NCERT Class 10 Science Chapter 4 Carbon and its Compounds in Hindi | कार्बन एवं इसके यौगिक Notes, MCQ व प्रश्न-उत्तर

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परिचय – यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है?

Class 10 Science Chapter 4 Carbon and its Compounds के NCERT Solutions आपको इस पेज पर सरल हिंदी में, किताब के क्रम से मिलेंगे। Class 10 Science Chapter 4 Carbon and its Compounds यानी कार्बन एवं इसके यौगिक — यह विज्ञान का सबसे बड़ा और सबसे मज़ेदार अध्याय है, क्योंकि यह अध्याय किसी प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है; यह आपकी रसोई, आपके कपड़ों, आपकी दवाओं और आपकी गाड़ी के ईंधन तक फैला हुआ है।

ज़रा अपने चारों ओर देखिए — सुबह का नाश्ता (रोटी, चीनी, तेल), पहने हुए कपड़े (कपास, नायलॉन), लिखने की पेंसिल (ग्रेफ़ाइट), माँ की दवाइयाँ, घर का साबुन, रसोई की LPG गैस — इन सबमें कार्बन ही कार्बन है! धरती की पपड़ी में कार्बन मात्र 0.02% ही है, फिर भी कार्बन के यौगिकों की संख्या लाखों में है। क्यों? इसका रहस्य — शृंखलन (catenation) और चतुःसंयोजकता (tetravalency) — इसी अध्याय में खुलेगा।

Bihar Board (BSEB) Class 10 की परीक्षा में इस अध्याय का वज़न बहुत अधिक है — नामकरण (nomenclature), समजातीय श्रेणी, क्रियात्मक समूह, साबुन की सफ़ाई क्रिया और एथेनॉल-एथेनॉइक अम्ल के गुणों पर हर साल वस्तुनिष्ठ, लघु उत्तरीय और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न बनते हैं। अध्याय बड़ा ज़रूर है, पर एक बार इसकी कहानी समझ आ जाए तो यह सबसे अधिक अंक दिलाने वाला अध्याय बन जाता है।

📌 खास बात: इस अध्याय की तैयारी का सबसे अच्छा तरीका है — पहले क्रियात्मक समूहों की table और समजातीय श्रेणी को पक्का कर लीजिए। नामकरण, सूत्र लिखना और अधिकांश MCQ इन्हीं दो चीज़ों से हल हो जाते हैं।

📋 अध्याय की जानकारी (Chapter Information)

Board Bihar Board (BSEB)
Textbook NCERT
Class 10
Subject Science (विज्ञान)
Chapter 4
Chapter Name Carbon and its Compounds (कार्बन एवं इसके यौगिक)
कुल हल किए गए प्रश्न 28 (InText 13 + प्रश्नावली 15)

📚 इस Chapter में क्या-क्या है? (Topics)

  1. 4.1 कार्बन में आबंधन – सहसंयोजक आबंध – इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना, कार्बन क्यों आयन नहीं बनाता, सहसंयोजक यौगिकों के गुण
  2. 4.2 कार्बन की बहुमुखी प्रकृति
    • कार्बन के अपररूप – हीरा, ग्रेफ़ाइट, फुलेरीन
    • शृंखलन (Catenation) व चतुःसंयोजकता
    • संतृप्त व असंतृप्त हाइड्रोकार्बन – ऐल्केन, ऐल्कीन, ऐल्काइन
    • शृंखला, शाखा व वलय (chains, branches, rings) तथा समावयवता (isomerism)
    • समजातीय श्रेणी (Homologous Series) व क्रियात्मक समूह (Functional Groups)
    • कार्बन यौगिकों का नामकरण (IUPAC Nomenclature)
  3. 4.3 कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुणधर्म – दहन, उपचयन (oxidation), संकलन/योगात्मक अभिक्रिया (addition), प्रतिस्थापन अभिक्रिया (substitution)
  4. 4.4 कुछ महत्वपूर्ण कार्बन यौगिक – एथेनॉल (Ethanol) व एथेनॉइक अम्ल (Ethanoic Acid) के गुण व अभिक्रियाएँ, एस्टरीकरण
  5. 4.5 साबुन व अपमार्जक – मिसेल (micelle) की कार्यविधि, कठोर जल में साबुन व अपमार्जक का अंतर
  6. पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (InText) – 13 प्रश्न, महत्वपूर्ण हल किए गए उदाहरण, प्रश्नावली के 15 प्रश्न
  7. Case Study, Quick Revision, Mistakes, Bihar Board Exam Tips, MCQ Quiz व FAQ

📊 Key Concepts – मुख्य परिभाषाएँ व नियम

पद / नियम अर्थ (एक लाइन में)
सहसंयोजक आबंध (Covalent Bond) दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी से बना बंध।
शृंखलन (Catenation) कार्बन परमाणुओं का आपस में जुड़कर लंबी शृंखला, शाखा या वलय बनाने का गुण।
चतुःसंयोजकता (Tetravalency) कार्बन की संयोजकता 4 है — वह एक साथ चार बंध बना सकता है।
अपररूप (Allotropes) एक ही तत्व के वे भिन्न रूप जिनके भौतिक गुण भिन्न पर रासायनिक गुण समान हों — हीरा, ग्रेफ़ाइट, फुलेरीन।
हाइड्रोकार्बन केवल कार्बन व हाइड्रोजन से बने यौगिक।
संतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्केन) जिनमें कार्बन-कार्बन के बीच केवल एकल बंध हों; सामान्य सूत्र CnH2n+2।
असंतृप्त हाइड्रोकार्बन जिनमें कम-से-कम एक द्वि-बंध (ऐल्कीन, CnH2n) या त्रि-बंध (ऐल्काइन, CnH2n–2) हो।
क्रियात्मक समूह (Functional Group) वह परमाणु या परमाणु-समूह जो यौगिक के रासायनिक गुण तय करता है — जैसे –OH, –COOH।
समजातीय श्रेणी (Homologous Series) यौगिकों की वह श्रेणी जिसमें एक ही क्रियात्मक समूह हो, क्रमागत सदस्यों में –CH2– का अंतर हो और रासायनिक गुण समान हों।
समावयवता (Isomerism) एक ही आण्विक सूत्र, पर अलग संरचना व अलग गुण वाले यौगिक समावयवी कहलाते हैं।
हाइड्रोजनीकरण (Hydrogenation) Ni/Pd उत्प्रेरक की उपस्थिति में असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में H2 का योग — वनस्पति तेल से घी बनना इसका उदाहरण है।
एस्टरीकरण (Esterification) कार्बोक्सिलिक अम्ल व ऐल्कोहॉल की क्रिया से मीठी गंध वाला एस्टर व जल बनना।
मिसेल (Micelle) जल में साबुन अणुओं का वह गोलाकार समूह जिसमें तेल-मैल अंदर फँसा होता है।
साबुनीकरण (Saponification) एस्टर को NaOH के साथ गरम करके साबुन व ऐल्कोहॉल प्राप्त करने की क्रिया।

सबसे काम की बात: कार्बन की परमाणु संख्या 6 है और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 4 है। बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन होने के कारण वह न तो 4 इलेक्ट्रॉन छोड़ सकता है, न 4 ग्रहण कर सकता है — इसलिए वह इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी (सहसंयोजक बंध) करता है। यही एक वाक्य पूरे अध्याय की कुंजी है!

सहसंयोजक बंध – कार्बन इलेक्ट्रॉन बाँटता क्यों है?

पिछले अध्यायों में आपने आयनिक यौगिक पढ़े — वहाँ एक परमाणु इलेक्ट्रॉन देकर और दूसरा लेकर आयन बन जाता था। प्रश्न यह है कि कार्बन ऐसा क्यों नहीं करता? कार्बन के बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन हैं। अष्टक पूरा करने के लिए उसे या तो 4 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने होंगे या 4 त्यागने होंगे। दोनों ही रास्ते कठिन हैं:

पहली कठिनाई: 4 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके C4– आयन बनाना कठिन है, क्योंकि 6 प्रोटॉन वाला नाभिक 10 इलेक्ट्रॉनों को संभाल नहीं पाएगा — इतनी ऊर्जा लगेगी कि प्रक्रिया असंभव हो जाएगी।

दूसरी कठिनाई: 4 इलेक्ट्रॉन त्यागकर C4+ बनाने में भी बहुत अधिक ऊर्जा लगेगी, क्योंकि नाभिक बचे हुए इलेक्ट्रॉनों को कसकर पकड़े रहता है।

इस समस्या का सुंदर हल कार्बन ने साझेदारी में निकाला — वह अपने चारों संयोजकता इलेक्ट्रॉनों को दूसरे परमाणुओं के साथ साझा करता है। इसी साझेदारी से बने बंध को सहसंयोजक बंध (covalent bond) कहते हैं, और साझा किए गए इलेक्ट्रॉन दोनों परमाणुओं के बाहरी कोश में गिने जाते हैं — दोनों का अष्टक (हाइड्रोजन का द्विक) पूरा हो जाता है।

इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना कैसे बनाएँ? – मीथेन व क्लोरोमीथेन

इलेक्ट्रॉन बिंदु (electron dot) संरचना में प्रत्येक साझा इलेक्ट्रॉन-युग्म को दोनों परमाणुओं के बीच एक बिंदु-जोड़ी या एक छोटी रेखा (–) से दिखाते हैं। एक रेखा = एक एकल बंध, दो रेखाएँ = द्वि-बंध, तीन रेखाएँ = त्रि-बंध।

मीथेन (CH4): कार्बन अपने 4 इलेक्ट्रॉनों में से एक-एक इलेक्ट्रॉन चारों हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ साझा करता है। परिणाम — कार्बन के चारों ओर 4 एकल बंध बनते हैं और प्रत्येक हाइड्रोजन का द्विक पूरा हो जाता है। शब्दों में संरचना है: केंद्रीय C परमाणु चारों दिशाओं में H से जुड़ा हुआ — H–C(–H)(–H)–H अर्थात CH3–H के रूप में लिखा गया CH4।

क्लोरोमीथेन (CH3Cl): इसमें कार्बन तीन बंध हाइड्रोजन से और एक बंध क्लोरीन से बनाता है। क्लोरीन के बाहरी कोश में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं — एक साझा युग्म मिलते ही उसका अष्टक पूरा हो जाता है, और उसके शेष 6 इलेक्ट्रॉन तीन असाझा (एकाकी) युग्मों के रूप में रहते हैं। यह प्रश्नावली का प्रिय प्रश्न है — इसे अभ्यास से ही बनाएँ।

द्वि-बंध व त्रि-बंध: जब दो परमाणु दो इलेक्ट्रॉन-युग्म साझा करें तो द्वि-बंध बनता है, जैसे O2 अणु में और एथीन (C2H4) में C=C। तीन युग्म साझा हों तो त्रि-बंध बनता है, जैसे N2 अणु में और एथाइन (C2H2) में C≡C। CO2 में कार्बन प्रत्येक ऑक्सीजन से द्वि-बंध बनाता है — O=C=O।

सहसंयोजक यौगिकों के गुणधर्म

  • गलनांक व क्वथनांक कम होते हैं, क्योंकि अणुओं के बीच अंतरआण्विक बल दुर्बल होता है।
  • सामान्यतः विद्युत के कुचालक होते हैं, क्योंकि इनमें आयन या मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं होते।
  • अधिकांश कार्बनिक यौगिक जल में कम घुलनशील, पर कार्बनिक विलायकों में घुलनशील होते हैं।
  • आयनिक यौगिकों के विपरीत ये प्रायः ज्वलनशील होते हैं — इसीलिए ईंधन इन्हीं से बनते हैं।

📌 याद रखें: आयनिक यौगिकों के गलनांक ऊँचे होते हैं क्योंकि आयनों के बीच प्रबल विद्युत-स्थैतिक आकर्षण बल होता है, जिसे तोड़ने में बहुत ऊर्जा लगती है। यही अंतर Board में बार-बार पूछा जाता है।

कार्बन की बहुमुखी प्रकृति – शृंखलन व चतुःसंयोजकता

प्रकृति में कार्बन के यौगिकों की संख्या किसी भी अन्य तत्व के यौगिकों से कहीं अधिक है। इसके पीछे कार्बन के दो विशेष गुण हैं:

1. शृंखलन (Catenation): कार्बन का वह गुण जिसके कारण कार्बन परमाणु आपस में सहसंयोजक बंधों द्वारा जुड़कर लंबी सीधी शृंखला, शाखित शृंखला या वलय (ring) बनाते हैं। कार्बन-कार्बन बंध बहुत मज़बूत और स्थायी होता है, इसीलिए शृंखलाएँ बहुत लंबी हो सकती हैं — प्लास्टिक, प्रोटीन और DNA जैसी विशाल संरचनाएँ इसी गुण की देन हैं। कोई अन्य तत्व इतनी कुशलता से शृंखलन नहीं दिखाता; सिलिकॉन भी शृंखला बनाता है, पर केवल 7–8 परमाणुओं तक, और वह शृंखला स्थायी भी नहीं होती।

2. चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन की संयोजकता 4 है, अर्थात वह एक साथ चार परमाणुओं से बंध बना सकता है — कार्बन से, हाइड्रोजन से, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फ़र, क्लोरीन आदि से भी। इससे हर कार्बन परमाणु एक चौराहे जैसा बन जाता है, जहाँ से चार दिशाओं में यौगिक फैल सकते हैं। आकार छोटा होने के कारण कार्बन के बंध मज़बूत होते हैं, इसलिए उसके यौगिक स्थायी होते हैं।

एक साँस में समझें — शृंखलन से शृंखलाएँ लंबी होती हैं और चतुःसंयोजकता से वे शृंखलाएँ हर दिशा में फैलती हैं; दोनों मिलकर लाखों यौगिक बना देते हैं।

कार्बन के अपररूप – हीरा, ग्रेफ़ाइट व फुलेरीन

जब कोई तत्व प्रकृति में एक से अधिक भौतिक रूपों में पाया जाए, जिनके भौतिक गुण भिन्न हों पर रासायनिक गुण समान हों, तो वे रूप अपररूप (allotropes) कहलाते हैं। कार्बन के तीन प्रसिद्ध अपररूप हैं:

गुण हीरा (Diamond) ग्रेफ़ाइट (Graphite) फुलेरीन (Fullerene)
संरचना प्रत्येक C परमाणु अन्य 4 C से जुड़ा — त्रि-विमीय मज़बूत जालक प्रत्येक C परमाणु अन्य 3 C से जुड़ा — षट्कोणीय परतें, परतें आपस में ढीली जुड़ी C-60 — फुटबॉल जैसी गोलीय संरचना; 60 C परमाणु 20 षट्कोण व 12 पंचकोण वलयों में
कठोरता सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ मुलायम व फिसलन भरा (चिकना) आण्विक रूप
विद्युत चालकता कुचालक (मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं) सुचालक (प्रत्येक C का एक इलेक्ट्रॉन मुक्त रहता है) विशेष परिस्थितियों में चालकता दिखाता है
उपयोग आभूषण, काँच काटना, ड्रिल पेंसिल की लीड, स्नेहक (lubricant), इलेक्ट्रोड अतिचालकता, नैनो-तकनीक व औषधि अनुसंधान

📌 खास बात: हीरा व ग्रेफ़ाइट दोनों शुद्ध कार्बन हैं, फिर भी गुण ज़मीन-आसमान हैं — अंतर केवल परमाणुओं की व्यवस्था का है। ग्रेफ़ाइट की परतें एक-दूसरे पर फिसल सकती हैं, इसीलिए वह मुलायम है और पेंसिल से कागज़ पर लिखने पर उसकी परतें कागज़ पर उतरती रहती हैं। फुलेरीन की खोज के बाद इसे अमेरिकी वास्तुकार बकमिंस्टर फुलर के गुंबद (geodesic dome) जैसी आकृति के कारण ‘बकमिंस्टर फुलेरीन’ नाम मिला।

संतृप्त व असंतृप्त हाइड्रोकार्बन – ऐल्केन, ऐल्कीन, ऐल्काइन

केवल कार्बन व हाइड्रोजन से बने यौगिक हाइड्रोकार्बन कहलाते हैं — LPG, पेट्रोल, मीथेन, मोम, सब इसी परिवार के हैं। कार्बन-कार्बन बंध के प्रकार के आधार पर ये तीन श्रेणियों में बँटते हैं:

श्रेणी बंध सामान्य सूत्र उदाहरण प्रकृति
ऐल्केन (Alkane) केवल एकल बंध C–C CnH2n+2 CH4 (मीथेन), C2H6 (एथेन), C3H8 (प्रोपेन) संतृप्त
ऐल्कीन (Alkene) एक द्वि-बंध C=C CnH2n C2H4 (एथीन), C3H6 (प्रोपीन) असंतृप्त
ऐल्काइन (Alkyne) एक त्रि-बंध C≡C CnH2n–2 C2H2 (एथाइन), C3H4 (प्रोपाइन) असंतृप्त

संतृप्त का अर्थ है — हर कार्बन की चारों संयोजकताएँ एकल बंधों से पूरी हो चुकी हैं, अब कुछ और जुड़ नहीं सकता। ऐसे यौगिक अपेक्षाकृत कम क्रियाशील होते हैं। असंतृप्त यौगिकों में द्वि/त्रि-बंध होता है, जो खुलकर अतिरिक्त परमाणु जोड़ सकता है — इसलिए वे अधिक क्रियाशील होते हैं और योगात्मक (संकलन) अभिक्रिया दिखाते हैं।

कार्बन शृंखला केवल सीधी ही नहीं होती — वह शाखित (branched) भी हो सकती है और वलय (ring) के रूप में बंद भी। साइक्लोहेक्सेन (C6H12) छह कार्बन का वलय है, और बेंज़ीन (C6H6) एक विशेष वलय यौगिक है जिसमें द्वि-बंध व एकल बंध एकांतर क्रम में होते हैं। साइक्लोपेन्टेन (C5H10) पाँच कार्बन का संतृप्त वलय है — इसका सूत्र ऐल्कीन के सामान्य सूत्र जैसा दिखता है, पर बंध सारे एकल होते हैं; यह बात परीक्षा में भ्रम पैदा करती है, ध्यान रखिए।

समावयवता (Isomerism) – एक सूत्र, कई चेहरे

ब्यूटेन (C4H10) को ही लीजिए। इसके कार्बन दो तरीकों से सज सकते हैं:

n-ब्यूटेन (सरल ब्यूटेन): CH3–CH2–CH2–CH3 (सीधी शृंखला)
आइसोब्यूटेन (2-मेथिलप्रोपेन): CH3–CH(CH3)–CH3 (शाखित शृंखला)

दोनों का आण्विक सूत्र एक ही है — C4H10 — पर संरचना अलग है, इसलिए गुण भी अलग हैं (क्वथनांक आदि)। एक ही आण्विक सूत्र परंतु भिन्न संरचनाओं वाले यौगिक संरचनात्मक समावयवी (structural isomers) कहलाते हैं और यह घटना समावयवता कहलाती है। कार्बन बढ़ने पर समावयवियों की संख्या तेज़ी से बढ़ती है — पेन्टेन के 3, हेक्सेन के 5 समावयवी बनते हैं। LPG सिलिंडर में मुख्यतः यही दो ब्यूटेन समावयवी भरे होते हैं!

समजातीय श्रेणी (Homologous Series) – एक परिवार, बढ़ते सदस्य

रसोई में दाल की तरह सोचिए — परिवार एक, सदस्य कई। यौगिकों की वह श्रेणी जिसमें सभी सदस्यों में एक ही क्रियात्मक समूह हो, क्रमागत (लगातार आने वाले) दो सदस्यों के सूत्रों में –CH2– का अंतर हो, सबका एक ही सामान्य सूत्र हो और रासायनिक गुण समान हों — समजातीय श्रेणी कहलाती है।

ऐल्केन श्रेणी की table – पहले 6 सदस्य

सदस्य नाम आण्विक सूत्र अणुभार (u) संरचना (संक्षिप्त)
1 मीथेन CH4 16 CH4
2 एथेन C2H6 30 CH3–CH3
3 प्रोपेन C3H8 44 CH3–CH2–CH3
4 ब्यूटेन C4H10 58 CH3–CH2–CH2–CH3
5 पेन्टेन C5H12 72 CH3–(CH2)3–CH3
6 हेक्सेन C6H14 86 CH3–(CH2)4–CH3

श्रेणी की विशेषताएँ (परीक्षा के लिए पंक्तियाँ):

  • क्रमागत सदस्यों में –CH2– समूह का अंतर होता है और अणुभार में 14 u का अंतर आता है (16 → 30 → 44 → 58 …, table में स्वयं देख लीजिए)।
  • सभी सदस्यों को एक ही सामान्य सूत्र से लिखा जा सकता है — ऐल्केन के लिए CnH2n+2।
  • सभी सदस्यों के रासायनिक गुण लगभग समान होते हैं, क्योंकि क्रियात्मक समूह (यहाँ बंध-प्रकार) एक ही है।
  • भौतिक गुणों में क्रमिक परिवर्तन होता है — कार्बन बढ़ने पर गलनांक, क्वथनांक व घनत्व धीरे-धीरे बढ़ते हैं (CH4 गैस है, पेन्टेन द्रव, लंबे ऐल्केन ठोस मोम जैसे)।
  • सभी सदस्यों को समान सामान्य विधियों से बनाया जा सकता है।

यही बात ऐल्कोहॉल श्रेणी पर भी लागू होती है — CH3OH (मेथेनॉल, 32 u), C2H5OH (एथेनॉल, 46 u), C3H7OH (प्रोपेनॉल, 60 u)… हर चरण में 14 u की बढ़ोतरी देखिए।

क्रियात्मक समूह (Functional Groups) – यौगिक का असली चेहरा

लंबी कार्बन शृंखला तो केवल ढाँचा है; यौगिक का स्वभाव तय करता है उस पर लगा क्रियात्मक समूह। जैसे एक ही व्यक्ति पर वर्दी बदलने से उसका काम बदल जाता है, वैसे ही शृंखला पर समूह बदलते ही यौगिक अम्ल, ऐल्कोहॉल या ऐल्डिहाइड बन जाता है। ध्यान दें — क्रियात्मक समूह के कारण ही विषम परमाणु (heteroatoms: O, N, Cl, Br, S आदि) कार्बन-शृंखला से जुड़ते हैं।

क्रियात्मक समूह समूह का सूत्र/रूप प्रत्यय (Suffix) / उपसर्ग उदाहरण (नाम व सूत्र)
हैलोऐल्केन (Haloalkane) –Cl, –Br (हाइड्रोजन की जगह हैलोजन) उपसर्ग: क्लोरो– / ब्रोमो– क्लोरोमीथेन — CH3Cl; ब्रोमोएथेन — C2H5Br
ऐल्कोहॉल (Alcohol) –OH प्रत्यय: –ऑल (–ol) एथेनॉल — C2H5OH
ऐल्डिहाइड (Aldehyde) –CHO प्रत्यय: –अल (–al) मेथेनल — HCHO; एथेनल — CH3CHO
कीटोन (Ketone) >C=O (शृंखला के बीच में) प्रत्यय: –ओन (–one) प्रोपेनोन — CH3COCH3
कार्बोक्सिलिक अम्ल (Carboxylic Acid) –COOH प्रत्यय: –ओइक अम्ल (–oic acid) एथेनॉइक अम्ल — CH3COOH
ऐल्कीन (Alkene) >C=C< प्रत्यय: –ईन (–ene) एथीन — C2H4
ऐल्काइन (Alkyne) –C≡C– प्रत्यय: –आइन (–yne) एथाइन — C2H2

📌 याद रखें: हैलोजन समूह के लिए प्रत्यय नहीं, उपसर्ग (prefix) लगता है — क्लोरो, ब्रोमो नाम के पहले आते हैं। बाकी सब में प्रत्यय मूल नाम के अंत में जुड़ता है और मूल ऐल्केन के नाम का अंतिम ‘e’ प्रायः हट जाता है — जैसे ethane + ol = ethanol।

IUPAC नामकरण के नियम – तीन चरणों में

चरण 1 – मूल शृंखला चुनिए: कार्बन परमाणुओं की सबसे लंबी शृंखला गिनिए। 1 कार्बन = meth (मेथ), 2 = eth (एथ), 3 = prop (प्रोप), 4 = but (ब्यूट), 5 = pent (पेन्ट), 6 = hex (हेक्स)।

चरण 2 – बंध का प्रकार देखिए: सारे एकल बंध हों तो –ane (–एन); द्वि-बंध हो तो –ene; त्रि-बंध हो तो –yne।

चरण 3 – क्रियात्मक समूह जोड़िए: समूह का प्रत्यय/उपसर्ग लगाइए और ज़रूरत हो तो समूह की स्थिति (कार्बन संख्या) बताइए — जैसे hex-1-yne (हेक्स-1-आइन) में त्रि-बंध पहले कार्बन से शुरू होता है।

उदाहरण: (i) CH3Cl → 1 कार्बन + क्लोरो उपसर्ग = क्लोरोमीथेन। (ii) C2H5OH → 2 कार्बन + –ऑल = एथेनॉल। (iii) CH3COOH → 2 कार्बन + –ओइक अम्ल = एथेनॉइक अम्ल। (iv) CH3COCH3 → 3 कार्बन + कीटोन = प्रोपेनोन। (v) CH3CHO → एथेनल। नामकरण की यही विधि InText व प्रश्नावली दोनों जगह काम आएगी।

कार्बन यौगिकों की अभिक्रियाएँ – दहन, उपचयन, योग व प्रतिस्थापन

1. दहन (Combustion) – जलना ही पहचान है

कार्बन व उसके लगभग सभी यौगिक वायु (ऑक्सीजन) में जलकर कार्बन डाइऑक्साइड, जल, ऊष्मा व प्रकाश देते हैं। यही कारण है कि ये ईंधन के रूप में उपयोगी हैं।

C(s) + O2(g) → CO2(g) + ऊष्मा + प्रकाश
(कार्बन/कोयले का दहन)

CH4(g) + 2O2(g) → CO2(g) + 2H2O(l) + ऊष्मा + प्रकाश
(मीथेन / प्राकृतिक गैस का दहन)

C2H5OH(l) + 3O2(g) → 2CO2(g) + 3H2O(l) + ऊष्मा + प्रकाश
(एथेनॉल का दहन)

पूर्ण बनाम अपूर्ण दहन: ऑक्सीजन पर्याप्त हो तो दहन पूर्ण होता है और स्वच्छ नीली लौ मिलती है — यही कारण है कि गैस बर्नर की लौ नीली होती है। ऑक्सीजन कम पड़ जाए तो अपूर्ण दहन होता है जल पीली, कजली (sooty) लौ बनती है और कार्बन के कण बर्तन के तले को काला कर देते हैं। संतृप्त हाइड्रोकार्बन सामान्यतः स्वच्छ लौ देते हैं, जबकि असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (कार्बन की प्रतिशतता अधिक होने से) पीली-कजली लौ देते हैं। बर्नर के वायु-छिद्र बंद कर देने पर आप यह अंतर स्वयं देख सकते हैं!

2. उपचयन (Oxidation) – ऑक्सीजन जोड़ने वाले कारक

दहन भी एक प्रकार का उपचयन ही है, पर नियंत्रित उपचयन के लिए विशेष पदार्थ उपयोग होते हैं — क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट (alkaline KMnO4) और अम्लीकृत पोटैशियम डाइक्रोमेट (acidified K2Cr2O7)। ये दूसरे पदार्थों को ऑक्सीजन देते हैं, इसलिए इन्हें उपचायक (oxidising agents) कहते हैं। उदाहरण के लिए ये एथेनॉल को एथेनॉइक अम्ल में बदल देते हैं (आगे विस्तार से)।

3. योगात्मक / संकलन अभिक्रिया (Addition Reaction) – तेल से घी!

असंतृप्त हाइड्रोकार्बन, पैलेडियम (Pd) या निकैल (Ni) उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन से योग करके संतृप्त हाइड्रोकार्बन बनाते हैं। द्वि/त्रि-बंध खुलकर हाइड्रोजन परमाणु जुड़ जाते हैं — यही हाइड्रोजनीकरण (hydrogenation) है।

C2H4(g) + H2(g) →(Ni उत्प्रेरक) C2H6(g)
(एथीन + हाइड्रोजन → एथेन)

औद्योगिक उपयोग: वनस्पति तेलों में लंबी असंतृप्त शृंखलाएँ (C=C द्वि-बंध) होती हैं, इसलिए वे द्रव होते हैं। उनका हाइड्रोजनीकरण करने पर द्वि-बंध संतृप्त हो जाते हैं और तेल जमकर वनस्पति घी बन जाता है। याद रखिए — पशु वसा में संतृप्त वसा अम्ल होते हैं (अस्वास्थ्यकर कहे जाते हैं), जबकि वनस्पति तेलों में असंतृप्त वसा अम्ल होते हैं और वे स्वास्थ्य के लिए अपेक्षाकृत अच्छे माने जाते हैं। इन दोनों को अलग करने की कसौटी भी यही हाइड्रोजनीकरण है — यही बात प्रश्नावली में पूछी गई है।

4. प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution Reaction) – एक हटे, दूसरा बैठे

संतृप्त हाइड्रोकार्बन बहुत कम क्रियाशील होते हैं — अधिकांश अभिकर्मकों से क्रिया ही नहीं करते। परंतु सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरीन से वे तेज़ क्रिया करते हैं: क्लोरीन एक-एक करके हाइड्रोजन परमाणुओं की जगह ले लेती (प्रतिस्थापित कर देती) है।

CH4 + Cl2 →(सूर्य का प्रकाश) CH3Cl + HCl
(मीथेन + क्लोरीन → क्लोरोमीथेन + हाइड्रोजन क्लोराइड)

क्लोरीन और जुड़ती रहे तो क्रमशः CH2Cl2, CHCl3 (क्लोरोफ़ॉर्म) और अंततः CCl4 तक उत्पाद बन सकते हैं। नाम से ही याद रखिए — प्रतिस्थापन अर्थात एक परमाणु का स्थान दूसरे ने ले लिया।

एथेनॉल (Ethanol) – गुण व अभिक्रियाएँ

एथेनॉल (C2H5OH) वह प्रसिद्ध ऐल्कोहॉल है जो मादक पेयों में होता है — और परीक्षा में भी उतना ही प्रसिद्ध है। शुद्ध एथेनॉल रंगहीन द्रव है, जिसकी गंध विशिष्ट और स्वाद ज्वलनशील-सा होता है; यह जल में सभी अनुपातों में घुल जाता है। इसका क्वथनांक 351 K होता है। चिकित्सा के लिए उपयोग होने वाला एथेनॉल, जिसमें मेथेनॉल मिलाकर पीने अयोग्य बना दिया जाता है, ‘विकृत ऐल्कोहॉल’ (denatured alcohol) कहलाता है — क्योंकि मेथेनॉल अत्यंत विषैला होता है और आँखों की रोशनी छीन सकता है।

अभिक्रिया 1 – सोडियम के साथ: एथेनॉल सोडियम धातु से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस निकालता है और सोडियम एथॉक्साइड बनाता है। यह वही हाइड्रोजन है जो पॉप ध्वनि के साथ जलती है।

2C2H5OH + 2Na → 2C2H5ONa + H2↑
(एथेनॉल + सोडियम → सोडियम एथॉक्साइड + हाइड्रोजन)

अभिक्रिया 2 – निर्जलीकरण (Dehydration): एथेनॉल को 443 K पर सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ गरम करने पर उसमें से जल निकल जाता है और एथीन बनती है। यह अभिक्रिया एथीन बनाने की मानक विधि है।

C2H5OH →(443 K, सांद्र H2SO4) C2H4 + H2O
(एथेनॉल → एथीन + जल)

अभिक्रिया 3 – उपचयन: क्षारीय KMnO4 अथवा अम्लीकृत K2Cr2O7 से उपचयन करने पर एथेनॉल पहले एथेनल और फिर एथेनॉइक अम्ल में बदल जाता है (यहाँ [O] नवजात ऑक्सीजन दर्शाता है)।

CH3CH2OH + 2[O] → CH3COOH + H2O
(एथेनॉल + नवजात ऑक्सीजन → एथेनॉइक अम्ल + जल)

📌 खास बात: निर्जलीकरण का तापमान 443 K रट लीजिए — परीक्षा में संख्या पूछे जाने की सबसे प्रबल संभावना यहीं है।

एथेनॉइक अम्ल (Ethanoic Acid) – सिरके वाला अम्ल

एथेनॉइक अम्ल (CH3COOH) कार्बोक्सिलिक अम्ल परिवार का सबसे परिचित सदस्य है — घर का सिरका (vinegar) इसका 5–8% जलीय विलयन ही होता है। शुद्ध एथेनॉइक अम्ल ठंड में जमकर बर्फ-जैसा दिखता है, इसलिए इसे ‘ग्लेशियल ऐसीटिक अम्ल’ (glacial acetic acid) कहते हैं; इसका गलनांक 290 K है। यह एक दुर्बल अम्ल है — इसका pH 1 (जैसे HCl) जितना कम नहीं होता।

अभिक्रिया 1 – एस्टरीकरण (Esterification): एथेनॉइक अम्ल, सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में ऐल्कोहॉल से क्रिया करके मीठी गंध वाला एस्टर बनाता है। यह अभिक्रिया उत्क्रमणीय होती है (⇌ का चिह्न यही बताता है)।

CH3COOH + C2H5OH ⇌ CH3COOC2H5 + H2O
(एथेनॉइक अम्ल + एथेनॉल ⇌ एथिल एथेनोएट (एस्टर) + जल)

अभिक्रिया 2 – साबुनीकरण (Saponification): एस्टर को सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गरम करने पर वह टूटकर ऐल्कोहॉल और कार्बोक्सिलिक अम्ल का सोडियम लवण देता है — यही लवण साबुन होता है। इसलिए साबुन बनाने की प्रक्रिया का नाम ही साबुनीकरण है।

CH3COOC2H5 + NaOH → C2H5OH + CH3COONa
(एस्टर + सोडियम हाइड्रॉक्साइड → एथेनॉल + सोडियम एथेनोएट (साबुन))

अभिक्रिया 3 – क्षारक के साथ (लवण + जल): सामान्य अम्ल-क्षारक उदासीनीकरण — एथेनॉइक अम्ल, सोडियम हाइड्रॉक्साइड से क्रिया करके सोडियम एथेनोएट व जल देता है।

CH3COOH + NaOH → CH3COONa + H2O
(एथेनॉइक अम्ल + सोडियम हाइड्रॉक्साइड → सोडियम एथेनोएट + जल)

अभिक्रिया 4 – कार्बोनेट व हाइड्रोजनकार्बोनेट के साथ (CO2 की पहचान): एथेनॉइक अम्ल, सोडियम कार्बोनेट अथवा सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट से क्रिया करके लवण, जल और कार्बन डाइऑक्साइड गैस देता है — निकलती हुई CO2 चूने के पानी को दूधिया कर देती है, जो इसकी पहचान है।

2CH3COOH + Na2CO3 → 2CH3COONa + H2O + CO2↑
CH3COOH + NaHCO3 → CH3COONa + H2O + CO2↑

साबुन व अपमार्जक (Soaps and Detergents) – मिसेल की कार्यविधि

साबुन, लंबी शृंखला वाले कार्बोक्सिलिक अम्लों के सोडियम या पोटैशियम लवण होते हैं। उदाहरण के लिए सोडियम स्टिऐरेट — C17H35COONa — में लंबी हाइड्रोकार्बन शृंखला (C17H35–) और आयनिक सिरा (–COONa) दोनों हैं। साबुन के अणु की यही दोहरी प्रकृति उसकी सफ़ाई का रहस्य है:

  • जलविरागी पूँछ (hydrophobic tail): लंबी हाइड्रोकार्बन शृंखला, जो जल से दूर भागती है और तेल-मैल से चिपकती है।
  • जलरागी सिरा (hydrophilic head): आयनिक भाग (–COONa), जो जल से आकर्षित होता है।

मिसेल कैसे बनता है – चरण-दर-चरण

चरण 1: साबुन का घोल बनते ही अणु इस प्रकार व्यवस्थित होते हैं कि उनकी पूँछें अंदर की ओर और सिरे बाहर (जल की ओर) आ जाते हैं — यही गोलाकार समूह मिसेल (micelle) है।

चरण 2: कपड़े पर लगा तेल-मैल मिसेल के अंदर फँस जाता है, क्योंकि पूँछें तेल से चिपकती हैं।

चरण 3: मिसेल के बाहर आयनिक सिरों पर ऋण आवेश होता है, इसलिए मिसेल एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं और अवक्षेपित नहीं होते — मैल जल में तैरता हुआ अलग हो जाता है।

चरण 4: खँगालने (rinsing) पर मैल मिसेल सहित बह जाता है और कपड़ा साफ़ हो जाता है।

कठोर जल में साबुन क्यों फेल होता है?

कठोर जल में कैल्शियम व मैग्नीशियम के लवण (जैसे CaCl2, MgSO4) घुले होते हैं। साबुन इनसे क्रिया करके अघुलनशील सफ़ेद अवक्षेप — स्कम (scum) बना देता है, जिससे झाग ही नहीं बनता और सफ़ाई रुक जाती है:

2C17H35COONa + CaCl2 → (C17H35COO)2Ca↓ + 2NaCl
(सोडियम स्टिऐरेट + कैल्शियम क्लोराइड → कैल्शियम स्टिऐरेट (स्कम) + सोडियम क्लोराइड)

बिंदु साबुन (Soap) अपमार्जक (Detergent)
प्रकृति कार्बोक्सिलिक अम्लों के Na/K लवण (जैव-निम्नीकरणीय, biodegradable) लंबी शृंखला वाले सल्फ़ोनिक अम्लों के Na लवण (अधिकतर जैव-अनिम्नीकरणीय)
कठोर जल में स्कम बनाता है, झाग नहीं देता कठोर जल में भी अच्छा झाग देता है
पर्यावरण सूक्ष्मजीवों द्वारा आसानी से विघटित कुछ अपमार्जक नदियों में झाग व प्रदूषण बढ़ाते हैं
उपयोग नहाने, हाथ धोने कपड़े धोने (विशेषकर कठोर जल क्षेत्रों में)

📌 खास बात: अपमार्जक, साबुन की ही तरह मिसेल बनाकर सफ़ाई करते हैं — अंतर केवल इतना है कि कठोर जल के Ca/Mg आयनों से उनके लवण घुलनशील रहते हैं, इसलिए झाग नहीं रुकता।

साबुन की पूँछ मैल पकड़ती है, सिरा जल पकड़ता है — और इसी रस्साकशी में कपड़ा साफ़ हो जाता है।

📘 पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (InText Questions)

पाठ्य-पुस्तक में कुल 13 InText प्रश्न हैं — 4.1 में 2, 4.2 में 5, 4.3 में 2, 4.4 में 2 और 4.5 में 2। नीचे सभी के हल क्रमशः दिए गए हैं। इनमें से अधिकांश प्रश्न परीक्षा में घुमा-फिराकर पूछे जाते हैं, इसलिए केवल उत्तर ही नहीं, कारण भी समझिए।

(क) अनुच्छेद 4.1 पर आधारित प्रश्न (पृष्ठ 61)

प्रश्न 1. कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना क्या होगी?

हल:

चरण 1: कार्बन (परमाणु संख्या 6) के बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन हैं और प्रत्येक ऑक्सीजन (परमाणु संख्या 8) के बाहरी कोश में 6 इलेक्ट्रॉन हैं — ऑक्सीजन को अष्टक के लिए 2 इलेक्ट्रॉन चाहिए।

चरण 2: कार्बन अपने दो-दो इलेक्ट्रॉन दोनों ऑक्सीजन परमाणुओं के साथ साझा करता है, अर्थात दोनों ओर द्वि-बंध बनते हैं। इससे कार्बन का अष्टक भी पूरा होता है और दोनों ऑक्सीजन का भी।

उत्तर: संरचना शब्दों में — बीच में C परमाणु, दोनों ओर एक-एक O परमाणु, और C व प्रत्येक O के बीच दो साझा इलेक्ट्रॉन-युग्म (द्वि-बंध): O=C=O। प्रत्येक ऑक्सीजन पर दो-दो असाझा (एकाकी) इलेक्ट्रॉन-युग्म भी रहते हैं।

प्रश्न 2. सल्फ़र के आठ परमाणुओं से बने सल्फ़र अणु (S8) की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना क्या होगी? (संकेत — आठों परमाणु एक वलय के रूप में जुड़े होते हैं।)

हल:

चरण 1: सल्फ़र (परमाणु संख्या 16, विन्यास 2, 8, 6) के बाहरी कोश में 6 इलेक्ट्रॉन हैं — प्रत्येक सल्फ़र को अष्टक पूरा करने के लिए 2 इलेक्ट्रॉन चाहिए।

चरण 2: प्रत्येक सल्फ़र परमाणु अपने दोनों ओर के सल्फ़र परमाणुओं से एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा करता है — अर्थात प्रत्येक S अपने पड़ोसियों से दो एकल बंध बनाता है। आठों परमाणु आपस में जुड़कर मुकुट (crown) जैसी वलय संरचना बनाते हैं।

उत्तर: S8 की संरचना में आठ सल्फ़र परमाणु एक बंद वलय में क्रमिक रूप से एकल बंधों से जुड़े होते हैं; हर सल्फ़र पर दो-दो एकाकी इलेक्ट्रॉन-युग्म शेष रहते हैं।

(ख) अनुच्छेद 4.2 पर आधारित प्रश्न (पृष्ठ 68)

प्रश्न 1. पेन्टेन (C5H12) के कितने संरचनात्मक समावयवी आप बना सकते हैं?

हल: पाँच कार्बन परमाणुओं को तीन अलग-अलग ढंग से सजाया जा सकता है, इसलिए पेन्टेन के तीन संरचनात्मक समावयवी होते हैं:

(i) n-पेन्टेन (सीधी शृंखला): CH3–CH2–CH2–CH2–CH3
(ii) आइसोपेन्टेन / 2-मेथिलब्यूटेन (एक शाखा): CH3–CH(CH3)–CH2–CH3
(iii) नियोपेन्टेन / 2,2-डाइमेथिलप्रोपेन (दो शाखाएँ): केंद्रीय C से चारों ओर CH3 समूह — C(CH3)4

उत्तर: तीन समावयवी — n-पेन्टेन, आइसोपेन्टेन व नियोपेन्टेन। तीनों का सूत्र एक ही C5H12 है, पर संरचना व क्वथनांक अलग-अलग हैं।

प्रश्न 2. कार्बन के वे दो गुण कौन-से हैं, जिनके कारण हमारे चारों ओर कार्बन यौगिकों की विशाल संख्या दिखाई देती है?

हल: (i) शृंखलन (Catenation): कार्बन परमाणुओं का आपस में जुड़कर लंबी शृंखला, शाखा या वलय बनाने का गुण। C–C बंध अत्यंत मज़बूत व स्थायी होने से ये शृंखलाएँ बहुत लंबी हो सकती हैं। (ii) चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन की संयोजकता 4 होने से वह कार्बन के अलावा ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, सल्फ़र, क्लोरीन आदि अनेक तत्वों से बंध बनाता है। इन्हीं दो गुणों के संगम से लाखों यौगिक संभव होते हैं।

प्रश्न 3. साइक्लोपेन्टेन (Cyclopentane) का सूत्र व इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना क्या होगी?

हल:

चरण 1: साइक्लोपेन्टेन पाँच कार्बन परमाणुओं का संतृप्त वलय है। हर कार्बन दो पड़ोसी कार्बन से और दो हाइड्रोजन से जुड़ा है — कुल H = 5 × 2 = 10।

उत्तर: सूत्र — C5H10। इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना शब्दों में: पाँच C परमाणु एक पंचकोणीय वलय में एकल बंधों से जुड़े हैं और प्रत्येक C पर दो H परमाणु बाहर की ओर जुड़े हैं; सभी बंध एकल (साझा इलेक्ट्रॉन-युग्म एक-एक) हैं।

प्रश्न 4. निम्नलिखित यौगिकों की संरचनाएँ बनाइए: (i) एथेनॉइक अम्ल (ii) ब्रोमोपेन्टेन* (iii) ब्यूटेनोन (iv) हेक्सेनल। *क्या ब्रोमोपेन्टेन के संरचनात्मक समावयवी संभव हैं?

हल: (शब्द-वर्णन से कापी पर संरचना बनाएँ)

(i) एथेनॉइक अम्ल (CH3COOH): एक कार्बन CH3 समूह के रूप में, दूसरा कार्बन एक ऑक्सीजन से द्वि-बंध (C=O) और दूसरी ऑक्सीजन से एकल बंध (C–OH) द्वारा जुड़ा है — अर्थात CH3–C(=O)–OH।

(ii) ब्रोमोपेन्टेन (C5H11Br): पाँच कार्बन की सीधी शृंखला के किसी एक कार्बन पर Br जुड़ा है — जैसे CH3–CH2–CH2–CH2–CH2Br।

(iii) ब्यूटेनोन (C4H8O): चार कार्बन की शृंखला में दूसरे कार्बन पर कीटोन समूह (C=O) है — CH3–C(=O)–CH2–CH3।

(iv) हेक्सेनल (C6H12O): छह कार्बन की शृंखला के पहले कार्बन पर ऐल्डिहाइड समूह (–CHO) है — CH3–CH2–CH2–CH2–CH2–CHO।

*उत्तर: हाँ, ब्रोमोपेन्टेन के संरचनात्मक समावयवी संभव हैं। Br की स्थिति बदलने से कम-से-कम तीन रूप मिलते हैं — Br पहले कार्बन पर (1-ब्रोमोपेन्टेन), दूसरे पर (2-ब्रोमोपेन्टेन) व तीसरे पर (3-ब्रोमोपेन्टेन); चौथी व पाँचवीं स्थिति क्रमशः दूसरी व पहली के समान ही होती है।

प्रश्न 5. निम्नलिखित यौगिकों के नाम आप कैसे रखेंगे? (i) CH3–CH2–Br (ii) H–C(=O)–H (iii) CH3–CH2–CH2–CH2–C≡CH

हल:

(i) दो कार्बन + Br उपसर्ग → ब्रोमोएथेन। (ii) एक कार्बन + ऐल्डिहाइड समूह (–CHO, यहाँ HCHO) → मेथेनल। (iii) छह कार्बन + त्रि-बंध पहले कार्बन से → हेक्स-1-आइन (1-Hexyne)।

उत्तर: (i) ब्रोमोएथेन (ii) मेथेनल (iii) हेक्स-1-आइन

(ग) अनुच्छेद 4.3 पर आधारित प्रश्न (पृष्ठ 71)

प्रश्न 1. एथेनॉल का एथेनॉइक अम्ल में परिवर्तन उपचयन अभिक्रिया क्यों है?

हल: एथेनॉल (CH3CH2OH) में ऑक्सीजन परमाणु एक है, जबकि उत्पाद एथेनॉइक अम्ल (CH3COOH) में ऑक्सीजन परमाणु दो हैं — अर्थात अभिक्रिया में एथेनॉल ने एक ऑक्सीजन परमाणु ग्रहण किया है (साथ में हाइड्रोजन भी घटे हैं)। अध्याय 1 में हमने सीखा था — ऑक्सीजन का योग ही उपचयन कहलाता है। यह कार्य क्षारीय KMnO4 या अम्लीकृत K2Cr2O7 जैसे उपचायक करते हैं, इसलिए यह एक उपचयन अभिक्रिया है।

प्रश्न 2. वेल्डिंग के लिए ऑक्सीजन व एथाइन का मिश्रण जलाया जाता है। क्या आप बता सकते हैं कि एथाइन व वायु का मिश्रण क्यों नहीं उपयोग किया जाता?

हल: एथाइन एक असंतृप्त हाइड्रोकार्बन है जिसमें कार्बन की प्रतिशत मात्रा बहुत अधिक है। वायु में ऑक्सीजन केवल लगभग 21% होती है — इतनी ऑक्सीजन से एथाइन का पूर्ण दहन नहीं हो पाता; कजली (sooty) पीली लौ बनती है और ताप भी पर्याप्त नहीं मिलता। शुद्ध ऑक्सीजन के साथ जलाने पर दहन पूर्ण होता है, स्वच्छ लौ मिलती है और ताप लगभग 3000°C तक पहुँच जाता है — धातुओं को पिघलाकर जोड़ने (वेल्डिंग) के लिए इतना ही ताप चाहिए। इसलिए एथाइन + वायु के बजाय एथाइन + ऑक्सीजन का मिश्रण उपयोग होता है।

2C2H2(g) + 5O2(g) → 4CO2(g) + 2H2O(g) + ऊष्मा

(घ) अनुच्छेद 4.4 पर आधारित प्रश्न (पृष्ठ 74)

प्रश्न 1. ऐल्कोहॉल व कार्बोक्सिलिक अम्ल में प्रयोग द्वारा अंतर कैसे करेंगे?

हल: सबसे सरल परीक्षा सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (NaHCO3) परीक्षा है। दोनों के अलग-अलग नमूनों में NaHCO3 का चूर्ण मिलाइए। कार्बोक्सिलिक अम्ल के साथ तेज़ बुदबुदाहट के साथ CO2 गैस निकलेगी, जो चूने के पानी को दूधिया कर देगी, जबकि ऐल्कोहॉल के साथ कोई क्रिया नहीं होगी। (दूसरा विकल्प — लिटमस परीक्षा से भी अंतर होता है: अम्ल नीले लिटमस को लाल करता है, ऐल्कोहॉल उदासीन होने से कोई परिवर्तन नहीं करता।)

CH3COOH + NaHCO3 → CH3COONa + H2O + CO2↑  |  C2H5OH + NaHCO3 → कोई अभिक्रिया नहीं

प्रश्न 2. उपचायक (Oxidising Agents) क्या होते हैं?

हल: वे पदार्थ जो अन्य पदार्थों को ऑक्सीजन प्रदान करके उनका उपचयन करा सकते हैं, उपचायक कहलाते हैं। जैसे क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO4) और अम्लीकृत पोटैशियम डाइक्रोमेट (K2Cr2O7) — ये दोनों एथेनॉल को एथेनॉइक अम्ल में उपचयित कर देते हैं, इसलिए इस अध्याय के प्रमुख उपचायक हैं।

(ङ) अनुच्छेद 4.5 पर आधारित प्रश्न (पृष्ठ 76)

प्रश्न 1. क्या आप अपमार्जक का उपयोग करके बता सकते हैं कि जल कठोर है या नहीं?

हल: नहीं। अपमार्जक (detergent) कठोर जल में उपस्थित Ca2+ व Mg2+ आयनों के साथ भी घुलनशील लवण बनाते हैं, इसलिए अपमार्जक मृदु जल में भी और कठोर जल में भी समान रूप से भरपूर झाग देता है। जब दोनों दशाओं में झाग एक जैसा आए, तो अंतर ही पता नहीं चल सकता। इसके विपरीत, साबुन कठोर जल में झाग नहीं देता व स्कम बनाता है — इसलिए कठोरता की जाँच साबुन से ही हो सकती है, अपमार्जक से नहीं।

प्रश्न 2. लोग कपड़े धोने के विभिन्न तरीके अपनाते हैं। सामान्यतः साबुन लगाने के बाद वे कपड़ों को पत्थर पर पटकते हैं, डंडे से पीटते हैं, ब्रश से रगड़ते हैं या वाशिंग मशीन में हिलाते हैं। कपड़े साफ़ करने के लिए उन्हें हिलाना (रगड़ना) क्यों आवश्यक है?

हल: साबुन अपने आप मैल को कपड़े से “उखाड़” नहीं सकता — वह केवल मैल के चारों ओर मिसेल बनाकर उसे ढक लेता है। ये मिसेल कपड़े की सतह से हल्के से चिपके रहते हैं। कपड़े को पटकने, रगड़ने या हिलाने से मिसेल (मैल समेत) कपड़े से अलग होकर जल में चले जाते हैं और धोने पर बह जाते हैं। अर्थात हलचल (agitation) मिसेल को कपड़े से छुड़ाने के लिए आवश्यक है — बिना रगड़े केवल भिगोने से कपड़ा पूरी तरह साफ़ नहीं होता।

इस भाग में हमने सीखा — InText के 13 प्रश्नों में संरचना-निर्माण और साबुन-एथेनॉल से जुड़े प्रश्न ही सबसे अधिक पूछे जाते हैं; संरचनाएँ शब्दों में समझकर कापी पर 2–3 बार बनाकर अभ्यास कर लीजिए।

📗 NCERT उदाहरण (Examples)

सबसे पहले एक सच्ची जानकारी — इस अध्याय में NCERT किताब में क्रमांकित (numbered) Examples नहीं दिए गए हैं; किताब ने क्रियाकलापों और सारणियों से ही समझाया है। इसलिए परीक्षा की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण तीन प्रकार के “worked उदाहरण” — सूत्र से नाम, नाम से संरचना और सामान्य सूत्र का प्रयोग — यहाँ चरण-दर-चरण हल करके दिए जा रहे हैं। यही कौशल InText व प्रश्नावली में बार-बार चाहिए।

उदाहरण 1 (सामान्य सूत्र का प्रयोग). किसी ऐल्केन में 8 कार्बन परमाणु हैं। उसका आण्विक सूत्र व अणुभार ज्ञात कीजिए।

हल:

चरण 1: ऐल्केन का सामान्य सूत्र CnH2n+2 है। n = 8 रखने पर H = 2(8) + 2 = 18।

चरण 2: अणुभार = 8 × 12 + 18 × 1 = 96 + 18 = 114 u।

उत्तर: सूत्र — C8H18 (ऑक्टेन), अणुभार — 114 u। (जाँच: n = 5 रखने पर पेन्टेन C5H12 आता है — सामान्य सूत्र सही है।)

उदाहरण 2 (नाम से संरचना). प्रोपेनोन (Propanone) की संरचना शब्दों में समझाइए व उसका सूत्र लिखिए।

हल: नाम में ‘prop’ अर्थात 3 कार्बन और ‘–one’ अर्थात कीटोन समूह (>C=O)। कीटोन समूह शृंखला के बीच वाले कार्बन पर ही आ सकता है, क्योंकि किनारे पर हो तो वह ऐल्डिहाइड बन जाएगा। इसलिए संरचना है — CH3–C(=O)–CH3: बीच वाला कार्बन एक ओर CH3 से, दूसरी ओर CH3 से और ऊपर की ओर ऑक्सीजन से द्वि-बंध द्वारा जुड़ा है। हाइड्रोजन गिनिए: 3 + 3 = 6।

उत्तर: प्रोपेनोन का सूत्र — C3H6O, संरचना — CH3COCH3। यह सबसे छोटा कीटोन है और नेल-पॉलिश रिमूवर (एसीटोन) के नाम से घरों में जाना जाता है।

उदाहरण 3 (सूत्र से श्रेणी पहचान). एक हाइड्रोकार्बन का सूत्र C4H6 है। यह किस श्रेणी का है — ऐल्केन, ऐल्कीन या ऐल्काइन?

हल: n = 4 के लिए तीनों सामान्य सूत्र परखिए — ऐल्केन: H = 2(4)+2 = 10; ऐल्कीन: H = 2(4) = 8; ऐल्काइन: H = 2(4)–2 = 6। दिया गया H = 6 ऐल्काइन से मिलता है।

उत्तर: C4H6 एक ऐल्काइन (ब्यूटाइन) है — इसमें एक त्रि-बंध है, इसलिए यह असंतृप्त है और योगात्मक अभिक्रिया देगा।

✏️ प्रश्नावली (Exercise) – सभी 15 प्रश्नों के हल

प्रश्न 1. एथेन, जिसका आण्विक सूत्र C2H6 है, में कितने सहसंयोजक बंध होते हैं? (a) 6 (b) 7 (c) 8 (d) 9

हल: एथेन की संरचना CH3–CH3 है। गिनिए — प्रत्येक कार्बन पर 3 C–H बंध (कुल 6) और बीच में 1 C–C बंध। कुल = 6 + 1 = 7 बंध।

उत्तर: (b) 7 सहसंयोजक बंध — युक्ति याद रखें: N कार्बन वाले ऐल्केन में कुल बंध = 3N + 1 होते हैं (N = 2 रखने पर 3×2 + 1 = 7); फिर भी परीक्षा में संरचना बनाकर गिनना ही सबसे सुरक्षित है।

प्रश्न 2. ब्यूटेनोन चार कार्बन वाला यौगिक है, जिसमें क्रियात्मक समूह है — (a) कार्बोक्सिलिक अम्ल (b) ऐल्डिहाइड (c) कीटोन (d) ऐल्कोहॉल

हल: नाम के अंत में ‘–ओन (–one)’ प्रत्यय ही बता रहा है कि समूह कीटोन (>C=O) है। ब्यूटेनोन = CH3–C(=O)–CH2–CH3।

उत्तर: (c) कीटोन

प्रश्न 3. खाना बनाते समय यदि बर्तन के तले बाहर से काले हो रहे हैं, तो इसका अर्थ है कि — (a) खाना पूरी तरह नहीं पका (b) ईंधन पूरी तरह नहीं जल रहा (c) ईंधन गीला है (d) ईंधन पूरी तरह जल रहा है

हल: तले का कालापन काजल (कार्बन के कण) के जमने से होता है, और काजल तभी बनता है जब ऑक्सीजन की कमी से ईंधन का अपूर्ण दहन होता है। पूर्ण दहन में कोई काजल नहीं बनता।

उत्तर: (b) ईंधन पूरी तरह नहीं जल रहा है — बर्नर के वायु-छिद्र खोलने/साफ़ करने से लौ फिर नीली हो जाती है।

प्रश्न 4. CH3Cl में बंध निर्माण का उपयोग करके सहसंयोजक बंध की प्रकृति समझाइए।

हल:

चरण 1: कार्बन को अष्टक पूरा करने के लिए 4 इलेक्ट्रॉन चाहिए, प्रत्येक हाइड्रोजन को द्विक के लिए 1 इलेक्ट्रॉन और क्लोरीन को अष्टक के लिए 1 इलेक्ट्रॉन चाहिए।

चरण 2: कार्बन न तो 4 इलेक्ट्रॉन छोड़ सकता है, न ग्रहण कर सकता है (दोनों में अत्यधिक ऊर्जा लगेगी) — इसलिए वह साझेदारी करता है।

चरण 3: कार्बन अपने एक-एक इलेक्ट्रॉन को तीन हाइड्रोजन व एक क्लोरीन के साथ साझा करता है। साझा इलेक्ट्रॉन-युग्म दोनों परमाणुओं के बाहरी कोश में गिना जाता है — सबका अष्टक/द्विक पूरा।

उत्तर: CH3Cl में कुल चार सहसंयोजक बंध हैं — तीन C–H और एक C–Cl। इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण के बजाय साझेदारी से बना बंध ही सहसंयोजक बंध है; ऐसे यौगिकों में आयन नहीं होते, इसलिए वे विद्युत के कुचालक होते हैं व उनके गलनांक कम होते हैं।

प्रश्न 5. निम्नलिखित की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचनाएँ बनाइए: (a) एथेनॉइक अम्ल (b) H2S (c) प्रोपेनोन (d) F2

हल: (शब्द-वर्णन — कापी पर बिंदु बनाकर अभ्यास करें)

(a) एथेनॉइक अम्ल: CH3 वाला कार्बन दूसरे कार्बन से एकल बंध से जुड़ा है; दूसरा कार्बन एक ऑक्सीजन से द्वि-बंध (दो साझा युग्म) और –OH वाली ऑक्सीजन से एकल बंध बनाता है; –OH की ऑक्सीजन आगे हाइड्रोजन से जुड़ी है। द्वि-बंध वाली ऑक्सीजन पर दो एकाकी युग्म रहते हैं।

(b) H2S: केंद्रीय सल्फ़र (बाहरी कोश में 6 इलेक्ट्रॉन) अपने दो इलेक्ट्रॉन दो हाइड्रोजन के साथ एक-एक करके साझा करता है — दो एकल बंध बनते हैं और सल्फ़र पर दो एकाकी इलेक्ट्रॉन-युग्म शेष रहते हैं। संरचना जल (H2O) जैसी ही है।

(c) प्रोपेनोन: बीच वाला कार्बन दोनों ओर के CH3 समूहों से एकल बंध व ऑक्सीजन से द्वि-बंध बनाता है; ऑक्सीजन पर दो एकाकी युग्म रहते हैं।

(d) F2: प्रत्येक फ़्लुओरीन (बाहरी कोश में 7 इलेक्ट्रॉन) एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा करता है — दोनों के बीच एक साझा युग्म (एकल बंध) बनता है और प्रत्येक F पर तीन-तीन एकाकी युग्म रहते हैं।

प्रश्न 6. समजातीय श्रेणी क्या है? उदाहरण देकर समझाइए।

हल: यौगिकों की वह श्रेणी जिसमें सभी सदस्यों में एक ही क्रियात्मक समूह हो, क्रमागत सदस्यों में –CH2– का अंतर (अणुभार में 14 u का अंतर) हो, सबका एक सामान्य सूत्र हो और रासायनिक गुण समान हों, समजातीय श्रेणी कहलाती है।

उदाहरण — ऐल्केन श्रेणी (सामान्य सूत्र CnH2n+2): CH4 (16 u) → C2H6 (30 u) → C3H8 (44 u) → C4H10 (58 u)। हर चरण में सूत्र में CH2 और भार में 14 u बढ़ रहे हैं, और सभी का व्यवहार (दहन, प्रतिस्थापन) एक जैसा है — यही श्रेणी की पहचान है।

प्रश्न 7. भौतिक व रासायनिक गुणों के आधार पर एथेनॉल व एथेनॉइक अम्ल में अंतर कैसे करेंगे?

हल:

भौतिक गुणों से अंतर:

  • गंध: एथेनॉल में हल्की, सुखद (स्पिरिट जैसी) गंध होती है; एथेनॉइक अम्ल में तीखी सिरके जैसी गंध होती है।
  • गलनांक: एथेनॉइक अम्ल का गलनांक 290 K (17°C) है — सर्दियों में यह जम जाता है (glacial acetic acid); एथेनॉल का गलनांक बहुत कम (156 K) है, वह सामान्य सर्दी में नहीं जमता।
  • क्वथनांक: एथेनॉल 351 K पर और एथेनॉइक अम्ल 391 K पर उबलता है।

रासायनिक गुणों से अंतर:

  • लिटमस: एथेनॉइक अम्ल नीले लिटमस को लाल करता है; एथेनॉल उदासीन है — कोई परिवर्तन नहीं।
  • NaHCO3/Na2CO3: अम्ल तेज़ बुदबुदाहट के साथ CO2 देता है; एथेनॉल कोई क्रिया नहीं करता।
  • NaOH: अम्ल उदासीनीकरण से सोडियम एथेनोएट बनाता है; एथेनॉल NaOH से क्रिया नहीं करता। (ध्यान दें — दोनों धात्विक सोडियम से H2 देते हैं, पर अम्ल की क्रिया अधिक तीव्र होती है।)

प्रश्न 8. जब साबुन को जल में घोला जाता है तो मिसेल का निर्माण क्यों होता है? क्या एथेनॉल जैसे अन्य विलायकों में भी मिसेल बनेगा?

हल:

चरण 1: साबुन अणु के दो विपरीत स्वभाव वाले भाग हैं — लंबी हाइड्रोकार्बन शृंखला जलविरागी है (जल में घुल नहीं सकती, पर तेल में घुलती है) और आयनिक सिरा जलरागी है (जल में घुलता है)।

चरण 2: जल में साबुन की सांद्रता पर्याप्त होने पर ये अणु सतह से अंदर की ओर एकत्रित होकर ऐसा गोला बनाते हैं कि शृंखलाएँ अंदर (जल से बची हुई) और आयनिक सिरे बाहर (जल की ओर) रहें — यही मिसेल है। यह व्यवस्था दोनों भागों को उनके “पसंदीदा” वातावरण देती है, इसलिए मिसेल बनना स्वाभाविक है।

उत्तर: एथेनॉल में मिसेल नहीं बनेगा, क्योंकि साबुन की हाइड्रोकार्बन पूँछ (शृंखला) एथेनॉल में घुलनशील होती है — पूँछ को विलायक से बचकर अंदर छिपने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती, इसलिए अणु गोले (मिसेल) के रूप में एकत्रित नहीं होते। मिसेल तभी बनता है जब पूँछ विलायक में अघुलनशील हो, जैसा जल में होता है।

प्रश्न 9. कार्बन व उसके यौगिक अधिकांश अनुप्रयोगों में ईंधन के रूप में क्यों उपयोग होते हैं?

हल:

चरण 1: कार्बन व उसके यौगिक (हाइड्रोकार्बन आदि) वायु में जलने पर प्रति इकाई भार में बहुत अधिक ऊष्मा देते हैं — ऊर्जा-घनत्व ऊँचा है।

चरण 2: दहन को नियंत्रित करना आसान है — बर्नर, इंजन आदि में इन्हें इच्छानुसार धीरे-तेज़ जलाया जा सकता है और उत्पाद मुख्यतः CO2 व जल वाष्प होते हैं, जिन्हें संभालना आसान है।

चरण 3: ये प्रकृति में प्रचुर मात्रा में मिलते हैं (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस) और ठोस, द्रव व गैस — तीनों अवस्थाओं में उपलब्ध हैं, इसलिए भंडारण व परिवहन भी सुगम है।

उत्तर: अधिक ऊष्मा-मान, नियंत्रण योग्य दहन, आसान प्रबंधन और प्रचुर उपलब्धता — इन्हीं कारणों से कार्बन व उसके यौगिक अधिकांश कामों में ईंधन हैं।

प्रश्न 10. कठोर जल को साबुन से उपचारित करने पर स्कम (scum) के निर्माण को समझाइए।

हल: कठोर जल में Ca2+ व Mg2+ आयन होते हैं। साबुन (वसा अम्ल का सोडियम लवण) इन आयनों से क्रिया करता है — सोडियम आयन हट जाते हैं और कैल्सियम/मैग्नीशियम के अघुलनशील लवण बन जाते हैं, जो सफ़ेद चिपचिपे अवक्षेप के रूप में तैरते/जमते हैं — यही स्कम है। इस क्रिया में साबुन की बड़ी मात्रा बर्बाद हो जाती है, तब जाकर झाग बनना शुरू होता है — इसलिए कठोर जल में कपड़े साफ़ करने में अधिक साबुन लगता है और सफ़ाई भी ठीक नहीं होती।

2C17H35COONa + Ca2+ → (C17H35COO)2Ca↓ (स्कम) + 2Na+

प्रश्न 11. यदि आप लिटमस पेपर (लाल व नीला) से साबुन की जाँच करें तो क्या परिवर्तन देखेंगे?

हल: साबुन का जलीय विलयन क्षारीय प्रकृति का होता है (यह एक प्रबल क्षारक व दुर्बल अम्ल का लवण है)। इसलिए लाल लिटमस नीला हो जाएगा, जबकि नीला लिटमस नीला ही रहेगा — उसमें कोई परिवर्तन नहीं होगा।

उत्तर: लाल → नीला; नीला → नीला (अपरिवर्तित)। यही कारण है कि हाथ धोने के बाद साबुन वाला जल कभी-कभी आँखों में चुभता है — क्षारीयता!

प्रश्न 12. हाइड्रोजनीकरण क्या है? इसका औद्योगिक अनुप्रयोग क्या है?

हल: असंतृप्त हाइड्रोकार्बन को Ni या Pd उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन के साथ गरम करके संतृप्त हाइड्रोकार्बन में बदलने की योगात्मक अभिक्रिया हाइड्रोजनीकरण कहलाती है। द्वि/त्रि-बंध खुलकर H परमाणु जुड़ जाते हैं।

वनस्पति तेल (असंतृप्त, द्रव) + H2 →(Ni, 473 K लगभग) वनस्पति घी (संतृप्त, ठोस)

औद्योगिक अनुप्रयोग: यही क्रिया वनस्पति तेलों से वनस्पति घी (डालडा आदि) बनाने में उपयोग होती है। मार्जरीन बनाने में भी यही सिद्धांत काम करता है।

प्रश्न 13. निम्नलिखित हाइड्रोकार्बनों में से कौन योगात्मक (संकलन) अभिक्रिया देगा — C2H6, C3H8, C3H6, C2H2 व CH4?

हल: योगात्मक अभिक्रिया केवल असंतृप्त यौगिक (द्वि/त्रि-बंध वाले) देते हैं। जाँचिए — C2H6 व C3H8 व CH4 ऐल्केन हैं (CnH2n+2) — संतृप्त। C3H6 ऐल्कीन है (CnH2n) और C2H2 ऐल्काइन है (CnH2n–2) — दोनों असंतृप्त।

उत्तर: केवल C3H6 (प्रोपीन) व C2H2 (एथाइन) योगात्मक अभिक्रिया देंगे।

प्रश्न 14. मक्खन व खाना पकाने के तेल के बीच रासायनिक अंतर करने के लिए एक परीक्षण बताइए।

हल: परीक्षण है — हाइड्रोजनीकरण परीक्षण। मक्खन में संतृप्त वसा होती है, इसलिए Ni उत्प्रेरक के साथ H2 प्रवाहित करने पर उसमें कोई परिवर्तन/योग नहीं होता। खाना पकाने के तेल में असंतृप्त वसा होती है — हाइड्रोजनीकरण करने पर वह संतृप्त होकर जम (ठोस घी जैसा) जाएगा। अतः जो नमूना हाइड्रोजनीकरण से जम जाए वह तेल है, जो न बदले वह मक्खन। (व्यावहारिक रूप में ब्रोमीन जल परीक्षण से भी तेल ब्रोमीन के रंग को उड़ा देता है, जबकि संतृप्त वसा नहीं — दोनों में से कोई एक उत्तर में लिख सकते हैं; NCERT अपेक्षित उत्तर हाइड्रोजनीकरण ही है।)

प्रश्न 15. साबुन की सफ़ाई प्रक्रिया की क्रियाविधि समझाइए।

हल:

चरण 1: कपड़ों का मैल प्रायः तैलीय (organic) होता है और केवल जल से नहीं धुलता, क्योंकि जल उसे गीला नहीं कर पाता।

चरण 2: साबुन अणु की हाइड्रोकार्बन पूँछ तैलीय मैल में चिपक जाती है और आयनिक सिरा जल में रहता है। अणु मैल की बूँद के चारों ओर व्यवस्थित होकर मिसेल बनाते हैं — मैल गोले के केंद्र में फँस जाता है।

चरण 3: मिसेल के बाहर ऋणावेशित सिरे होने से बूँदें एक-दूसरे से दूर रहती हैं और जल में कोलॉइडी रूप में तैरती हैं।

चरण 4: कपड़े को रगड़ने/पटकने से मिसेल कपड़े से छूट जाते हैं और स्वच्छ जल से खंगालने पर मैल बह जाता है।

सार: साबुन स्वयं मैल नहीं खाता — वह मैल को मिसेल में “पैक” करके जल के हवाले कर देता है; जल उसे बहा ले जाता है।

इस प्रश्नावली में हमने सीखा — 15 प्रश्नों का सार है: संरचना गिनना-बनाना, श्रेणी की पहचान, एथेनॉल-अम्ल अंतर और मिसेल क्रियाविधि। ये चार कौशल पक्के हों तो प्रश्नावली पूरी आपकी है।

📖 Case Study – कुएँ का कठोर जल और राधा की परेशानी

राधा के गाँव के कुएँ का पानी पीने में खारा-सा लगता है। उसी पानी से कपड़े धोने पर साबुन बहुत लगता है, फिर भी झाग नाममात्र का बनता है और कपड़ों पर सफ़ेद-सी परत जम जाती है। कपड़े पहले जैसे साफ़ भी नहीं होते। राधा की भाभी, जो शहर से आई थीं, बोलीं — “यहाँ के पानी में कैल्सियम व मैग्नीशियम के लवण अधिक हैं। तुम्हें नहाने के लिए साबुन ही ठीक रहेगा, पर कपड़ों के लिए अपमार्जक (डिटर्जेंट) उपयोग करो, झाग भी बनेगा और कपड़े भी साफ़ होंगे।” राधा ने वैसा ही किया और सचमुच फ़र्क दिखा। इस गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

Q1. कुएँ के पानी से साबुन में झाग न बनने का कारण क्या है? —

(A) पानी बहुत ठंडा है
(B) पानी कठोर है — उसमें Ca2+ व Mg2+ आयन हैं
(C) साबुन पुराना है
(D) पानी में ऑक्सीजन अधिक है

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) पानी कठोर है — Ca2+ व Mg2+ आयन साबुन से क्रिया करके अघुलनशील स्कम बना लेते हैं, जिससे झाग नहीं बनता।

Q2. कपड़ों पर जमने वाली सफ़ेद परत क्या है? —

(A) मैल
(B) स्कम — वसा अम्लों के कैल्सियम/मैग्नीशियम लवण
(C) नमक
(D) चूना पत्थर

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) स्कम — साबुन का सोडियम, कैल्सियम/मैग्नीशियम से बदलकर अघुलनशील लवण बनाता है, वही सफ़ेद परत है।

Q3. अपमार्जक कठोर जल में भी सफ़ाई क्यों कर पाता है? —

(A) वह पानी को मृदु बना देता है
(B) वह Ca/Mg आयनों के साथ भी घुलनशील लवण बनाता है
(C) वह बिना झाग के साफ़ करता है
(D) उसका कोई सिरा जल में नहीं घुलता

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) अपमार्जक कठोर जल के आयनों के साथ घुलनशील लवण बनाता है — स्कम नहीं बनता, झाग बना रहता है और मिसेल-क्रिया चलती रहती है।

Q4. क्या राधा केवल अपमार्जक के झाग को देखकर बता सकती है कि कुएँ का पानी कठोर है? —

(A) हाँ, झाग देखकर तुरंत पता चलता है
(B) हाँ, क्योंकि अपमार्जक कठोर जल में अधिक झाग देता है
(C) नहीं, क्योंकि अपमार्जक कठोर व मृदु दोनों जल में समान झाग देता है
(D) नहीं, क्योंकि अपमार्जक पानी में घुलता नहीं है

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) नहीं — अपमार्जक दोनों प्रकार के जल में एक जैसा झाग देता है, इसलिए कठोरता की जाँच केवल साबुन से हो सकती है।

⭐ Quick Revision – Important Points

  • ✅ कार्बन (परमाणु संख्या 6, विन्यास 2,4) इलेक्ट्रॉन साझा करके सहसंयोजक बंध बनाता है — न C4+ संभव है, न C4–।
  • ✅ यौगिकों की विशाल संख्या के दो कारण — शृंखलन व चतुःसंयोजकता।
  • ✅ अपररूप: हीरा (कठोरतम, कुचालक), ग्रेफ़ाइट (मुलायम, सुचालक), फुलेरीन C-60 (फुटबॉल आकृति)।
  • ✅ सामान्य सूत्र — ऐल्केन CnH2n+2, ऐल्कीन CnH2n, ऐल्काइन CnH2n–2।
  • ✅ समजातीय श्रेणी: एक ही क्रियात्मक समूह, क्रमागत अंतर –CH2– / 14 u, रासायनिक गुण समान, भौतिक गुणों में क्रमिक परिवर्तन।
  • ✅ प्रत्यय रट लीजिए — –ऑल (ऐल्कोहॉल), –अल (ऐल्डिहाइड), –ओन (कीटोन), –ओइक अम्ल (अम्ल), –ईन, –आइन; हैलोजन के लिए उपसर्ग क्लोरो/ब्रोमो।
  • ✅ ब्यूटेन के 2 व पेन्टेन के 3 समावयवी होते हैं।
  • ✅ अभिक्रियाएँ: दहन (CO2 + H2O + ऊष्मा), उपचयन (KMnO4/K2Cr2O7), योग/हाइड्रोजनीकरण (Ni/Pd; तेल → घी), प्रतिस्थापन (CH4 + Cl2, सूर्य-प्रकाश)।
  • ✅ एथेनॉल: Na से H2; 443 K + सांद्र H2SO4 से एथीन; उपचयन से एथेनॉइक अम्ल।
  • ✅ एथेनॉइक अम्ल: सिरका = 5–8% विलयन; गलनांक 290 K (glacial); कार्बोनेट से CO2; एस्टरीकरण से मीठी गंध वाला एस्टर।
  • ✅ साबुन: लंबी वसा-अम्ल शृंखला का Na/K लवण; पूँछ जलविरागी, सिरा जलरागी; मिसेल से सफ़ाई; कठोर जल में स्कम। अपमार्जक कठोर जल में भी सफल, पर कठोरता की जाँच उससे नहीं होती।

⚠️ Aam Galtiyan (Common Mistakes)

  • ऐल्कीन-ऐल्काइन सूत्र उलट देना: ऐल्कीन CnH2n और ऐल्काइन CnH2n–2 है। याद रखें — बंध बढ़ेगा तो हाइड्रोजन घटेगा: एकल → द्वि → त्रि, हाइड्रोजन 2n+2 → 2n → 2n–2।
  • साइक्लोपेन्टेन को ऐल्कीन समझ लेना: C5H10 सूत्र ऐल्कीन जैसा है, पर साइक्लोपेन्टेन में सारे बंध एकल हैं और वह संतृप्त वलय यौगिक है।
  • नामकरण में प्रत्यय भूलना/गलत लगाना: एथेनॉल (–ऑल) को एथेनल (–अल, ऐल्डिहाइड) से भ्रमित करना सबसे आम गलती है — एक अक्षर से यौगिक ही बदल जाता है।
  • निर्जलीकरण का ताप गलत लिखना: एथेनॉल से एथीन बनाने के लिए 443 K व सांद्र H2SO4 दोनों लिखना ज़रूरी है; ताप लिखना न भूलें।
  • एथेन के बंध 6 गिनना: C–C बंध गिनना छूट जाता है — सही उत्तर 7 है (6 C–H + 1 C–C)।
  • मिसेल में सिरा-पूँछ उलटा लिखना: पूँछ (हाइड्रोकार्बन) अंदर/तेल की ओर और आयनिक सिरा बाहर/जल की ओर होता है। उल्टा लिखने पर पूरा उत्तर गलत होगा।
  • अपमार्जक से कठोरता जाँच का दावा: अपमार्जक दोनों जल में झाग देता है — उससे कठोरता पता नहीं चलती। यही InText प्रश्न है, दोहराया जाता है।
  • एस्टरीकरण में उत्पाद की गंध भूलना: एस्टर की पहचान ही उसकी मीठी, फलों जैसी गंध है — उत्तर में अवश्य लिखें।

🎯 Bihar Board Exam Tips

  • संरचना-अभ्यास रोज़ करें: रोज़ 3 यौगिकों की इलेक्ट्रॉन बिंदु व सामान्य संरचना बिना देखे बनाएँ — एथेनॉइक अम्ल, प्रोपेनोन, CH3Cl, CO2 परीक्षकों के पसंदीदा हैं।
  • Table वाले उत्तर table में ही लिखें: साबुन-अपमार्जक अंतर, हीरा-ग्रेफ़ाइट अंतर, एथेनॉल-एथेनॉइक अम्ल अंतर — ये प्रश्न table में लिखने से पूरे अंक मिलते हैं और परीक्षक को जाँचना आसान होता है।
  • समीकरण सदैव संतुलित लिखें: दहन, प्रतिस्थापन, एस्टरीकरण — जो भी समीकरण लिखें, लिखने के बाद दोनों ओर C, H, O गिनकर जाँचने की आदत डालें।
  • MCQ की तैयारी: BSEB में बड़ी संख्या में वस्तुनिष्ठ प्रश्न आते हैं — सामान्य सूत्र, प्रत्यय, 443 K, 290 K, C-60, LPG के समावयवी जैसे तथ्य-flash card बनाकर याद करें।
  • मिसेल का वर्णन चरणों में लिखें: पूँछ → मैल, सिरा → जल, गोला = मिसेल, रगड़ने से अलग — चार चरण स्पष्ट लिखने पर दीर्घ उत्तरीय में पूरे अंक मिलते हैं।
  • पिछले वर्षों के BSEB प्रश्नों में नामकरण व समजातीय श्रेणी के प्रश्न लगभग हर वर्ष आए हैं — InText प्रश्न 4 व 5 (4.2 वाले) विशेष रूप से तैयार करें।

📝 MCQ Quiz – 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (स्वयं को जाँचें)

उत्तर देखने से पहले स्वयं प्रयास कीजिए। प्रत्येक प्रश्न के नीचे दिए गए “✅ उत्तर देखें” पर क्लिक करके सही विकल्प की जाँच करें।

Q1. कार्बन की संयोजकता कितनी होती है?

(A) 2
(B) 4
(C) 6
(D) 1

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) कार्बन की संयोजकता 4 है — वह चार सहसंयोजक बंध बनाता है।

Q2. ऐल्काइन का सामान्य सूत्र कौन-सा है?

(A) CnH2n–2
(B) CnH2n
(C) CnH2n+2
(D) CnHn

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (A) ऐल्काइन (त्रि-बंध वाले) का सामान्य सूत्र CnH2n–2 है।

Q3. ब्यूटेन (C4H10) के कितने संरचनात्मक समावयवी होते हैं?

(A) 1
(B) 3
(C) 2
(D) 4

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) ब्यूटेन के 2 समावयवी हैं — n-ब्यूटेन व आइसो-ब्यूटेन।

Q4. समजातीय श्रेणी के क्रमागत सदस्यों के अणुभार में कितना अंतर होता है?

(A) 12 u
(B) 14 u
(C) 16 u
(D) 28 u

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) क्रमागत सदस्यों में –CH2– समूह का अंतर होता है, यानी 14 u।

Q5. ऐल्कोहॉल का क्रियात्मक समूह कौन-सा है?

(A) –COOH
(B) –CHO
(C) >C=O
(D) –OH

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (D) ऐल्कोहॉल का क्रियात्मक समूह –OH (हाइड्रॉक्सिल) है।

Q6. वनस्पति तेलों को वनस्पति घी में बदलने की प्रक्रिया कहलाती है —

(A) उपचयन
(B) साबुनीकरण
(C) हाइड्रोजनीकरण
(D) एस्टरीकरण

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) Ni/Pd उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन जोड़कर असंतृप्त तेल को संतृप्त घी में बदला जाता है — यही हाइड्रोजनीकरण है।

Q7. सिरके में कौन-सा अम्ल होता है?

(A) एथेनॉइक अम्ल
(B) फॉर्मिक अम्ल
(C) लैक्टिक अम्ल
(D) सिट्रिक अम्ल

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (A) सिरका, एथेनॉइक अम्ल (CH3COOH) का 5–8% जलीय विलयन है।

Q8. एथेनॉल को 443 K पर सांद्र H2SO4 के साथ गरम करने पर क्या प्राप्त होता है?

(A) एथेन
(B) एथीन
(C) एथेनॉइक अम्ल
(D) एथेनल

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) निर्जलीकरण से एथीन (C2H4) प्राप्त होता है।

Q9. साबुन अणु का कौन-सा भाग तेल-मैल से चिपकता है?

(A) आयनिक सिरा
(B) –COONa समूह
(C) कार्बन परमाणु
(D) लंबी हाइड्रोकार्बन पूँछ

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (D) लंबी हाइड्रोकार्बन पूँछ जलविरागी है — वह तेल-मैल में घुलकर उसे मिसेल में खींच लेती है।

Q10. कठोर जल में साबुन से बनने वाली सफ़ेद परत क्या कहलाती है?

(A) झाग
(B) मिसेल
(C) स्कम
(D) अवक्षेप

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) Ca/Mg आयनों के साथ साबुन के अघुलनशील लवण बनते हैं — यही स्कम है।

Q11. मीथेन की क्लोरीन से सूर्य-प्रकाश में क्रिया किस प्रकार की अभिक्रिया है?

(A) योगात्मक
(B) प्रतिस्थापन
(C) दहन
(D) उपचयन

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) मीथेन के हाइड्रोजन एक-एक करके क्लोरीन से प्रतिस्थापित होते हैं — प्रतिस्थापन अभिक्रिया।

Q12. एथेन (C2H6) में कुल कितने सहसंयोजक बंध हैं?

(A) 7 बंध
(B) 6 बंध
(C) 8 बंध
(D) 5 बंध

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (A) 6 C–H बंध + 1 C–C बंध = कुल 7 बंध।

Q13. प्रोपेनोन (CH3COCH3) में कौन-सा क्रियात्मक समूह है?

(A) –OH
(B) –COOH
(C) –CHO
(D) कीटोन (>C=O)

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (D) प्रोपेनोन में कीटोन समूह (>C=O) है — प्रत्यय –ओन ही बता देता है।

Q14. एस्टरीकरण से बने एस्टर की गंध कैसी होती है?

(A) तीखी
(B) दुर्गंधयुक्त
(C) मीठी, फलों जैसी
(D) कोई गंध नहीं

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (C) एस्टर की पहचान ही उसकी मीठी, फलों जैसी गंध है।

Q15. बकमिन्स्टर फुलेरीन (C-60) में कितने कार्बन परमाणु होते हैं?

(A) 12
(B) 60
(C) 20
(D) 32

✅ उत्तर देखें

उत्तर: (B) फुलेरीन C-60 में 60 कार्बन परमाणु फुटबॉल-आकृति में जुड़े होते हैं।

Answer Key – उत्तरमाला

प्रश्न 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15
उत्तर B A C B D C A B D C B A D C B

❓ FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. इस अध्याय की तैयारी किस क्रम में करें?

उत्तर: पहले सहसंयोजक बंध की अवधारणा, फिर अपररूप व समजातीय श्रेणी, उसके बाद नामकरण की प्रैक्टिस, फिर एथेनॉल-एथेनॉइक अम्ल की अभिक्रियाएँ और अंत में साबुन-मिसेल। InText प्रश्न इसी क्रम में पढ़ें, फिर प्रश्नावली — यही सबसे प्रभावी क्रम है।

Q2. नामकरण में सबसे ज़्यादा अंक कैसे पक्के करें?

उत्तर: तीन टुकड़े याद रखिए — कार्बन संख्या (meth/eth/prop/but), बंध का प्रकार (–ane/–ene/–yne) और क्रियात्मक समूह का प्रत्यय (–ol/–al/–one/–oic acid)। रोज़ 5 यौगिकों के नाम-संरचना अभ्यास से नामकरण का कोई प्रश्न नहीं छूटेगा।

Q3. इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना बनाते समय आम गलतियाँ क्या हैं?

उत्तर: सबसे आम गलतियाँ हैं — एकल इलेक्ट्रॉनों (lone pairs) को न दिखाना, साझा युग्म की गिनती गलत करना और CO2 में द्वि-बंध न दिखाना। हर परमाणु का अष्टक पूरा होने की जाँच करके ही उत्तर समाप्त करें।

Q4. साबुन और अपमार्जक में कठोर जल के लिए क्या अंतर है?

उत्तर: साबुन कठोर जल में Ca/Mg आयनों के साथ अघुलनशील स्कम बनाता है और झाग नहीं देता; अपमार्जक उन्हीं आयनों के साथ भी घुलनशील लवण बनाता है, इसलिए कठोर जल में भी अच्छा झाग देता है और सफ़ाई करता है।

Q5. NCERT किताब का PDF कहाँ से मिलेगा?

उत्तर: NCERT की आधिकारिक वेबसाइट ncert.nic.in से Class 10 Science की किताब का PDF निःशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है। इसी पेज पर दिए गए सभी हल उसी NCERT पुस्तक के प्रश्नों पर आधारित हैं।

🔗 Pichhla / Agla Adhyay – पिछले व अगले अध्याय पढ़ें

पिछला अध्याय पढ़ें: NCERT Class 10 Science Chapter 3 Metals and Non-metals in Hindi | धातु एवं अधातु Notes, MCQ व प्रश्न-उत्तर

अगला अध्याय पढ़ें: NCERT Class 10 Science Chapter 5 Periodic Classification of Elements in Hindi | तत्वों का आवर्त वर्गीकरण Notes, MCQ व प्रश्न-उत्तर

सभी अध्याय एक जगह पढ़ें: NCERT Class 10 Science Bihar Board 2027 – सभी अध्याय, Notes व MCQ

🔚 Conclusion – निष्कर्ष

कार्बन एवं इसके यौगिक अध्याय का सार एक ही वाक्य में है — सहसंयोजक बंध + शृंखलन + चतुःसंयोजकता = कार्बनिक रसायन की पूरी दुनिया। इस पेज पर आपने 13 InText प्रश्न, 15 प्रश्नावली प्रश्न, Case Study, MCQ Quiz व FAQ — सब कुछ एक जगह पढ़ लिया है। अब बस इतना कीजिए — नामकरण के 5 प्रश्न रोज़, एक संरचना रोज़ और मिसेल-साबुन के चरण एक बार फिर दोहराकर परीक्षा में जाइए।

अगला अध्याय — तत्वों का आवर्त वर्गीकरण (Periodic Classification) — भी इसी तरह सरल हिंदी में पढ़ें, ताकि Class 10 Science की पूरी तैयारी एक ही जगह पूरी हो। शुभकामनाएँ, मेहनत जारी रखिए!