परिचय – यह अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है?
Class 10 Science Chapter 5 Periodic Classification of Elements के NCERT Solutions आपको इस पेज पर सरल हिंदी में, किताब के क्रम से मिलेंगे। Class 10 Science Chapter 5 Periodic Classification of Elements यानी तत्वों का आवर्त वर्गीकरण — यह अध्याय बताता है कि वैज्ञानिकों ने 118 तत्वों को किस समझदारी से एक ही सारणी में सजाया, ताकि किसी भी तत्व के गुण देखे बिना ही उसकी जगह से पहचाने जा सकें।
सोचिए, अगर बाज़ार की सारी चीज़ें बिना किसी क्रम के बिखरी पड़ी हों तो एक छोटी-सी चीज़ ढूँढने में कितना समय लगेगा! तत्वों के साथ भी पहले यही हाल था। जैसे-जैसे नए तत्व खोजे गए, वैज्ञानिकों को लगा कि इन्हें गुणों के आधार पर समूहों में बाँटना होगा। डोबेराइनर ने त्रिक बनाए, न्यूलैंड ने अष्टक का नियम दिया, मेंडेलीव ने अपनी प्रसिद्ध आवर्त सारणी बनाई और अंत में मोसले के काम से आधुनिक आवर्त सारणी मिली — वही सारणी जो आज आपकी कक्षा की दीवार पर टँगी होती है।
एक ज़रूरी बात पहले ही समझ लीजिए — यह अध्याय Bihar Board (BSEB) की किताब में पढ़ाया जाता है। नई rationalized NCERT किताब से यह अध्याय हटाया गया था, लेकिन Bihar Board में पुरानी NCERT के क्रम से ही पढ़ाई होती है, इसलिए आपके लिए यह अध्याय पूरी तरह परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसे छोड़ने की गलती बिल्कुल न करें।
BSEB Class 10 की परीक्षा में इस अध्याय से हर साल प्रश्न आते हैं — आवर्त सारणी के रुझानों (trends) पर 1 अंक के वस्तुनिष्ठ प्रश्न, डोबेराइनर व न्यूलैंड की सीमाओं पर लघु उत्तरीय प्रश्न और मेंडेलीव व आधुनिक सारणी की तुलना पर दीर्घ उत्तरीय प्रश्न। अच्छी बात यह है कि इस अध्याय में कोई कठिन गणना नहीं है; बस कहानी को क्रम से समझ लीजिए और रुझानों की सारणी याद कर लीजिए, अंक पक्के हो जाएँगे।
📌 खास बात: इस पूरे अध्याय की आत्मा एक ही वाक्य में है — तत्वों के गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवर्ती फलन होते हैं। समूह में नीचे जाने और आवर्त में दाईं ओर जाने पर आकार, संयोजकता, धात्विक गुण और विद्युत-ऋणात्मकता कैसे बदलते हैं — यही चार रुझान Board को सबसे ज़्यादा पसंद हैं।
📋 अध्याय की जानकारी (Chapter Information)
| Board | Bihar Board (BSEB) |
|---|---|
| Textbook | NCERT |
| Class | 10 |
| Subject | Science (विज्ञान) |
| Chapter | 5 |
| Chapter Name | Periodic Classification of Elements (तत्वों का आवर्त वर्गीकरण) |
| कुल हल किए गए प्रश्न | 23 (InText 13 + प्रश्नावली 10) |
📚 इस Chapter में क्या-क्या है? (Topics)
- 5.1 डोबेराइनर के त्रिक (Dobereiner’s Triads) – तीन-तीन तत्वों के समूह और बीच वाले तत्व का औसत परमाणु भार
- 5.2 न्यूलैंड का अष्टक नियम (Newlands’ Law of Octaves) – हर आठवाँ तत्व संगीत के स्वरों जैसा दोहराव
- 5.3 मेंडेलीव की आवर्त सारणी (Mendeleev’s Periodic Table, 1869) – परमाणु भार का क्रम, उपलब्धियाँ, भविष्यवाणियाँ व सीमाएँ
- 5.4 आधुनिक आवर्त सारणी (Modern Periodic Table) – मोसले और परमाणु संख्या (Z) का आधार, 18 समूह व 7 आवर्त
- 5.5 आवर्ती रुझान (Periodic Trends) – परमाणु आकार, संयोजकता, धात्विक गुण व विद्युत-ऋणात्मकता में बदलाव
- पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (InText) – 13 प्रश्न, प्रश्नावली के 10 प्रश्न
- Case Study, Quick Revision, Common Mistakes, Bihar Board Exam Tips, MCQ Quiz व FAQ
📊 Key Concepts – मुख्य परिभाषाएँ व नियम
| पद / नियम | अर्थ (एक लाइन में) |
|---|---|
| तत्वों का वर्गीकरण | समान गुणों वाले तत्वों को एक समूह में रखना, ताकि अध्ययन सरल और क्रमबद्ध हो जाए। |
| डोबेराइनर के त्रिक | समान गुणों वाले तीन तत्वों का समूह, जिसमें बीच वाले तत्व का परमाणु भार शेष दो के परमाणु भारों के औसत के लगभग बराबर होता है। |
| न्यूलैंड का अष्टक नियम | परमाणु भार के बढ़ते क्रम में रखने पर हर आठवें तत्व के गुण पहले तत्व जैसे होते हैं — संगीत के अष्टक (सा रे ग म प ध नि सा) की तरह। |
| मेंडेलीव का आवर्त नियम | तत्वों के गुण उनके परमाणु भारों के आवर्ती फलन होते हैं। |
| आधुनिक आवर्त नियम | तत्वों के गुण उनके परमाणु क्रमांक (परमाणु संख्या) के आवर्ती फलन होते हैं। |
| परमाणु संख्या (Z) | किसी तत्व के परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या। |
| समूह (Group) | आवर्त सारणी के ऊर्ध्वाधर (खड़े) स्तंभ — कुल 18 समूह हैं; एक समूह के तत्वों के बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। |
| आवर्त (Period) | आवर्त सारणी की क्षैतिज (आड़ी) पंक्तियाँ — कुल 7 आवर्त हैं; एक आवर्त के तत्वों में कोशों की संख्या समान होती है। |
| संयोजकता (Valency) | किसी तत्व के परमाणु की संयोग करने की क्षमता — बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनों (संयोजकता इलेक्ट्रॉनों) से तय होती है। |
| परमाणु आकार | परमाणु के केंद्र (नाभिक) से बाह्यतम कोश तक की दूरी — परमाणु त्रिज्या से मापा जाता है। |
| उत्कृष्ट गैसें (Noble Gases) | समूह 18 के अक्रिय तत्व (He, Ne, Ar आदि) — इनका बाह्यतम कोश पूर्णतः भरा होता है, इसलिए ये लगभग अक्रियाशील हैं। |
| उपधातु (Metalloids) | वे तत्व जिनमें धातु और अधातु दोनों के गुण पाए जाते हैं — जैसे बोरॉन, सिलिकॉन, जर्मेनियम। |
सबसे काम की बात: आधुनिक आवर्त सारणी में तत्व की जगह ही उसका परिचय है — समूह संख्या संयोजकता इलेक्ट्रॉन बताती है और आवर्त संख्या कोशों की संख्या। जगह याद है तो गुण अपने आप याद हो जाते हैं!
डोबेराइनर के त्रिक – वर्गीकरण की पहली कोशिश
सन् 1817 के आसपास जर्मन वैज्ञानिक जॉन वोल्फ़गांग डोबेराइनर ने देखा कि कुछ तत्वों को तीन-तीन के समूहों में रखा जा सकता है। इन तीनों तत्वों के गुण आपस में बहुत मिलते-जुलते थे। ऐसे तीन तत्वों के समूह को ही त्रिक (Triad) कहा गया।
त्रिक की असली पहचान यह थी — जब तीनों तत्वों को परमाणु भार के बढ़ते क्रम में रखा जाता, तो बीच वाले तत्व का परमाणु भार, शेष दो तत्वों के परमाणु भारों के औसत के लगभग बराबर होता था, और बीच वाले तत्व के गुण भी शेष दो के बीच के होते थे।
| त्रिक | तत्व व परमाणु भार | जाँच – बीच वाला भार = औसत? |
|---|---|---|
| क्षार धातुओं का त्रिक | Li (7), Na (23), K (39) | (7 + 39) ÷ 2 = 23 = Na का भार ✓ |
| क्षारीय मृदा धातुओं का त्रिक | Ca (40), Sr (88), Ba (137) | (40 + 137) ÷ 2 = 88.5 ≈ Sr का भार 88 ✓ |
| हैलोजन का त्रिक | Cl (35.5), Br (80), I (127) | (35.5 + 127) ÷ 2 = 81.25 ≈ Br का भार 80 ✓ |
घर पर खुद जाँच करके देखिए — कैल्सियम वाला हिसाब लगाइए: (40 + 137) ÷ 2 = 88.5, जो स्ट्रांशियम के 88 के बहुत पास है। यही छोटी-सी गणना इस नियम की आत्मा है और परीक्षा में भी इसी तरह के आँकड़े पूछे जाते हैं।
डोबेराइनर के वर्गीकरण की सीमाएँ
- डोबेराइनर उस समय ज्ञात तत्वों में से केवल कुछ ही त्रिक पहचान पाए — सभी तत्वों को त्रिकों में नहीं बाँटा जा सका।
- कई तत्व ऐसे मिले जिनके गुण तो मिलते थे, पर परमाणु भार वाला औसत का नियम उन पर ठीक नहीं बैठता था।
- इसलिए यह वर्गीकरण सभी तत्वों के लिए उपयोगी नहीं हो सका और आगे चलकर इसे छोड़ दिया गया।
एक साँस में समझें — त्रिक का नियम सही दिशा में पहला कदम था, पर वह कुछ ही तत्वों पर लागू होता था।
न्यूलैंड का अष्टक नियम – संगीत से आया विचार
सन् 1866 में अंग्रेज़ वैज्ञानिक जॉन न्यूलैंड ने ज्ञात तत्वों को परमाणु भार के बढ़ते क्रम में सजाया — उन्होंने सबसे कम परमाणु भार वाले हाइड्रोजन (H) से शुरू करके थोरियम (Th) तक के तत्व रखे; थोरियम उस समय का 56वाँ तत्व था। उन्होंने पाया कि हर आठवें तत्व के गुण पहले तत्व के गुणों के समान होते हैं। उन्हें यह बात भारतीय संगीत के स्वरों — सा, रे, ग, म, प, ध, नि और फिर फिर से सा — जैसी लगी, इसलिए उन्होंने इसे अष्टक का नियम (Law of Octaves) कहा।
| सा | रे | ग | म | प | ध | नि |
|---|---|---|---|---|---|---|
| H | Li | Be | B | C | N | O |
| F | Na | Mg | Al | Si | P | S |
| Cl | K | Ca | Cr | Ti | Mn | Fe |
ऊपर की सरल सारणी देखिए — हाइड्रोजन (H) से गिनना शुरू करें तो आठवाँ तत्व फ्लुओरीन (F) आता है, जो उसी ‘सा’ स्तंभ में नीचे आता है, और दोनों के गुणों में समानता दिखती है। इसी तरह लीथियम (Li) से आठवाँ सोडियम (Na) है, जो उसी ‘रे’ स्तंभ में आता है। ध्यान दीजिए, डोबेराइनर का त्रिक Li, Na, K न्यूलैंड के एक ही (‘रे’) स्तंभ में भी मिल जाता है — यह बात InText प्रश्न में सीधे पूछी गई है।
अष्टक नियम की सीमाएँ
- यह नियम केवल कैल्सियम (Ca) तक ही ठीक काम करता था। कैल्सियम के बाद हर आठवाँ तत्व पहले तत्व जैसे गुण नहीं दिखाता था।
- न्यूलैंड ने मान लिया था कि प्रकृति में केवल 56 तत्व ही हैं और आगे कोई नया तत्व नहीं खोजा जाएगा — इसलिए उन्होंने नए तत्वों के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी। बाद में खोजे गए तत्व इस सारणी में फिट ही नहीं हुए।
- जगह की कमी के कारण उन्होंने दो-दो तत्वों को एक ही खाने में रख दिया — जैसे कोबाल्ट (Co) और निकैल (Ni) को एक साथ रखा गया।
- कुछ असमान गुणों वाले तत्वों को एक ही स्तंभ में रख दिया गया — जैसे Co और Ni को हैलोजन (F, Cl) वाले स्तंभ में रखा गया, जबकि इनके गुण बिल्कुल अलग हैं।
- इसके उलट, समान गुणों वाले तत्वों को दूर-दूर रख दिया गया — जैसे लोहा (Fe), जो Co और Ni से मिलता-जुलता है, उसे उनसे बहुत दूर रखा गया।
- बाद में उत्कृष्ट गैसों की खोज होने पर अष्टक वाला पूरा क्रम बिगड़ गया, क्योंकि नौवाँ तत्व भी पहले जैसा गुण दिखाने लगा।
📌 याद रखें: अष्टक नियम केवल हल्के तत्वों पर ही ठीक से लागू होता था। भारी तत्वों पर यह नियम असफल हो गया — यही इसकी सबसे बड़ी सीमा है।
एक साँस में समझें — आठ का दोहराव विचार अच्छा था, पर सारणी में नए तत्वों के लिए जगह और भारी तत्वों के लिए सटीकता, दोनों की कमी रह गई।
मेंडेलीव की आवर्त सारणी (1869) – सबसे बड़ी छलांग
रूसी वैज्ञानिक दिमित्री इवानोविच मेंडेलीव ने सन् 1869 में अपनी आवर्त सारणी प्रस्तुत की। उस समय केवल 63 तत्व ज्ञात थे। मेंडेलीव ने तत्वों को उनके परमाणु भार के बढ़ते क्रम में रखा और साथ ही उनके रासायनिक गुणों की समानता — विशेषकर ऑक्सीजन व हाइड्रोजन के साथ बनने वाले यौगिकों (ऑक्साइड व हाइड्राइड) के सूत्रों — को आधार बनाया।
उनका नियम कहता था — “तत्वों के गुण उनके परमाणु भारों के आवर्ती फलन होते हैं।” उनकी सारणी में खड़े स्तंभ समूह और आड़ी पंक्तियाँ आवर्त कहलाईं। समान गुणों वाले तत्व एक ही समूह में आ गए — जैसे क्षार धातुएँ एक साथ और हैलोजन एक साथ।
मेंडेलीव की उपलब्धियाँ
1. अज्ञात तत्वों के लिए खाली जगह छोड़ना: मेंडेलीव की सबसे साहसिक बात यह थी कि जहाँ क्रम बिगड़ता दिखा, वहाँ उन्होंने घबराकर गलत तत्व नहीं भरा, बल्कि खाली स्थान छोड़ दिया और दावा किया कि यहाँ भविष्य में नया तत्व खोजा जाएगा।
2. भविष्यवाणी जो सच हुई: उन्होंने खाली स्थानों वाले तत्वों को संस्कृत के ‘एक’ शब्द से नाम दिए — एक-ऐलुमिनियम और एक-सिलिकॉन। बाद में एक-ऐलुमिनियम की जगह गैलियम (Ga) और एक-सिलिकॉन की जगह जर्मेनियम (Ge) खोजा गया, और उनके गुण मेंडेलीव की भविष्यवाणी से लगभग हूबहू मिल गए। यही इस सारणी की सबसे प्रसिद्ध सफलता है।
| गुण | एक-सिलिकॉन (भविष्यवाणी, 1871) | जर्मेनियम (खोजा गया, 1886) |
|---|---|---|
| परमाणु भार | 72 | 72.6 |
| घनत्व (g/cm³) | 5.5 | 5.36 |
| ऑक्साइड का सूत्र | XO2 | GeO2 |
| क्लोराइड का सूत्र | XCl4 | GeCl4 |
इसी प्रकार एक-ऐलुमिनियम के लिए उन्होंने परमाणु भार लगभग 68 और ऑक्साइड का सूत्र X2O3 बताया था — गैलियम का परमाणु भार 69.7 निकला और उसका ऑक्साइड Ga2O3 ही बना। सोचिए, तत्व देखा तक नहीं और गुण इतने सटीक! इसीलिए मेंडेलीव को आवर्त सारणी का जनक माना जाता है।
3. गलत परमाणु भारों में सुधार: गुणों के आधार पर मेंडेलीव ने कुछ तत्वों के माने गए परमाणु भारों को गलत ठहराया और उन्हें सही क्रम में रखा — बाद की जाँच में वे सही पाए गए।
4. उत्कृष्ट गैसों के लिए जगह: जब बाद में हीलियम, निऑन, आर्गन जैसी उत्कृष्ट गैसें खोजी गईं, तो मेंडेलीव की सारणी में उनके लिए एक नया समूह बनाकर उन्हें बिना पूरा क्रम बिगाड़े रखा जा सका।
मेंडेलीव की सारणी की सीमाएँ
- हाइड्रोजन की स्थिति: हाइड्रोजन के गुण क्षार धातुओं (समूह 1) से भी मिलते हैं और हैलोजन (समूह 17) से भी। इसलिए हाइड्रोजन को कोई निश्चित स्थान नहीं दिया जा सका।
- समस्थानिकों (Isotopes) की समस्या: एक ही तत्व के समस्थानिकों के परमाणु भार अलग-अलग होते हैं, पर रासायनिक गुण समान होते हैं। परमाणु भार के क्रम वाली सारणी में उन्हें अलग-अलग जगह देनी पड़ती, जो संभव नहीं था — अतः समस्थानिकों को कोई स्पष्ट स्थान नहीं मिल सका।
- विसंगत युग्म (Anomalous Pairs): कुछ जगहों पर अधिक परमाणु भार वाला तत्व कम भार वाले से पहले आ गया — जैसे कोबाल्ट (Co, 58.9) को निकैल (Ni, 58.7) से पहले और टेल्यूरियम को आयोडीन से पहले रखना पड़ा, वरना समान गुणों वाले तत्व एक समूह में नहीं आते। यह परमाणु भार वाले क्रम का सीधा उल्लंघन था।
- समान गुणों वाले कुछ तत्व अलग समूहों में और असमान गुणों वाले कुछ तत्व एक ही समूह में आ गए थे।
एक साँस में समझें — मेंडेलीव की सारणी भविष्यवाणी की शक्ति के कारण महान बनी, पर परमाणु भार को आधार बनाना ही उसकी जड़ की कमज़ोरी थी।
आधुनिक आवर्त सारणी – मोसले और परमाणु संख्या
सन् 1913 में अंग्रेज़ वैज्ञानिक हेनरी मोसले (Henry Moseley) ने एक्स-किरणों के प्रयोगों से दिखाया कि किसी तत्व का परमाणु क्रमांक (परमाणु संख्या, Z) उसके परमाणु भार से अधिक मौलिक गुण है। परमाणु संख्या नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या होती है।
इसी आधार पर आधुनिक आवर्त नियम बना — “तत्वों के गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवर्ती फलन होते हैं।” जब तत्वों को परमाणु संख्या के बढ़ते क्रम में रखा गया, तो मेंडेलीव की सारी विसंगतियाँ अपने आप दूर हो गईं — Co (Z = 27) स्वाभाविक रूप से Ni (Z = 28) से पहले आ गया और समस्थानिकों को एक ही स्थान मिला, क्योंकि उनकी परमाणु संख्या समान होती है।
समूह और आवर्त – सारणी की बनावट
आधुनिक आवर्त सारणी में 18 खड़े स्तंभ (समूह) और 7 आड़ी पंक्तियाँ (आवर्त) हैं। एक समूह के सभी तत्वों के बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, इसलिए उनके रासायनिक गुण मिलते-जुलते हैं। एक आवर्त के सभी तत्वों में इलेक्ट्रॉन कोशों की संख्या समान होती है।
| आवर्त | तत्वों की संख्या | कौन से तत्व |
|---|---|---|
| पहला आवर्त | 2 | H से He तक (सबसे छोटा आवर्त) |
| दूसरा आवर्त | 8 | Li से Ne तक |
| तीसरा आवर्त | 8 | Na से Ar तक |
| चौथा आवर्त | 18 | K से Kr तक |
| पाँचवाँ आवर्त | 18 | Rb से Xe तक |
| छठा आवर्त | 32 | Cs से Rn तक (सबसे लंबा आवर्त) |
| सातवाँ आवर्त | अपूर्ण (NCERT के अनुसार यह आवर्त अधूरा है) | Fr से आगे |
📌 खास बात: किसी तत्व की आवर्त संख्या = उसके परमाणु में कोशों की संख्या और समूह संख्या का संबंध संयोजकता इलेक्ट्रॉनों से होता है। जैसे सोडियम (2, 8, 1) में 3 कोश हैं, इसलिए वह तीसरे आवर्त में है और बाह्यतम कोश में 1 इलेक्ट्रॉन है, इसलिए समूह 1 में है। बस यही दो बातें याद रखिए, किसी भी तत्व की जगह आप खुद बता देंगे!
धातु, अधातु और उपधातु कहाँ हैं?
आधुनिक सारणी में धातुएँ बाईं ओर और बीच में हैं, अधातुएँ दाईं ओर ऊपर के भाग में हैं और दोनों को अलग करने वाली एक टेढ़ी-मेढ़ी (zig-zag) रेखा चलती है। इस रेखा को छूने वाले तत्व — बोरॉन (B), सिलिकॉन (Si), जर्मेनियम (Ge), आर्सेनिक (As), एंटिमनी (Sb), टेल्यूरियम (Te) और पोलोनियम (Po) — धातु और अधातु दोनों के गुण दिखाते हैं, इसलिए इन्हें उपधातु या अर्धधातु (Metalloids) कहते हैं। सिलिकॉन का नाम आपने कंप्यूटर चिप के कारण सुना ही होगा — वह उपधातु ही है।
उत्कृष्ट गैसें सबसे दाईं ओर समूह 18 में अलग रखी गई हैं, क्योंकि इनका बाह्यतम कोश पूरी तरह भरा होता है और ये लगभग अक्रियाशील होती हैं — इनके गुण बाकी सभी तत्वों से बिल्कुल अलग हैं, इसलिए अलग समूह ही उचित है।
आवर्ती रुझान (Trends) – इस अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण भाग
अब आते हैं उस भाग पर जिससे Board में सबसे अधिक प्रश्न बनते हैं। जब हम समूह में ऊपर से नीचे या आवर्त में बाएँ से दाएँ चलते हैं, तो तत्वों के गुण किसी बेतरतीब ढंग से नहीं, बल्कि एक निश्चित क्रम में बदलते हैं। इन्हीं नियमित बदलावों को आवर्ती रुझान कहते हैं।
| गुण | समूह में ऊपर से नीचे जाने पर | आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर | मुख्य कारण |
|---|---|---|---|
| परमाणु आकार | बढ़ता है ↑ | घटता है ↓ | समूह में नया कोश जुड़ता है; आवर्त में प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ने से इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर खिंचते हैं। |
| संयोजकता | समान रहती है (एक समूह में एक जैसी) | पहले 1 से 4 तक बढ़ती है, फिर 4 से 0 तक घटती है | समूह में संयोजकता इलेक्ट्रॉन समान रहते हैं; आवर्त में संयोजकता इलेक्ट्रॉन 1 से 8 तक बढ़ते हैं। |
| धात्विक गुण | बढ़ता है ↑ | घटता है ↓ (अधात्विक गुण बढ़ता है) | आकार बढ़ने पर इलेक्ट्रॉन त्यागना आसान; आकार घटने पर इलेक्ट्रॉन त्यागना कठिन और ग्रहण करना आसान। |
| विद्युत-ऋणात्मकता | घटती है ↓ | बढ़ती है ↑ | नाभिक से बाह्यतम कोश की दूरी और प्रभावी नाभिकीय आवेश का प्रभाव। |
1. परमाणु आकार (Atomic Size)
समूह में नीचे जाने पर आकार बढ़ता है, क्योंकि हर अगले तत्व में एक नया इलेक्ट्रॉन कोश जुड़ जाता है। नाभिक में आवेश बढ़ने के बावजूद नाभिक से बाह्यतम कोश की दूरी बढ़ जाती है, इसलिए आकार बढ़ जाता है। जैसे Li (2, 1) से K (2, 8, 8, 1) तक आकार बढ़ता जाता है।
आवर्त में दाएँ जाने पर आकार घटता है, क्योंकि कोशों की संख्या वही रहती है, पर नाभिक में प्रोटॉन बढ़ने से प्रभावी नाभिकीय आवेश (effective nuclear charge) बढ़ जाता है। नाभिक इलेक्ट्रॉनों को अधिक बल से अपनी ओर खींचता है, इसलिए परमाणु सिकुड़ जाता है। दूसरे आवर्त में क्रम देखिए — Li सबसे बड़ा और F सबसे छोटे तत्वों में से है।
2. संयोजकता (Valency)
संयोजकता बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनों से तय होती है। समूह में सभी तत्वों के बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉन समान होते हैं, इसलिए उनकी संयोजकता समान रहती है — जैसे समूह 1 के सभी तत्वों की संयोजकता 1 और समूह 2 के सभी तत्वों की संयोजकता 2 है।
आवर्त में संयोजकता इलेक्ट्रॉन 1 से 8 तक बढ़ते हैं। ऑक्सीजन के संदर्भ में संयोजकता पहले 1 से 4 तक बढ़ती है, फिर 4 से घटकर 0 हो जाती है। तीसरे आवर्त का क्रम याद कर लीजिए — Na (1), Mg (2), Al (3), Si (4), P (3), S (2), Cl (1), Ar (0)। ध्यान दें, 1 से 8 तक बढ़ने वाला क्रम संयोजकता का नहीं, संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या का है — संयोजकता हाइड्रोजन या ऑक्सीजन के संदर्भ में पहले 1 से 4 तक बढ़कर फिर 0 तक घटती है; दोनों में भ्रम न करें।
3. धात्विक गुण और विद्युत-ऋणात्मकता
धात्विक गुण का अर्थ है इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति। समूह में नीचे जाने पर आकार बढ़ता है, बाह्यतम इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर हो जाता है, उसे निकालना आसान हो जाता है — इसलिए धात्विक गुण बढ़ता है। आवर्त में दाएँ जाने पर आकार घटता है और प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है, इलेक्ट्रॉन त्यागना कठिन हो जाता है — इसलिए धात्विक गुण घटता है और अधात्विक गुण बढ़ता है। साथ ही धातुओं के ऑक्साइड क्षारकीय और अधातुओं के ऑक्साइड अम्लीय होते हैं — आवर्त में दाएँ जाने पर ऑक्साइडों का अम्लीय गुण बढ़ता है।
विद्युत-ऋणात्मकता का अर्थ है साझा किए गए इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर आकर्षित करने की प्रवृत्ति। यह धात्विक गुण के ठीक उलट चलती है — समूह में नीचे जाने पर घटती है और आवर्त में दाएँ जाने पर बढ़ती है। फ्लुओरीन (F) सबसे अधिक विद्युत-ऋणात्मक तत्व है — यह तथ्य MCQ में बार-बार आता है।
📌 याद रखें: रुझानों को रटने के बजाय दो कारण याद रखिए — नया कोश जुड़ना (समूह के लिए) और प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ना (आवर्त के लिए)। कारण याद रहेगा तो चारों रुझान आप खुद निकाल लेंगे।
एक साँस में समझें — नीचे जाओ तो आकार और धात्विक गुण बढ़ते हैं; दाएँ जाओ तो आकार घटता है, पर विद्युत-ऋणात्मकता बढ़ती है।
📘 पाठ्य-पुस्तक के प्रश्न (InText Questions)
ये वे प्रश्न हैं जो NCERT किताब के अनुच्छेदों के बीच-बीच में दिए गए हैं। इस अध्याय में कुल 13 InText प्रश्न हैं — अनुच्छेद 5.1–5.2 पर 3, अनुच्छेद 5.3 पर 4 और अनुच्छेद 5.4–5.5 पर 6। Board में ये प्रश्न वैसे-के-वैसे पूछ लिए जाते हैं, इसलिए इन्हें सबसे पहले तैयार कीजिए।
(क) अनुच्छेद 5.1–5.2 पर आधारित प्रश्न (पृष्ठ 81)
प्रश्न 1. क्या डोबेराइनर के त्रिक न्यूलैंड के अष्टक के स्तंभों में भी पाए जाते थे? तुलना कीजिए और ज्ञात कीजिए।
हल:
चरण 1: न्यूलैंड की सारणी को ध्यान से देखिए — लीथियम (Li) से गिनना शुरू करें तो सात तत्वों के बाद आठवाँ तत्व सोडियम (Na) उसी स्तंभ में आता है, और सोडियम से आठवाँ पोटैशियम (K) आता है।
चरण 2: Li, Na और K — यह डोबेराइनर का प्रसिद्ध त्रिक ही है और इन तीनों के गुण भी समान हैं।
उत्तर: हाँ, डोबेराइनर के त्रिक न्यूलैंड के अष्टक के स्तंभों में भी पाए जाते थे। उदाहरण — Li, Na, K का त्रिक एक ही स्तंभ में स्थित है।
प्रश्न 2. डोबेराइनर के वर्गीकरण की सीमाएँ क्या थीं?
हल: डोबेराइनर केवल कुछ ही त्रिक पहचान पाए थे। उस समय ज्ञात सभी तत्वों को त्रिकों में वर्गीकृत नहीं किया जा सका — जिन तत्वों के गुण मिलते भी थे, उनमें से कई पर परमाणु भार के औसत वाला नियम ठीक नहीं बैठता था।
उत्तर: डोबेराइनर केवल कुछ ही त्रिक बना पाए और सभी ज्ञात तत्व इस वर्गीकरण में नहीं आ सके, इसलिए यह वर्गीकरण उपयोगी सिद्ध नहीं हुआ।
प्रश्न 3. न्यूलैंड के अष्टक नियम की सीमाएँ क्या थीं?
हल:
(i) यह नियम केवल कैल्सियम तक लागू होता था; उसके बाद हर आठवाँ तत्व पहले तत्व जैसे गुण नहीं दिखाता था।
(ii) न्यूलैंड ने मान लिया था कि प्रकृति में केवल 56 तत्व हैं — इसलिए नए तत्वों के लिए कोई स्थान नहीं छोड़ा गया और बाद में खोजे गए तत्व फिट नहीं हुए।
(iii) उन्होंने कोबाल्ट व निकैल को एक ही खाने में रख दिया और उन्हें हैलोजन (F, Cl) वाले स्तंभ में रखा, जबकि इनके गुण बिल्कुल भिन्न हैं।
(iv) इसके विपरीत, लोहे (Fe) को — जो Co व Ni से गुणों में मिलता है — उनसे बहुत दूर रखा गया।
उत्तर: अष्टक नियम केवल हल्के तत्वों (Ca तक) पर लागू था, उसमें नए तत्वों के लिए जगह नहीं थी और समान गुणों वाले तत्व दूर तथा असमान गुणों वाले तत्व साथ रख दिए गए थे।
(ख) अनुच्छेद 5.3 पर आधारित प्रश्न (पृष्ठ 85)
प्रश्न 1. मेंडेलीव की आवर्त सारणी का उपयोग करके निम्नलिखित तत्वों के ऑक्साइड के सूत्रों का अनुमान लगाइए: K, C, Al, Si, Ba।
हल: समूह के सभी तत्वों के ऑक्साइड के सूत्रों का सामान्य रूप एक जैसा होता है। तत्व जिस समूह में है, उसी समूह के ज्ञात तत्व के ऑक्साइड जैसा सूत्र बनाइए:
| तत्व | समूह | ऑक्साइड का सूत्र | कारण |
|---|---|---|---|
| K | 1 | K2O | समूह 1 का सामान्य सूत्र R2O |
| C | 4 | CO2 | समूह 4 का सामान्य सूत्र RO2 |
| Al | 3 | Al2O3 | समूह 3 का सामान्य सूत्र R2O3 |
| Si | 4 | SiO2 | समूह 4 का सामान्य सूत्र RO2 |
| Ba | 2 | BaO | समूह 2 का सामान्य सूत्र RO |
प्रश्न 2. गैलियम के अतिरिक्त, मेंडेलीव द्वारा अपनी आवर्त सारणी में छोड़े गए रिक्त स्थानों से बाद में खोजे गए अन्य दो तत्वों के नाम बताइए।
हल: मेंडेलीव ने एक-बोरॉन और एक-सिलिकॉन के लिए भी जगह छोड़ी थी। ये स्थान बाद में भरे गए।
उत्तर: स्कैंडियम (Sc) और जर्मेनियम (Ge) — ये दोनों तत्व मेंडेलीव की भविष्यवाणी के बाद खोजे गए।
प्रश्न 3. मेंडेलीव ने अपनी आवर्त सारणी तैयार करने के लिए कौन-से मापदंड अपनाए थे?
हल:
चरण 1: पहला मापदंड था परमाणु भार का बढ़ता क्रम — तत्वों को उनके परमाणु भार के क्रम में रखा गया।
चरण 2: दूसरा मापदंड था रासायनिक गुणों की समानता — विशेषकर तत्वों के हाइड्रोजन व ऑक्सीजन के साथ बनने वाले यौगिकों (हाइड्राइड व ऑक्साइड) के सूत्रों की समानता। समान गुणों वाले तत्व एक ही समूह में रखे गए, भले ही इसके लिए परमाणु भार के क्रम में मामूली बदलाव करना पड़े।
उत्तर: मेंडेलीव के दो मापदंड थे — (1) परमाणु भार का बढ़ता क्रम और (2) रासायनिक गुणों, विशेषकर ऑक्साइड व हाइड्राइड के सूत्रों की समानता।
प्रश्न 4. आपके अनुसार उत्कृष्ट गैसों को अलग समूह में क्यों रखा गया?
हल: उत्कृष्ट गैसें अत्यंत अक्रियाशील होती हैं — ये अन्य तत्वों से लगभग क्रिया ही नहीं करतीं, क्योंकि इनका बाह्यतम कोश पूर्णतः भरा होता है। इनके गुण किसी भी अन्य समूह के तत्वों से नहीं मिलते। मेंडेलीव के समय ये खोजी ही नहीं गई थीं; बाद में खोज होने पर इन्हें बिना पूरी सारणी बिगाड़े एक नए समूह में रखा जा सका।
उत्तर: उत्कृष्ट गैसें अक्रियाशील हैं और इनके गुण सभी तत्वों से भिन्न हैं, इसलिए इन्हें अलग समूह (समूह 18) में रखा गया।
(ग) अनुच्छेद 5.4–5.5 पर आधारित प्रश्न (पृष्ठ 90)
प्रश्न 1. आधुनिक आवर्त सारणी, मेंडेलीव की आवर्त सारणी की विभिन्न विसंगतियों को कैसे दूर करती है?
हल:
चरण 1: आधुनिक सारणी का आधार परमाणु भार नहीं, परमाणु संख्या (Z) है, जो अधिक मौलिक गुण है।
चरण 2: इससे विसंगत युग्म ठीक हो गए — Co (Z = 27) स्वाभाविक रूप से Ni (Z = 28) से पहले आ गया, किसी ज़बरदस्ती की ज़रूरत नहीं पड़ी।
चरण 3: समस्थानिकों की परमाणु संख्या समान होती है, इसलिए वे सब एक ही स्थान पर रखे गए — अलग-अलग जगह की समस्या खत्म हो गई।
चरण 4: समान गुणों वाले तत्व इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के कारण स्वाभाविक रूप से एक ही समूह में आ गए।
उत्तर: परमाणु संख्या को आधार बनाने से विसंगत युग्मों, समस्थानिकों के स्थान और गुणों के दोहराव — तीनों विसंगतियाँ दूर हो गईं। (हाइड्रोजन की स्थिति पर आज भी चर्चा होती है, उसे समूह 1 के ऊपर अलग स्थान दिया गया है।)
प्रश्न 2. मैग्नीशियम के समान रासायनिक अभिक्रियाएँ दिखाने वाले दो तत्वों के नाम बताइए। आपके चयन का आधार क्या है?
हल: मैग्नीशियम (Mg, परमाणु संख्या 12) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 2 है — बाह्यतम कोश में 2 इलेक्ट्रॉन हैं। जिन तत्वों के बाह्यतम कोश में भी 2 इलेक्ट्रॉन होंगे, उनके गुण Mg जैसे होंगे। बेरिलियम (Be) का विन्यास 2, 2 और कैल्सियम (Ca) का विन्यास 2, 8, 8, 2 है — दोनों के बाह्यतम कोश में 2 इलेक्ट्रॉन हैं और दोनों समूह 2 में ही हैं।
उत्तर: बेरिलियम (Be) और कैल्सियम (Ca)। आधार — इनके बाह्यतम कोश में भी मैग्नीशियम की तरह 2 संयोजकता इलेक्ट्रॉन हैं, इसलिए ये समान रासायनिक गुण दिखाते हैं।
प्रश्न 3. नाम बताइए: (a) बाह्यतम कोश में केवल एक इलेक्ट्रॉन वाले तीन तत्व (b) बाह्यतम कोश में दो इलेक्ट्रॉन वाले दो तत्व (c) पूर्णतः भरे हुए बाह्यतम कोश वाले तीन तत्व।
हल:
(a) एक इलेक्ट्रॉन वाले — लीथियम (Li: 2, 1), सोडियम (Na: 2, 8, 1) और पोटैशियम (K: 2, 8, 8, 1) — तीनों समूह 1 में हैं।
(b) दो इलेक्ट्रॉन वाले — बेरिलियम (Be: 2, 2) और कैल्सियम (Ca: 2, 8, 8, 2) — दोनों समूह 2 में हैं।
(c) पूर्णतः भरे बाह्यतम कोश वाले — हीलियम (He: 2), निऑन (Ne: 2, 8) और आर्गन (Ar: 2, 8, 8) — ये उत्कृष्ट गैसें हैं।
उत्तर: (a) Li, Na, K | (b) Be, Ca | (c) He, Ne, Ar
प्रश्न 4. (a) लीथियम, सोडियम और पोटैशियम — ये सभी धातुएँ जल से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं। क्या इन तत्वों के परमाणुओं में कोई समानता है? (b) हीलियम एक अक्रियाशील गैस है और निऑन अत्यंत कम क्रियाशीलता की गैस है। इनके परमाणुओं में क्या समानता है?
हल:
(a) हाँ। Li (2, 1), Na (2, 8, 1) और K (2, 8, 8, 1) — तीनों के बाह्यतम कोश में केवल 1 इलेक्ट्रॉन है। इसीलिए तीनों समूह 1 में हैं, तीनों वह इलेक्ट्रॉन आसानी से त्याग देती हैं और जल से क्रिया करके हाइड्रोजन मुक्त करती हैं।
(b) He (2) और Ne (2, 8) — दोनों का बाह्यतम कोश पूर्णतः भरा हुआ है। भरा हुआ कोश बहुत स्थायी होता है, इसलिए ये तत्व न इलेक्ट्रॉन लेना चाहते हैं, न देना — इसी कारण ये अक्रियाशील हैं।
उत्तर: (a) तीनों के बाह्यतम कोश में 1 इलेक्ट्रॉन है। (b) दोनों का बाह्यतम कोश पूर्णतः भरा हुआ है।
प्रश्न 5. आधुनिक आवर्त सारणी में पहले दस तत्वों में से कौन-से धातु हैं?
हल: पहले दस तत्व हैं — H, He, Li, Be, B, C, N, O, F, Ne। इनमें से सारणी में बाईं ओर स्थित लीथियम (Li) और बेरिलियम (Be) ही धातुएँ हैं। बोरॉन उपधातु है और शेष सभी अधातुएँ हैं (H व He गैसें हैं)।
उत्तर: पहले दस तत्वों में केवल Li और Be धातु हैं।
प्रश्न 6. आवर्त सारणी में तत्वों की स्थिति के आधार पर बताइए कि निम्नलिखित तत्वों में से किसमें सबसे अधिक धात्विक गुण होगा: Ga, Ge, As, Se, Be।
हल: Ga, Ge, As और Se — ये चारों चौथे आवर्त में बाएँ से दाएँ क्रम में हैं, इसलिए इन चारों में Ga सबसे अधिक धात्विक है, क्योंकि आवर्त में दाएँ जाने पर धात्विक गुण घटता है। अब तुलना Be और Ga के बीच बचती है — Be समूह 2 में बाईं ओर है, परंतु Ga का परमाणु आकार Be से बहुत बड़ा है (Ga में 4 कोश, Be में केवल 2 कोश)। आकार बड़ा होने से Ga के बाह्यतम इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते हैं और उन्हें त्यागना अधिक आसान होता है।
उत्तर: Ga (गैलियम) में सबसे अधिक धात्विक गुण होगा, क्योंकि उसका आकार सबसे बड़ा है और इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति सबसे अधिक है।
इस भाग में हमने सीखा — InText के 13 प्रश्न ही इस अध्याय की रीढ़ हैं; इन्हें तैयार कर लिया तो अध्याय आधा तैयार समझिए।
✏️ प्रश्नावली (Exercise) – सभी 10 प्रश्नों के हल
प्रश्न 1. आवर्त सारणी के आवर्तों में बाएँ से दाएँ जाने पर रुझानों के बारे में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन सही नहीं है? (a) तत्वों की धात्विक प्रकृति घटती है। (b) संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ जाती है। (c) परमाणु अपने इलेक्ट्रॉन अधिक आसानी से त्याग देते हैं। (d) ऑक्साइड अधिक अम्लीय हो जाते हैं।
हल: आवर्त में दाएँ जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है और आकार घटता है, इसलिए इलेक्ट्रॉन त्यागना आसान नहीं, बल्कि कठिन होता जाता है। कथन (a), (b) और (d) तीनों सही हैं।
उत्तर: (c) — “परमाणु अपने इलेक्ट्रॉन अधिक आसानी से त्याग देते हैं” — यही कथन सही नहीं है।
प्रश्न 2. तत्व X, XCl2 सूत्र वाला क्लोराइड बनाता है, जो एक ठोस है तथा जिसका गलनांक उच्च है। आवर्त सारणी में तत्व X किस समूह में होगा? (a) Na (b) Mg (c) Al (d) Si
हल: XCl2 सूत्र से X की संयोजकता 2 है। उच्च गलनांक वाला ठोस क्लोराइड आयनिक यौगिक की पहचान है। संयोजकता 2 वाले तत्व समूह 2 में होते हैं और दिए गए विकल्पों में समूह 2 का तत्व मैग्नीशियम (Mg) है।
उत्तर: (b) Mg — X समूह 2 का तत्व होगा, जैसे Mg, जिसका क्लोराइड MgCl2 उच्च गलनांक वाला ठोस है।
प्रश्न 3. किस तत्व में: (a) दो कोश हैं और दोनों कोश इलेक्ट्रॉनों से पूर्णतः भरे हुए हैं? (b) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 2 है? (c) कुल तीन कोश होते हैं और संयोजकता कोश में चार इलेक्ट्रॉन होते हैं? (d) कुल दो कोश होते हैं और संयोजकता कोश में तीन इलेक्ट्रॉन होते हैं? (e) दूसरे कोश में पहले कोश की तुलना में दोगुने इलेक्ट्रॉन होते हैं?
हल:
(a) दो कोश और दोनों पूर्णतः भरे हुए — विन्यास 2, 8 होगा। परमाणु संख्या = 10, यह निऑन (Ne) है।
(b) विन्यास 2, 8, 2 — परमाणु संख्या = 2 + 8 + 2 = 12, यह मैग्नीशियम (Mg) है।
(c) तीन कोश और बाह्यतम कोश में 4 इलेक्ट्रॉन — विन्यास 2, 8, 4 होगा। परमाणु संख्या = 2 + 8 + 4 = 14, यह सिलिकॉन (Si) है।
(d) दो कोश और बाह्यतम कोश में 3 इलेक्ट्रॉन — विन्यास 2, 3 होगा। परमाणु संख्या = 5, यह बोरॉन (B) है।
(e) पहले कोश में 2 इलेक्ट्रॉन हों तो दूसरे में दोगुने यानी 4 — विन्यास 2, 4 होगा। परमाणु संख्या = 6, यह कार्बन (C) है।
उत्तर: (a) निऑन (Ne) | (b) मैग्नीशियम (Mg) | (c) सिलिकॉन (Si) | (d) बोरॉन (B) | (e) कार्बन (C)
प्रश्न 4. (a) आवर्त सारणी के उस स्तंभ के सभी तत्वों में क्या गुण समान हैं, जिसमें बोरॉन है? (b) आवर्त सारणी के उस स्तंभ के सभी तत्वों में क्या गुण समान हैं, जिसमें फ्लुओरीन है?
हल:
(a) बोरॉन समूह 13 में है। इस समूह के सभी तत्वों के बाह्यतम कोश में 3 संयोजकता इलेक्ट्रॉन होते हैं और सभी की संयोजकता 3 होती है।
(b) फ्लुओरीन समूह 17 (हैलोजन समूह) में है। इस समूह के सभी तत्वों के बाह्यतम कोश में 7 संयोजकता इलेक्ट्रॉन होते हैं, सभी की संयोजकता 1 होती है और सभी अधातु हैं तथा अम्लीय ऑक्साइड बनाते हैं।
उत्तर: (a) संयोजकता इलेक्ट्रॉन 3 व संयोजकता 3 समान है। (b) संयोजकता इलेक्ट्रॉन 7 व संयोजकता 1 समान है।
प्रश्न 5. किसी परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7 है। (a) इस तत्व की परमाणु संख्या क्या है? (b) निम्न में से किस तत्व के साथ इसकी रासायनिक समानता होगी? (परमाणु संख्या कोष्ठक में दी गई है) N (7), F (9), P (15), Ar (18)
हल:
(a) परमाणु संख्या = इलेक्ट्रॉनों का योग = 2 + 8 + 7 = 17 — यह तत्व क्लोरीन (Cl) है।
(b) रासायनिक समानता बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनों से तय होती है। F (9) का विन्यास 2, 7 है — इसके बाह्यतम कोश में भी 7 इलेक्ट्रॉन हैं और यह भी समूह 17 में है। N का विन्यास 2, 5; P का 2, 8, 5 और Ar का 2, 8, 8 है — इनमें से कोई समान नहीं है।
उत्तर: (a) परमाणु संख्या 17 | (b) F (फ्लुओरीन) के साथ समानता होगी, क्योंकि दोनों के बाह्यतम कोश में 7 इलेक्ट्रॉन हैं।
प्रश्न 6. आवर्त सारणी में तीन तत्वों A, B और C की स्थितियाँ NCERT की सारणी के अनुसार इस प्रकार हैं — समूह 16 और समूह 17 के चार पंक्तियों वाले अंश में A समूह 17 की दूसरी पंक्ति में है, जबकि B (समूह 16) और C (समूह 17) सबसे नीचे वाली (चौथी) पंक्ति में हैं। (a) बताइए कि A धातु है या अधातु? (b) क्या C, A की तुलना में अधिक क्रियाशील है या कम? (c) क्या C का आकार B से छोटा होगा या बड़ा? (d) तत्व A किस प्रकार का आयन — धनायन (cation) या ऋणायन (anion) — बनाएगा?
हल:
(a) A समूह 17 में है — इस समूह के तत्व (हैलोजन) अधातु होते हैं। अतः A अधातु है।
(b) समूह में नीचे जाने पर आकार बढ़ता है और इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति (विद्युत-ऋणात्मकता) घटती है। C उसी समूह में A से बहुत नीचे है, इसलिए C, A की तुलना में कम क्रियाशील होगा।
(c) B और C एक ही आवर्त में हैं और C, B के दाईं ओर (समूह 17) है। आवर्त में दाएँ जाने पर आकार घटता है, इसलिए C का आकार B से छोटा होगा।
(d) A समूह 17 की अधातु है; इसके बाह्यतम कोश में 7 इलेक्ट्रॉन हैं। अष्टक पूरा करने के लिए यह 1 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करती है, इसलिए यह ऋणायन (anion) बनाएगी, धनायन नहीं।
उत्तर: (a) A अधातु है। (b) C, A से कम क्रियाशील है। (c) C का आकार B से छोटा होगा। (d) A ऋणायन (anion) बनाएगा।
प्रश्न 7. नाइट्रोजन (परमाणु संख्या 7) और फ़ॉस्फ़ोरस (परमाणु संख्या 15) आवर्त सारणी के समूह 15 के तत्व हैं। इन दोनों तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। इनमें से कौन अधिक विद्युत-ऋणात्मक होगा और क्यों?
हल: नाइट्रोजन (7) का विन्यास 2, 5 है और फ़ॉस्फ़ोरस (15) का विन्यास 2, 8, 5 है — दोनों के बाह्यतम कोश में 5 इलेक्ट्रॉन हैं, इसलिए दोनों समूह 15 में हैं। समूह में नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ता है, बाह्यतम कोश नाभिक से दूर हो जाता है, इसलिए इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करने की क्षमता घटती है। नाइट्रोजन ऊपर है और उसका आकार छोटा है, इसलिए उसका नाभिक इलेक्ट्रॉनों को अधिक बल से आकर्षित करता है।
उत्तर: नाइट्रोजन अधिक विद्युत-ऋणात्मक होगा, क्योंकि समूह में ऊपर से नीचे जाने पर विद्युत-ऋणात्मकता घटती है और नाइट्रोजन फ़ॉस्फ़ोरस से ऊपर स्थित है।
प्रश्न 8. किसी परमाणु के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और आधुनिक आवर्त सारणी में उसकी स्थिति के बीच क्या संबंध है?
हल:
चरण 1: इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में कोशों की संख्या = आवर्त संख्या। जैसे विन्यास 2, 8, 2 में 3 कोश हैं, इसलिए तत्व तीसरे आवर्त में होगा।
चरण 2: बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉन समूह बताते हैं — यदि बाह्यतम कोश में 1 या 2 इलेक्ट्रॉन हैं, तो समूह संख्या वही (1 या 2) होती है; यदि 3 या अधिक हैं, तो समूह संख्या = 10 + बाह्यतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या। जैसे 7 इलेक्ट्रॉन हों तो समूह = 10 + 7 = 17।
चरण 3: इसीलिए समान बाह्यतम विन्यास वाले तत्व एक ही समूह में आते हैं और उनके गुण समान होते हैं — यही आवर्तिता का असली कारण है।
उत्तर: कोशों की संख्या आवर्त संख्या और संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या समूह संख्या तय करती है — इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ही आवर्त सारणी में तत्व की स्थिति का आधार है।
प्रश्न 9. आधुनिक आवर्त सारणी में कैल्सियम (परमाणु संख्या 20) के चारों ओर परमाणु संख्या 12, 19, 21 और 38 वाले तत्व हैं। इनमें से किन तत्वों के भौतिक व रासायनिक गुण कैल्सियम के समान होंगे?
हल: कैल्सियम का विन्यास 2, 8, 8, 2 है — यह समूह 2 का तत्व है। समान गुण उसी तत्व के होंगे जो समूह 2 में हो। परमाणु संख्या 12 वाला तत्व मैग्नीशियम (Mg: 2, 8, 2) समूह 2 में है और परमाणु संख्या 38 वाला तत्व स्ट्रांशियम (Sr: 2, 8, 18, 8, 2) भी समूह 2 में है — दोनों के बाह्यतम कोश में 2 इलेक्ट्रॉन हैं। परमाणु संख्या 19 (K) समूह 1 में और 21 (Sc) समूह 3 में है, इसलिए उनके गुण Ca से नहीं मिलेंगे।
उत्तर: परमाणु संख्या 12 (Mg) और 38 (Sr) वाले तत्वों के गुण कैल्सियम के समान होंगे, क्योंकि तीनों समूह 2 के तत्व हैं।
प्रश्न 10. मेंडेलीव की आवर्त सारणी और आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों की व्यवस्था की तुलना कीजिए और अंतर स्पष्ट कीजिए।
हल:
| आधार | मेंडेलीव की आवर्त सारणी | आधुनिक आवर्त सारणी |
|---|---|---|
| व्यवस्था का आधार | परमाणु भार का बढ़ता क्रम | परमाणु संख्या (Z) का बढ़ता क्रम |
| आवर्त नियम | गुण परमाणु भार के आवर्ती फलन हैं | गुण परमाणु संख्या के आवर्ती फलन हैं |
| समूह व आवर्त | 8 समूह व 6 आवर्त (कुछ समूह उपसमूहों में बँटे) | 18 समूह व 7 आवर्त |
| समस्थानिक | कोई स्थान नहीं मिल सका | समान परमाणु संख्या के कारण एक ही स्थान पर रखे गए |
| विसंगत युग्म | Co को Ni से पहले रखना पड़ा (क्रम का उल्लंघन) | कोई विसंगति नहीं — Co (27) स्वाभाविक रूप से Ni (28) से पहले आता है |
| उत्कृष्ट गैसें | खोज नहीं हुई थी, स्थान नहीं था | समूह 18 में अलग व स्पष्ट स्थान है |
| हाइड्रोजन | निश्चित स्थान नहीं दिया जा सका | समूह 1 के ऊपर अलग स्थान दिया गया है |
निष्कर्ष: आधुनिक सारणी मेंडेलीव की सारणी का ही सुधरा हुआ रूप है — आधार परमाणु भार से बदलकर परमाणु संख्या हो जाने से सभी विसंगतियाँ दूर हो गईं और सारणी अधिक वैज्ञानिक व उपयोगी बन गई।
इस प्रश्नावली में हमने सीखा — लगभग हर प्रश्न इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और रुझानों पर ही घूमता है; विन्यास लिखना आ गया तो यह प्रश्नावली आसान है।
📖 Case Study – मेंडेलीव की भविष्यवाणी और गैलियम की खोज
सन् 1871 में मेंडेलीव ने अपनी सारणी में ऐलुमिनियम के नीचे एक खाली स्थान छोड़ा और उस अज्ञात तत्व को ‘एक-ऐलुमिनियम’ नाम दिया। उन्होंने उसके गुणों की भविष्यवाणी तक कर दी — परमाणु भार लगभग 68 होगा, घनत्व लगभग 5.9 g/cm³ होगा और ऑक्साइड का सूत्र X2O3 होगा। उस समय कई वैज्ञानिकों ने इस दावे को मज़ाक समझा। लेकिन सन् 1875 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक ने एक नया तत्व खोजा — गैलियम। उसका परमाणु भार 69.7, घनत्व 5.94 g/cm³ और ऑक्साइड Ga2O3 निकला — बिल्कुल भविष्यवाणी जैसा! इसी घटना के बाद पूरी दुनिया ने मेंडेलीव की सारणी को गंभीरता से लिया। इस गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
Q1. मेंडेलीव ने एक-ऐलुमिनियम के लिए खाली स्थान किस आधार पर छोड़ा था? —
(A) तत्व का रंग देखकर
(B) परमाणु भार के क्रम में रिक्ति और गुणों की समानता देखकर
(C) अनुमान से, बिना किसी आधार के
(D) तत्व की गंध के आधार पर
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) परमाणु भार के क्रम में रिक्ति और गुणों की समानता देखकर — मेंडेलीव ने क्रम बिगड़ने पर गलत तत्व भरने के बजाय भविष्य के तत्व के लिए जगह छोड़ी थी।
Q2. बाद में एक-ऐलुमिनियम की जगह कौन-सा तत्व खोजा गया? —
(A) जर्मेनियम
(B) स्कैंडियम
(C) गैलियम
(D) बोरॉन
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) गैलियम — इसके गुण (परमाणु भार 69.7, ऑक्साइड Ga2O3) मेंडेलीव की भविष्यवाणी से लगभग हूबहू मिल गए।
Q3. एक-सिलिकॉन की भविष्यवाणी किस तत्व की खोज से सच सिद्ध हुई? —
(A) सिलिकॉन
(B) जर्मेनियम
(C) टिन
(D) कार्बन
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) जर्मेनियम — सन् 1886 में खोजे गए इस तत्व का परमाणु भार 72.6 और ऑक्साइड GeO2 भविष्यवाणी के अनुरूप निकला।
Q4. इस घटना से मेंडेलीव की सारणी की कौन-सी विशेषता सिद्ध होती है? —
(A) सारणी में केवल 56 तत्व थे
(B) सारणी नए तत्वों के गुणों की भविष्यवाणी कर सकती थी
(C) सारणी केवल हल्के तत्वों पर लागू थी
(D) सारणी में उत्कृष्ट गैसों का स्थान था
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) सारणी नए तत्वों के गुणों की भविष्यवाणी कर सकती थी — यही मेंडेलीव की सबसे बड़ी उपलब्धि थी, जिसने उनकी सारणी को विश्वव्यापी मान्यता दिलाई।
⭐ Quick Revision – Important Points
- ✅ डोबेराइनर के त्रिक में बीच वाले तत्व का परमाणु भार शेष दो के औसत के बराबर होता है — जैसे (Li 7 + K 39) ÷ 2 = Na 23।
- ✅ न्यूलैंड का अष्टक नियम केवल कैल्सियम तक और केवल हल्के तत्वों पर लागू था; उसमें नए तत्वों के लिए जगह नहीं थी।
- ✅ मेंडेलीव ने 1869 में परमाणु भार के क्रम में सारणी बनाई, अज्ञात तत्वों के लिए जगह छोड़ी और एक-ऐलुमिनियम (Ga) व एक-सिलिकॉन (Ge) की सफल भविष्यवाणी की।
- ✅ मेंडेलीव की सीमाएँ — हाइड्रोजन की अनिश्चित स्थिति, समस्थानिकों को स्थान न मिलना और Co–Ni जैसे विसंगत युग्म।
- ✅ मोसले (1913) ने दिखाया कि परमाणु संख्या परमाणु भार से अधिक मौलिक है — आधुनिक सारणी का आधार परमाणु संख्या (Z) है।
- ✅ आधुनिक सारणी में 18 समूह व 7 आवर्त हैं; आवर्तों में तत्वों की संख्या क्रमशः 2, 8, 8, 18, 18, 32 है।
- ✅ कोशों की संख्या = आवर्त संख्या; संयोजकता इलेक्ट्रॉन समूह से जुड़े होते हैं — यही तत्व की जगह तय करते हैं।
- ✅ उत्कृष्ट गैसें समूह 18 में हैं; धातु बाईं ओर, अधातु दाईं ओर और उपधातु zig-zag रेखा के साथ स्थित हैं।
- ✅ समूह में नीचे जाने पर — आकार ↑, धात्विक गुण ↑, विद्युत-ऋणात्मकता ↓ और संयोजकता समान रहती है।
- ✅ आवर्त में दाएँ जाने पर — आकार ↓, धात्विक गुण ↓, विद्युत-ऋणात्मकता ↑ और संयोजकता पहले 1→4 फिर 4→0 होती है।
- ✅ फ्लुओरीन सबसे अधिक विद्युत-ऋणात्मक तत्व है और फ्रांसियम/सीज़ियम जैसे नीचे-बाएँ तत्व सबसे अधिक धात्विक प्रवृत्ति के हैं।
⚠️ Aam Galtiyan (Common Mistakes)
- मेंडेलीव और आधुनिक सारणी का आधार उलट देना: सबसे आम गलती यही होती है। याद रखिए — मेंडेलीव = परमाणु भार, आधुनिक = परमाणु संख्या। एक लाइन में रट लीजिए: “भार पुराना, संख्या नया।”
- समूह और आवर्त में भ्रम: समूह खड़े स्तंभ (18) होते हैं और आवर्त आड़ी पंक्तियाँ (7)। दोनों की संख्या उलटकर लिखना MCQ में अंक कटवाता है।
- आकार का रुझान उलटा लिखना: समूह में नीचे जाने पर आकार बढ़ता है (नया कोश जुड़ता है) और आवर्त में दाएँ जाने पर आकार घटता है (प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है) — कारण के साथ याद करें, क्रम कभी नहीं बिगड़ेगा।
- संयोजकता का क्रम गलत लिखना: आवर्त में संयोजकता सीधे 1 से 8 नहीं बढ़ती; ऑक्सीजन के संदर्भ में वह 1→4 फिर 4→0 होती है। Ar की संयोजकता 0 लिखना न भूलें।
- धात्विक गुण और विद्युत-ऋणात्मकता को एक जैसा समझना: दोनों एक-दूसरे के उलट चलते हैं — जहाँ धात्विक गुण बढ़ता है, वहाँ विद्युत-ऋणात्मकता घटती है।
- समस्थानिक और समभारिक में भ्रम: समस्थानिकों की परमाणु संख्या समान और परमाणु भार भिन्न होते हैं — इसीलिए आधुनिक सारणी में वे एक ही स्थान पर हैं। यही मेंडेलीव की सीमा का हल है।
- उत्कृष्ट गैसों का समूह गलत लिखना: उत्कृष्ट गैसें समूह 18 में हैं, समूह 0 आधुनिक क्रमांकन नहीं है — उत्तर में 18 ही लिखें।
🎯 Bihar Board Exam Tips
- रुझानों की सारणी एक पेज पर बनाकर रोज़ देखें: आकार, संयोजकता, धात्विक गुण और विद्युत-ऋणात्मकता — चारों के समूह व आवर्त वाले बदलाव कारण सहित लिखकर दीवार पर लगा लीजिए; इस अध्याय के आधे MCQ वहीं से बनते हैं।
- तुलना वाले प्रश्नों के लिए table बनाना सीखें: मेंडेलीव बनाम आधुनिक सारणी और मेंडेलीव बनाम न्यूलैंड जैसे प्रश्नों में सारणीबद्ध उत्तर लिखने से पूरे अंक मिलते हैं।
- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास का अभ्यास करें: पहले 20 तत्वों के विन्यास बिना देखे लिखने का अभ्यास कीजिए — प्रश्नावली के कम-से-कम 5 प्रश्न सीधे विन्यास से ही हल होते हैं।
- भविष्यवाणी वाली घटना कहानी की तरह याद करें: एक-ऐलुमिनियम = गैलियम और एक-सिलिकॉन = जर्मेनियम, उनके परमाणु भार (68→69.7 और 72→72.6) सहित — यह दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों की जान है।
- सीमाएँ बिंदुवार लिखें: डोबेराइनर, न्यूलैंड और मेंडेलीव — तीनों की सीमाएँ अलग-अलग 3-3 बिंदुओं में तैयार करें; ये लघु उत्तरीय प्रश्नों में बार-बार पूछी जाती हैं।
- पिछले वर्षों के BSEB प्रश्न-पत्रों से इस अध्याय के वस्तुनिष्ठ प्रश्न हल करके जाएँ — InText व प्रश्नावली के प्रश्न अक्सर दोहराए जाते हैं।
📝 MCQ Quiz – 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्न (स्वयं को जाँचें)
पहले बिना देखे हल करें, फिर “✅ उत्तर देखें” खोलकर मिलाएँ। अंत में Answer Key table दी गई है।
Q1. डोबेराइनर के त्रिक में बीच वाले तत्व का परमाणु भार होता है —
(A) शेष दो के योग के बराबर
(B) शेष दो के परमाणु भारों के औसत के लगभग बराबर
(C) शेष दो के गुणनफल के बराबर
(D) पहले तत्व के बराबर
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) शेष दो के परमाणु भारों के औसत के लगभग बराबर — जैसे (7 + 39) ÷ 2 = 23, जो Na का परमाणु भार है।
Q2. न्यूलैंड के अष्टक नियम के अनुसार गुणों का दोहराव हर कितने तत्वों के बाद होता था? —
(A) हर दूसरे तत्व पर
(B) हर पाँचवें तत्व पर
(C) हर आठवें तत्व पर
(D) हर दसवें तत्व पर
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) हर आठवें तत्व पर — संगीत के अष्टक (सा से सा) की तरह आठवाँ तत्व पहले जैसे गुण दिखाता था।
Q3. न्यूलैंड का अष्टक नियम किस तत्व तक ही ठीक से लागू होता था? —
(A) पोटैशियम
(B) कैल्सियम
(C) आयरन
(D) ज़िंक
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) कैल्सियम — उसके बाद हर आठवाँ तत्व पहले तत्व जैसे गुण नहीं दिखाता था।
Q4. मेंडेलीव ने अपनी आवर्त सारणी किस वर्ष प्रस्तुत की थी? —
(A) 1817
(B) 1866
(C) 1869
(D) 1913
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) 1869 — मेंडेलीव ने तत्वों को परमाणु भार के बढ़ते क्रम में सजाकर अपनी सारणी प्रस्तुत की थी।
Q5. मेंडेलीव द्वारा भविष्यवाणी किया गया एक-सिलिकॉन बाद में किस नाम से खोजा गया? —
(A) गैलियम
(B) जर्मेनियम
(C) स्कैंडियम
(D) सिलिकॉन
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) जर्मेनियम — 1886 में खोजा गया; एक-ऐलुमिनियम की जगह गैलियम खोजा गया था।
Q6. आधुनिक आवर्त सारणी का आधार क्या है? —
(A) परमाणु भार
(B) परमाणु आकार
(C) परमाणु संख्या
(D) घनत्व
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) परमाणु संख्या — मोसले ने सिद्ध किया कि यह परमाणु भार से अधिक मौलिक गुण है।
Q7. आधुनिक आवर्त सारणी में समूहों और आवर्तों की संख्या क्रमशः है —
(A) 8 समूह, 7 आवर्त
(B) 18 समूह, 7 आवर्त
(C) 7 समूह, 18 आवर्त
(D) 18 समूह, 6 आवर्त
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) 18 समूह, 7 आवर्त — समूह खड़े स्तंभ और आवर्त आड़ी पंक्तियाँ हैं।
Q8. तीसरे आवर्त में कुल कितने तत्व होते हैं? —
(A) 2
(B) 8
(C) 18
(D) 32
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) 8 — Na से Ar तक; आवर्तों में तत्वों की संख्या का क्रम 2, 8, 8, 18, 18, 32 है।
Q9. किसी समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार —
(A) घटता है
(B) समान रहता है
(C) बढ़ता है
(D) पहले घटता है, फिर बढ़ता है
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) बढ़ता है — नीचे जाने पर हर तत्व में एक नया इलेक्ट्रॉन कोश जुड़ जाता है।
Q10. आवर्त में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु आकार —
(A) बढ़ता है
(B) घटता है
(C) समान रहता है
(D) अनियमित बदलता है
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) घटता है — प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ने से इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर अधिक खिंचते हैं।
Q11. तीसरे आवर्त में संयोजकता का क्रम (ऑक्सीजन के संदर्भ में) है —
(A) 1 से 8 तक लगातार बढ़ती है
(B) पहले 1 से 4 तक बढ़ती है, फिर 4 से 0 तक घटती है
(C) हमेशा 8 रहती है
(D) पहले घटती है, फिर बढ़ती है
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) पहले 1 से 4 तक बढ़ती है, फिर 4 से 0 तक घटती है — Na(1), Mg(2), Al(3), Si(4), P(3), S(2), Cl(1), Ar(0)।
Q12. उत्कृष्ट गैसें आधुनिक आवर्त सारणी के किस समूह में रखी गई हैं? —
(A) समूह 1
(B) समूह 17
(C) समूह 18
(D) समूह 2
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) समूह 18 — इनका बाह्यतम कोश पूर्णतः भरा होता है, इसलिए ये अक्रियाशील हैं।
Q13. निम्न में से कौन-सा तत्व उपधातु (metalloid) है? —
(A) सोडियम
(B) सिलिकॉन
(C) क्लोरीन
(D) कैल्सियम
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (B) सिलिकॉन — यह zig-zag रेखा के पास स्थित है और धातु व अधातु दोनों के गुण दिखाता है।
Q14. सबसे अधिक विद्युत-ऋणात्मक तत्व कौन-सा है? —
(A) क्लोरीन
(B) ऑक्सीजन
(C) फ्लुओरीन
(D) नाइट्रोजन
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) फ्लुओरीन — आवर्त में सबसे दाईं ओर (उत्कृष्ट गैसों को छोड़कर) और आकार छोटा होने से इसकी इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने की क्षमता सबसे अधिक है।
Q15. किसी तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1 है। यह तत्व किस समूह और किस आवर्त में होगा? —
(A) समूह 1, आवर्त 2
(B) समूह 11, आवर्त 3
(C) समूह 1, आवर्त 3
(D) समूह 3, आवर्त 1
✅ उत्तर देखें
उत्तर: (C) समूह 1, आवर्त 3 — 3 कोश हैं इसलिए आवर्त 3 और बाह्यतम कोश में 1 इलेक्ट्रॉन है इसलिए समूह 1; यह तत्व सोडियम है।
Answer Key – उत्तरमाला
| प्रश्न | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उत्तर | B | C | B | C | B | C | B | B | C | B | B | C | B | C | C |
❓ FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1. क्या यह अध्याय Bihar Board की परीक्षा में सच में आता है, जबकि नई NCERT से यह हटा दिया गया है?
हाँ, आता है। Bihar Board (BSEB) में विज्ञान की पढ़ाई पुरानी NCERT किताब के क्रम से होती है, जिसमें यह पाँचवाँ अध्याय है। rationalized नई किताब से हटना CBSE के क्रम की बात है — BSEB के विद्यार्थियों के लिए यह अध्याय पूरी तरह पाठ्यक्रम में है और इससे हर साल वस्तुनिष्ठ व लघु उत्तरीय प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए इसे बिल्कुल न छोड़ें।
प्रश्न 2. मेंडेलीव और आधुनिक आवर्त सारणी में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
सबसे बड़ा अंतर आधार का है। मेंडेलीव ने तत्वों को परमाणु भार के बढ़ते क्रम में रखा था, जबकि आधुनिक सारणी में तत्व परमाणु संख्या (Z) के बढ़ते क्रम में रखे गए हैं। आधार बदलते ही समस्थानिकों का स्थान, Co–Ni जैसी विसंगतियाँ और गुणों के दोहराव की समस्याएँ अपने आप सुलझ गईं। इसके अलावा आधुनिक सारणी में 18 समूह व 7 आवर्त हैं और उत्कृष्ट गैसों को समूह 18 में स्पष्ट स्थान मिला है।
प्रश्न 3. आवर्ती रुझान (trends) याद करने का सबसे आसान तरीका क्या है?
रुझान रटिए मत, दो कारण याद कर लीजिए। समूह में नीचे जाने पर नया कोश जुड़ता है — इसलिए आकार बढ़ता है, धात्विक गुण बढ़ता है और विद्युत-ऋणात्मकता घटती है। आवर्त में दाएँ जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है — इसलिए आकार घटता है, धात्विक गुण घटता है और विद्युत-ऋणात्मकता बढ़ती है। संयोजकता के लिए तीसरे आवर्त का क्रम Na(1), Mg(2), Al(3), Si(4), P(3), S(2), Cl(1), Ar(0) एक बार लिखकर याद कर लीजिए। कारण याद रहेगा तो कोई भी रुझान आप परीक्षा में खुद निकाल लेंगे।
प्रश्न 4. किसी अज्ञात तत्व की आवर्त सारणी में जगह कैसे पता करें?
तरीका बहुत सरल है — पहले तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए। विन्यास में जितने कोश हैं, वही उसकी आवर्त संख्या है। फिर बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉन गिनिए — 1 या 2 हों तो वही समूह संख्या है और 3 या अधिक हों तो समूह संख्या = 10 + वह संख्या। उदाहरण के लिए विन्यास 2, 8, 7 वाले तत्व में 3 कोश हैं (आवर्त 3) और बाह्यतम कोश में 7 इलेक्ट्रॉन हैं, इसलिए समूह = 10 + 7 = 17 — यह क्लोरीन है। इसी विधि से प्रश्नावली के कई प्रश्न हल होते हैं।
प्रश्न 5. NCERT की मूल किताब (PDF) कहाँ से मिलेगी?
NCERT की आधिकारिक वेबसाइट ncert.nic.in से Class 10 Science की किताब का PDF बिल्कुल मुफ़्त डाउनलोड किया जा सकता है। ध्यान रहे — इस अध्याय के लिए आपको पुरानी (पुनर्मुद्रित) NCERT किताब वाला अध्याय 5 देखना होगा, क्योंकि rationalized नई किताब से यह अध्याय हटाया गया है; Bihar Board की किताब में यह अध्याय उपलब्ध है।
🔗 Pichhla / Agla Adhyay – पिछले व अगले अध्याय पढ़ें
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📚 सभी अध्यायों की सूची यहाँ देखें: NCERT Class 10 Bihar Board Science Book — इस पेज पर Class 10 Science के सभी अध्यायों के Notes, MCQ व प्रश्न-उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।
🔚 Conclusion – निष्कर्ष
बधाई हो! आपने तत्वों के वर्गीकरण की पूरी कहानी पढ़ ली — डोबेराइनर के त्रिकों से शुरू होकर न्यूलैंड के अष्टक, मेंडेलीव की भविष्यवाणी वाली सारणी और अंत में मोसले की परमाणु संख्या पर आधारित आधुनिक आवर्त सारणी तक। अब आप जानते हैं कि सारणी में किसी तत्व की जगह देखकर उसके गुण कैसे बताए जाते हैं और समूह व आवर्त में चलते हुए आकार, संयोजकता, धात्विक गुण व विद्युत-ऋणात्मकता कैसे बदलते हैं।
ऊपर दिए गए सभी 23 हल किए गए प्रश्नों (InText 13 + प्रश्नावली 10), रुझानों की सारणी और 15 MCQ का अभ्यास कीजिए। किताब का मूल पाठ पढ़ने के लिए NCERT की आधिकारिक वेबसाइट ncert.nic.in से PDF ले सकते हैं। आगे के अध्यायों के लिए Science Book पेज से जुड़े रहिए — वहाँ हर अध्याय इसी सरल शैली में मिलेगा। शुभकामनाएँ, मेहनत जारी रखिए!
