NCERT Class 10 Science Chapter 3 Metals and Non-metals in Hindi | धातु एवं अधातु Notes, MCQ व प्रश्न-उत्तर

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परिचय – यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है?

Class 10 Science Chapter 3 Metals and Non-metals के NCERT Solutions आपको इस पेज पर सरल हिंदी में, किताब के क्रम से मिलेंगे। Class 10 Science Chapter 3 Metals and Non-metals यानी धातु एवं अधातु — यह अध्याय हमारे आस-पास की हर चीज़ से जुड़ा है, क्योंकि सुबह उठने से रात को सोने तक हम धातुओं और अधातुओं के बीच ही रहते हैं।

ज़रा चारों ओर देखिए — खाना बनाने के बर्तन (ऐलुमिनियम, स्टील, ताँबा), घर तक बिजली पहुँचाने वाले बिजली के तार (ताँबा, ऐलुमिनियम), स्कूल की घंटी (पीतल या लोहे की — ठोकने पर टन-टन बजती है!), सिक्के, गहने, साइकिल, रेल की पटरी… ये सब धातु ही तो हैं। और दूसरी ओर — साँस की ऑक्सीजन, पेंसिल का ग्रेफ़ाइट, माचिस की तीली पर लगा गंधक (सल्फ़र), ये सब अधातुएँ हैं। इस अध्याय में हम जानेंगे कि धातु और अधातु में अंतर क्या है, कौन-सी धातु कितनी क्रियाशील है, धातु ज़मीन के अंदर से निकलकर हमारे घर तक पहुँचती कैसे है, और जंग जैसी रोज़ की समस्या से बचाव कैसे होता है।

Bihar Board (BSEB) Class 10 की परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय बहुत महत्वपूर्ण है। सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series), आयनिक यौगिकों का बनना, धातु निष्कर्षण के चरण (भर्जन, निस्तापन, थर्मिट अभिक्रिया) और संक्षारण व उसके बचाव — इन विषयों से हर साल वस्तुनिष्ठ (MCQ), लघु उत्तरीय और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न नियमित रूप से आते हैं। अध्याय थोड़ा लंबा ज़रूर है, पर कहानी की तरह पढ़ेंगे तो हर बात याद रह जाएगी।

📌 खास बात: इस अध्याय की जान है सक्रियता श्रेणी। यह एक क्रम याद कर लिया तो विस्थापन अभिक्रिया, अम्ल-जल से क्रिया, निष्कर्षण की विधि — आधे प्रश्न अपने आप हल होने लगेंगे। इसलिए श्रेणी को रटने के साथ-साथ उसके पीछे का कारण भी समझिए।

📋 अध्याय की जानकारी (Chapter Information)

Board Bihar Board (BSEB)
Textbook NCERT
Class 10
Subject Science (विज्ञान)
Chapter 3
Chapter Name Metals and Non-metals (धातु एवं अधातु)
कुल हल किए गए प्रश्न 31 (InText 15 + प्रश्नावली 16)

📚 इस Chapter में क्या-क्या है? (Topics)

  1. 3.1 धातुओं व अधातुओं के भौतिक गुण – चमक, कठोरता, आघातवर्धनीयता, तन्यता, ऊष्मा व विद्युत चालकता, ध्वानिकता (sonority) और उनके अपवाद
  2. 3.2 धातुओं के रासायनिक गुण
    • वायु (ऑक्सीजन) के साथ अभिक्रिया – धातु ऑक्साइड, उभयधर्मी ऑक्साइड
    • जल के साथ अभिक्रिया – ठंडा जल, गर्म जल व भाप से अलग-अलग व्यवहार
    • अम्लों के साथ अभिक्रिया व एक्वा रेजिया (अम्लराज)
    • अन्य धातु लवणों के विलयन से अभिक्रिया व सक्रियता श्रेणी
    • अधातुओं के रासायनिक गुण – संक्षिप्त तुलना
  3. 3.3 धातु व अधातु की अभिक्रिया – आयनिक यौगिक – इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण से बंध बनना व आयनिक यौगिकों के गुण
  4. 3.4 धातुओं की प्राप्ति व निष्कर्षण – खनिज, अयस्क, गैंग; सान्द्रण, भर्जन, निस्तापन, अपचयन, थर्मिट अभिक्रिया, विद्युत अपघटन व शोधन
  5. 3.5 संक्षारण व मिश्रधातुएँ – जंग व उसका बचाव; पीतल, काँसा, सोल्डर व स्टेनलेस स्टील
  6. पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (InText) – 15 प्रश्न, महत्वपूर्ण उदाहरण, प्रश्नावली के 16 प्रश्न
  7. Case Study, Quick Revision, Mistakes, Bihar Board Exam Tips, MCQ Quiz व FAQ

📊 Key Concepts – मुख्य परिभाषाएँ व नियम

पद / नियम अर्थ (एक लाइन में)
धात्विक चमक (Metallic Lustre) शुद्ध अवस्था में धातुओं की सतह का चमकदार होना।
आघातवर्धनीयता (Malleability) धातुओं को पीटकर पतली चादर बनाने का गुण; सोना व चाँदी सबसे अधिक आघातवर्धनीय हैं।
तन्यता (Ductility) धातुओं को खींचकर पतले तार बनाने का गुण; सोना सबसे अधिक तन्य धातु है।
ध्वानिकता (Sonority) कठोर सतह से टकराने पर धातुओं का ध्वनि उत्पन्न करना — इसीलिए घंटियाँ धातु की बनती हैं।
सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) धातुओं को उनकी घटती क्रियाशीलता के क्रम में व्यवस्थित सूची — ऊपर वाली धातु सबसे क्रियाशील।
उभयधर्मी ऑक्साइड वे धातु ऑक्साइड जो अम्ल और क्षारक दोनों से क्रिया करके लवण व जल बनाते हैं — जैसे Al2O3, ZnO।
एक्वा रेजिया (अम्लराज) सान्द्र HCl व सान्द्र HNO3 का 3 : 1 मिश्रण; सोना व प्लैटिनम जैसी उत्कृष्ट धातुओं को भी घोल लेता है।
आयनिक (वैद्युतसंयोजी) यौगिक धातु से अधातु की ओर इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से बने यौगिक — जैसे NaCl, MgO।
खनिज (Mineral) पृथ्वी की भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्व या यौगिक।
अयस्क (Ore) वे खनिज जिनसे धातु सुविधाजनक व लाभप्रद रूप से निकाली जा सके।
गैंग (Gangue) अयस्क के साथ मिली मिट्टी, रेत आदि की अशुद्धियाँ।
भर्जन (Roasting) सल्फ़ाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में तेज़ गरम करके ऑक्साइड में बदलना।
निस्तापन (Calcination) कार्बोनेट अयस्क को वायु की अनुपस्थिति (या सीमित वायु) में तेज़ गरम करके ऑक्साइड में बदलना।
थर्मिट अभिक्रिया ऐलुमिनियम द्वारा धातु ऑक्साइड का अपचयन, जिसमें प्रचुर ऊष्मा निकलती है — रेल पटरी जोड़ने में उपयोगी।
संक्षारण (Corrosion) वायु, नमी आदि से धातु का धीरे-धीरे खाया जाना — जैसे लोहे पर जंग।
मिश्रधातु (Alloy) दो या अधिक धातुओं, या धातु व अधातु का समांगी मिश्रण — जैसे पीतल, स्टेनलेस स्टील।

सबसे काम की बात: इस अध्याय का हर बड़ा प्रश्न अंत में सक्रियता श्रेणी से ही जुड़ता है — कौन किसे विस्थापित करेगा, कौन अम्ल से हाइड्रोजन निकालेगा, किस धातु को विद्युत से निकालना पड़ेगा और किसमें जंग लगेगी। श्रेणी पक्की, तो अध्याय पक्का!

धातुओं के भौतिक गुण – पहचान कैसे हो?

कोई वस्तु धातु है या अधातु, यह हम उसके भौतिक गुणों से पहचान सकते हैं। आइए एक-एक गुण को रोज़ के उदाहरण से समझते हैं।

1. धात्विक चमक और कठोरता

शुद्ध अवस्था में धातुओं की सतह चमकदार होती है — इसी को धात्विक चमक कहते हैं। ताँबे के बर्तन को रगड़ते ही उसकी चमक लौट आना आपने घर में देखा होगा। धातुएँ सामान्यतः कठोर होती हैं, पर कठोरता हर धातु में अलग होती है — लोहा बहुत कठोर है, जबकि सोडियम, पोटैशियम और लीथियम इतने नरम हैं कि चाकू से काटे जा सकते हैं। यह इस नियम का प्रसिद्ध अपवाद है।

2. आघातवर्धनीयता (Malleability) – चादर बनना

कुछ धातुओं को पीटकर पतली चादरों में बदला जा सकता है — इस गुण को आघातवर्धनीयता कहते हैं। बाज़ार में मिलने वाला चाँदी का वर्क (वरक़), ऐलुमिनियम की फ़ॉइल और लोहे की चादरें इसी गुण का परिणाम हैं। सोना और चाँदी सबसे अधिक आघातवर्धनीय धातुएँ हैं।

3. तन्यता (Ductility) – तार बनना

धातुओं को खींचकर पतले तार बनाए जा सकते हैं — इस गुण को तन्यता कहते हैं। सोना सबसे अधिक तन्य धातु है — केवल 1 ग्राम सोने से लगभग 2 किलोमीटर लंबा तार खींचा जा सकता है, है न हैरानी की बात! बिजली के तार (ताँबा, ऐलुमिनियम) इसी गुण के कारण बनते हैं।

4. ऊष्मा व विद्युत चालकता और ध्वानिकता

धातुएँ ऊष्मा की सुचालक होती हैं, इसलिए बर्तन धातु के बनते हैं। चाँदी ऊष्मा की सबसे अच्छी चालक है, उसके बाद ताँबा व ऐलुमिनियम आते हैं; वहीं सीसा (लेड) और पारा ऊष्मा के कुचालक माने जाते हैं। धातुओं के गलनांक भी सामान्यतः ऊँचे होते हैं। इसी प्रकार धातुएँ विद्युत की भी सुचालक हैं — इसीलिए तारों में ताँबा-ऐलुमिनियम चलते हैं। और कठोर सतह से टकराने पर धातुएँ ध्वनि उत्पन्न करती हैं — इस गुण को ध्वानिकता (sonority) कहते हैं; स्कूल की घंटी इसी कारण धातु की होती है।

📌 खास बात: धातुओं के भौतिक गुणों में पारा (मरकरी) सबसे बड़ा अपवाद है — यह एकमात्र धातु है जो कमरे के ताप पर द्रव होती है। थर्मामीटर में चमकने वाला वही द्रव है! गैलियम और सीज़ियम भी इतने कम ताप पर पिघलती हैं कि गर्म दिन में या हथेली पर रखते ही पिघलने लगती हैं।

अधातुओं के भौतिक गुण – धातुओं से उलट

अधातुएँ ठोस, द्रव व गैस — तीनों अवस्थाओं में मिलती हैं। ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन गैसें हैं; गंधक (सल्फ़र), कार्बन, आयोडीन ठोस हैं; और ब्रोमीन एकमात्र अधातु है जो द्रव होती है। अधातुओं में सामान्यतः धात्विक चमक नहीं होती (अपवाद — आयोडीन चमकदार अधातु है), ये भंगुर (brittle) होती हैं — ठोकने पर चादर नहीं बनतीं, टूट जाती हैं — और ऊष्मा व विद्युत की कुचालक होती हैं। इनके गलनांक व क्वथनांक भी धातुओं की तुलना में कम होते हैं।

पर यहाँ भी दो प्रसिद्ध अपवाद याद रखिए — हीरा (कार्बन का अपरूप) प्रकृति का सबसे कठोर पदार्थ है और उसका गलनांक बहुत ऊँचा होता है; और ग्रेफ़ाइट (कार्बन का ही दूसरा अपरूप, पेंसिल की “लीड”) अधातु होते हुए भी विद्युत का सुचालक है। परीक्षा में अपवादों से ही प्रश्न बनते हैं, इसलिए इन्हें अलग से याद करें।

गुण धातुएँ अधातुएँ
चमक धात्विक चमक होती है सामान्यतः चमक नहीं (अपवाद – आयोडीन)
अवस्था ठोस (अपवाद – पारा द्रव है) ठोस, द्रव व गैस तीनों (ब्रोमीन द्रव है)
आघातवर्धनीयता व तन्यता चादर व तार बनते हैं भंगुर — ठोकने पर टूटती हैं
चालकता ऊष्मा व विद्युत की सुचालक कुचालक (अपवाद – ग्रेफ़ाइट सुचालक)
ध्वानिकता ध्वनि उत्पन्न करती हैं (ध्वानिक) ध्वनि उत्पन्न नहीं करतीं
गलनांक / क्वथनांक सामान्यतः ऊँचे (अपवाद – Na, K नरम व कम गलनांक वाले) सामान्यतः कम (अपवाद – हीरा बहुत कठोर, ऊँचा गलनांक)

एक साँस में समझें — धातु = चमक, चादर, तार, चालकता व टन-टन ध्वनि; अधातु = सामान्यतः इन सबका उलटा, पर अपवाद (पारा, ब्रोमीन, आयोडीन, ग्रेफ़ाइट, हीरा) ही असली परीक्षा हैं।

धातुओं के रासायनिक गुण – वायु व जल के साथ अभिक्रिया

1. वायु (ऑक्सीजन) के साथ अभिक्रिया – धातु ऑक्साइड बनना

लगभग सभी धातुएँ ऑक्सीजन से क्रिया करके धातु ऑक्साइड बनाती हैं। सामान्य नियम है — धातु + ऑक्सीजन → धातु ऑक्साइड, और अधिकांश धातु ऑक्साइड क्षारकीय (basic) स्वभाव के होते हैं। क्रियाशीलता के अनुसार गति अलग-अलग होती है — सोडियम बिना गरम किए ही क्रिया कर लेता है, जबकि ताँबे को देर तक गरम करना पड़ता है।

4Na(s) + O2(g) → 2Na2O(s)
(सोडियम वायु में रखते ही ऑक्साइड बना लेता है — इसीलिए इसे मिट्टी के तेल में डुबोकर रखते हैं)

2Mg(s) + O2(g) → 2MgO(s)
(मैग्नीशियम चमकदार सफ़ेद लौ के साथ जलता है)

4Al(s) + 3O2(g) → 2Al2O3(s)
(ऐलुमिनियम की सतह पर बनी यह ऑक्साइड परत ही उसे आगे के संक्षारण से बचाती है)

2Cu(s) + O2(g) →(ऊष्मा) 2CuO(s)
(ताँबा धीरे-धीरे क्रिया करता है — गरम करने पर काला कॉपर(II) ऑक्साइड बनता है)

वहीं अधातुएँ ऑक्सीजन से क्रिया करके अम्लीय ऑक्साइड (कुछ उदासीन भी) बनाती हैं — जैसे गंधक जलकर सल्फ़र डाइऑक्साइड बनाती है:

S(s) + O2(g) → SO2(g)
(SO2 जल में घुलकर अम्लीय विलयन बनाती है — नम नीले लिटमस को लाल कर देती है)

2. उभयधर्मी ऑक्साइड (Amphoteric Oxides) – दोहरा स्वभाव

कुछ धातु ऑक्साइड ऐसे होते हैं जो अम्ल के साथ भी क्रिया करते हैं और क्षारक के साथ भी — दोनों बार लवण व जल बनाते हैं। ऐसे ऑक्साइड उभयधर्मी ऑक्साइड कहलाते हैं। दो सबसे प्रसिद्ध उदाहरण हैं — ऐलुमिनियम ऑक्साइड (Al2O3) और ज़िंक ऑक्साइड (ZnO)।

ऐलुमिनियम ऑक्साइड अम्ल के साथ क्षारक जैसा व्यवहार करता है:

Al2O3(s) + 6HCl(aq) → 2AlCl3(aq) + 3H2O(l)
(अम्ल के साथ — क्षारकीय व्यवहार)

और वही Al2O3 क्षारक के साथ अम्ल जैसा व्यवहार करता है:

Al2O3(s) + 2NaOH(aq) → 2NaAlO2(aq) + H2O(l)
(सोडियम मेटाऐलुमिनेट बनता है — क्षारक के साथ अम्लीय व्यवहार)

ज़िंक ऑक्साइड भी दोनों ओर क्रिया करता है:

ZnO(s) + 2HCl(aq) → ZnCl2(aq) + H2O(l)
ZnO(s) + 2NaOH(aq) → Na2ZnO2(aq) + H2O(l)
(सोडियम ज़िंकेट बनता है)

📌 याद रखें: अधिकांश धातु ऑक्साइड क्षारकीय होते हैं, केवल कुछ (Al2O3, ZnO, PbO) उभयधर्मी हैं; जबकि अधातु ऑक्साइड अम्लीय या उदासीन (जैसे CO, N2O) होते हैं। यही अंतर Exercise के कई प्रश्नों की कुंजी है।

3. जल के साथ अभिक्रिया – कौन कितना तेज़?

धातुओं की जल से क्रिया उनकी क्रियाशीलता की सबसे अच्छी परख है। सामान्य नियम — धातु + जल → धातु ऑक्साइड / हाइड्रॉक्साइड + हाइड्रोजन। पर हर धातु की गति अलग है:

  • पोटैशियम व सोडियम ठंडे जल से इतनी तीव्र क्रिया करते हैं कि निकली हाइड्रोजन ऊष्मा से तुरंत आग पकड़ लेती है।
  • कैल्सियम ठंडे जल से धीमी क्रिया करता है; निकली ऊष्मा हाइड्रोजन को जलाने के लिए पर्याप्त नहीं होती। कैल्सियम तैरने लगता है, क्योंकि हाइड्रोजन के बुलबुले उसकी सतह पर चिपक जाते हैं।
  • मैग्नीशियम ठंडे जल से क्रिया नहीं करता, गर्म जल से क्रिया करके Mg(OH)2 व H2 बनाता है — Mg(s) + 2H2O(l) → Mg(OH)2(aq) + H2(g)↑ — और H2 के बुलबुले सतह पर चिपकने से यह भी तैरने लगता है; भाप से यह तेज़ क्रिया करता है।
  • ऐलुमिनियम, लोहा व ज़िंक केवल भाप (steam) से क्रिया करते हैं।
  • सीसा, ताँबा, चाँदी व सोना जल से बिल्कुल क्रिया नहीं करते — न ठंडे से, न गर्म से, न भाप से।

2K(s) + 2H2O(l) → 2KOH(aq) + H2(g)↑ + ऊष्मा
(इतनी तीव्र ऊष्माक्षेपी क्रिया कि H2 आग पकड़ लेती है)

2Na(s) + 2H2O(l) → 2NaOH(aq) + H2(g)↑ + ऊष्मा
(सोडियम की जल से क्रिया भी पोटैशियम जैसी ही तीव्र व ऊष्माक्षेपी होती है)

Ca(s) + 2H2O(l) → Ca(OH)2(aq) + H2(g)↑
(कैल्सियम H2 के बुलबुलों के कारण तैरता है)

3Fe(s) + 4H2O(g) → Fe3O4(s) + 4H2(g)↑
(लोहा केवल भाप से क्रिया करता है — मैग्नेटाइट (Fe3O4) बनता है)

अम्लों के साथ अभिक्रिया, सक्रियता श्रेणी व एक्वा रेजिया

1. तनु अम्लों के साथ अभिक्रिया

क्रियाशील धातुएँ तनु अम्लों से क्रिया करके लवण व हाइड्रोजन गैस बनाती हैं — धातु + तनु अम्ल → लवण + हाइड्रोजन। बुदबुदाहट के साथ गैस निकलना और जलती तीली ले जाने पर “पॉप” ध्वनि आना हाइड्रोजन की पहचान है। बुदबुदाहट की तीव्रता ही क्रियाशीलता बता देती है — Mg सबसे तेज़, फिर Al, Zn और सबसे धीमा Fe।

Mg(s) + 2HCl(aq) → MgCl2(aq) + H2(g)↑
Zn(s) + H2SO4(aq) → ZnSO4(aq) + H2(g)↑
Fe(s) + H2SO4(aq) → FeSO4(aq) + H2(g)↑

दो बातें विशेष ध्यान दें — (i) ताँबा व उससे नीचे की धातुएँ तनु अम्लों से हाइड्रोजन नहीं निकाल पातीं, क्योंकि वे हाइड्रोजन से कम क्रियाशील हैं। (ii) तनु नाइट्रिक अम्ल (HNO3) एक मज़बूत ऑक्सीकारक है — वह धातुओं से क्रिया में बनी हाइड्रोजन को जल में बदल देता है, इसलिए सामान्यतः HNO3 से H2 गैस नहीं निकलती। अपवाद है — मैग्नीशियम व मैंगनीज़, जो अत्यंत तनु HNO3 के साथ H2 निकालते हैं। अधातुएँ तनु अम्लों से क्रिया नहीं करतीं, क्योंकि वे हाइड्रोजन को विस्थापित नहीं कर सकतीं।

2. सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series) – अध्याय की रीढ़

विभिन्न धातुओं की क्रियाशीलता की तुलना करके वैज्ञानिकों ने धातुओं को घटती क्रियाशीलता के क्रम में सजाया है — यही सक्रियता श्रेणी है। नियम सरल है — श्रेणी में ऊपर स्थित धातु, नीचे स्थित धातु को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर देती है, उल्टा कभी नहीं होता। श्रेणी NCERT के क्रम में इस प्रकार है:

क्रम धातु (प्रतीक) क्रियाशीलता का स्तर
1 पोटैशियम (K) सबसे अधिक क्रियाशील
2 सोडियम (Na) अत्यधिक क्रियाशील — विद्युत अपघटन से निष्कर्षण; K व Na ठंडे जल से तीव्र क्रिया करते हैं, Ca मंद क्रिया करता है और Mg ठंडे जल से क्रिया नहीं करता (केवल गर्म जल व भाप से करता है)
3 कैल्सियम (Ca)
4 मैग्नीशियम (Mg)
5 ऐलुमिनियम (Al) मध्यम क्रियाशील — Al, Zn व Fe भाप से क्रिया करते हैं (Pb जल व भाप से क्रिया नहीं करता); कार्बन अपचयन से निष्कर्षण (Al का विद्युत अपघटन)
6 ज़िंक (Zn)
7 लोहा (Fe)
8 सीसा (Pb)
9 हाइड्रोजन (H) — संदर्भ बिंदु इससे ऊपर की धातुएँ अम्लों से H2 विस्थापित करती हैं, नीचे वाली नहीं
10 ताँबा (Cu) कम क्रियाशील — जल से क्रिया नहीं; प्रकृति में मुक्त अवस्था में भी पाई जाती हैं (Hg केवल गरम करने से व Cu स्वतः अपचयन से प्राप्त होता है)
11 पारा (Hg)
12 चाँदी (Ag)
13 सोना (Au)

सक्रियता श्रेणी (घटता क्रम): K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au

श्रेणी को प्रयोगों से कैसे तय किया गया, इसका सबसे सुंदर उदाहरण विस्थापन है — लोहे की कील को कॉपर सल्फ़ेट के नीले विलयन में डालिए, लोहा (Fe, ऊपर) ताँबे (Cu, नीचे) को विस्थापित कर देता है, विलयन हल्का हरा (FeSO4) हो जाता है और कील पर भूरी ताँबे की परत जम जाती है:

Fe(s) + CuSO4(aq) → FeSO4(aq) + Cu(s)
Cu(s) + 2AgNO3(aq) → Cu(NO3)2(aq) + 2Ag(s)
(ताँबा, चाँदी से अधिक क्रियाशील है — विलयन नीला हो जाता है)

3. एक्वा रेजिया (Aqua Regia) – अम्लराज

सोना इतनी अक्रियाशील धातु है कि कोई एक अम्ल उसे नहीं घोल पाता। पर ताज़ा बनाया गया एक विशेष मिश्रण उसे भी घोल लेता है — सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) और सान्द्र नाइट्रिक अम्ल (HNO3) का 3 : 1 अनुपात में मिश्रण ही एक्वा रेजिया है, जिसे अम्लराज भी कहते हैं। यह धुआँ देने वाला, अत्यंत संक्षारक द्रव है और सोने (Au) व प्लैटिनम (Pt) को घोलने की क्षमता रखता है। सुनारों की कहानी वाला Exercise प्रश्न 15 इसी पर आधारित है — इसे वहाँ विस्तार से समझेंगे।

एक साँस में समझें — वायु से ऑक्साइड, जल से हाइड्रॉक्साइड व H2, अम्ल से लवण व H2 — और हर क्रिया की गति तय करती है सक्रियता श्रेणी में धातु की जगह।

आयनिक यौगिक – इलेक्ट्रॉन के लेन-देन से बंध

धातु और अधातु के बीच बंध कैसे बनता है? उत्तर है — इलेक्ट्रॉन का स्थानांतरण। धातु के परमाणु अपने बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन (cation) बनाते हैं और अधातु के परमाणु वे इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन (anion) बनाते हैं। दोनों आयन स्थायी (उत्कृष्ट गैस जैसा) विन्यास पा लेते हैं और विपरीत आवेशों के आकर्षण से जुड़ जाते हैं। ऐसे यौगिकों को आयनिक यौगिक या वैद्युतसंयोजी यौगिक कहते हैं — जैसे NaCl, MgO, CaO, Na2O।

सोडियम क्लोराइड व मैग्नीशियम ऑक्साइड का बनना

इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना शब्दों में समझिए — सोडियम (Na, 2,8,1) के बाहरी कोश में 1 इलेक्ट्रॉन (एक बिंदु), मैग्नीशियम (Mg, 2,8,2) के बाहरी कोश में 2 इलेक्ट्रॉन (दो बिंदु), ऑक्सीजन (O, 2,6) के बाहरी कोश में 6 इलेक्ट्रॉन (छह बिंदु) और क्लोरीन (Cl, 2,8,7) के बाहरी कोश में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं।

NaCl का बनना: सोडियम अपना 1 इलेक्ट्रॉन क्लोरीन को दे देता है। सोडियम Na+ (2,8) बन जाता है और क्लोरीन वह इलेक्ट्रॉन पाकर Cl− (2,8,8) बन जाती है — दोनों का अष्टक पूरा।

MgO का बनना: मैग्नीशियम अपने 2 इलेक्ट्रॉन ऑक्सीजन को देता है — Mg2+ (2,8) और O2− (2,8) बनते हैं।

Na2O का बनना: ऑक्सीजन को 2 इलेक्ट्रॉन चाहिए, इसलिए दो सोडियम परमाणु एक-एक इलेक्ट्रॉन देते हैं — 2Na+ और O2− बनते हैं, इसीलिए सूत्र Na2O बनता है।

आयनिक यौगिकों के गुण

  • भौतिक प्रकृति: ये ठोस व सामान्यतः क्रिस्टलीय होते हैं, पर भंगुर होते हैं — चोट मारने पर टूट जाते हैं।
  • गलनांक व क्वथनांक ऊँचे होते हैं, क्योंकि विपरीत आवेशित आयनों के बीच मज़बूत आकर्षण बल तोड़ने के लिए बहुत ऊर्जा लगती है।
  • घुलनशीलता: सामान्यतः जल में घुलनशील होते हैं, पर मिट्टी के तेल व पेट्रोल जैसे कार्बनिक विलायकों में अघुलनशील होते हैं।
  • विद्युत चालकता: ठोस अवस्था में विद्युत नहीं चलाते (आयन जकड़े रहते हैं), पर गलित अवस्था या जलीय विलयन में सुचालक होते हैं, क्योंकि तब आयन स्वतंत्र रूप से गति कर सकते हैं। यही गुण विद्युत अपघटन व विद्युत शोधन की नींव है।

📌 खास बात: आयनिक यौगिकों की पहचान का सबसे आसान परीक्षण — ठोस में बल्ब नहीं जलेगा, पर वही यौगिक पिघला दें या जल में घोल दें तो बल्ब जल उठेगा। प्रश्नों में यही बिंदु बार-बार घुमाकर पूछा जाता है।

धातु निष्कर्षण – खदान से शुद्ध धातु तक का सफ़र

सोना, चाँदी, प्लैटिनम व ताँबा जैसी कम क्रियाशील धातुएँ प्रकृति में मुक्त अवस्था में भी मिल जाती हैं, पर अधिकांश धातुएँ ऑक्साइड, कार्बोनेट, सल्फ़ाइड या क्लोराइड जैसे यौगिकों (खनिजों) के रूप में मिलती हैं। जिन खनिजों से धातु लाभप्रद रूप से निकाली जा सके, वे अयस्क कहलाते हैं, और अयस्क के साथ मिली मिट्टी-रेत जैसी अशुद्धियाँ गैंग कहलाती हैं। अयस्क से शुद्ध धातु पाने के मुख्य चरण ये हैं:

चरण 1 – अयस्क का सान्द्रण: पहले गैंग (मिट्टी, रेत आदि) को भौतिक विधियों से हटाकर अयस्क को सान्द्र किया जाता है।

चरण 2 – अयस्क को ऑक्साइड में बदलना: धातु को उसके ऑक्साइड से निकालना, कार्बोनेट या सल्फ़ाइड की तुलना में आसान होता है। इसलिए सान्द्रित अयस्क को पहले ऑक्साइड में बदला जाता है — और अयस्क के प्रकार के अनुसार दो विधियाँ हैं:

भर्जन (Roasting) — सल्फ़ाइड अयस्क के लिए: वायु की उपस्थिति में तेज़ गरम करना
2ZnS(s) + 3O2(g) →(ऊष्मा) 2ZnO(s) + 2SO2(g)

निस्तापन (Calcination) — कार्बोनेट अयस्क के लिए: वायु की अनुपस्थिति / सीमित वायु में तेज़ गरम करना
ZnCO3(s) →(ऊष्मा) ZnO(s) + CO2(g)

चरण 3 – ऑक्साइड का अपचयन (धातु प्राप्त करना): धातु की क्रियाशीलता तय करती है कि विधि कौन-सी होगी —

  • श्रेणी में नीचे की धातुएँ (कम क्रियाशील): केवल गरम करने से ही धातु मिल जाती है — जैसे सिनाबार (HgS) से पारा: पहले भर्जन से HgO, फिर गरम करने पर Hg।
    2HgS(s) + 3O2(g) →(ऊष्मा) 2HgO(s) + 2SO2(g);   2HgO(s) →(ऊष्मा) 2Hg(l) + O2(g)
  • श्रेणी के मध्य की धातुएँ (Zn, Fe, Pb, Cu आदि): कार्बन जैसे अपचायक से अपचयन — ZnO(s) + C(s) → Zn(s) + CO(g)। ताँबे के सल्फ़ाइड अयस्क में आंशिक भर्जन के बाद स्वतः अपचयन होता है: 2Cu2S + 3O2 → 2Cu2O + 2SO2; फिर 2Cu2O + Cu2S →(ऊष्मा) 6Cu + SO2।
  • अधिक क्रियाशील धातु से विस्थापन — थर्मिट अभिक्रिया: कुछ धातु ऑक्साइड कार्बन से अपचयित नहीं होते (जैसे Cr2O3, MnO2), उनके लिए ऐलुमिनियम चूर्ण अपचायक के रूप में उपयोग होता है।
  • श्रेणी में ऊपर की धातुएँ (K, Na, Ca, Mg, Al): ये अत्यंत क्रियाशील हैं; इनके गलित लवणों के विद्युत अपघटन से ही धातु मिलती है — जैसे गलित NaCl के विद्युत अपघटन में कैथोड पर सोडियम (Na+ + e− → Na) और ऐनोड पर क्लोरीन गैस (2Cl− → Cl2 + 2e−) मिलती है।

थर्मिट अभिक्रिया: Fe2O3(s) + 2Al(s) → Al2O3(s) + 2Fe(l) + प्रचुर ऊष्मा
ऐलुमिनियम, लोहे को विस्थापित करता है; निकली ऊष्मा से लोहा पिघली अवस्था में बनता है — इसी से रेल की पटरियों व टूटी मशीनों की दरारें जोड़ी (वेल्ड) की जाती हैं।

चरण 4 – धातु का शोधन (परिष्करण): प्राप्त धातु अशुद्ध होती है। सबसे प्रचलित विधि विद्युत शोधन (Electrolytic Refining) है — इसमें अशुद्ध धातु का ऐनोड, शुद्ध धातु की पतली पट्टी का कैथोड और धातु लवण का विलयन विद्युत अपघट्य लिया जाता है। धारा बहने पर ऐनोड से शुद्ध धातु घुलकर कैथोड पर जमा होती जाती है; घुलनशील अशुद्धियाँ विलयन में रह जाती हैं और अघुलनशील अशुद्धियाँ ऐनोड के नीचे ऐनोड पंक (anode mud) के रूप में जमा हो जाती हैं (ताँबे के शोधन में इस पंक से चाँदी व सोना जैसी मूल्यवान धातुएँ भी प्राप्त होती हैं)। ताँबा, ज़िंक, टिन, निकेल, चाँदी व सोना इसी विधि से शुद्ध किए जाते हैं।

📌 याद रखें: भर्जन व निस्तापन में अंतर केवल इतना है — सल्फ़ाइड अयस्क + वायु की उपस्थिति = भर्जन; कार्बोनेट अयस्क + वायु की अनुपस्थिति = निस्तापन। दोनों का उद्देश्य एक ही है — अयस्क को ऑक्साइड में बदलना।

संक्षारण व मिश्रधातुएँ – जंग से बचाव और मज़बूत मिश्रण

संक्षारण (Corrosion) व उससे बचाव

वायु, नमी आदि के संपर्क में धातु का धीरे-धीरे खाया जाना संक्षारण है। सबसे जाना-पहचाना उदाहरण लोहे पर जंग है — नम वायु में लोहे पर जलयोजित फ़ेरिक ऑक्साइड (Fe2O3·xH2O) की भूरी परत जम जाती है। इसी प्रकार चाँदी पर Ag2S की काली परत और ताँबे पर क्षारकीय कॉपर कार्बोनेट की हरी परत भी संक्षारण ही है। श्रेणी में सबसे नीचे की धातुएँ (सोना, प्लैटिनम) आसानी से संक्षारित नहीं होतीं — इसीलिए गहने इन्हीं से बनते हैं।

जंग से बचाव के उपाय:

  • पेंट करना — सतह पर परत बनकर वायु-नमी का संपर्क टूट जाता है।
  • तेल या ग्रीस लगाना — औज़ारों व मशीनों के लिए उपयुक्त।
  • यशदलेपन (Galvanization) — लोहे पर ज़िंक की परत चढ़ाना; ज़िंक लोहे से अधिक क्रियाशील है, इसलिए परत टूटने पर भी ज़िंक पहले क्रिया करके लोहे की रक्षा करता है। बाल्टी, टिन की छत व लोहे की तवाई के लिए यही सर्वोत्तम उपाय है।
  • विद्युत लेपन (Electroplating) — क्रोमियम, टिन आदि की चमकदार परत चढ़ाना।
  • मिश्रधातु बनाना — जैसे स्टेनलेस स्टील में जंग नहीं लगती।

एनोडीकरण (Anodising) – ऐलुमिनियम की विशेष रक्षा

ऐलुमिनियम की स्वच्छ सतह वायु में स्वयं ऑक्साइड की पतली परत बना लेती है, जो उसे संक्षारण से बचाती है। इस परत को विद्युत विधि से और मोटा करने की प्रक्रिया एनोडीकरण कहलाती है — तनु सल्फ़्यूरिक अम्ल में ऐलुमिनियम की वस्तु को ऐनोड बनाकर विद्युत धारा बहाई जाती है; बनी ऑक्सीजन सतह पर मोटी ऑक्साइड परत बना देती है, जिस पर आसानी से रंग भी चढ़ाया जा सकता है। कुकर व बर्तन इसी कारण टिकाऊ व रंगीन बनते हैं।

मिश्रधातुएँ (Alloys) – गुण सुधारने का मिश्रण

मिश्रधातु दो या अधिक धातुओं, या धातु व अधातु का समांगी मिश्रण होती है — पहले धातुओं को पिघलाकर निश्चित अनुपात में मिलाया जाता है, फिर ठंडा किया जाता है। शुद्ध धातुएँ अक्सर नरम होती हैं; मिश्रधातुएँ उनसे अधिक कठोर, मज़बूत व संक्षारण-रोधी होती हैं। एक रोचक बात — मिश्रधातुओं की विद्युत चालकता व गलनांक शुद्ध धातुओं से सामान्यतः कम होते हैं; सोल्डर का गलनांक इसीलिए कम होता है और वह तार जोड़ने के काम आता है। यदि मिश्रधातु का एक घटक पारा हो तो उसे अमलगम (amalgam) कहते हैं।

मिश्रधातु घटक (संघटन) प्रमुख उपयोग / विशेषता
पीतल (Brass) ताँबा (Cu) + ज़िंक (Zn) बर्तन, घंटियाँ, ताले, सजावटी सामान; मज़बूत व आकर्षक
काँसा (Bronze) ताँबा (Cu) + टिन (Sn) मूर्तियाँ, सिक्के, पदक; कठोर व संक्षारण-रोधी
सोल्डर (Solder) सीसा (Pb) + टिन (Sn) विद्युत तारों को जोड़ना (वेल्डिंग); गलनांक बहुत कम
स्टेनलेस स्टील (Stainless Steel) लोहा (Fe) + निकेल (Ni) + क्रोमियम (Cr) बर्तन, चिकित्सा उपकरण; कठोर और जंग नहीं लगती
22 कैरेट सोना (22 Carat Gold) सोना (Au) + ताँबा (Cu) या चाँदी (Ag) आभूषण; शुद्ध सोना 24 कैरेट का होकर बहुत नरम होता है, इसलिए 22 भाग शुद्ध सोने में 2 भाग Cu या Ag मिलाकर इसे कठोर बनाया जाता है
अमलगम (Amalgam) पारा (Hg) + अन्य धातु दाँतों की भराई आदि में

एक साँस में समझें — धातु की कहानी खदान से शुरू होती है: सान्द्रण → ऑक्साइड में परिवर्तन (भर्जन/निस्तापन) → अपचयन → शोधन; और उपयोग के बाद की कहानी है संक्षारण से बचाव व मिश्रधातुओं से गुण-सुधार।

📘 पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (InText Questions)

ये वे प्रश्न हैं जो NCERT किताब के अनुच्छेदों के बीच-बीच में दिए गए हैं। इस अध्याय में कुल 15 InText प्रश्न हैं — अनुच्छेद 3.1 में 2, 3.2 में 5, 3.3 में 2, 3.4 में 3 और 3.5 में 3। Board में ये प्रश्न वैसे-के-वैसे पूछ लिए जाते हैं, इसलिए इन्हें सबसे पहले तैयार कीजिए।

(क) अनुच्छेद 3.1 पर आधारित प्रश्न (कुल 2)

प्रश्न 1. ऐसी धातु का उदाहरण दीजिए जो — (i) कमरे के ताप पर द्रव हो, (ii) चाकू से आसानी से काटी जा सके, (iii) ऊष्मा की सबसे अच्छी चालक हो, (iv) ऊष्मा की कुचालक हो।

हल:

उत्तर: (i) पारा (मरकरी, Hg) — कमरे के ताप पर द्रव धातु। (ii) सोडियम (Na) — चाकू से कटने वाली नरम धातु (पोटैशियम व लीथियम भी)। (iii) चाँदी (Ag) — ऊष्मा की सबसे अच्छी चालक। (iv) सीसा (लेड, Pb) — ऊष्मा की कुचालक धातु (पारा भी कुचालक है)।

प्रश्न 2. आघातवर्धनीयता (malleable) तथा तन्यता (ductile) का अर्थ समझाइए।

हल: आघातवर्धनीयता — धातुओं को पीटकर पतली चादरों में बदलने के गुण को आघातवर्धनीयता कहते हैं और ऐसी धातु आघातवर्धनीय कहलाती है; जैसे सोना-चाँदी से वर्क़ बनता है। तन्यता — धातुओं को खींचकर पतले तार बनाने के गुण को तन्यता कहते हैं और ऐसी धातु तन्य कहलाती है; सोना सबसे अधिक तन्य है — 1 ग्राम सोने से लगभग 2 km लंबा तार बन सकता है।

(ख) अनुच्छेद 3.2 पर आधारित प्रश्न (कुल 5)

प्रश्न 1. सोडियम को मिट्टी के तेल (किरोसिन) में डुबोकर क्यों रखा जाता है?

हल: सोडियम अत्यंत क्रियाशील धातु है। खुले में रखने पर यह वायु की ऑक्सीजन व नमी से इतनी तीव्र क्रिया करता है कि आग पकड़ लेता है। मिट्टी का तेल सोडियम से क्रिया नहीं करता और उसे वायु व नमी से अलग रखता है, इसलिए दुर्घटना से बचाव के लिए सोडियम को किरोसिन तेल में डुबोकर रखा जाता है।

प्रश्न 2. निम्नलिखित की अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए: (i) लोहे की भाप के साथ अभिक्रिया, (ii) कैल्सियम व पोटैशियम की जल के साथ अभिक्रिया।

हल:

(i) लोहा भाप से क्रिया करके मैग्नेटाइट (Fe3O4) व हाइड्रोजन बनाता है:

3Fe(s) + 4H2O(g) → Fe3O4(s) + 4H2(g)↑

(ii) कैल्सियम ठंडे जल से मंद क्रिया करता है, जबकि पोटैशियम अत्यंत तीव्र क्रिया करता है और निकली H2 आग पकड़ लेती है:

Ca(s) + 2H2O(l) → Ca(OH)2(aq) + H2(g)↑
2K(s) + 2H2O(l) → 2KOH(aq) + H2(g)↑ + ऊष्मा

प्रश्न 3. चार धातुओं A, B, C और D के नमूने लेकर उन्हें निम्नलिखित विलयनों में एक-एक करके डाला गया। प्राप्त परिणाम इस प्रकार हैं —

धातु आयरन(II) सल्फ़ेट कॉपर(II) सल्फ़ेट ज़िंक सल्फ़ेट सिल्वर नाइट्रेट
A कोई अभिक्रिया नहीं विस्थापन — —
B विस्थापन — कोई अभिक्रिया नहीं —
C कोई अभिक्रिया नहीं कोई अभिक्रिया नहीं कोई अभिक्रिया नहीं विस्थापन
D कोई अभिक्रिया नहीं कोई अभिक्रिया नहीं कोई अभिक्रिया नहीं कोई अभिक्रिया नहीं

इस सारणी के आधार पर बताइए: (i) सबसे अधिक क्रियाशील धातु कौन-सी है? (ii) B को कॉपर(II) सल्फ़ेट के विलयन में डालने पर क्या प्रेक्षण होगा? (iii) A, B, C व D को घटती क्रियाशीलता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

हल:

चरण 1: B ने FeSO4 से लोहे को विस्थापित किया है, अर्थात B लोहे से अधिक क्रियाशील है; पर ZnSO4 से क्रिया नहीं हुई, अर्थात B ज़िंक से कम क्रियाशील है। फिर भी चारों में B ही एकमात्र है जो Fe को हटा पाया।

चरण 2: A ने CuSO4 से ताँबा विस्थापित किया, पर FeSO4 से क्रिया नहीं हुई — अर्थात A, ताँबे से अधिक पर लोहे से कम क्रियाशील है। C केवल AgNO3 से चाँदी हटा पाया — अर्थात C, चाँदी से अधिक पर ताँबे से कम क्रियाशील है। D किसी से भी क्रिया नहीं कर पाया — सबसे कम क्रियाशील।

उत्तर: (i) सबसे अधिक क्रियाशील धातु — B। (ii) B, ताँबे से भी अधिक क्रियाशील है, इसलिए विस्थापन होगा — CuSO4 का नीला रंग फीका पड़ जाएगा और B की सतह पर लाल-भूरा ताँबा जमा होगा। (iii) घटती क्रियाशीलता का क्रम — B > A > C > D।

प्रश्न 4. किसी क्रियाशील धातु में तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल डालने पर कौन-सी गैस उत्पन्न होती है? लोहे की तनु H2SO4 के साथ अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।

हल: क्रियाशील धातु तनु अम्ल से हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करती है — धातु + तनु अम्ल → लवण + हाइड्रोजन। लोहे की अभिक्रिया:

Fe(s) + H2SO4(aq) → FeSO4(aq) + H2(g)↑

प्रश्न 5. ज़िंक को आयरन(II) सल्फ़ेट के विलयन में डालने पर आप क्या प्रेक्षण करेंगे? होने वाली अभिक्रिया लिखिए।

हल: ज़िंक, लोहे से अधिक क्रियाशील है, इसलिए वह लोहे को विस्थापित कर देता है। आयरन(II) सल्फ़ेट विलयन का हरा रंग धीरे-धीरे फीका पड़कर रंगहीन हो जाता है (रंगहीन ZnSO4 बनता है) और ज़िंक की सतह पर लोहा जमा होने लगता है:

Zn(s) + FeSO4(aq) → ZnSO4(aq) + Fe(s)
(हरा विलयन → रंगहीन विलयन)

(ग) अनुच्छेद 3.3 पर आधारित प्रश्न (कुल 2)

प्रश्न 1. (i) सोडियम, ऑक्सीजन तथा मैग्नीशियम के इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचनाएँ लिखिए। (ii) इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण द्वारा Na2O व MgO का निर्माण दर्शाइए। (iii) इन यौगिकों में कौन-से आयन उपस्थित हैं?

हल:

(i) इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना में बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉन बिंदुओं से दिखाए जाते हैं — Na (2,8,1): बाहरी कोश में 1 बिंदु; O (2,6): बाहरी कोश में 6 बिंदु; Mg (2,8,2): बाहरी कोश में 2 बिंदु।

(ii) Na2O का निर्माण: दो सोडियम परमाणु अपना-अपना 1 इलेक्ट्रॉन एक ऑक्सीजन परमाणु को देते हैं — 2Na → 2Na+ + 2e− और O + 2e− → O2−; दोनों प्रकार के आयनों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास स्थायी (2,8) हो जाता है। MgO का निर्माण: एक मैग्नीशियम परमाणु अपने 2 इलेक्ट्रॉन एक ऑक्सीजन परमाणु को देता है — Mg → Mg2+ + 2e− और O + 2e− → O2−। विपरीत आवेशित आयन परस्पर आकर्षण से जुड़कर यौगिक बनाते हैं।

उत्तर (iii): Na2O में आयन — Na+ (सोडियम आयन) व O2− (ऑक्साइड आयन); MgO में आयन — Mg2+ (मैग्नीशियम आयन) व O2− (ऑक्साइड आयन)।

प्रश्न 2. आयनिक यौगिकों के गलनांक उच्च क्यों होते हैं?

हल: आयनिक यौगिकों में धनात्मक व ऋणात्मक आयनों के बीच प्रबल अंतर-आयनिक आकर्षण बल होता है। इस मज़बूत बंध-जाल को तोड़ने के लिए बहुत अधिक ऊष्मीय ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए इनके गलनांक व क्वथनांक उच्च होते हैं।

(घ) अनुच्छेद 3.4 पर आधारित प्रश्न (कुल 3)

प्रश्न 1. निम्न पदों की परिभाषा दीजिए: (i) खनिज (ii) अयस्क (iii) गैंग।

हल: (i) खनिज — पृथ्वी की भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्व या यौगिक खनिज कहलाते हैं। (ii) अयस्क — वे खनिज जिनमें किसी धातु की पर्याप्त मात्रा हो और जिनसे वह धातु सुविधाजनक व लाभप्रद रूप से निकाली जा सके, अयस्क कहलाते हैं। ध्यान दें — हर अयस्क खनिज होता है, पर हर खनिज अयस्क नहीं होता। (iii) गैंग — खनन के समय अयस्क के साथ आने वाली मिट्टी, रेत आदि की अशुद्धियाँ गैंग कहलाती हैं, जिन्हें सान्द्रण द्वारा हटाया जाता है।

प्रश्न 2. दो धातुओं के नाम बताइए जो प्रकृति में मुक्त अवस्था में पाई जाती हैं।

हल: सबसे कम क्रियाशील धातुएँ प्रकृति में मुक्त अवस्था में मिलती हैं — सोना (Au) व चाँदी (Ag)। (प्लैटिनम व ताँबा भी मुक्त अवस्था में मिलते हैं।)

प्रश्न 3. धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करने के लिए किस रासायनिक प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है?

हल: अपचयन (Reduction) प्रक्रिया का। धातु की क्रियाशीलता के अनुसार विधि बदलती है — मध्यम क्रियाशील धातुओं के ऑक्साइडों का कार्बन से अपचयन (ZnO + C → Zn + CO), कुछ का ऐलुमिनियम से विस्थापन (थर्मिट), और अत्यधिक क्रियाशील धातुओं के लिए गलित लवणों का विद्युत अपघटन किया जाता है; सबसे कम क्रियाशील धातुओं के ऑक्साइड केवल गरम करने से ही अपचयित हो जाते हैं।

(ङ) अनुच्छेद 3.5 पर आधारित प्रश्न (कुल 3)

प्रश्न 1. ज़िंक, मैग्नीशियम व कॉपर के धात्विक ऑक्साइडों को निम्न धातुओं के साथ गरम किया गया —

धातु ज़िंक मैग्नीशियम कॉपर
ज़िंक ऑक्साइड
मैग्नीशियम ऑक्साइड
कॉपर ऑक्साइड

किन-किन स्थितियों में विस्थापन अभिक्रिया होगी?

हल: क्रियाशीलता क्रम है — Mg > Zn > Cu। अतः अधिक क्रियाशील धातु ही कम क्रियाशील धातु के ऑक्साइड से धातु को विस्थापित करेगी — Mg, ZnO व CuO दोनों से; Zn केवल CuO से; Cu किसी से नहीं:

धातु ज़िंक मैग्नीशियम कॉपर
ज़िंक ऑक्साइड कोई अभिक्रिया नहीं विस्थापन कोई अभिक्रिया नहीं
मैग्नीशियम ऑक्साइड कोई अभिक्रिया नहीं कोई अभिक्रिया नहीं कोई अभिक्रिया नहीं
कॉपर ऑक्साइड विस्थापन विस्थापन कोई अभिक्रिया नहीं

प्रश्न 2. कौन-सी धातुएँ आसानी से संक्षारित नहीं होती हैं?

हल: सक्रियता श्रेणी में सबसे नीचे स्थित, सबसे कम क्रियाशील धातुएँ आसानी से संक्षारित नहीं होती हैं — जैसे सोना व प्लैटिनम। ये वायु, नमी व सामान्य अम्लों से लगभग क्रिया ही नहीं करतीं, इसीलिए इनके गहने पीढ़ियों तक चमकते रहते हैं। (चाँदी भी बहुत कम क्रियाशील है, पर उस पर समय के साथ Ag2S की काली परत आ जाती है।)

प्रश्न 3. मिश्रधातु क्या हैं?

हल: मिश्रधातु दो या अधिक धातुओं का, अथवा एक धातु व एक अधातु का समांगी मिश्रण होती है। इन्हें धातुओं को पिघलाकर निश्चित अनुपात में मिलाकर ठंडा करके बनाया जाता है। उदाहरण — पीतल (Cu + Zn), काँसा (Cu + Sn), स्टेनलेस स्टील (Fe + Ni + Cr)। मिश्रधातुएँ शुद्ध धातुओं से अधिक कठोर, मज़बूत व संक्षारण-रोधी होती हैं।

इस भाग में हमने सीखा — 15 InText प्रश्नों में से अधिकतर सक्रियता श्रेणी और विस्थापन पर घूमते हैं; श्रेणी का क्रम मुँहज़बानी हो तो ये प्रश्न सबसे आसान अंक देते हैं।

📗 NCERT उदाहरण (Examples)

एक ज़रूरी जानकारी पहले ही स्पष्ट कर दें — इस अध्याय (धातु एवं अधातु) में NCERT किताब में अलग से क्रमांकित “उदाहरण 3.1, 3.2…” जैसे numbered Examples नहीं दिए गए हैं (अध्याय 1 की तरह यहाँ उदाहरण-खण्ड नहीं है)। इसलिए यहाँ हम अध्याय के वे तीन सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण विस्तार से समझा रहे हैं, जिन पर किताब की व्याख्या टिकी है और जिनसे Board में सबसे अधिक प्रश्न बनते हैं।

उदाहरण 1. थर्मिट अभिक्रिया — पिघला लोहा कैसे बनता है?

हल:

चरण 1: फ़ेरिक ऑक्साइड (Fe2O3) व ऐलुमिनियम चूर्ण के मिश्रण को प्रज्वलित करने पर ऐलुमिनियम, जो लोहे से अधिक क्रियाशील है, लोहे को विस्थापित कर देता है — यह एक विस्थापन अभिक्रिया है।

चरण 2: अभिक्रिया अत्यंत ऊष्माक्षेपी है — इतनी ऊष्मा निकलती है कि बना हुआ लोहा पिघली हुई अवस्था में प्राप्त होता है।

Fe2O3(s) + 2Al(s) → Al2O3(s) + 2Fe(l) + प्रचुर ऊष्मा
उपयोग: रेल की पटरियों व मशीनों की दरारों को जोड़ना (थर्मिट वेल्डिंग)

उदाहरण 2. आयनिक यौगिक का बनना — सोडियम क्लोराइड (NaCl) इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण से कैसे बनता है?

हल:

चरण 1: सोडियम का विन्यास 2,8,1 है — बाहरी कोश में 1 इलेक्ट्रॉन। क्लोरीन का विन्यास 2,8,7 है — बाहरी कोश में 7 इलेक्ट्रॉन, अष्टक से 1 कम।

चरण 2: सोडियम अपना इलेक्ट्रॉन त्यागकर Na+ (2,8) बनता है और क्लोरीन वही इलेक्ट्रॉन पाकर Cl− (2,8,8) बन जाती है। दोनों का अष्टक पूरा हो जाता है और विपरीत आवेशों के आकर्षण से NaCl बनता है।

Na → Na+ + e−  |  Cl + e− → Cl−  ⇒  Na+ + Cl− → NaCl
सीख: धातु इलेक्ट्रॉन देता है (धनायन), अधातु इलेक्ट्रॉन लेती है (ऋणायन) — यही आयनिक बंध है।

उदाहरण 3. ज़िंक के निष्कर्षण में भर्जन व निस्तापन — दोनों रास्ते एक ही मंज़िल।

हल: ज़िंक के दो प्रमुख अयस्क हैं — ज़िंक ब्लेंड (ZnS, सल्फ़ाइड) और कैलामाइन (ZnCO3, कार्बोनेट)। दोनों को पहले ZnO में बदला जाता है — सल्फ़ाइड का भर्जन (वायु में गरम) और कार्बोनेट का निस्तापन (वायु की अनुपस्थिति में गरम) — और फिर ZnO का कार्बन से अपचयन करके ज़िंक मिलता है।

भर्जन: 2ZnS(s) + 3O2(g) →(ऊष्मा) 2ZnO(s) + 2SO2(g)
निस्तापन: ZnCO3(s) →(ऊष्मा) ZnO(s) + CO2(g)
अपचयन: ZnO(s) + C(s) →(ऊष्मा) Zn(s) + CO(g)

✏️ प्रश्नावली (Exercise) – सभी 16 प्रश्नों के हल

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन-से युग्म विस्थापन अभिक्रिया देंगे? (a) NaCl विलयन एवं कॉपर धातु (b) MgCl2 विलयन एवं ऐलुमिनियम धातु (c) FeSO4 विलयन एवं सिल्वर धातु (d) AgNO3 विलयन एवं कॉपर धातु

हल: विस्थापन तभी होगा जब स्वतंत्र धातु, लवण वाली धातु से अधिक क्रियाशील हो। (a) में Cu, Na से कम क्रियाशील है; (b) में Al, Mg से कम क्रियाशील है; (c) में Ag, Fe से कम क्रियाशील है — तीनों में विस्थापन नहीं होगा। (d) में Cu, Ag से अधिक क्रियाशील है — विस्थापन होगा:

उत्तर: (d) AgNO3 विलयन एवं कॉपर धातु
Cu(s) + 2AgNO3(aq) → Cu(NO3)2(aq) + 2Ag(s)

प्रश्न 2. लोहे की कड़ाही (तवाई) को जंग से बचाने के लिए निम्न में से कौन-सी विधि उपयुक्त है? (a) ग्रीस लगाना (b) पेंट लगाना (c) ज़िंक की परत चढ़ाना (d) उपर्युक्त सभी

हल: कड़ाही पर खाना बनता है और वह बार-बार गरम व धोई जाती है। ग्रीस भोजन को दूषित करेगा और गरम करने पर जल जाएगा; पेंट भी ऊष्मा व धुलाई से उतर जाएगा और भोजन के लिए उपयुक्त नहीं। यशदलेपन (ज़िंक की परत) ही टिकाऊ व सुरक्षित उपाय है — ज़िंक लोहे से अधिक क्रियाशील है, इसलिए परत में खरोंच आने पर भी ज़िंक पहले संक्षारित होकर लोहे की रक्षा करता है।

उत्तर: (c) ज़िंक की परत चढ़ाना (यशदलेपन / galvanization)

प्रश्न 3. कोई तत्व ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके उच्च गलनांक वाला यौगिक बनाता है। यह यौगिक जल में विलेय भी है। यह तत्व संभवतः क्या है? (a) कैल्सियम (b) कार्बन (c) सिलिकॉन (d) लोहा

हल: उच्च गलनांक वाला यौगिक प्रायः आयनिक होता है, अर्थात तत्व धातु होना चाहिए — कार्बन व सिलिकॉन (अधातु/उपधातु) के ऑक्साइड सहसंयोजी होते हैं। कैल्सियम का ऑक्साइड CaO जल में विलेय होकर Ca(OH)2 बनाता है, जबकि लोहे के ऑक्साइड जल में अविलेय होते हैं।

उत्तर: (a) कैल्सियम — 2Ca(s) + O2(g) → 2CaO(s); CaO + H2O → Ca(OH)2

प्रश्न 4. खाद्य पदार्थों के डिब्बों पर टिन की परत चढ़ाई जाती है, ज़िंक की नहीं, क्योंकि — (a) ज़िंक टिन से महँगा है (b) ज़िंक का गलनांक टिन से अधिक है (c) ज़िंक टिन से अधिक क्रियाशील है (d) ज़िंक टिन से कम क्रियाशील है

हल: ज़िंक, टिन से अधिक क्रियाशील है। यदि डिब्बों पर ज़िंक की परत हो तो वह खाद्य पदार्थों में मौजूद अम्लों से क्रिया करके हानिकारक यौगिक बना सकता है और भोजन विषाक्त हो सकता है। टिन कम क्रियाशील है, इसलिए सुरक्षित है।

उत्तर: (c) ज़िंक टिन से अधिक क्रियाशील है।

प्रश्न 5. आपको एक हथौड़ा, बैटरी, बल्ब, तार व स्विच दिए गए हैं। (a) इनका उपयोग करके आप धातुओं व अधातुओं के नमूनों के बीच अंतर कैसे करेंगे? (b) धातुओं व अधातुओं में अंतर ज्ञात करने के लिए इन परीक्षणों की उपयोगिता का आकलन कीजिए।

हल:

(a) हथौड़े का परीक्षण: नमूने को हथौड़े से पीटिए — यदि वह फैलकर पतली चादर बन जाए तो वह धातु है (आघातवर्धनीयता); यदि वह टूटकर टुकड़े हो जाए तो अधातु है (भंगुरता)। विद्युत परीक्षण: बैटरी, बल्ब, तार व स्विच से परिपथ बनाकर नमूने को दो सिरों के बीच जोड़िए — बल्ब जल उठे तो नमूना धातु है (सुचालक); बल्ब न जले तो अधातु है (कुचालक)।

(b) ये परीक्षण सरल व उपयोगी हैं, क्योंकि ये भौतिक गुणों पर आधारित हैं और बिना किसी रासायनिक अभिक्रिया के घर-प्रयोगशाला में किए जा सकते हैं। परंतु इनकी सीमाएँ भी हैं — ग्रेफ़ाइट अधातु होते हुए भी विद्युत चलाता है (बल्ब जलेगा), और नरम धातुएँ (जैसे सीसा) या भंगुर-सी कुछ धातुएँ हथौड़े पर अस्पष्ट परिणाम दे सकती हैं। अतः अंतिम निर्णय के लिए रासायनिक गुणों की जाँच भी आवश्यक होती है।

प्रश्न 6. उभयधर्मी ऑक्साइड क्या होते हैं? दो उदाहरण दीजिए।

हल: वे धातु ऑक्साइड जो अम्लों के साथ भी और क्षारकों के साथ भी अभिक्रिया करके लवण व जल बनाते हैं, उभयधर्मी ऑक्साइड कहलाते हैं।

उदाहरण: ऐलुमिनियम ऑक्साइड व ज़िंक ऑक्साइड
Al2O3 + 6HCl → 2AlCl3 + 3H2O  |  Al2O3 + 2NaOH → 2NaAlO2 + H2O
ZnO + 2HCl → ZnCl2 + H2O  |  ZnO + 2NaOH → Na2ZnO2 + H2O

प्रश्न 7. दो धातुओं के नाम बताइए जो तनु अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित करेंगी तथा दो धातुएँ जो ऐसा नहीं कर सकतीं।

हल: सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन से ऊपर की धातुएँ अम्लों से H2 विस्थापित करती हैं और नीचे की धातुएँ नहीं कर पातीं।

उत्तर: हाइड्रोजन विस्थापित करने वाली — ज़िंक (Zn) व लोहा (Fe) (मैग्नीशियम भी)। विस्थापित न करने वाली — ताँबा (Cu) व चाँदी (Ag)।

प्रश्न 8. किसी धातु M के विद्युत शोधन में आप ऐनोड, कैथोड व विद्युत अपघट्य किसे बनाएँगे?

हल:

उत्तर: ऐनोड — अशुद्ध धातु M का मोटा खंड; कैथोड — शुद्ध धातु M की पतली पट्टी; विद्युत अपघट्य — धातु M के किसी लवण का जलीय विलयन। धारा बहने पर ऐनोड से धातु घुलकर कैथोड पर शुद्ध रूप में जमा होती है और अशुद्धियाँ विलयन में या ऐनोड पंक के रूप में रह जाती हैं।

प्रश्न 9. प्रत्यूष ने स्पैचुला पर गंधक (सल्फ़र) का चूर्ण लिया और उसे गरम किया। उसने परखनली को उल्टा करके निकली गैस को एकत्र किया। (a) गैस की क्रिया क्या होगी — (i) शुष्क लिटमस पत्र पर? (ii) आर्द्र (नम) लिटमस पत्र पर? (b) होने वाली अभिक्रिया का संतुलित समीकरण लिखिए।

हल: गंधक को गरम करने पर सल्फ़र डाइऑक्साइड (SO2) गैस बनती है, जो अम्लीय स्वभाव की है।

उत्तर: (a)(i) शुष्क लिटमस पत्र पर कोई प्रभाव नहीं — अम्लीय गुण जल की उपस्थिति में ही प्रकट होता है। (a)(ii) नम नीला लिटमस लाल हो जाता है, क्योंकि SO2 नमी से सल्फ्यूरस अम्ल बनाती है। (b) S(s) + O2(g) → SO2(g)

प्रश्न 10. लोहे को जंग से बचाने के दो तरीके बताइए।

हल:

उत्तर: (1) पेंट, तेल या ग्रीस की परत चढ़ाना — इससे वायु व नमी लोहे के संपर्क में नहीं आती। (2) यशदलेपन (galvanization) — लोहे पर ज़िंक की परत चढ़ाना; ज़िंक स्वयं पहले संक्षारित होकर लोहे की रक्षा करता है। (इसके अलावा मिश्रधातु बनाना व विद्युत लेपन भी उपयोगी हैं।)

प्रश्न 11. अधातुएँ ऑक्सीजन के साथ संयोग करके किस प्रकार के ऑक्साइड बनाती हैं?

हल: अधातुएँ ऑक्सीजन से संयोग करके सामान्यतः अम्लीय ऑक्साइड बनाती हैं — जैसे CO2 (जल में कार्बोनिक अम्ल) व SO2 (जल में सल्फ्यूरस अम्ल)। कुछ अधातु ऑक्साइड उदासीन भी होते हैं — जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) व नाइट्रस ऑक्साइड (N2O)। इसके विपरीत धातु ऑक्साइड क्षारकीय होते हैं — यही दोनों का मूल रासायनिक अंतर है।

प्रश्न 12. कारण दीजिए: (a) प्लैटिनम, सोना व चाँदी का उपयोग आभूषण बनाने के लिए किया जाता है। (b) सोडियम, पोटैशियम व लीथियम को तेल में डुबोकर रखा जाता है। (c) ऐलुमिनियम अत्यधिक क्रियाशील धातु है, फिर भी इसका उपयोग खाना बनाने के बर्तन बनाने में किया जाता है। (d) निष्कर्षण की प्रक्रिया में कार्बोनेट व सल्फ़ाइड अयस्कों को सामान्यतः ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है।

हल:

(a) प्लैटिनम, सोना व चाँदी अत्यंत कम क्रियाशील व चमकदार धातुएँ हैं — इनमें जंग या संक्षारण नहीं होता, चमक बनी रहती है; साथ ही ये अत्यधिक आघातवर्धनीय व तन्य हैं, इसलिए इनसे सुंदर व बारीक आभूषण आसानी से बनते हैं।

(b) सोडियम, पोटैशियम व लीथियम इतनी क्रियाशील धातुएँ हैं कि खुले में रखने पर वायु व नमी से तीव्र क्रिया करके आग पकड़ लेती हैं। तेल इन्हें वायु-नमी से अलग रखता है और स्वयं क्रिया नहीं करता, इसलिए इन्हें तेल (किरोसिन) में डुबोकर रखा जाता है।

(c) ऐलुमिनियम वायु की ऑक्सीजन से क्रिया करके अपनी सतह पर Al2O3 की पतली, मज़बूत व स्थायी परत बना लेता है। यह परत अंदर की धातु को आगे की क्रिया से बचा लेती है — अर्थात ऐलुमिनियम स्वयं अपनी रक्षा-कवच बना लेता है। साथ ही यह हलका, सस्ता व ऊष्मा का अच्छा चालक है, इसलिए बर्तनों के लिए उत्तम है।

(d) धातु को उसके ऑक्साइड से अपचयित करके निकालना, कार्बोनेट या सल्फ़ाइड की तुलना में कहीं आसान होता है। इसलिए निष्कर्षण में कार्बोनेट अयस्क का निस्तापन और सल्फ़ाइड अयस्क का भर्जन करके पहले उन्हें ऑक्साइड में बदला जाता है, फिर अपचयन किया जाता है।

प्रश्न 13. आपने ताँबे के मलिन (काले-हरे पड़े) बर्तनों को नींबू या इमली के रस से साफ़ होते देखा होगा। समझाइए कि ये खट्टे पदार्थ बर्तनों को साफ़ करने में क्यों प्रभावी होते हैं?

हल: ताँबा नम वायु की CO2 से धीरे-धीरे क्रिया करके सतह पर क्षारकीय कॉपर कार्बोनेट की हरी परत बना लेता है — बर्तन की भूरी चमक इसी से चली जाती है। नींबू व इमली में मौजूद अम्ल (साइट्रिक अम्ल आदि) इस क्षारकीय परत से क्रिया करके उसे घोल देते हैं (उदासीनीकरण)। परत हटते ही नीचे की चमकदार ताँबे की सतह दिखाई देने लगती है — बर्तन फिर से नया-सा चमक उठता है।

प्रश्न 14. रासायनिक गुणों के आधार पर धातुओं व अधातुओं में अंतर स्पष्ट कीजिए।

हल:

रासायनिक गुण धातुएँ अधातुएँ
ऑक्सीजन से क्रिया क्षारकीय ऑक्साइड (कुछ उभयधर्मी) बनाती हैं अम्लीय या उदासीन ऑक्साइड बनाती हैं
जल से क्रिया कई धातुएँ हाइड्रोजन निकालती हैं; गति क्रियाशीलता पर निर्भर सामान्यतः क्रिया नहीं करतीं
तनु अम्लों से क्रिया लवण व H2 बनाती हैं (H से ऊपर वाली धातुएँ) क्रिया नहीं करतीं, H2 विस्थापित नहीं कर सकतीं
इलेक्ट्रॉन व्यवहार इलेक्ट्रॉन त्यागती हैं — धनायन बनाती हैं (वैद्युतधनात्मक), अपचायक का कार्य करती हैं इलेक्ट्रॉन ग्रहण करती हैं — ऋणायन बनाती हैं (वैद्युतऋणात्मक), ऑक्सीकारक का कार्य करती हैं
क्लोरीन से बने यौगिक आयनिक क्लोराइड (जैसे NaCl) सहसंयोजी क्लोराइड (जैसे HCl, CCl4)

प्रश्न 15. एक व्यक्ति सुनार बनकर घर-घर घूमता था। उसने पुराने व मलिन सोने के आभूषणों की चमक वापस लाने का वादा किया। एक भोली महिला ने उसे सोने के कंगनों का सेट दे दिया, जिसे उसने एक विशेष विलयन में डुबोया। कंगन नए जैसे चमक उठे, परंतु उनका वज़न काफी कम हो गया। महिला परेशान हुई, परंतु व्यर्थ बहस के बाद वह व्यक्ति भाग निकला। क्या आप जासूस बनकर उस विलयन की प्रकृति का पता लगा सकते हैं?

हल: वह विलयन एक्वा रेजिया (अम्लराज) था — सान्द्र HCl व सान्द्र HNO3 का 3 : 1 मिश्रण। यह विश्व के उन गिने-चुने द्रवों में है जो सोने को घोल सकते हैं। कंगनों को डुबोने पर उनकी बाहरी सतह का सोना घुलकर विलयन में चला गया — इसीलिए अंदर की साफ़ सतह निकल आने से कंगन चमक उठे, परंतु सोने की मात्रा घट जाने से वज़न काफी कम हो गया। ठग वही घुला हुआ सोना लेकर भागा।

📌 सीख: विज्ञान जानना केवल परीक्षा के लिए नहीं है — ऐसी ठगी से बचना भी इसी अध्याय की देन है। अनजान व्यक्ति को आभूषण कभी न सौंपें!

प्रश्न 16. कारण दीजिए कि ताँबे का उपयोग गर्म जल की टंकियाँ बनाने में होता है, परंतु इस्पात (लोहे की मिश्रधातु) का नहीं।

हल: ताँबा सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे है — यह ठंडे जल, गर्म जल, यहाँ तक कि भाप से भी क्रिया नहीं करता। इसके विपरीत लोहा भाप से क्रिया करता है:

3Fe(s) + 4H2O(g) → Fe3O4(s) + 4H2(g)↑
उत्तर: इस्पात की टंकी गर्म जल की भाप से धीरे-धीरे क्रिया करके कमज़ोर हो जाएगी और जंग भी लगेगा, जबकि ताँबे की टंकी अक्रियम रहकर लंबे समय तक टिकती है — इसलिए गर्म जल की टंकियाँ ताँबे की बनाई जाती हैं।

इस प्रश्नावली में हमने सीखा — 16 प्रश्नों में से अधिकांश का उत्तर अंततः सक्रियता श्रेणी, उभयधर्मी ऑक्साइड व निष्कर्षण के चरणों में ही छिपा है; अवधारणा स्पष्ट हो तो हर प्रश्न दो-तीन पंक्तियों में निपट जाता है।

📖 Case Study – लोहे के गेट पर जंग और चाचा जी की तरकीब

मोहन के घर के लोहे के गेट पर कुछ ही बरसातों में भूरी जंग की परत जम गई और गेट जगह-जगह से कमज़ोर होने लगा। चाचा जी ने बताया कि गेट पर पेंट नहीं हुआ था, इसलिए नम हवा सीधे लोहे के संपर्क में आती रही। उन्होंने गेट को पहले रेगमाल से साफ़ करवाकर जंग हटवाई, फिर उस पर पेंट करवाया। साथ वाले शर्मा जी ने लोहे की नई ग्रिल पर ज़िंक की परत (यशदलेपन) वाली शीट लगवाई, जिस पर वर्षों बाद भी जंग नहीं लगी। मोहन ने अपनी विज्ञान की किताब खोली और समझ गया कि यह सब सक्रियता श्रेणी और संक्षारण का ही खेल है। इस गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

Q1. लोहे के गेट पर जमी भूरी परत का रासायनिक सूत्र क्या है? —

(A) FeO
(B) Fe3O4
(C) Fe2O3·xH2O
(D) FeCO3

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) Fe2O3·xH2O — जंग जलयोजित फ़ेरिक ऑक्साइड होता है, जो नम वायु में लोहे के संक्षारण से बनता है।

Q2. पेंट करने से गेट जंग से क्यों बच जाता है? —

(A) पेंट लोहे को कठोर बना देता है
(B) पेंट की परत वायु व नमी को लोहे तक पहुँचने से रोकती है
(C) पेंट लोहे को ज़िंक में बदल देता है
(D) पेंट लोहे का गलनांक बढ़ा देता है

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) पेंट की परत वायु व नमी को लोहे तक पहुँचने से रोकती है — संक्षारण के लिए दोनों का संपर्क ज़रूरी है, संपर्क टूटा तो जंग रुकी।

Q3. यशदलेपन (galvanization) में ज़िंक की परत लोहे की रक्षा परत टूटने पर भी करती है, क्योंकि —

(A) ज़िंक लोहे से कम क्रियाशील है
(B) ज़िंक लोहे से अधिक क्रियाशील है, इसलिए वह स्वयं पहले क्रिया करके लोहे को बचा लेता है
(C) ज़िंक विद्युत का कुचालक है
(D) ज़िंक का गलनांक अधिक है

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) ज़िंक लोहे से अधिक क्रियाशील है, इसलिए वह स्वयं पहले क्रिया करके (बलिदानी सुरक्षा देकर) लोहे को बचा लेता है।

Q4. सक्रियता श्रेणी में लोहे (Fe) और ज़िंक (Zn) का सही क्रम क्या है? —

(A) Fe > Zn
(B) Zn > Fe
(C) दोनों बराबर हैं
(D) दोनों हाइड्रोजन से नीचे हैं

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) Zn > Fe — श्रेणी K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe के अनुसार ज़िंक लोहे से ऊपर है, इसीलिए वह लोहे को उसके लवणों से विस्थापित भी करता है।

⭐ Quick Revision – Important Points

  • ✅ धातुएँ चमकदार, आघातवर्धनीय, तन्य, ध्वानिक तथा ऊष्मा व विद्युत की सुचालक होती हैं; अपवाद — पारा (द्रव धातु), सोडियम-पोटैशियम (नरम, चाकू से कटते हैं)।
  • ✅ सोना सबसे तन्य और सोना-चाँदी सबसे आघातवर्धनीय धातुएँ हैं; चाँदी ऊष्मा-विद्युत की सर्वोत्तम चालक है; ब्रोमीन द्रव अधातु, आयोडीन चमकदार अधातु, ग्रेफ़ाइट विद्युत-चालक अधातु और हीरा सबसे कठोर पदार्थ है।
  • ✅ धातु ऑक्साइड सामान्यतः क्षारकीय होते हैं; Al2O3 व ZnO उभयधर्मी हैं; अधातु ऑक्साइड अम्लीय या उदासीन होते हैं।
  • ✅ जल से क्रिया — K, Na ठंडे जल से तीव्र; Ca ठंडे जल से मंद (तैरता है); Mg गर्म जल/भाप से; Al, Fe, Zn केवल भाप से; Pb, Cu, Ag, Au बिल्कुल नहीं।
  • ✅ सक्रियता श्रेणी: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au — ऊपर वाली धातु नीचे वाली को विस्थापित करती है; H से ऊपर वाली ही अम्लों से H2 निकालती हैं।
  • ✅ एक्वा रेजिया = सान्द्र HCl : सान्द्र HNO3 = 3 : 1; यह सोने व प्लैटिनम को घोलता है।
  • ✅ आयनिक यौगिक इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण से बनते हैं; ये ठोस, भंगुर, उच्च गलनांक वाले होते हैं और गलित/विलयन अवस्था में ही विद्युत चलाते हैं।
  • ✅ निष्कर्षण — सल्फ़ाइड अयस्क का भर्जन (वायु में), कार्बोनेट अयस्क का निस्तापन (वायु की अनुपस्थिति में); मध्य श्रेणी → कार्बन अपचयन, शीर्ष श्रेणी → विद्युत अपघटन; थर्मिट — Fe2O3 + 2Al → Al2O3 + 2Fe।
  • ✅ विद्युत शोधन — ऐनोड = अशुद्ध धातु, कैथोड = शुद्ध धातु की पट्टी, अपघट्य = धातु लवण का विलयन; अशुद्धियाँ ऐनोड पंक में जमा होती हैं।
  • ✅ जंग = Fe2O3·xH2O; बचाव — पेंट, तेल-ग्रीस, यशदलेपन, विद्युत लेपन व मिश्रधातु। मिश्रधातु — पीतल (Cu+Zn), काँसा (Cu+Sn), सोल्डर (Pb+Sn), स्टेनलेस स्टील (Fe+Ni+Cr)।

⚠️ Aam Galtiyan (Common Mistakes)

  • Zn + FeSO4 का उत्पाद गलत लिखना: यहाँ ZnSO4 + Fe बनता है, कॉपर नहीं! कई गाइडों में छपा “Zn + FeSO4 → ZnSO4 + Cu” बिल्कुल गलत है — विस्थापन में वही धातु बाहर आती है जो यौगिक में थी, अर्थात लोहा।
  • सक्रियता श्रेणी का क्रम उलटना: Al व Zn, तथा Pb व H की जगह अक्सर गड़बड़ होती है। सही क्रम है — Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu। हाइड्रोजन को श्रेणी में रखना न भूलें — अम्ल वाले प्रश्न उसी से तय होते हैं।
  • भर्जन व निस्तापन में भ्रम: सल्फ़ाइड → भर्जन (वायु उपस्थित) और कार्बोनेट → निस्तापन (वायु अनुपस्थित)। अयस्क देखकर विधि चुनें, नाम रटकर नहीं।
  • धातु ऑक्साइडों को अम्लीय लिख देना: धातु ऑक्साइड क्षारकीय होते हैं, अधातु ऑक्साइड अम्लीय — Exercise प्रश्न 3 व 11 की जड़ यही है। उभयधर्मी (Al2O3, ZnO) अपवाद हैं, नियम नहीं।
  • आयनिक यौगिकों की चालकता उलटी लिखना: ठोस अवस्था में विद्युत नहीं चलती; गलित अवस्था व जलीय विलयन में चलती है — क्योंकि तभी आयन स्वतंत्र होते हैं।
  • विद्युत शोधन में ऐनोड-कैथोड बदल देना: ऐनोड हमेशा अशुद्ध धातु का और कैथोड शुद्ध धातु की पतली पट्टी का होता है — उल्टा लिखने पर पूरा उत्तर गलत हो जाता है।
  • Fe + भाप का समीकरण गलत लिखना: उत्पाद Fe3O4 है, Fe2O3 नहीं — 3Fe + 4H2O → Fe3O4 + 4H2।

🎯 Bihar Board Exam Tips

  • सक्रियता श्रेणी चार्ट बनाकर दीवार पर लगाइए: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > H > Cu > Hg > Ag > Au — रोज़ एक बार बोलकर दोहराइए। विस्थापन, अम्ल-क्रिया व निष्कर्षण विधि — तीनों तरह के प्रश्न इसी से हल होते हैं।
  • समीकरण संतुलित व अवस्था संकेत सहित लिखें: थर्मिट, भर्जन, निस्तापन, Fe + भाप व Zn + FeSO4 जैसे समीकरण साथ में (s), (aq), (g) लिखने से पूरे अंक मिलते हैं।
  • “कारण दीजिए” वाले प्रश्नों का पैटर्न पकड़िए: BSEB में Exercise प्रश्न 12 जैसे कारण-प्रश्न बहुत आते हैं — उत्तर हमेशा दो बिंदुओं में दें: पहला — तथ्य (धातु कैसी है), दूसरा — परिणाम (इसलिए ऐसा किया जाता है)।
  • अपवादों की अलग सूची बनाइए: पारा, ब्रोमीन, आयोडीन, ग्रेफ़ाइट, हीरा, सोडियम का तेल में रखा जाना — वस्तुनिष्ठ प्रश्न प्रायः इन्हीं अपवादों से बनते हैं।
  • तालिकाएँ रटें नहीं, तर्क से बनाएँ: भौतिक व रासायनिक गुणों की धातु-अधातु तुलना तालिका एक बार स्वयं बनाकर देखें — परीक्षा में वैसी ही तालिका पूछी जाती है।
  • पिछले वर्षों के BSEB प्रश्न-पत्रों से इस अध्याय के प्रश्न अवश्य हल करें — InText की A-B-C-D वाली सारणी और उभयधर्मी ऑक्साइड जैसे प्रश्न बार-बार दोहराए गए हैं।

📝 MCQ Quiz – 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (स्वयं को जाँचें)

पहले बिना देखे हल करें, फिर “✅ उत्तर देखें” खोलकर मिलाएँ। अंत में Answer Key table दी गई है।

Q1. कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में पाई जाने वाली धातु है —

(A) सोडियम
(B) पारा (मरकरी)
(C) ऐलुमिनियम
(D) लोहा

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) पारा (मरकरी) — यह एकमात्र धातु है जो कमरे के ताप पर द्रव होती है।

Q2. सबसे अधिक तन्य (ductile) धातु कौन-सी है? —

(A) चाँदी
(B) ताँबा
(C) सोना
(D) ऐलुमिनियम

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) सोना — 1 ग्राम सोने से लगभग 2 km लंबा तार खींचा जा सकता है।

Q3. निम्न में से कौन-सी अधातु विद्युत की सुचालक है? —

(A) गंधक
(B) ग्रेफ़ाइट
(C) आयोडीन
(D) ब्रोमीन

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) ग्रेफ़ाइट — कार्बन का यह अपरूप अधातु होते हुए भी विद्युत चलाता है।

Q4. सक्रियता श्रेणी में सही घटता क्रम कौन-सा है? —

(A) Na > K > Ca > Mg
(B) K > Na > Ca > Mg
(C) Mg > Ca > Na > K
(D) Ca > K > Na > Mg

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) K > Na > Ca > Mg — पोटैशियम सबसे अधिक क्रियाशील धातु है।

Q5. सोडियम को किसमें डुबोकर रखा जाता है? —

(A) जल में
(B) पेट्रोल में
(C) मिट्टी के तेल (किरोसिन) में
(D) अम्ल में

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) मिट्टी के तेल (किरोसिन) में — ताकि वह वायु व नमी से क्रिया करके आग न पकड़े।

Q6. निम्न में से कौन-सा ऑक्साइड उभयधर्मी है? —

(A) Na2O
(B) MgO
(C) Al2O3
(D) CO2

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) Al2O3 — यह अम्ल व क्षारक दोनों से क्रिया करता है; ZnO भी उभयधर्मी है।

Q7. Fe + CuSO4 → FeSO4 + Cu अभिक्रिया में विलयन का रंग हो जाता है —

(A) नीले से लाल
(B) नीले से हल्का हरा
(C) हरे से नीला
(D) कोई परिवर्तन नहीं

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) नीले से हल्का हरा — नीला CuSO4 समाप्त होकर हल्के हरे रंग का FeSO4 बनता है।

Q8. एक्वा रेजिया में सान्द्र HCl व सान्द्र HNO3 का अनुपात होता है —

(A) 1 : 3
(B) 3 : 1
(C) 1 : 1
(D) 2 : 1

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) 3 : 1 — यही अम्लराज सोने व प्लैटिनम को घोल सकता है।

Q9. थर्मिट अभिक्रिया में अपचायक के रूप में उपयोग होता है —

(A) कार्बन
(B) ज़िंक
(C) ऐलुमिनियम चूर्ण
(D) कॉपर

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) ऐलुमिनियम चूर्ण — Fe2O3 + 2Al → Al2O3 + 2Fe; इससे रेल पटरियाँ जोड़ी जाती हैं।

Q10. सल्फ़ाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में तेज़ गरम करना कहलाता है —

(A) निस्तापन
(B) भर्जन
(C) यशदलेपन
(D) एनोडीकरण

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) भर्जन — जैसे 2ZnS + 3O2 → 2ZnO + 2SO2; कार्बोनेट अयस्क के लिए निस्तापन होता है।

Q11. पीतल (Brass) किसका मिश्रण है? —

(A) Cu + Sn
(B) Pb + Sn
(C) Cu + Zn
(D) Fe + Cr

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) Cu + Zn — ताँबा व ज़िंक; काँसा Cu + Sn का और सोल्डर Pb + Sn का मिश्रण है।

Q12. आयनिक यौगिक विद्युत का चालन करते हैं —

(A) ठोस अवस्था में
(B) गलित अवस्था व जलीय विलयन में
(C) केवल गैसीय अवस्था में
(D) किसी भी अवस्था में नहीं

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) गलित अवस्था व जलीय विलयन में — क्योंकि तभी आयन गति के लिए स्वतंत्र होते हैं।

Q13. निम्न में से कौन-सी धातु तनु अम्ल से हाइड्रोजन विस्थापित नहीं कर सकती? —

(A) ज़िंक
(B) मैग्नीशियम
(C) लोहा
(D) ताँबा

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (D) ताँबा — यह सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन से नीचे है।

Q14. विद्युत शोधन में ऐनोड बनाया जाता है —

(A) शुद्ध धातु की पतली पट्टी का
(B) अशुद्ध धातु का
(C) ग्रेफ़ाइट का
(D) ज़िंक का

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) अशुद्ध धातु का — कैथोड शुद्ध धातु की पतली पट्टी का बनता है, जहाँ शुद्ध धातु जमा होती है।

Q15. लोहे को जंग से बचाने के लिए यशदलेपन में किस धातु की परत चढ़ाई जाती है? —

(A) टिन
(B) ताँबा
(C) ज़िंक
(D) क्रोमियम

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) ज़िंक — ज़िंक लोहे से अधिक क्रियाशील है, इसलिए परत टूटने पर भी वह पहले क्रिया करके लोहे की रक्षा करता है।

Answer Key – उत्तरमाला

प्रश्न 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15
उत्तर B C B B C C B B C B C B D B C

❓ FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1. सक्रियता श्रेणी याद करने का सबसे आसान तरीका क्या है?

उत्तर: क्रम को तीन हिस्सों में तोड़कर याद कीजिए — सबसे तेज़ चार (K, Na, Ca, Mg), बीच के चार (Al, Zn, Fe, Pb), फिर हाइड्रोजन (H) को दरवाज़ा मानिए, और अंत के चार (Cu, Hg, Ag, Au)। साथ में एक प्रयोग हर समूह से जोड़िए — Na जल में आग, Fe कील CuSO4 में, सोना किसी से क्रिया नहीं। कहानी से जुड़ा क्रम कभी नहीं भूलता।

प्रश्न 2. भर्जन और निस्तापन में अंतर एक लाइन में कैसे लिखें?

उत्तर: सल्फ़ाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में गरम करना भर्जन है, और कार्बोनेट अयस्क को वायु की अनुपस्थिति में गरम करना निस्तापन है — दोनों का उद्देश्य अयस्क को ऑक्साइड में बदलना है। अयस्क का प्रकार (S है या CO3) देखकर विधि पहचानिए, नाम रटने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

प्रश्न 3. क्या केवल InText और प्रश्नावली के प्रश्न तैयार करना काफ़ी है?

उत्तर: इस अध्याय के लिए लगभग हाँ — Board के अधिकांश प्रश्न इन्हीं 31 प्रश्नों (InText 15 + प्रश्नावली 16) से सीधे या हल्के बदलाव के साथ आते हैं। साथ में अध्याय के तीन प्रमुख उदाहरण (थर्मिट, आयनिक यौगिक बनना, भर्जन-निस्तापन) और अंत का MCQ Quiz कर लें, तो वस्तुनिष्ठ भाग भी तैयार हो जाएगा।

प्रश्न 4. ऐलुमिनियम क्रियाशील होते हुए भी जंग क्यों नहीं खाता?

उत्तर: क्योंकि ऐलुमिनियम वायु से क्रिया करके अपनी सतह पर Al2O3 की पतली, मज़बूत व अभेद्य परत बना लेता है। यह परत अंदर की धातु तक वायु-नमी को पहुँचने ही नहीं देती। एनोडीकरण द्वारा इस परत को और मोटा करके सुरक्षा बढ़ाई जाती है — यही कारण है कि ऐलुमिनियम के बर्तन वर्षों चलते हैं।

प्रश्न 5. NCERT की किताब (PDF) कहाँ से मिलेगी?

उत्तर: NCERT की आधिकारिक वेबसाइट ncert.nic.in से Class 10 Science की किताब का PDF बिल्कुल मुफ़्त डाउनलोड किया जा सकता है। वहीं से आप हर अध्याय की मूल किताब पढ़ सकते हैं और इस पेज के हल मूल प्रश्नों से मिला भी सकते हैं।

🔗 Pichhla / Agla Adhyay – पिछले व अगले अध्याय पढ़ें

⬅️ पिछला अध्याय: अध्याय 2 — अम्ल, क्षारक एवं लवण (Acids, Bases and Salts) यहाँ पढ़ें: Class 10 Science Chapter 2 Acids, Bases and Salts

➡️ अगला अध्याय: अध्याय 4 — कार्बन एवं उसके यौगिक (Carbon and its Compounds) यहाँ पढ़ें: Class 10 Science Chapter 4 Carbon and its Compounds

📚 सभी अध्यायों की सूची: NCERT Class 10 Bihar Board Science Book — सभी अध्याय एक ही जगह

🔚 Conclusion – निष्कर्ष

बधाई हो! आपने विज्ञान के सबसे उपयोगी अध्यायों में से एक — धातु एवं अधातु — पूरा कर लिया। अब आप जानते हैं कि बर्तन, तार और घंटी धातु के ही क्यों बनते हैं; सक्रियता श्रेणी कैसे हर विस्थापन का फैसला करती है; आयनिक यौगिक इलेक्ट्रॉनों के लेन-देन से कैसे बनते हैं; धातु खदान से निकलकर भर्जन, निस्तापन, अपचयन व शोधन के बाद हमारे घर तक कैसे पहुँचती है; और जंग से बचाव के पीछे का विज्ञान क्या है।

ऊपर दिए गए सभी 31 हल किए गए प्रश्नों (InText 15 + प्रश्नावली 16), तीनों प्रमुख उदाहरणों और 15 MCQ का अभ्यास कीजिए। किताब का मूल पाठ पढ़ने के लिए NCERT की आधिकारिक वेबसाइट ncert.nic.in से PDF ले सकते हैं। अब अगले अध्याय — कार्बन एवं उसके यौगिक — की तैयारी शुरू कीजिए; वहाँ सहसंयोजी बंध की दुनिया इस आयनिक बंध से बिल्कुल अलग और उतनी ही रोचक है। शुभकामनाएँ, मेहनत जारी रखिए!