NCERT Class 10 Science Chapter 2 Acids Bases and Salts in Hindi | अम्ल, क्षारक एवं लवण Notes, MCQ व प्रश्न-उत्तर

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परिचय – यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है?

Class 10 Science Chapter 2 Acids Bases and Salts के NCERT Solutions आपको इस पेज पर सरल हिंदी में, किताब के क्रम से मिलेंगे। Class 10 Science Chapter 2 Acids Bases and Salts यानी अम्ल, क्षारक एवं लवण — यह अध्याय हमारी रसोई, हमारे शरीर और हमारे आस-पास की हर चीज़ से जुड़ा है, इसलिए इसे समझना बहुत आसान भी है और मज़ेदार भी।

ज़रा सोचिए — नींबू और इमली खट्टे क्यों लगते हैं? दही में खट्टापन कहाँ से आता है? ज़्यादा खाना खा लेने पर पेट में जलन क्यों होती है और माँ एंटैसिड क्यों देती है? साबुन छूने में चिकना क्यों लगता है और हल्दी वाला दाग साबुन लगाते ही लाल क्यों हो जाता है? इन सब सवालों का जवाब इसी अध्याय में छिपा है — अम्ल और क्षारक की दुनिया में।

इस अध्याय में हम सीखेंगे कि अम्ल और क्षारक पहचानें कैसे, सूचक (indicator) रंग क्यों बदलते हैं, pH क्या होता है, और बेकिंग सोडा, धोने का सोडा, विरंजक चूर्ण (bleaching powder) व प्लास्टर ऑफ़ पेरिस जैसे रोज़ काम आने वाले लवण बनते कैसे हैं।

Bihar Board (BSEB) Class 10 की परीक्षा में इस अध्याय से हर साल अच्छे-खासे प्रश्न आते हैं — pH पर आधारित वस्तुनिष्ठ (MCQ) प्रश्न, सूचकों के रंग-परिवर्तन पर लघु उत्तरीय प्रश्न और महत्वपूर्ण लवणों के बनाने की विधि व उपयोग पर दीर्घ उत्तरीय प्रश्न। पहला अध्याय आपने पढ़ लिया हो तो समीकरण संतुलित करना आपको आता ही है — बस, यह अध्याय तो आपके लिए और भी आसान हो जाएगा!

📌 खास बात: इस अध्याय की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसके ज़्यादातर प्रश्न रोज़ की ज़िंदगी से जुड़े हैं — दाँतों की सड़न, मिट्टी का उपचार, चींटी का डंक, अपच… Board इन्हीं पर आधारित प्रश्न पूछना बहुत पसंद करता है। इसलिए हर concept को किसी रोज़ के उदाहरण से जोड़कर याद कीजिए, उत्तर लिखना आसान हो जाएगा।

📋 अध्याय की जानकारी (Chapter Information)

Board Bihar Board (BSEB)
Textbook NCERT
Class 10
Subject Science (विज्ञान)
Chapter 2
Chapter Name Acids, Bases and Salts (अम्ल, क्षारक एवं लवण)
कुल हल किए गए प्रश्न 34 (InText 19 + प्रश्नावली 15)

📚 इस Chapter में क्या-क्या है? (Topics)

  1. 2.1 अम्ल एवं क्षारकों के रासायनिक गुण
    • सूचक (Indicators) – लिटमस, हल्दी, मेथिल ऑरेंज, फ़िनॉल्फ़थेलिन व गंधीय सूचक
    • धातुओं के साथ अम्ल व क्षारक की अभिक्रिया
    • धातु कार्बोनेट व धातु हाइड्रोजनकार्बोनेट की अम्ल से अभिक्रिया
    • अम्ल व क्षारक की परस्पर अभिक्रिया – उदासीनीकरण
    • धात्विक ऑक्साइड की अम्ल से व अधात्विक ऑक्साइड की क्षारक से अभिक्रिया
  2. 2.2 सभी अम्लों व क्षारकों में क्या समानता है? तथा 2.3 अम्ल या क्षारक के विलयन कितने प्रबल हैं? – H3O+ व OH− आयन, अम्ल का तनुकरण, pH स्केल व दैनिक जीवन में pH का महत्व
  3. 2.4 लवणों के बारे में अधिक जानकारी – लवणों का परिवार, लवणों का pH, साधारण नमक से बनने वाले रसायन (क्लोर-क्षार प्रक्रम, विरंजक चूर्ण, बेकिंग सोडा, धोने का सोडा) व क्रिस्टलन जल (प्लास्टर ऑफ़ पेरिस, जिप्सम)
  4. पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (InText) – 19 प्रश्न, NCERT क्रियाकलाप-आधारित उदाहरण, प्रश्नावली के 15 प्रश्न
  5. Case Study, Quick Revision, Common Mistakes, Bihar Board Exam Tips, MCQ Quiz व FAQ

📊 Key Concepts – मुख्य परिभाषाएँ व नियम

पद / नियम अर्थ (एक लाइन में)
अम्ल (Acid) वह पदार्थ जो जल में घुलकर H+(aq) अथवा H3O+ आयन देता है; स्वाद में खट्टा होता है और नीले लिटमस को लाल कर देता है।
क्षारक (Base) वह पदार्थ जो जल में घुलकर OH−(aq) आयन देता है; स्वाद में कड़वा, छूने में साबुन-जैसा चिकना होता है और लाल लिटमस को नीला कर देता है।
क्षार (Alkali) जल में घुलनशील क्षारक को क्षार कहते हैं — जैसे NaOH, KOH। सभी क्षार, क्षारक होते हैं, परंतु सभी क्षारक, क्षार नहीं होते।
सूचक (Indicator) वह रंजक (dye) या पदार्थ जो अम्लीय व क्षारकीय माध्यम में अलग-अलग रंग दिखाकर पदार्थ की प्रकृति बता देता है।
गंधीय सूचक (Olfactory Indicator) वह पदार्थ जिसकी गंध अम्लीय व क्षारकीय माध्यम में बदल जाती है — जैसे प्याज़, वैनिला, लौंग का तेल।
उदासीनीकरण (Neutralisation) अम्ल व क्षारक की परस्पर अभिक्रिया से लवण व जल बनना — अम्ल + क्षारक → लवण + जल।
pH स्केल किसी विलयन की अम्लता या क्षारकता मापने का स्केल (0 से 14); pH 7 से कम = अम्लीय, 7 = उदासीन, 7 से अधिक = क्षारकीय।
प्रबल अम्ल / दुर्बल अम्ल जो अम्ल जल में पूरी तरह आयनित हो जाए वह प्रबल (जैसे HCl); जो आंशिक रूप से आयनित हो वह दुर्बल (जैसे CH3COOH)।
लवण (Salt) अम्ल व क्षारक की उदासीनीकरण अभिक्रिया से बना पदार्थ — जैसे NaCl, CuSO4।
क्रिस्टलन जल (Water of Crystallisation) लवण के एक सूत्र-इकाई के साथ जुड़े जल के अणुओं की निश्चित संख्या — जैसे CuSO4·5H2O में 5।

सबसे काम की बात: अम्लता की असली वजह H+ / H3O+ आयन है और क्षारकता की वजह OH− आयन। जिस विलयन में ये आयन नहीं बनते, वह अम्लीय या क्षारकीय गुण नहीं दिखाता — यही इस पूरे अध्याय की कुंजी है!

अम्ल व क्षारक के गुण – खट्टा, कड़वा और लिटमस की कहानी

हमारे घर में ही अम्लों की पूरी दुकान है! नींबू में सिट्रिक अम्ल, सिरके में ऐसीटिक अम्ल, दही में लैक्टिक अम्ल, इमली व अंगूर में टार्टरिक अम्ल, टमाटर में ऑक्सैलिक अम्ल और चींटी के डंक में मेथैनॉइक (फ़ॉर्मिक) अम्ल पाया जाता है। ये सभी प्राकृतिक अम्ल हैं और इन्हीं के कारण ये चीज़ें खट्टी लगती हैं।

दूसरी ओर प्रयोगशाला के अम्ल — हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl), सल्फ़्यूरिक अम्ल (H2SO4) और नाइट्रिक अम्ल (HNO3) — खनिज अम्ल कहलाते हैं। ये प्रबल होते हैं, इसलिए इन्हें बहुत सावधानी से छूना चाहिए।

क्षारकों की दुनिया भी घर से ही शुरू होती है — खाने का सोडा, चूने का पानी, साबुन का घोल, मिल्क ऑफ़ मैग्नीशिया — ये सब क्षारकीय हैं। क्षारक स्वाद में कड़वे होते हैं और छूने पर साबुन जैसे चिकने लगते हैं, क्योंकि वे हमारी त्वचा की चर्बी से क्रिया कर लेते हैं।

अम्ल व क्षारक में बुनियादी अंतर

बात अम्ल क्षारक
स्वाद खट्टा कड़वा
जल में आयन H+ / H3O+ देता है OH− देता है
नीला लिटमस लाल हो जाता है कोई परिवर्तन नहीं
लाल लिटमस कोई परिवर्तन नहीं नीला हो जाता है
pH 7 से कम 7 से अधिक
उदाहरण HCl, H2SO4, नींबू का रस NaOH, Ca(OH)2, साबुन का घोल

📌 सावधानी: प्रयोगशाला में किसी भी पदार्थ को चखकर या सीधे छूकर कभी परख न करें! अम्ल-क्षारक की पहचान हमेशा सूचक से की जाती है — स्वाद वाली बात केवल घर की जानी-पहचानी चीज़ों (नींबू, दही) के लिए है।

एक साँस में समझें — अम्ल खट्टा व H+ देने वाला, क्षारक कड़वा व OH− देने वाला; पहचान का काम सूचक करता है।

सूचक (Indicators) – रंग बदलकर सच बताने वाले

मान लीजिए आपके सामने तीन रंगहीन घोल रखे हैं — एक अम्ल, एक क्षारक और एक साधारण जल। देखकर तो तीनों एक जैसे लगेंगे! ऐसे में काम आते हैं सूचक — ये ऐसे रंजक होते हैं जो अम्लीय माध्यम में एक रंग और क्षारकीय माध्यम में दूसरा रंग दिखाते हैं।

लिटमस सबसे प्रसिद्ध प्राकृतिक सूचक है। यह लाइकेन (lichen) नामक पौधों से निकाला जाता है और उदासीन अवस्था में इसका रंग बैंगनी (purple) होता है। आसुत जल में लिटमस न लाल होता है, न नीला — यही उसकी उदासीन पहचान है।

हल्दी हमारी रसोई की सूचक है! हल्दी का पीला रंग अम्ल में पीला ही रहता है, पर क्षारकीय पदार्थ (जैसे साबुन) लगते ही वह लाल-भूरा हो जाता है। कपड़े पर हल्दी का दाग साबुन से धोते ही लाल क्यों हो जाता है — अब आप इसका कारण जान गए!

प्रयोगशाला के बने-बनाए (संश्लिष्ट) सूचक हैं — मेथिल ऑरेंज और फ़िनॉल्फ़थेलिन। इनके रंग नीचे की table में अच्छी तरह याद कर लीजिए, Board में यह table लगभग हर साल काम आती है।

सूचक अम्लीय माध्यम में रंग क्षारकीय माध्यम में रंग प्रकार
नीला लिटमस विलयन लाल नीला (अपरिवर्तित) प्राकृतिक
लाल लिटमस विलयन लाल (अपरिवर्तित) नीला प्राकृतिक
हल्दी (Turmeric) पीला लाल-भूरा प्राकृतिक
चाइना रोज़ (गुड़हल) का अर्क गहरा गुलाबी (मैजेंटा) हरा प्राकृतिक
लाल पत्तागोभी का अर्क लाल / गुलाबी हरा / पीला प्राकृतिक
मेथिल ऑरेंज (Methyl Orange) लाल / गुलाबी पीला संश्लिष्ट
फ़िनॉल्फ़थेलिन (Phenolphthalein) रंगहीन गुलाबी संश्लिष्ट

गंधीय सूचक (Olfactory Indicators) – जो सूंघकर बताए

कुछ पदार्थों की गंध अम्लीय व क्षारकीय माध्यम में बदल जाती है — इन्हें गंधीय सूचक कहते हैं। जैसे प्याज़ की गंध क्षारकीय माध्यम में चली जाती है, वैनिला की खुशबू अम्लीय माध्यम में रहती है पर क्षारकीय में गायब हो जाती है, और लौंग के तेल की गंध भी माध्यम बदलने से बदलती है। ये सूचक विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हैं जो रंग नहीं देख सकते — विज्ञान सबके लिए है!

📌 याद रखें: फ़िनॉल्फ़थेलिन अम्ल में रंगहीन और क्षारक में गुलाबी होती है — यही जोड़ी सबसे ज़्यादा उलझाती है और सबसे ज़्यादा पूछी भी जाती है। मेथिल ऑरेंज के लिए याद रखें — अम्ल में लाल, क्षारक में पीला।

एक साँस में समझें — सूचक वही पदार्थ है जो अम्ल-क्षारक में रंग (या गंध) बदलकर पदार्थ की प्रकृति बता दे।

धातुओं व कार्बोनेटों के साथ अभिक्रियाएँ – बुलबुले क्या कहते हैं?

1. धातु + अम्ल → लवण + हाइड्रोजन गैस

अम्ल जब किसी क्रियाशील धातु से मिलता है तो धातु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देती है (पहले अध्याय की विस्थापन अभिक्रिया याद आई?) — बनता है धातु का लवण और निकलती है हाइड्रोजन गैस। परखनली में तेज़ बुदबुदाहट दिखना इसी की पहचान है।

Zn(s) + H2SO4(aq) → ZnSO4(aq) + H2(g)↑
(ज़िंक + तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल → ज़िंक सल्फ़ेट + हाइड्रोजन)

Mg(s) + 2HCl(aq) → MgCl2(aq) + H2(g)↑
(मैग्नीशियम की अभिक्रिया बहुत तेज़ होती है)

हाइड्रोजन की जाँच: गैस के पास जलती हुई मोमबत्ती या तिल्ली ले जाने पर गैस “पॉप” ध्वनि (pop sound) के साथ जलती है — यही हाइड्रोजन की पक्की पहचान है।

2. क्षारक + धातु → लवण + हाइड्रोजन गैस

कुछ धातुएँ क्षारकों से भी क्रिया करके हाइड्रोजन निकालती हैं। NCERT का प्रसिद्ध उदाहरण है — ज़िंक की सोडियम हाइड्रॉक्साइड से अभिक्रिया, जिसमें सोडियम ज़िंकेट नामक लवण बनता है:

Zn(s) + 2NaOH(aq) → Na2ZnO2(aq) + H2(g)↑
(ज़िंक + सोडियम हाइड्रॉक्साइड → सोडियम ज़िंकेट + हाइड्रोजन)

📌 ध्यान दें: हर धातु क्षारक से क्रिया नहीं करती — यह अभिक्रिया केवल कुछ धातुओं (जैसे ज़िंक, ऐलुमिनियम) में ही दिखती है। कॉपर जैसी कम क्रियाशील धातु तनु अम्लों से भी हाइड्रोजन नहीं निकाल पाती।

3. धातु कार्बोनेट / हाइड्रोजनकार्बोनेट + अम्ल → लवण + जल + CO2

संगमरमर, चूना पत्थर, अंडे के छिलके — ये सब कैल्सियम कार्बोनेट (CaCO3) के रूप हैं। इन पर अम्ल डालते ही तेज़ बुदबुदाहट (effervescence) के साथ कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है:

Na2CO3(s) + 2HCl(aq) → 2NaCl(aq) + H2O(l) + CO2(g)↑

NaHCO3(s) + HCl(aq) → NaCl(aq) + H2O(l) + CO2(g)↑

CaCO3(s) + 2HCl(aq) → CaCl2(aq) + H2O(l) + CO2(g)↑

CO2 की जाँच — चूने के पानी वाला परीक्षण: निकली गैस को चूने के पानी (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड के विलयन) में प्रवाहित करने पर चूने का पानी दूधिया (milky) हो जाता है, क्योंकि अघुलनशील कैल्सियम कार्बोनेट बनता है:

Ca(OH)2(aq) + CO2(g) → CaCO3(s)↓ + H2O(l)
(चूने का पानी दूधिया हो जाता है)

और यदि CO2 अधिक देर तक प्रवाहित की जाए तो दूधियापन गायब हो जाता है, क्योंकि घुलनशील कैल्सियम हाइड्रोजनकार्बोनेट बन जाता है:

CaCO3(s) + H2O(l) + CO2(g) → Ca(HCO3)2(aq)

📌 याद रखें: CO2 जलती हुई मोमबत्ती को बुझा देती है और चूने के पानी को दूधिया करती है — ये दोनों जाँचें Board में बार-बार पूछी जाती हैं। खाने के सोडे पर नींबू निचोड़ने पर जो झाग उठता है, वह भी यही CO2 है!

4. अम्ल + क्षारक → लवण + जल (उदासीनीकरण)

जब अम्ल और क्षारक मिलते हैं तो वे एक-दूसरे के प्रभाव को खत्म (उदासीन) कर देते हैं — अम्ल के H+ आयन और क्षारक के OH− आयन मिलकर जल बना लेते हैं और बचा हुआ भाग लवण कहलाता है:

NaOH(aq) + HCl(aq) → NaCl(aq) + H2O(l)
आयनिक रूप में: H+(aq) + OH−(aq) → H2O(l)

इस अभिक्रिया में ऊष्मा निकलती है, इसलिए परखनली छूने पर गरम लगती है — उदासीनीकरण एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है। पेट की अम्लता में एंटैसिड (क्षारक) देना और खेत की अम्लीय मिट्टी में चूना डालना — दोनों इसी अभिक्रिया के उपयोग हैं।

5. धात्विक ऑक्साइड + अम्ल और अधात्विक ऑक्साइड + क्षारक

कॉपर ऑक्साइड (CuO) काले रंग का होता है। इसमें तनु HCl डालकर गरम करने पर विलयन नीला-हरा हो जाता है, क्योंकि कॉपर(II) क्लोराइड बनता है:

CuO(s) + 2HCl(aq) → CuCl2(aq) + H2O(l)

धात्विक ऑक्साइड अम्ल से क्रिया करके लवण व जल बनाते हैं — ठीक वैसे ही जैसे कोई क्षारक बनाता है। इसलिए धात्विक ऑक्साइड क्षारकीय प्रकृति के होते हैं।

इसके उलट, अधात्विक ऑक्साइड अम्लीय प्रकृति के होते हैं — वे क्षारक से क्रिया करके लवण व जल बनाते हैं। जैसे CO2 (अधातु ऑक्साइड) चूने के पानी Ca(OH)2 से क्रिया करके CaCO3 व जल बनाती है (ऊपर वाला समीकरण ही देखिए)।

एक साँस में समझें — धातु + अम्ल से H2, कार्बोनेट + अम्ल से CO2, अम्ल + क्षारक से लवण + जल, और धातु ऑक्साइड क्षारकीय व अधातु ऑक्साइड अम्लीय होते हैं।

जल में अम्ल या क्षारक – आयन ही असली खिलाड़ी हैं

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल — अम्ल अम्लीय गुण दिखाता क्यों है? उत्तर है: जल में बनने वाले आयन। जब HCl को जल में घोलते हैं तो वह टूटकर हाइड्रोजन आयन देता है। अकेला H+ जल में नहीं रह पाता, वह जल के अणु से जुड़कर हाइड्रोनियम आयन (H3O+) बना लेता है:

HCl(aq) → H+(aq) + Cl−(aq)  |  H+ + H2O → H3O+

इसी प्रकार क्षारक जल में घुलकर हाइड्रॉक्साइड आयन (OH−) देते हैं:

NaOH(aq) → Na+(aq) + OH−(aq)

यही आयन विलयन में घूम-घूमकर विद्युत का चालन करते हैं — इसीलिए अम्ल व क्षारक के विलयन में बल्ब जल उठता है, जबकि आसुत जल, ग्लूकोज़ व ऐल्कोहॉल के विलयन में बल्ब नहीं जलता, क्योंकि उनमें आयन बनते ही नहीं। ग्लूकोज़ व ऐल्कोहॉल में हाइड्रोजन होते हुए भी वे H+ आयन नहीं देते — इसीलिए वे अम्ल नहीं कहलाते। परीक्षा का यह चहेता प्रश्न है, अच्छी तरह समझ लीजिए!

शुष्क HCl गैस लिटमस क्यों नहीं बदलती?

अम्लीय गुण H+ आयनों के कारण होता है, और HCl से H+ आयन केवल जल की उपस्थिति में अलग होते हैं। शुष्क HCl गैस में आयन हैं ही नहीं, इसलिए वह शुष्क नीले लिटमस का रंग नहीं बदल पाती। जैसे ही लिटमस पत्र नम होता है, आयन बनते हैं और रंग लाल हो जाता है। निष्कर्ष साफ है — अम्ल, अम्लीय व्यवहार जल के बिना नहीं दिखाता।

अम्ल को तनु करना – क्रम उल्टा किया तो दुर्घटना!

सान्द्र अम्ल में जल मिलाना अत्यंत ऊष्माक्षेपी क्रिया है — बहुत अधिक ऊष्मा निकलती है। यदि आप अम्ल में जल डाल दें तो निकली ऊष्मा से जल अचानक उबलकर मिश्रण को बाहर उछाल सकता है और अम्ल की बूंदें चेहरे व कपड़ों पर पड़कर गंभीर जलन कर सकती हैं; काँच का बर्तन भी ऊष्मा से चटक सकता है।

सही नियम: अम्ल को हमेशा जल में, धीरे-धीरे, लगातार हिलाते हुए मिलाएँ — जल को अम्ल में कभी न डालें। जल की मात्रा अधिक होने से निकली ऊष्मा फैल जाती है और कोई नुकसान नहीं होता।

तनु करने पर क्या बदलता है? प्रति इकाई आयतन में H3O+ आयनों की संख्या घट जाती है — अर्थात सान्द्रता कम हो जाती है और अम्ल दुर्बल असर दिखाता है। ठीक इसी तरह NaOH के विलयन में और क्षारक घोलने पर OH− आयनों की सान्द्रता बढ़ जाती है।

एक साँस में समझें — अम्ल का असली रूप उसके आयन हैं; आयन जल में ही बनते हैं, और तनुकरण में आयनों की सान्द्रता घटती-बढ़ती है।

pH स्केल – 0 से 14 तक की पूरी कहानी

कोई विलयन कितना अम्लीय है या कितना क्षारकीय — यह नापने के लिए वैज्ञानिकों ने pH स्केल बनाया। इसमें ‘p’ का अर्थ है पुसांस (potenz) यानी ‘क्षमता’ और ‘H’ है हाइड्रोजन। सरल भाषा में — विलयन में H+ आयनों की सान्द्रता जितनी अधिक, pH उतना कम और विलयन उतना अधिक अम्लीय।

सार्वत्रिक सूचक (Universal Indicator) कई सूचकों का मिश्रण होता है, जो अलग-अलग pH पर अलग-अलग रंग दिखाता है — लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला… pH पत्र (pH paper) पर यही रंग देखकर हम विलयन का लगभग pH जान लेते हैं।

pH (लगभग) प्रकृति रोज़ का उदाहरण
0 अत्यंत प्रबल अम्लीय सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल / बैटरी का अम्ल
1 प्रबल अम्लीय आमाशय रस (पेट का रस, लगभग 1.2)
2 अम्लीय नींबू का रस (लगभग 2.2)
3 अम्लीय सिरका, संतरे का रस
4 दुर्बल अम्लीय टमाटर का रस (लगभग 4.1)
5 दुर्बल अम्लीय काली कॉफ़ी, केला
6 हल्का अम्लीय ताज़ा दूध (6), मूत्र
7 उदासीन शुद्ध जल, साधारण नमक (NaCl) का विलयन
8 हल्का क्षारकीय समुद्री जल, अंडे की सफ़ेदी
9 क्षारकीय बेकिंग सोडा (खाने के सोडे) का विलयन
10 क्षारकीय मिल्क ऑफ़ मैग्नीशिया (एंटैसिड)
11 प्रबल क्षारकीय अमोनिया का विलयन
12 प्रबल क्षारकीय साबुन का विलयन / चूने का पानी से अधिक प्रबल क्षारकीय विलयन
13 अत्यंत प्रबल क्षारकीय तनु सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) विलयन
14 अत्यंत प्रबल क्षारकीय सान्द्र सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) / कास्टिक सोडा

📌 याद रखें: pH 7 से जितना नीचे, अम्लता उतनी अधिक; pH 7 से जितना ऊपर, क्षारकता उतनी अधिक। क्षारकीय विलयनों में भी H+ आयन होते हैं, परंतु वहाँ OH− आयन H+ से बहुत अधिक होते हैं — इसीलिए विलयन क्षारकीय कहलाता है। रक्त का pH लगभग 7.4 होता है — अर्थात 7 से थोड़ा ही ऊपर, हल्का क्षारकीय।

दैनिक जीवन में pH का महत्व – शरीर से खेत तक

1. हमारे पाचन तंत्र का pH: हमारा आमाशय हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनाता है, जो भोजन पचाने और कीटाणु मारने में मदद करता है। परंतु अम्ल अधिक बन जाए तो अपच व अम्लता (acidity) हो जाती है — पेट में जलन और दर्द। इसका इलाज है एंटैसिड — मिल्क ऑफ़ मैग्नीशिया जैसा दुर्बल क्षारक, जो अतिरिक्त अम्ल को उदासीन कर देता है: Mg(OH)2 + 2HCl → MgCl2 + 2H2O।

2. pH परिवर्तन से दाँतों की सड़न: मुँह का pH 5.5 से कम हो जाए तो दाँतों का इनैमल (कैल्सियम हाइड्रॉक्सीएपेटाइट से बना, शरीर का सबसे कठोर पदार्थ) संक्षारित होने लगता है और दाँत सड़ने लगते हैं। मुँह के जीवाणु खाने के बाद बचे शर्करा व खाद्य कणों को तोड़कर अम्ल बनाते हैं। उपाय — खाना खाने के बाद मुँह साफ़ करना व क्षारकीय टूथपेस्ट से ब्रश करना, जो अम्ल को उदासीन कर दे।

3. चींटी के डंक का इलाज: चींटी डंक मारते समय मेथैनॉइक अम्ल (फ़ॉर्मिक अम्ल) त्वचा में छोड़ देती है, जिससे जलन होती है। डंक पर बेकिंग सोडा जैसा दुर्बल क्षारक रगड़ने से अम्ल उदासीन हो जाता है और आराम मिलता है। यही कारण है कि बिच्छू-बूटी (nettle) के डंक पर भी सोडा या डॉक पत्ते रगड़े जाते हैं।

4. मिट्टी का pH और किसान: पौधे तभी अच्छे बढ़ते हैं जब मिट्टी का pH उपयुक्त सीमा में हो। मिट्टी अधिक अम्लीय हो जाए तो किसान उसमें बिना बुझा चूना (CaO), बुझा चूना (Ca(OH)2) या चॉक (CaCO3) जैसे क्षारकीय पदार्थ मिलाता है। मिट्टी अधिक क्षारकीय हो तो उसमें जैविक पदार्थ (खाद) मिलाकर उसे संतुलित किया जाता है।

5. जीव-जंतुओं व वर्षा में pH: हमारा शरीर 7.0 से 7.8 pH सीमा के बीच ही ठीक से काम करता है। अम्ल वर्षा (acid rain) का pH 5.6 से कम होता है — ऐसी वर्षा नदियों में बहकर जलीय जीवों का जीना कठिन कर देती है और इमारतों व मिट्टी को भी नुकसान पहुँचाती है।

एक साँस में समझें — pH सिर्फ़ प्रयोगशाला की संख्या नहीं है; हमारा पेट, दाँत, खेत और नदियाँ — सबका स्वास्थ्य pH पर टिका है।

महत्वपूर्ण लवण – नमक से बनने वाले चमत्कारी रसायन

लवणों का एक परिवार होता है — जिन लवणों में समान धनायन या समान ऋणायन हो, वे एक ही परिवार के कहलाते हैं। जैसे NaCl व Na2SO4 सोडियम लवणों के परिवार के हैं, और NaCl व KCl क्लोराइड परिवार के। लवण अम्लीय, क्षारकीय या उदासीन हो सकते हैं — यह इस पर निर्भर करता है कि वे किस अम्ल व किस क्षारक से बने हैं: प्रबल अम्ल + प्रबल क्षारक का लवण उदासीन (NaCl, pH 7), प्रबल अम्ल + दुर्बल क्षारक का लवण अम्लीय (NH4Cl, pH 7 से कम) और दुर्बल अम्ल + प्रबल क्षारक का लवण क्षारकीय (Na2CO3, pH 7 से अधिक) होता है।

अब सबसे मज़ेदार बात — हमारे खाने का साधारण नमक (NaCl) एक खज़ाना है! समुद्री जल व चट्टानी नमक से मिलने वाला यही नमक, कई महत्वपूर्ण रसायनों का कच्चा माल है। नमक के जलीय विलयन (ब्राइन) से विद्युत प्रवाहित करने पर सोडियम हाइड्रॉक्साइड, क्लोरीन व हाइड्रोजन मिलते हैं — इसे क्लोर-क्षार प्रक्रम (Chlor-Alkali Process) कहते हैं (‘क्लोर’ क्लोरीन के लिए, ‘क्षार’ NaOH के लिए):

2NaCl(aq) + 2H2O(l) →(विद्युत अपघटन) 2NaOH(aq) + Cl2(g)↑ + H2(g)↑
हाइड्रोजन ईंधन व मार्जरीन बनाने में, क्लोरीन जल-शोधन व PVC में और NaOH साबुन, कागज़ व दवाओं में उपयोगी है।

लवण सूत्र कैसे बनता है? मुख्य उपयोग
विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder) CaOCl2 शुष्क बुझे चूने Ca(OH)2 पर क्लोरीन गैस प्रवाहित करने से सूती-लिनेन का विरंजन, पीने के जल को जीवाणुमुक्त करना, ऑक्सीकारक के रूप में
बेकिंग सोडा (Baking Soda) NaHCO3 NaCl + H2O + CO2 + NH3 → NH4Cl + NaHCO3 बेकिंग पाउडर, एंटैसिड, सोडा-अम्ल अग्निशामक
धोने का सोडा (Washing Soda) Na2CO3·10H2O सोडियम कार्बोनेट के पुनः क्रिस्टलन से काँच-साबुन-कागज़ उद्योग, जल की स्थायी कठोरता दूर करना, बोरेक्स बनाने में
प्लास्टर ऑफ़ पेरिस (POP) CaSO4·½H2O जिप्सम को 373 K पर गरम करने से टूटी हड्डी का प्लास्टर, मूर्तियाँ, खिलौने, सजावटी सामान
जिप्सम (Gypsum) CaSO4·2H2O प्राकृतिक खनिज; POP में जल मिलाने से भी बनता है POP व सीमेंट बनाने में, मिट्टी सुधार में

विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder) – CaOCl2

Ca(OH)2(s) + Cl2(g) → CaOCl2(s) + H2O(l)
(शुष्क बुझा चूना + क्लोरीन → विरंजक चूर्ण + जल)

इसका नाम ही इसका काम बता देता है — विरंजन यानी रंग उड़ाना। कपड़ा उद्योग में सूती व लिनेन के विरंजन में, कागज़ उद्योग में लकड़ी की लुगदी के विरंजन में और पीने के जल को जीवाणुमुक्त करने में इसका बड़ा उपयोग है। कई रासायनिक उद्योगों में यह ऑक्सीकारक के रूप में भी काम आता है।

बेकिंग सोडा (Baking Soda) – NaHCO3

रसोई का यह सफ़ेद चूर्ण रासायनिक भाषा में सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट है। गरम करने पर यह टूटकर CO2 निकालता है — यही गैस केक व पकोड़ों को फुलाकर नरम व स्पंजी बनाती है:

2NaHCO3(s) →(ऊष्मा) Na2CO3(s) + H2O(l) + CO2(g)↑

बेकिंग पाउडर = बेकिंग सोडा + टार्टरिक अम्ल जैसा दुर्बल खाद्य अम्ल। भीगने या गरम होने पर अम्ल व सोडा क्रिया करके CO2 बनाते हैं और खाना फूल जाता है; टार्टरिक अम्ल साथ में इसलिए मिलाया जाता है ताकि बना हुआ सोडियम कार्बोनेट खाने को कड़वा न करे — वह उसे उदासीन कर देता है। हल्का क्षारकीय होने के कारण बेकिंग सोडा एंटैसिड के रूप में पेट की अम्लता में और सोडा-अम्ल अग्निशामक में भी उपयोग होता है।

धोने का सोडा (Washing Soda) – Na2CO3·10H2O

बेकिंग सोडे को गरम करके सोडियम कार्बोनेट मिलता है, और उसके पुनः क्रिस्टलन से धोने का सोडा बनता है — जिसमें क्रिस्टलन जल के पूरे 10 अणु जुड़े होते हैं:

Na2CO3(s) + 10H2O(l) → Na2CO3·10H2O(s)

यह क्षारकीय लवण है। काँच, साबुन व कागज़ उद्योगों में, बोरेक्स जैसे यौगिक बनाने में और घरों में कपड़े धोने व जल की स्थायी कठोरता दूर करने में इसका उपयोग होता है।

क्रिस्टलन जल, जिप्सम व प्लास्टर ऑफ़ पेरिस

कुछ लवणों के क्रिस्टलों में जल के अणु एक निश्चित संख्या में जुड़े रहते हैं — यही क्रिस्टलन जल है। नीला थोथा यानी कॉपर सल्फ़ेट CuSO4·5H2O इसका सुंदर उदाहरण है — गरम करने पर जल उड़ जाता है और नीला रंग सफ़ेद हो जाता है; जल की बूंद डालते ही नीला रंग लौट आता है।

जिप्सम (CaSO4·2H2O) को 373 K पर गरम करने पर वह जल का एक भाग खोकर प्लास्टर ऑफ़ पेरिस (CaSO4·½H2O) बन जाता है — अर्थात कैल्सियम सल्फ़ेट अर्ध-हाइड्रेट (hemihydrate):

CaSO4·2H2O(s) →(373 K, ऊष्मा) CaSO4·½H2O(s) + 1½H2O(g)

POP में जल मिलाने पर वह फिर से जिप्सम बनकर कठोर ठोस में जम जाता है — यही गुण डॉक्टरों के प्लास्टर, मूर्तियों व खिलौनों में काम आता है:

CaSO4·½H2O(s) + 1½H2O(l) → CaSO4·2H2O(s)
(POP + जल → जिप्सम — जमकर कठोर हो जाता है)

📌 खास बात: इसीलिए POP को हमेशा नमी-रोधी (moisture-proof) बर्तन में रखा जाता है — हवा की नमी सोखकर वह पहले ही जिप्सम बनकर जम जाएगा और किसी काम का नहीं रहेगा। बेकिंग सोडा में क्रिस्टलन जल नहीं होता — यह MCQ में बहुत पूछा जाता है!

एक साँस में समझें — नमक से क्लोर-क्षार द्वारा NaOH, Cl2, H2 मिलते हैं; और विरंजक चूर्ण, बेकिंग सोडा, धोने का सोडा व POP — चारों लवणों के सूत्र व उपयोग रट नहीं, समझकर याद करें।

📘 पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (InText Questions)

ये वे प्रश्न हैं जो NCERT किताब के अनुच्छेदों के बीच-बीच में दिए गए हैं। इस अध्याय में कुल 19 InText प्रश्न हैं — Board में ये वैसे-के-वैसे पूछ लिए जाते हैं, इसलिए इन्हें सबसे पहले तैयार कीजिए।

(क) अनुच्छेद 2.1 पर आधारित प्रश्न

प्रश्न 1. आपको तीन परखनलियाँ दी गई हैं। उनमें से एक में आसुत जल, दूसरी में अम्लीय विलयन तथा तीसरी में क्षारकीय विलयन है। यदि आपको केवल लाल लिटमस पत्र दिया जाए, तो आप प्रत्येक परखनली की सामग्री की पहचान कैसे करेंगे?

हल:

चरण 1: तीनों परखनलियों में बारी-बारी से लाल लिटमस पत्र डुबोइए और रंग देखिए। लाल लिटमस केवल क्षारक में नीला होता है।

चरण 2: जिस परखनली में लाल लिटमस नीला हो जाए — वही क्षारकीय विलयन है। एक परखनली की पहचान हो गई।

चरण 3: अब इसी नीले हुए लिटमस पत्र को बाकी दो परखनलियों में डालिए। जिसमें नीला लिटमस फिर से लाल हो जाए — वह अम्लीय विलयन है।

उत्तर: शेष बची परखनली, जिसमें किसी भी लिटमस का रंग न बदले, उसमें आसुत जल है। इस प्रकार केवल लाल लिटमस से ही — पहले क्षारक, फिर उसी नीले लिटमस से अम्ल और अंत में आसुत जल — तीनों की पहचान हो जाती है।

(ख) अनुच्छेद 2.1 – धातु व कार्बोनेट अभिक्रियाओं पर आधारित प्रश्न

प्रश्न 1. दही तथा खट्टे पदार्थों को पीतल तथा कॉपर (ताँबे) के बर्तनों में क्यों नहीं रखा जाना चाहिए?

हल: दही व खट्टे पदार्थों में अम्ल होते हैं। अम्ल पीतल व ताँबे जैसी धातुओं से क्रिया करके विषैले (हानिकारक) लवण बनाते हैं, जो भोजन में मिलकर स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा सकते हैं — पेट खराब होना, उल्टी व भोजन-विषाक्तता तक हो सकती है।

उत्तर: इसलिए दही व खट्टे पदार्थों को पीतल-ताँबे के बर्तनों में नहीं रखना चाहिए; इन्हें काँच, चीनी मिट्टी या स्टील के बर्तनों में रखना सुरक्षित है।

प्रश्न 2. धातु के साथ अम्ल की अभिक्रिया होने पर सामान्यतः कौन-सी गैस निकलती है? एक उदाहरण दीजिए। इस गैस की उपस्थिति की जाँच आप कैसे करेंगे?

हल: धातु + अम्ल की अभिक्रिया में सामान्यतः हाइड्रोजन गैस निकलती है। उदाहरण — ज़िंक पर तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल डालने पर:

Zn(s) + H2SO4(aq) → ZnSO4(aq) + H2(g)↑

जाँच: निकलती गैस के पास जलती हुई मोमबत्ती या तिल्ली ले जाइए — गैस “पॉप” ध्वनि के साथ जलती है। यही पॉप ध्वनि हाइड्रोजन की पहचान है।

प्रश्न 3. किसी धातु-यौगिक ‘A’ को तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ क्रिया कराने पर बुदबुदाहट उत्पन्न होती है। इससे निकलने वाली गैस जलती हुई मोमबत्ती को बुझा देती है। यदि उत्पन्न यौगिकों में से एक कैल्सियम क्लोराइड है, तो इस अभिक्रिया का संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।

हल:

चरण 1: जो गैस मोमबत्ती बुझा दे और अम्ल के साथ बुदबुदाहट के साथ निकले, वह CO2 है — अर्थात यौगिक ‘A’ कोई धातु कार्बोनेट है।

चरण 2: उत्पादों में CaCl2 बन रहा है, अर्थात ‘A’ में कैल्सियम है — अतः ‘A’ = कैल्सियम कार्बोनेट (CaCO3)।

CaCO3(s) + 2HCl(aq) → CaCl2(aq) + H2O(l) + CO2(g)↑
उत्तर: यौगिक ‘A’ कैल्सियम कार्बोनेट है।

(ग) अनुच्छेद 2.2 – अम्ल का जलीय व्यवहार व तनुकरण पर आधारित प्रश्न

प्रश्न 1. HCl, HNO3 आदि जलीय विलयन में अम्लीय अभिलक्षण क्यों दर्शाते हैं, जबकि ऐल्कोहॉल तथा ग्लूकोज़ के विलयन अम्लीयता नहीं दर्शाते?

हल: अम्लीय गुण का कारण H+ / H3O+ आयन हैं। HCl व HNO3 जल में घुलकर पूरी तरह आयनित हो जाते हैं और हाइड्रोनियम आयन देते हैं:

HCl(aq) + H2O(l) → H3O+(aq) + Cl−(aq)

इसके विपरीत ग्लूकोज़ व ऐल्कोहॉल में हाइड्रोजन होते हुए भी वे जल में आयनित नहीं होते — H+ आयन देते ही नहीं। इसलिए उनके विलयन न अम्लीय गुण दिखाते हैं, न विद्युत चालन करते हैं।

प्रश्न 2. अम्ल का जलीय विलयन विद्युत का चालन क्यों करता है?

हल: अम्ल के जलीय विलयन में आयन (H3O+ व ऋणायन) उपस्थित होते हैं। विद्युत धारा इन्हीं आयनों की गति से प्रवाहित होती है — धनायन कैथोड की ओर और ऋणायन ऐनोड की ओर चलते हैं।

उत्तर: आयनों की उपस्थिति के कारण ही अम्ल का जलीय विलयन विद्युत का चालन करता है; शुष्क अम्ल या बेंज़ीन जैसे विलायकों में आयन न बनने से चालन नहीं होता।

प्रश्न 3. शुष्क HCl गैस, शुष्क नीले लिटमस पत्र का रंग क्यों नहीं बदलती?

हल: लिटमस का रंग बदलने के लिए H+ आयन चाहिए, और HCl गैस H+ आयन केवल जल की उपस्थिति में ही देती है। शुष्क गैस और शुष्क लिटमस — दोनों ओर जल नहीं है, इसलिए आयन बनते ही नहीं और रंग नहीं बदलता। लिटमस को नम कर दें तो वही गैस उसे तुरंत लाल कर देगी।

प्रश्न 4. अम्ल को तनु करते समय यह क्यों सुझाया जाता है कि अम्ल को जल में मिलाना चाहिए, न कि जल को अम्ल में?

हल: सान्द्र अम्ल में जल मिलाने की क्रिया अत्यंत ऊष्माक्षेपी है। यदि जल को अम्ल में डाला जाए तो उत्पन्न ऊष्मा से जल अचानक वाष्प बनकर मिश्रण को बाहर उछाल सकता है — अम्ल की बूंदें त्वचा पर पड़कर गंभीर जलन करेंगी और काँच का बर्तन भी चटक सकता है। इसके विपरीत, अम्ल को जल में धीरे-धीरे हिलाते हुए मिलाने पर ऊष्मा अधिक मात्रा के जल में फैल जाती है और कोई दुर्घटना नहीं होती।

उत्तर: सुरक्षा के लिए हमेशा अम्ल को जल में धीरे-धीरे मिलाएँ — “जल को अम्ल में कभी नहीं।”

प्रश्न 5. जब किसी अम्ल के विलयन को तनु किया जाता है, तो हाइड्रोनियम आयनों (H3O+) की सान्द्रता कैसे प्रभावित होती है?

हल: तनु करने पर जल की मात्रा बढ़ जाती है, परंतु H3O+ आयनों की कुल संख्या उतनी ही रहती है। इसलिए प्रति इकाई आयतन में आयनों की संख्या यानी सान्द्रता घट जाती है — विलयन का अम्लीय असर कम हो जाता है और pH 7 की ओर बढ़ता है।

प्रश्न 6. जब सोडियम हाइड्रॉक्साइड के विलयन में आधिक्य क्षारक मिलाया जाता है, तो हाइड्रॉक्साइड आयनों (OH−) की सान्द्रता कैसे प्रभावित होती है?

हल: आधिक्य क्षारक घोलने पर विलयन में OH− आयनों की कुल संख्या बढ़ जाती है, इसलिए प्रति इकाई आयतन में उनकी सान्द्रता बढ़ जाती है — विलयन अधिक क्षारकीय हो जाता है और pH 14 की ओर बढ़ता है।

(घ) अनुच्छेद 2.3 – pH पर आधारित प्रश्न

प्रश्न 1. आपके पास दो विलयन ‘A’ और ‘B’ हैं। विलयन ‘A’ का pH 6 तथा विलयन ‘B’ का pH 8 है। किस विलयन में हाइड्रोजन आयनों की सान्द्रता अधिक है? इनमें से कौन अम्लीय है तथा कौन क्षारकीय?

हल: pH जितना कम, H+ आयनों की सान्द्रता उतनी अधिक। विलयन ‘A’ का pH (6) ‘B’ (8) से कम है, इसलिए ‘A’ में हाइड्रोजन आयनों की सान्द्रता अधिक है। pH 7 से कम होने के कारण ‘A’ अम्लीय है और pH 7 से अधिक होने के कारण ‘B’ क्षारकीय है।

प्रश्न 2. H+(aq) आयनों की सान्द्रता का विलयन की प्रकृति पर क्या प्रभाव पड़ता है?

हल: विलयन की प्रकृति H+ आयनों की सान्द्रता से ही तय होती है — H+ आयनों की सान्द्रता अधिक हो तो विलयन अम्लीय, कम हो (और OH− अधिक हो) तो विलयन क्षारकीय, तथा दोनों संतुलित हों तो विलयन उदासीन होता है। सान्द्रता बढ़ने-घटने से ही क्रमशः pH घटता-बढ़ता है।

प्रश्न 3. क्या क्षारकीय विलयनों में भी H+(aq) आयन होते हैं? यदि हाँ, तो ये विलयन क्षारकीय क्यों होते हैं?

हल: हाँ, क्षारकीय विलयनों में भी H+ आयन होते हैं, क्योंकि जल स्वयं भी बहुत कम मात्रा में आयनित होता है। परंतु क्षारकीय विलयन में OH− आयनों की सान्द्रता, H+ आयनों की तुलना में बहुत अधिक होती है। प्रकृति उसी की मानी जाती है जिसके आयन अधिक हों — इसलिए ये विलयन क्षारकीय कहलाते हैं।

प्रश्न 4. आप सोचिए कि कोई किसान अपने खेत की मिट्टी का उपचार बिना बुझे चूने (कैल्सियम ऑक्साइड) या बुझे चूने (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड) या चॉक (कैल्सियम कार्बोनेट) से किन परिस्थितियों में करेगा?

हल: जब खेत की मिट्टी अधिक अम्लीय हो जाती है, तो फसल ठीक से नहीं बढ़ती। CaO, Ca(OH)2 व CaCO3 — तीनों क्षारकीय पदार्थ हैं। ये मिट्टी के अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करके pH को पौधों के लिए उपयुक्त सीमा में ले आते हैं।

उत्तर: अतः किसान मिट्टी के अम्लीय होने की परिस्थिति में ही इन चूनों से मिट्टी का उपचार करता है।

(ङ) अनुच्छेद 2.4 – लवणों पर आधारित प्रश्न

प्रश्न 1. CaOCl2 यौगिक का सामान्य नाम क्या है?

हल:

उत्तर: CaOCl2 का सामान्य नाम है — विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder)। इसका रासायनिक नाम कैल्सियम ऑक्सीक्लोराइड है।

प्रश्न 2. उस पदार्थ का नाम बताइए, जिस पर क्लोरीन की क्रिया से विरंजक चूर्ण प्राप्त होता है।

हल: वह पदार्थ है — शुष्क बुझा चूना, Ca(OH)2।

Ca(OH)2 + Cl2 → CaOCl2 + H2O

प्रश्न 3. कठोर जल को मृदु बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले सोडियम यौगिक का नाम बताइए।

हल:

उत्तर: धोने का सोडा — सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट, Na2CO3·10H2O। यह जल की स्थायी कठोरता दूर करता है।

प्रश्न 4. सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट के विलयन को गरम करने पर क्या होगा? इस अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।

हल: गरम करने पर सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (बेकिंग सोडा) का वियोजन होकर सोडियम कार्बोनेट, जल व कार्बन डाइऑक्साइड बनते हैं। निकलने वाली CO2 ही केक-पकोड़ों को फुलाती है:

2NaHCO3(s) →(ऊष्मा) Na2CO3(s) + H2O(l) + CO2(g)↑

प्रश्न 5. प्लास्टर ऑफ़ पेरिस तथा जल की अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।

हल: POP जल से क्रिया करके पुनः जिप्सम बनाता है और कठोर ठोस के रूप में जम जाता है:

CaSO4·½H2O(s) + 1½H2O(l) → CaSO4·2H2O(s)
(प्लास्टर ऑफ़ पेरिस + जल → जिप्सम)

इस भाग में हमने सीखा — InText के 19 प्रश्न ही इस अध्याय की रीढ़ हैं; इन्हें तैयार कर लिया तो अध्याय का आधा से अधिक काम हो गया समझिए।

📗 NCERT उदाहरण (Examples)

एक बात पहले ही साफ़ कर दें — इस अध्याय में NCERT ने गणित की तरह क्रमांकित “उदाहरण (Examples)” नहीं दिए हैं। किताब की सीख क्रियाकलापों (Activities 2.1 से 2.14) के माध्यम से दी गई है। नीचे उन्हीं क्रियाकलापों पर आधारित तीन सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण दिए जा रहे हैं — परीक्षा में इन्हीं पर आधारित प्रेक्षण-प्रश्न (observation questions) आते हैं।

उदाहरण 1 (क्रियाकलाप-आधारित). सूखे नीले लिटमस और नम नीले लिटमस पर शुष्क HCl गैस का क्या प्रभाव पड़ता है?

हल: शुष्क HCl गैस शुष्क नीले लिटमस का रंग नहीं बदलती, क्योंकि जल के बिना HCl से H+ आयन अलग नहीं होते। वही गैस जब नम नीले लिटमस के संपर्क में आती है, तो जल की उपस्थिति में H3O+ आयन बनते हैं और लिटमस लाल हो जाता है। निष्कर्ष — अम्लीय व्यवहार के लिए जल आवश्यक है।

उदाहरण 2 (क्रियाकलाप-आधारित). ग्लूकोज़, ऐल्कोहॉल और HCl के विलयनों को विद्युत परिपथ (बल्ब-युक्त) से जाँचने पर क्या प्रेक्षण मिलता है और क्यों?

हल: HCl के विलयन में बल्ब जलता है, जबकि ग्लूकोज़ व ऐल्कोहॉल के विलयनों में बल्ब नहीं जलता। कारण — HCl जल में आयनित होकर H+ व Cl− आयन देता है, जो धारा बहाते हैं; ग्लूकोज़ व ऐल्कोहॉल आयनित नहीं होते। इससे सिद्ध होता है कि हाइड्रोजन होते हुए भी ग्लूकोज़-ऐल्कोहॉल अम्ल नहीं हैं, क्योंकि अम्लता H+ आयनों से आती है, केवल हाइड्रोजन परमाणु से नहीं।

उदाहरण 3 (क्रियाकलाप-आधारित). चूने के पानी में CO2 गैस थोड़ी देर और फिर अधिक देर तक प्रवाहित करने पर क्या होता है?

हल:

चरण 1: थोड़ी देर CO2 प्रवाहित करने पर अघुलनशील CaCO3 बनता है और चूने का पानी दूधिया हो जाता है: Ca(OH)2 + CO2 → CaCO3↓ + H2O।

चरण 2: अधिक देर तक प्रवाहित करने पर CaCO3, घुलनशील कैल्सियम हाइड्रोजनकार्बोनेट में बदल जाता है और दूधियापन गायब हो जाता है: CaCO3 + H2O + CO2 → Ca(HCO3)2।

निष्कर्ष: चूने के पानी का दूधिया होना CO2 की जाँच है — परंतु गैस अधिक प्रवाहित करने पर दूधियापन मिट जाता है, यह बात भी याद रखें।

✏️ प्रश्नावली (Exercise) – सभी 15 प्रश्नों के हल

प्रश्न 1. कोई विलयन लाल लिटमस को नीला कर देता है, इसका pH संभवतः क्या होगा? (a) 1 (b) 4 (c) 5 (d) 10

हल: लाल लिटमस को नीला करना क्षारकीय विलयन की पहचान है, और क्षारकीय विलयन का pH 7 से अधिक होता है। दिए गए विकल्पों में 7 से अधिक केवल 10 है।

उत्तर: (d) 10

प्रश्न 2. कोई विलयन अंडे के पिसे हुए कवच से अभिक्रिया करके एक गैस उत्पन्न करता है, जो चूने के पानी को दूधिया कर देती है। इस विलयन में क्या होगा? (a) NaCl (b) HCl (c) LiCl (d) KCl

हल: अंडे का कवच CaCO3 का बना होता है। उससे क्रिया करके CO2 गैस (जो चूने के पानी को दूधिया करती है) केवल अम्ल ही निकाल सकता है। विकल्पों में अम्ल केवल HCl है; बाकी तीनों लवण हैं।

उत्तर: (b) HCl — CaCO3 + 2HCl → CaCl2 + H2O + CO2↑

प्रश्न 3. NaOH के 10 mL विलयन को HCl के दिए गए विलयन के 8 mL द्वारा पूर्णतः उदासीन किया जाता है। यदि हम NaOH के उसी विलयन के 20 mL लें, तो आवश्यक HCl विलयन (उसी विलयन) की मात्रा होगी — (a) 4 mL (b) 8 mL (c) 12 mL (d) 16 mL

हल: उदासीनीकरण में मात्रा समानुपात में बढ़ती है। NaOH दोगुना (10 → 20 mL) किया, तो उसी सान्द्रता के HCl की मात्रा भी दोगुनी लगेगी: 8 × 2 = 16 mL।

उत्तर: (d) 16 mL

प्रश्न 4. अपच का उपचार करने के लिए निम्न में से किस औषधि का उपयोग होता है? (a) एंटीबायोटिक (प्रतिजैविक) (b) एनाल्जेसिक (पीड़ाहारी) (c) एंटैसिड (प्रत्यम्ल) (d) एंटीसेप्टिक (प्रतिरोधी)

हल: अपच का कारण आमाशय में अतिरिक्त अम्ल बनना है। उसे उदासीन करने के लिए दुर्बल क्षारक वाली औषधि — एंटैसिड — दी जाती है, जैसे मिल्क ऑफ़ मैग्नीशिया Mg(OH)2।

उत्तर: (c) एंटैसिड

प्रश्न 5. निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए पहले शब्द समीकरण और फिर संतुलित समीकरण लिखिए: (a) तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल, ज़िंक दानों (granules) के साथ अभिक्रिया करता है। (b) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, मैग्नीशियम पट्टी के साथ अभिक्रिया करता है। (c) तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल, ऐलुमिनियम चूर्ण के साथ अभिक्रिया करता है। (d) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, लौह रेतन (iron filings) के साथ अभिक्रिया करता है।

हल:

(a) शब्द समीकरण: ज़िंक + तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल → ज़िंक सल्फ़ेट + हाइड्रोजन

Zn(s) + H2SO4(aq) → ZnSO4(aq) + H2(g)↑

(b) शब्द समीकरण: मैग्नीशियम + तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → मैग्नीशियम क्लोराइड + हाइड्रोजन

Mg(s) + 2HCl(aq) → MgCl2(aq) + H2(g)↑

(c) शब्द समीकरण: ऐलुमिनियम + तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल → ऐलुमिनियम सल्फ़ेट + हाइड्रोजन

2Al(s) + 3H2SO4(aq) → Al2(SO4)3(aq) + 3H2(g)↑

(d) शब्द समीकरण: लोहा + तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → आयरन(II) क्लोराइड + हाइड्रोजन

Fe(s) + 2HCl(aq) → FeCl2(aq) + H2(g)↑

प्रश्न 6. ऐल्कोहॉल तथा ग्लूकोज़ जैसे यौगिकों में भी हाइड्रोजन होते हैं, लेकिन उन्हें अम्ल की श्रेणी में नहीं रखा गया है। इसे सिद्ध करने के लिए एक क्रियाकलाप का वर्णन कीजिए।

हल:

चरण 1: एक कॉर्क पर दो कीलें गाड़कर उसे बीकर में रखिए। कीलों को तार द्वारा 6 वोल्ट की बैटरी, एक बल्ब व एक स्विच से जोड़िए — यह विद्युत-चालन जाँचने का परिपथ है।

चरण 2: बीकर में ग्लूकोज़ का विलयन (फिर ऐल्कोहॉल का विलयन) डालकर स्विच ऑन कीजिए — बल्ब नहीं जलता। अर्थात इन विलयनों में धारा नहीं बहती, क्योंकि इनमें आयन नहीं हैं।

चरण 3: अब बीकर में तनु HCl का विलयन डालकर स्विच ऑन कीजिए — बल्ब जल उठता है, क्योंकि HCl आयनित होकर H+ व Cl− आयन देता है।

निष्कर्ष: अम्लता हाइड्रोजन परमाणु से नहीं, जल में बने H+ आयनों से आती है। ग्लूकोज़ व ऐल्कोहॉल H+ आयन नहीं देते, इसलिए वे अम्ल नहीं हैं।

प्रश्न 7. आसुत जल विद्युत का चालन क्यों नहीं करता, जबकि वर्षा का जल करता है?

हल: आसुत जल बिल्कुल शुद्ध होता है — उसमें आयन लगभग नहीं होते, इसलिए वह धारा नहीं बहा पाता। वर्षा का जल वायुमंडल से गिरते समय CO2, SO2 जैसी गैसों व धूल-कणों को घोल लेता है, जिससे उसमें आयन बन जाते हैं (वर्षा का जल हल्का अम्लीय भी होता है)।

उत्तर: आयनों की उपस्थिति के कारण वर्षा का जल विद्युत का चालन करता है, आसुत जल नहीं।

प्रश्न 8. जल की अनुपस्थिति में अम्ल, अम्लीय व्यवहार क्यों नहीं प्रदर्शित करते?

हल: अम्लीय व्यवहार का मूल कारण H+(aq) / H3O+ आयन हैं। अम्ल से ये आयन केवल जल में घुलने पर ही अलग होते हैं। जल की अनुपस्थिति में अम्ल के अणु वैसे-के-वैसे रहते हैं — आयन बनते ही नहीं, इसलिए न लिटमस का रंग बदलता है, न धातु से H2 निकलती है, न विद्युत चालन होता है।

प्रश्न 9. पाँच विलयनों A, B, C, D तथा E की सार्वत्रिक सूचक से जाँच करने पर उनके pH क्रमशः 4, 1, 11, 7 तथा 9 प्राप्त हुए। कौन-सा विलयन: (a) उदासीन है? (b) प्रबल क्षारीय है? (c) प्रबल अम्लीय है? (d) दुर्बल अम्लीय है? (e) दुर्बल क्षारीय है? pH को हाइड्रोजन आयन सान्द्रता के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

हल:

(a) उदासीन: pH 7 वाला — D। (b) प्रबल क्षारीय: pH 11 वाला — C। (c) प्रबल अम्लीय: pH 1 वाला — B। (d) दुर्बल अम्लीय: pH 4 वाला — A। (e) दुर्बल क्षारीय: pH 9 वाला — E।

क्रम: pH बढ़ने पर H+ आयनों की सान्द्रता घटती है। इसलिए हाइड्रोजन आयन सान्द्रता के बढ़ते क्रम में pH का क्रम होगा — 11 < 9 < 7 < 4 < 1 (अर्थात सबसे कम H+ सान्द्रता pH 11 में और सबसे अधिक pH 1 में)।

प्रश्न 10. परखनली ‘A’ व ‘B’ में समान लंबाई की मैग्नीशियम पट्टियाँ ली गई हैं। परखनली ‘A’ में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) तथा परखनली ‘B’ में ऐसीटिक अम्ल (CH3COOH) लिया गया है। दोनों अम्लों की मात्रा तथा सान्द्रता समान है। किस परखनली में बुदबुदाहट अधिक तीव्रता से होगी तथा क्यों?

हल: दोनों परखनलियों में Mg से क्रिया होकर H2 गैस बनेगी, परंतु HCl एक प्रबल अम्ल है — वह जल में पूरी तरह आयनित होकर बहुत अधिक H+ आयन देता है; जबकि ऐसीटिक अम्ल दुर्बल अम्ल है — वह आंशिक आयनित होता है, इसलिए H+ आयन कम मिलते हैं।

उत्तर: परखनली ‘A’ (HCl) में बुदबुदाहट अधिक तीव्र होगी, क्योंकि अभिक्रिया की गति H+ आयनों की सान्द्रता पर निर्भर करती है।

प्रश्न 11. ताज़ा दूध का pH 6 है। दही बन जाने पर इसके pH में क्या परिवर्तन होगा? अपना उत्तर समझाइए।

हल: दूध से दही बनने की क्रिया में जीवाणु दूध की शर्करा (लैक्टोज़) को लैक्टिक अम्ल में बदल देते हैं। नया अम्ल बनने से H+ आयनों की सान्द्रता बढ़ जाती है।

उत्तर: दही बनने पर pH 6 से घटकर और कम हो जाएगा (विलयन अधिक अम्लीय हो जाएगा) — दही का खट्टा स्वाद इसी लैक्टिक अम्ल के कारण होता है।

प्रश्न 12. कोई ग्वाला ताज़ा दूध में थोड़ी मात्रा में बेकिंग सोडा मिलाता है। (a) वह ताज़ा दूध के pH 6 को थोड़ा-सा क्षारीय क्यों कर देता है? (b) इस दूध को दही बनने में लंबा समय क्यों लगता है?

हल:

(a) बेकिंग सोडा (NaHCO3) क्षारकीय होता है। उसे मिलाने से दूध का pH 6 से बढ़कर हल्का क्षारीय हो जाता है, ताकि दूध जल्दी खट्टा (खराब) न हो — ग्वाला दूध को अधिक समय तक ताज़ा बनाए रखना चाहता है।

(b) दही बनने के लिए दूध में लैक्टिक अम्ल बनना ज़रूरी है। मिलाया गया बेकिंग सोडा पहले बने हुए अम्ल को उदासीन करता रहता है; जब सारा सोडा खत्म हो जाता है, तब जाकर अम्ल इतना बढ़ता है कि दूध जम सके।

उत्तर: (a) दूध देर तक ताज़ा रहे, इसलिए pH क्षारीय किया जाता है। (b) बना लैक्टिक अम्ल पहले बेकिंग सोडे को उदासीन करने में खर्च होता है, इसलिए दही बनने में लंबा समय लगता है।

प्रश्न 13. प्लास्टर ऑफ़ पेरिस को आर्द्रता-रोधी (moisture-proof) बर्तन में क्यों रखना चाहिए? समझाइए।

हल: POP हवा की नमी (आर्द्रता) से भी जल सोख लेता है। जल मिलते ही वह जिप्सम बनकर कठोर ठोस में जम जाता है:

CaSO4·½H2O + 1½H2O → CaSO4·2H2O
उत्तर: एक बार जमा हुआ POP फिर प्लास्टर के काम का नहीं रहता, इसलिए उसे हमेशा आर्द्रता-रोधी बर्तन में बंद करके रखना चाहिए।

प्रश्न 14. उदासीनीकरण अभिक्रिया क्या है? दो उदाहरण दीजिए।

हल: अम्ल व क्षारक की परस्पर अभिक्रिया से लवण व जल बनने की क्रिया को उदासीनीकरण कहते हैं। इसमें अम्ल के H+ और क्षारक के OH− मिलकर जल बनाते हैं तथा ऊष्मा निकलती है।

उदाहरण 1:

HCl(aq) + NaOH(aq) → NaCl(aq) + H2O(l)

उदाहरण 2:

H2SO4(aq) + 2KOH(aq) → K2SO4(aq) + 2H2O(l)

रोज़ के उदाहरण — पेट की अम्लता में एंटैसिड लेना और अम्लीय मिट्टी में चूना डालना भी उदासीनीकरण ही है।

प्रश्न 15. धोने के सोडे तथा बेकिंग सोडे के दो-दो प्रमुख उपयोग बताइए।

हल:

धोने के सोडे (Na2CO3·10H2O) के उपयोग: (1) काँच, साबुन तथा कागज़ उद्योगों में उपयोग होता है। (2) जल की स्थायी कठोरता दूर करने तथा घरों में कपड़े धोने में उपयोग होता है। (बोरेक्स बनाने में भी यही काम आता है।)

बेकिंग सोडे (NaHCO3) के उपयोग: (1) बेकिंग पाउडर बनाने में — जो केक-ब्रेड को फुलाता है। (2) एंटैसिड के रूप में पेट की अम्लता दूर करने में तथा सोडा-अम्ल अग्निशामक में उपयोग होता है।

इस प्रश्नावली में हमने सीखा — 15 प्रश्नों में pH, उदासीनीकरण और लवणों के उपयोग ही सबसे अधिक भार रखते हैं; ये तीनों खंड पक्के कर लिए तो प्रश्नावली आसान है।

📖 Case Study – दावत, अपच और एंटैसिड की कहानी

गाँव में एक दावत में सुरेश ने खूब चाट-पकोड़े खाए — ऊपर से खट्टी इमली की चटनी भी अधिक ले ली। रात को उसके पेट में तेज़ जलन होने लगी और खट्टी डकारें आने लगीं। दादी ने कहा — “पेट में अम्ल बढ़ गया है” और उसे एक छोटा गिलास पानी में घुला एंटैसिड पिला दिया। थोड़ी ही देर में सुरेश को आराम मिल गया। अगले दिन विद्यालय में शिक्षक ने बताया कि हमारे आमाशय का रस हल्का अम्लीय होता है और भोजन पचाने के लिए ज़रूरी है, परंतु आवश्यकता से अधिक अम्ल बन जाए तो वही जलन करता है। उन्होंने यह भी बताया कि दाँतों की सुरक्षा के लिए खाना खाने के बाद मुँह साफ़ करना चाहिए, क्योंकि मुँह में बचा खाना जीवाणुओं द्वारा अम्ल में बदल जाता है। इस गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

Q1. सुरेश के पेट में जलन (अम्लता) का कारण क्या था? —

(A) पेट में क्षारक अधिक बनना
(B) आमाशय में आवश्यकता से अधिक हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनना
(C) पेट में जल की कमी होना
(D) भोजन में नमक अधिक होना

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) आमाशय में आवश्यकता से अधिक हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनना — अत्यधिक व मसालेदार भोजन से अम्ल अधिक बना, जिससे जलन व खट्टी डकारें आईं।

Q2. एंटैसिड पीने से सुरेश को आराम क्यों मिला? —

(A) एंटैसिड ने अम्ल को और बढ़ा दिया
(B) एंटैसिड एक दुर्बल क्षारक है, जिसने अतिरिक्त अम्ल को उदासीन कर दिया
(C) एंटैसिड ने भोजन को बाहर निकाल दिया
(D) एंटैसिड ने पेट को ठंडा कर दिया

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) एंटैसिड एक दुर्बल क्षारक है — यह उदासीनीकरण अभिक्रिया द्वारा अतिरिक्त HCl को लवण व जल में बदल देता है, इसलिए जलन दूर हो जाती है।

Q3. शिक्षक के अनुसार मुँह का pH कितने से कम हो जाने पर दाँतों की सड़न शुरू हो सकती है? —

(A) 7.5
(B) 6.5
(C) 5.5
(D) 4.5

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) 5.5 — मुँह का pH 5.5 से कम होने पर दाँतों का इनैमल संक्षारित होने लगता है और सड़न शुरू हो जाती है।

Q4. मिल्क ऑफ़ मैग्नीशिया, जो एक प्रसिद्ध एंटैसिड है, रासायनिक रूप से क्या है? —

(A) NaHCO3
(B) Ca(OH)2
(C) Mg(OH)2
(D) Na2CO3

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) Mg(OH)2 — मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड, जो एक दुर्बल क्षारक है: Mg(OH)2 + 2HCl → MgCl2 + 2H2O।

⭐ Quick Revision – Important Points

  • ✅ अम्ल जल में H+ / H3O+ आयन और क्षारक OH− आयन देते हैं — अम्लता-क्षारकता की जड़ यही आयन हैं।
  • ✅ नीला लिटमस अम्ल में लाल, लाल लिटमस क्षारक में नीला; हल्दी क्षारक में लाल-भूरी; फ़िनॉल्फ़थेलिन क्षारक में गुलाबी व अम्ल में रंगहीन; मेथिल ऑरेंज अम्ल में लाल व क्षारक में पीला।
  • ✅ धातु + अम्ल → लवण + H2 (पॉप ध्वनि से जाँच); कार्बोनेट + अम्ल → लवण + जल + CO2 (चूने का पानी दूधिया)।
  • ✅ अम्ल + क्षारक → लवण + जल = उदासीनीकरण (ऊष्माक्षेपी); धात्विक ऑक्साइड क्षारकीय व अधात्विक ऑक्साइड अम्लीय होते हैं।
  • ✅ अम्ल को तनु करते समय हमेशा अम्ल को जल में धीरे-धीरे मिलाएँ; तनु करने पर H3O+ की सान्द्रता घटती है।
  • ✅ pH 7 से कम = अम्लीय, 7 = उदासीन, 7 से अधिक = क्षारकीय; pH घटने पर H+ सान्द्रता बढ़ती है।
  • ✅ दैनिक pH — आमाशय रस लगभग 1.2, मुँह का pH 5.5 से कम हो तो दाँत सड़ते हैं, अम्ल वर्षा का pH 5.6 से कम, शरीर 7.0–7.8 सीमा में काम करता है।
  • ✅ क्लोर-क्षार प्रक्रम: 2NaCl + 2H2O → 2NaOH + Cl2 + H2।
  • ✅ चार प्रमुख लवण — विरंजक चूर्ण CaOCl2, बेकिंग सोडा NaHCO3, धोने का सोडा Na2CO3·10H2O, POP CaSO4·½H2O (जिप्सम CaSO4·2H2O से 373 K पर बनता है)।
  • ✅ बेकिंग सोडा में क्रिस्टलन जल नहीं होता; धोने के सोडे में 10, जिप्सम में 2 और नीले थोथे में 5 अणु क्रिस्टलन जल के होते हैं।

⚠️ Aam Galtiyan (Common Mistakes)

  • लिटमस के रंग उलटे लिखना: अम्ल नीले लिटमस को लाल करता है और क्षारक लाल लिटमस को नीला — “अम्ल लाल लिटमस को…” जैसी उलटी बात लिखना सबसे आम गलती है।
  • फ़िनॉल्फ़थेलिन का रंग भूलना: यह अम्ल में गुलाबी नहीं, रंगहीन रहती है और क्षारक में गुलाबी होती है — MCQ में यही सबसे बड़ा जाल है।
  • POP का सूत्र गलत लिखना: POP CaSO4·½H2O है, CaSO4·2H2O नहीं — वह तो जिप्सम है। धोने के सोडे में 10H2O भी अक्सर 5 लिख दिया जाता है, सावधान रहें।
  • तनुकरण का क्रम उल्टा बताना: “जल को अम्ल में मिलाएँ” लिखना गलत भी है और खतरनाक भी — सही क्रम है: अम्ल को जल में, धीरे-धीरे हिलाते हुए।
  • pH और सान्द्रता का संबंध उल्टा करना: pH घटने पर H+ सान्द्रता बढ़ती है। प्रश्न 9 जैसे क्रम-प्रश्नों में यही बात सबसे अधिक विद्यार्थियों को फँसाती है।
  • बेकिंग सोडा व बेकिंग पाउडर में गड़बड़ी: बेकिंग सोडा केवल NaHCO3 है; बेकिंग पाउडर = बेकिंग सोडा + टार्टरिक अम्ल जैसा दुर्बल खाद्य अम्ल — दोनों को एक लिखना गलत है।
  • CO2 व H2 की जाँच आपस में बदलना: H2 पॉप ध्वनि से जलती है, CO2 मोमबत्ती बुझाती है और चूने के पानी को दूधिया करती है — जाँचें न बदलें।

🎯 Bihar Board Exam Tips

  • सूचकों की table रट लें: लिटमस, हल्दी, मेथिल ऑरेंज व फ़िनॉल्फ़थेलिन के अम्ल-क्षारक रंगों पर हर साल 1–2 वस्तुनिष्ठ प्रश्न आते हैं — यह सबसे आसान अंक हैं।
  • चारों लवणों के सूत्र, बनाना व दो-दो उपयोग तैयार रखें: विरंजक चूर्ण, बेकिंग सोडा, धोने का सोडा व POP — इन पर दीर्घ उत्तरीय प्रश्न लगभग निश्चित आता है। उत्तर में संतुलित समीकरण अवश्य लिखें।
  • pH वाले प्रश्न समझकर करें, रटकर नहीं: दूध-दही, ग्वाला-बेकिंग सोडा, मिट्टी-चूना, दाँतों की सड़न — ये अनुप्रयोग-आधारित प्रश्न BSEB के पसंदीदा हैं; कारण सहित उत्तर लिखने पर पूरे अंक मिलते हैं।
  • समीकरण के साथ गैस की जाँच भी लिखें: H2 के लिए पॉप ध्वनि और CO2 के लिए चूने का पानी दूधिया — जाँच लिखने से उत्तर पूर्ण माना जाता है।
  • MCQ अभ्यास: pH की संख्याएँ (आमाशय रस 1.2, दाँत 5.5, अम्ल वर्षा 5.6) और लवणों के सूत्र अलग से एक पेज पर लिखकर दोहराएँ — वस्तुनिष्ठ खंड में यही तथ्य बार-बार आते हैं।
  • पिछले वर्षों के BSEB प्रश्न-पत्रों से इस अध्याय के प्रश्न हल करके जाएँ — InText व प्रश्नावली के प्रश्न अक्सर दोहराए जाते हैं।

📝 MCQ Quiz – 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (स्वयं को जाँचें)

पहले बिना देखे हल करें, फिर “✅ उत्तर देखें” खोलकर मिलाएँ। अंत में Answer Key table दी गई है।

Q1. नीला लिटमस विलयन किसमें लाल हो जाता है? —

(A) क्षारकीय विलयन में
(B) अम्लीय विलयन में
(C) आसुत जल में
(D) नमक के विलयन में

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) अम्लीय विलयन में — अम्ल नीले लिटमस को लाल कर देता है।

Q2. फ़िनॉल्फ़थेलिन क्षारकीय विलयन में कौन-सा रंग देती है? —

(A) लाल
(B) पीला
(C) गुलाबी
(D) रंगहीन रहती है

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) गुलाबी — फ़िनॉल्फ़थेलिन अम्ल में रंगहीन और क्षारक में गुलाबी होती है।

Q3. ज़िंक पर तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल डालने से निकलने वाली गैस है —

(A) CO2
(B) O2
(C) H2
(D) Cl2

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) H2 — Zn + H2SO4 → ZnSO4 + H2↑; गैस पॉप ध्वनि के साथ जलती है।

Q4. चूने के पानी को दूधिया करने वाली गैस है —

(A) हाइड्रोजन
(B) कार्बन डाइऑक्साइड
(C) ऑक्सीजन
(D) नाइट्रोजन

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) कार्बन डाइऑक्साइड — CO2 + Ca(OH)2 → CaCO3↓ + H2O; सफ़ेद CaCO3 ही दूधियापन है।

Q5. उदासीन विलयन का pH होता है —

(A) 0
(B) 1
(C) 7
(D) 14

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) 7 — pH 7 से कम अम्लीय और 7 से अधिक क्षारकीय होता है।

Q6. विरंजक चूर्ण (bleaching powder) का सूत्र है —

(A) CaCl2
(B) CaOCl2
(C) Ca(OH)2
(D) CaCO3

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) CaOCl2 — बुझे चूने पर क्लोरीन की क्रिया से बनता है।

Q7. बेकिंग सोडा का रासायनिक सूत्र है —

(A) Na2CO3
(B) Na2CO3·10H2O
(C) NaHCO3
(D) NaOH

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) NaHCO3 — सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट; इसमें क्रिस्टलन जल नहीं होता।

Q8. प्लास्टर ऑफ़ पेरिस का सूत्र है —

(A) CaSO4·2H2O
(B) CaSO4·½H2O
(C) CaSO4
(D) CaOCl2

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) CaSO4·½H2O — जिप्सम (CaSO4·2H2O) को 373 K पर गरम करने से बनता है।

Q9. धोने के सोडे में क्रिस्टलन जल के अणुओं की संख्या है —

(A) 2
(B) 5
(C) 7
(D) 10

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (D) 10 — धोने का सोडा Na2CO3·10H2O है।

Q10. चींटी के डंक में कौन-सा अम्ल होता है? —

(A) ऐसीटिक अम्ल
(B) मेथैनॉइक (फ़ॉर्मिक) अम्ल
(C) सिट्रिक अम्ल
(D) लैक्टिक अम्ल

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) मेथैनॉइक (फ़ॉर्मिक) अम्ल — डंक पर बेकिंग सोडा जैसा दुर्बल क्षारक लगाने से आराम मिलता है।

Q11. दाँतों की सड़न मुँह का pH कितने से कम होने पर शुरू होती है? —

(A) 6.5
(B) 7.0
(C) 5.5
(D) 8.5

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) 5.5 — इससे कम pH पर दाँतों का इनैमल संक्षारित होने लगता है।

Q12. क्लोर-क्षार प्रक्रम में ब्राइन (नमक के विलयन) के विद्युत अपघटन से कौन-से उत्पाद मिलते हैं? —

(A) NaHCO3, Cl2, H2
(B) NaOH, Cl2, H2
(C) Na2CO3, O2, H2
(D) NaCl, H2O, CO2

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) NaOH, Cl2, H2 — 2NaCl + 2H2O → 2NaOH + Cl2↑ + H2↑।

Q13. शुष्क HCl गैस शुष्क नीले लिटमस का रंग क्यों नहीं बदलती? —

(A) क्योंकि HCl अम्ल नहीं है
(B) क्योंकि जल के बिना H+ आयन नहीं बनते
(C) क्योंकि लिटमस खराब होता है
(D) क्योंकि गैस रंगहीन होती है

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) क्योंकि जल के बिना H+ आयन नहीं बनते — अम्लीय व्यवहार आयनों के कारण ही होता है।

Q14. अम्लीय मिट्टी का उपचार करने के लिए किसान उपयोग करता है —

(A) साधारण नमक
(B) बेकिंग सोडा की अधिक मात्रा
(C) बिना बुझा चूना / बुझा चूना / चॉक
(D) सिरका

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) बिना बुझा चूना / बुझा चूना / चॉक — ये क्षारकीय पदार्थ मिट्टी के अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करते हैं।

Q15. निम्न में से किस लवण में क्रिस्टलन जल नहीं होता? —

(A) धोने का सोडा
(B) जिप्सम
(C) बेकिंग सोडा
(D) नीला थोथा (CuSO4·5H2O)

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) बेकिंग सोडा — NaHCO3 में क्रिस्टलन जल नहीं होता; बाकी तीनों में निश्चित संख्या में जल के अणु जुड़े होते हैं।

Answer Key – उत्तरमाला

प्रश्न 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15
उत्तर B C C B C B C B D B C B B C C

❓ FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1. अम्ल और क्षारक में सबसे सरल अंतर क्या है?
उत्तर: अम्ल जल में H+ / H3O+ आयन देता है, स्वाद में खट्टा होता है, नीले लिटमस को लाल करता है और उसका pH 7 से कम होता है। क्षारक जल में OH− आयन देता है, स्वाद में कड़वा व छूने में चिकना होता है, लाल लिटमस को नीला करता है और उसका pH 7 से अधिक होता है। दोनों मिलते हैं तो उदासीनीकरण से लवण व जल बनता है।

प्रश्न 2. प्रबल अम्ल व दुर्बल अम्ल में क्या अंतर है?
उत्तर: जो अम्ल जल में पूर्णतः आयनित हो जाए, वह प्रबल अम्ल है — जैसे HCl, H2SO4, HNO3। जो अम्ल आंशिक रूप से ही आयनित हो, वह दुर्बल अम्ल है — जैसे ऐसीटिक अम्ल (CH3COOH) व सिट्रिक अम्ल। इसीलिए समान सान्द्रता पर HCl, मैग्नीशियम से ऐसीटिक अम्ल की अपेक्षा अधिक तेज़ी से H2 निकालता है।

प्रश्न 3. बेकिंग सोडा और बेकिंग पाउडर एक ही चीज़ हैं क्या?
उत्तर: नहीं। बेकिंग सोडा केवल सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (NaHCO3) है। बेकिंग पाउडर, बेकिंग सोडे व टार्टरिक अम्ल जैसे दुर्बल खाद्य अम्ल का मिश्रण होता है — अम्ल इसलिए मिलाया जाता है ताकि अभिक्रिया में बना सोडियम कार्बोनेट खाने का स्वाद कड़वा न करे।

प्रश्न 4. क्या केवल InText और प्रश्नावली के प्रश्न तैयार करना काफ़ी है?
उत्तर: इस अध्याय के लिए लगभग हाँ — Board के अधिकांश प्रश्न इन्हीं 34 प्रश्नों (InText 19 + प्रश्नावली 15) से सीधे या हल्के बदलाव के साथ आते हैं। साथ में सूचकों की table, pH की प्रमुख संख्याएँ और चारों लवणों के सूत्र-उपयोग तैयार कर लें, तो वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की तैयारी भी पूरी हो जाएगी।

प्रश्न 5. NCERT की किताब (PDF) कहाँ से मिलेगी?
उत्तर: NCERT की आधिकारिक वेबसाइट ncert.nic.in से Class 10 Science की किताब का PDF बिल्कुल मुफ़्त डाउनलोड किया जा सकता है। वहीं से आप हर अध्याय की मूल किताब पढ़ सकते हैं।

🔗 Pichhla / Agla Adhyay – पिछले व अगले अध्याय पढ़ें

⬅️ पिछला अध्याय: अध्याय 1 — रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण (Chemical Reactions and Equations): Class 10 Science Chapter 1

➡️ अगला अध्याय: अध्याय 3 — धातुएँ एवं अधातुएँ (Metals and Non-metals): Class 10 Science Chapter 3

📚 सभी अध्यायों की सूची यहाँ देखें: NCERT Class 10 Bihar Board Science Book

🔚 Conclusion – निष्कर्ष

बधाई हो! आपने विज्ञान का दूसरा अध्याय पूरा कर लिया। अब आप जानते हैं कि अम्ल-क्षारक की पहचान सूचकों से कैसे होती है, आयन ही अम्लता-क्षारकता की असली वजह क्यों हैं, pH स्केल कैसे पढ़ा जाता है, और विरंजक चूर्ण, बेकिंग सोडा, धोने का सोडा व प्लास्टर ऑफ़ पेरिस जैसे लवण बनते कैसे हैं और काम कहाँ आते हैं।

ऊपर दिए गए सभी 34 हल किए गए प्रश्नों (InText 19 + प्रश्नावली 15), क्रियाकलाप-आधारित उदाहरणों और 15 MCQ का अभ्यास कीजिए। किताब का मूल पाठ पढ़ने के लिए NCERT की आधिकारिक वेबसाइट ncert.nic.in से PDF ले सकते हैं। अब अगले अध्याय — धातुएँ एवं अधातुएँ — की तैयारी शुरू कीजिए; वहाँ धातुओं की अम्लों से अभिक्रियाएँ फिर काम आएँगी। शुभकामनाएँ, मेहनत जारी रखिए!