) समतल दर्पण
(D) इनमें से कोई नहीं
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) उत्तल दर्पण — सीधा प्रतिबिंब व विस्तृत दृष्टि-क्षेत्र के कारण।
Q5. दर्पण सूत्र है —
(A) 1/v − 1/u = 1/f
(B) 1/v + 1/u = 1/f
(C) 1/v + 1/f = 1/u
(D) v + u = f
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) 1/v + 1/u = 1/f — घटाव वाला सूत्र लेंस का है, दर्पण का नहीं।
Q6. किसी दर्पण के आवर्धन का मान m = −2 है। प्रतिबिंब होगा —
(A) आभासी, सीधा व दोगुना बड़ा
(B) वास्तविक, सीधा व दोगुना बड़ा
(C) वास्तविक, उल्टा व दोगुना बड़ा
(D) आभासी, उल्टा व आधा
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) वास्तविक, उल्टा व दोगुना बड़ा — ऋण चिन्ह = उल्टा (वास्तविक) और |m| = 2 = दोगुना आकार।
Q7. प्रकाश की किरण वायु से जल में तिरछी प्रवेश करती है, तो वह —
(A) अभिलंब की ओर मुड़ेगी
(B) अभिलंब से दूर मुड़ेगी
(C) बिना मुड़े सीधी जाएगी
(D) लौटकर वापस आ जाएगी
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (A) अभिलंब की ओर मुड़ेगी — जल, वायु से सघन माध्यम है और वहाँ प्रकाश की चाल घट जाती है।
Q8. अपवर्तनांक 1.50 वाले काँच में प्रकाश की चाल होगी (निर्वात में चाल = 3 × 108 m/s) —
(A) 4.5 × 108 m/s
(B) 3 × 108 m/s
(C) 1.5 × 108 m/s
(D) 2 × 108 m/s
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (D) 2 × 108 m/s — v = c/n = (3 × 108)/1.50 = 2 × 108 m/s।
Q9. हीरे का अपवर्तनांक है —
(A) 1.52
(B) 2.42
(C) 1.33
(D) 1.65
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) 2.42 — सभी दिए माध्यमों में सबसे अधिक; हीरा प्रकाशतः सबसे सघन है।
Q10. उत्तल लेंस के सामने वस्तु को 2F1 पर रखने पर प्रतिबिंब बनता है —
(A) F2 पर, बिंदु-आकार का
(B) अनंत पर, अत्यधिक बड़ा
(C) 2F2 पर, बराबर आकार का, वास्तविक व उल्टा
(D) लेंस व F1 के बीच, आभासी व सीधा
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) 2F2 पर, बराबर आकार का, वास्तविक व उल्टा — यही प्रश्नावली के प्रश्न 3 का आधार है।
Q11. अवतल लेंस द्वारा बना प्रतिबिंब सदैव होता है —
(A) आभासी, सीधा व छोटा
(B) वास्तविक, उल्टा व छोटा
(C) आभासी, सीधा व बड़ा
(D) वास्तविक, सीधा व बराबर
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (A) आभासी, सीधा व छोटा — अवतल लेंस वस्तु वाली ओर, O व F के बीच ही प्रतिबिंब बनाता है।
Q12. लेंस सूत्र है —
(A) 1/v + 1/u = 1/f
(B) 1/f − 1/u = 1/v
(C) m = −v/u
(D) 1/v − 1/u = 1/f
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (D) 1/v − 1/u = 1/f — जोड़ वाला सूत्र दर्पण का है; विकल्प (C) दर्पण का आवर्धन है।
Q13. 50 cm फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस की शक्ति होगी —
(A) +0.02 D
(B) +2 D
(C) −2 D
(D) +50 D
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) +2 D — P = 100/50 = +2 D; उत्तल लेंस की शक्ति धनात्मक होती है। (केवल 1/50 करना cm-मीटर वाली आम गलती है।)
Q14. −2.5 D शक्ति वाला लेंस है —
(A) उत्तल लेंस
(B) समतल काँच
(C) अवतल लेंस
(D) द्वि-फोकसी लेंस
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) अवतल लेंस — ऋणात्मक शक्ति अपसारी (अवतल) लेंस की पहचान है; इसकी f = 100/(−2.5) = −40 cm होगी।
Q15. समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन होता है —
(A) +1
(B) −1
(C) 0
(D) अनंत
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (A) +1 — प्रतिबिंब बराबर आकार का (+) सीधा व आभासी होता है।
Answer Key – उत्तरमाला
| प्रश्न | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उत्तर | B | C | C | B | B | C | A | D | B | C | A | D | B | C | A |
❓ FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1. दर्पण सूत्र व लेंस सूत्र में क्या अंतर है? याद कैसे रखें?
उत्तर: दर्पण का सूत्र 1/v + 1/u = 1/f (जोड़) है और लेंस का सूत्र 1/v − 1/u = 1/f (घटाव) है। आवर्धन भी अलग है — दर्पण में m = −v/u और लेंस में m = v/u। याद रखने का तरीका: दर्पण में किरण लौटकर उसी ओर आती है, इसलिए सब “जुड़ता” है; लेंस में किरण आर-पार जाती है, इसलिए एक “घटाव” आता है। चिन्ह परिपाटी दोनों में एक जैसी है।
प्रश्न 2. Numerical में चिन्ह लगाने की सबसे सरल विधि क्या है?
उत्तर: (1) u हमेशा ऋणात्मक लें (वस्तु बाईं ओर है); (2) अवतल का f ऋणात्मक और उत्तल का f धनात्मक लें — दर्पण हो या लेंस; (3) v व h′ के चिन्ह स्वयं निकलने दें, फिर अंत में प्रकृति (वास्तविक/आभासी, सीधा/उल्टा) बताएँ; अंत में उत्तर को संबंधित प्रतिबिंब तालिका से मिलाएँ।
प्रश्न 3. उत्तल दर्पण छोटा प्रतिबिंब बनाता है, फिर भी गाड़ियों में वही क्यों लगाया जाता है?
उत्तर: क्योंकि यहाँ आकार नहीं, क्षेत्र व दिशा महत्वपूर्ण हैं — (i) उत्तल दर्पण सदैव सीधा प्रतिबिंब देता है, इसलिए चालक को भ्रम नहीं होता; (ii) इसका दृष्टि-क्षेत्र बहुत विस्तृत होता है, जिससे पीछे की सड़क का बड़ा हिस्सा एक नज़र में दिख जाता है। ध्यान रहे, शीशे पर चेतावनी लिखी रहती है कि वस्तुएँ दिखने की अपेक्षा निकट हैं।
प्रश्न 4. चश्मे का नंबर (शक्ति) धनात्मक या ऋणात्मक होने का क्या अर्थ है?
उत्तर: पर्चे पर लिखा नंबर लेंस की शक्ति P है। (+) शक्ति का अर्थ है उत्तल (अभिसारी) लेंस, जो सामान्यतः दूर-दृष्टि दोष में दिया जाता है; (−) शक्ति का अर्थ है अवतल (अपसारी) लेंस, जो निकट-दृष्टि दोष में दिया जाता है। f = 100/P cm से — +2 D का अर्थ f = 50 cm और −2 D का अर्थ f = −50 cm है। इन दोषों का विस्तार अगले अध्याय (मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार) में पढ़ेंगे।
प्रश्न 5. NCERT की किताब (PDF) कहाँ से मिलेगी?
उत्तर: NCERT की आधिकारिक वेबसाइट ncert.nic.in से Class 10 Science की PDF मुफ़्त में मिलती है। किरण-आरेख मूल किताब से देखकर हाथ से बनाने का अभ्यास अवश्य करें।
🔗 Pichhla / Agla Adhyay – पिछले व अगले अध्याय पढ़ें
⬅️ पिछला अध्याय 9 — आनुवंशिकता एवं जैव विकास (Heredity and Evolution): Class 10 Science Chapter 9
➡️ अगला अध्याय 11 — मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार (The Human Eye and the Colourful World): Class 10 Science Chapter 11
📚 सभी अध्यायों की सूची: NCERT Class 10 Bihar Board Science Book
🔚 Conclusion – निष्कर्ष
बधाई हो! आपने इस अध्याय के सभी महत्वपूर्ण भाग पूरे कर लिए — परावर्तन के नियम, दर्पणों में प्रतिबिंब-निर्माण, चिन्ह परिपाटी के साथ Numerical हल करना, अपवर्तन व अपवर्तनांक, तथा चश्मे के नंबर (शक्ति) का अर्थ। अब आप दर्पण व लेंस से जुड़े किसी भी प्रश्न का उत्तर आत्मविश्वास से दे सकते हैं।
इस पोस्ट में हमने कुल 35 हल किए गए प्रश्न (InText 14 + NCERT उदाहरण 4 + प्रश्नावली 17), 2 अतिरिक्त कार्यित उदाहरणों और 15 MCQ का अभ्यास किया है। आगे के अध्यायों की तैयारी के लिए NCERT की आधिकारिक वेबसाइट ncert.nic.in से किताब ज़रूर देखें। अगला अध्याय — मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार — भी इसी श्रृंखला में जल्द आएगा। शुभकामनाएँ, मेहनत जारी रखिए!
